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गुरुवार, 21 जून 2018

प्रेम



      प्रेम केवल सँसार को चलाता ही नहीं है, वरन वह हमें भावनात्मक और चोट खाने के लिए खुला भी कर देता है। हम समय-समय पर अपने आप से कहते हैं, “क्यों प्रेम करें जब दूसरे कोई सराहना नहीं करते हैं?” या “क्यों प्रेम में पड़कर मैं अपने आप को दुखी होने के लिए खुला करूँ?” परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस प्रेम करते रहने का स्पष्ट और सीधा कारण देता है: “पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।  प्रेम का अनुकरण करो...” (1 कुरिन्थियों 13:13-14:1)।

      बाइबल के व्याख्याकर्ता सी. के. बैरट लिखते हैं, “प्रेम क्रिया है, स्वयं परमेश्वर की क्रिया; और जब मनुष्य उससे या अन्य मनुष्यों से प्रेम करते हैं, तब वे (चाहे जितने भी असिद्ध रीति से) वही करते हैं जो परमेश्वर करता है। और जब हम परमेश्वर के समान कार्य करते हैं, तो परमेश्वर प्रसन्न होता है।

      प्रेम के मार्ग का अनुकरण करने के लिए, विचार कीजिए कि आप 1 कुरिन्थियों 13:4-7 में दिए गए गुणों को अपने जीवन में कार्यशाली किस प्रकार से प्रदर्शित कर सकते हैं? उदाहरण के लिए, अपने आप से पूछिए, जैसा धैर्य परमेश्वर मेरे प्रति दिखाता है, मैं अपनी सन्तान के प्रति वैसा ही धैर्य कैसे दिखा सकता हूँ? मैं अपने माता-पिता के प्रति आदर और दया कैसे दिखा सकता हूँ? अपने कार्य-स्थल पर  कार्य करते समय मैं औरों के हित के बारे में कैसे ध्यान कर सकता हूँ? जब मेरे किसी मित्र के साथ कुछ अच्छा होता है तो क्या मैं उसके साथ आनन्दित होता हूँ या ईर्ष्या करता हूँ?

      जब हम “प्रेम का अनुकरण” करेंगे, तो हम पाएँगे कि हम बहुधा प्रेम के स्त्रोत, परमेश्वर, तथा प्रभु यीशु, जो प्रेम का सबसे महान उदाहरण है, की ओर मुड़ते हैं। और तब ही हम सच्चे प्रेम की गहरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, तथा परमेश्वर के समान औरों से प्रेम करने की सामर्थ्य पा सकते हैं। - पो फैंग चिया


हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। - 1 यूहन्ना 4:7

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी।
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 3-5
  • प्रेरितों 5:22-42



रविवार, 13 सितंबर 2015

अनुकर्णीय


   जब मैं अपने पिता के बारे में सोचती हूँ तो मुझे यह कथन स्मरण हो आता है: "उन्होंने मुझे कहा नहीं कि जीवन कैसे जीना है; उन्होंने मुझे जीवन जी कर दिखाया।" मेरी युवाव्यस्था में मैंने अपने पिता को परमेश्वर के साथ चलते हुए देखा। वे प्रति इतवार प्रातः की चर्च सभा में सम्मिलित होते थे, और वहाँ परमेश्वर के वचन बाइबल का व्यसकों को अध्ययन करवाते थे, चर्च में आए पैसे के हिसाब में सहायता करते थे, और चर्च का अगुवा होने की सभी ज़िम्मेदारियाँ निभाते थे। चर्च के बाहर वे नियमित रीति से बाइबल अध्ययन करते थे और बाइबल तथा सुसमाचार के बारे में विश्वासयोग्यता के साथ चर्चा किया करते थे। मैंने उन्हें अपने कार्यों के द्वारा परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए देखा।

   बाइबल में यहूदा के राजा आसा का वृतान्त आया है, जिसने अपने जीवन में परमेश्वर के प्रति अपने समर्पण और भक्ति को अपना आदर्श बनाया (2 इतिहास 14:2)। उसने अपने राज्य में से मूर्तियों को हटवाया, परमेश्वर की वेदी को पुनःस्थापित किया तथा अपनी प्रजा के लोगों की परमेश्वर के साथ वाचा बाँधने में अगुवाई करी (2 इतिहास 15:8-12)। आसा के पुत्र यहोशापात ने भी अपने पिता का अनुसरण किया और "वह अपने पिता के परमेश्वर की खोज में लगा रहता था और उसी की आज्ञाओं पर चलता था..." (2 इतिहास 17:4)। यहोशापात ने भी अपने राज्य से मूर्तिपूजा को साफ किया (पद 6), तथा परमेश्वर की बातों को प्रजा को सिखाने के लिए याजकों और लेवियों को यहूदा के सभी नगरों में भेजा (पद 7-9)।

   यहोशापात का शासन काल उसके पिता के शासन काल के समान था; यहोशापात ने अपने पिता आसा के भक्तिपूर्ण उदाहरण का संपूर्ण रीति से अनुकरण किया। लेकिन इस से भी बढ़कर यह था कि वह परमेश्वर की बातों में लौलीन हो गया, "यहोवा के मार्गों पर चलते चलते उसका मन मगन हो गया..." (पद 6)। आज यदि आप अनुकरण के लिए किसी उदाहरण को ढूँढ़ रहे हैं, तो परमेश्वर के वचन बाइबल में आपको अनेक उदाहरण मिल जाएंगे; सर्वोत्त्म उदाहरण है हमारे पिता परमेश्वर का, जो अनुकरण के सर्वथा योग्य हमारा पिता है।


जब हम परमेश्वर को अपना पिता कहते हैं और उसके पुत्र के समान जीवन व्यतीत करते हैं, हम अपने परमेश्वर का आदर करते हैं।

और आसा ने वही किया जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में अच्छा और ठीक था। - 2 इतिहास 14:2

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 17:1-10
2 Chronicles 17:1 और उसका पुत्र यहोशापात उसके स्थान पर राज्य करने लगा, और इस्राएल के विरुद्ध अपना बल बढ़ाया। 
2 Chronicles 17:2 और उसने यहूदा के सब गढ़ वाले नगरों में सिपाहियों के दल ठहरा दिए, और यहूदा के देश में और एप्रैम के उन नगरों में भी जो उसके पिता आसा ने ले लिये थे, सिपाहियों की चौकियां बैठा दीं। 
2 Chronicles 17:3 और यहोवा यहोशापात के संग रहा, क्योंकि वह अपने मूलपुरुष दाऊद की प्राचीन चाल सी चाल चला और बाल देवताओं की खोज में न लगा। 
2 Chronicles 17:4 वरन वह अपने पिता के परमेश्वर की खोज में लगा रहता था और उसी की आज्ञाओं पर चलता था, और इस्राएल के से काम नहीं करता था। 
2 Chronicles 17:5 इस कारण यहोवा ने रज्य को उसके हाथ में दृढ़ किया, और सारे यहूदी उसके पास भेंट लाया करते थे, और उसके पास बहुत धन और उसका वैभव बढ़ गया। 
2 Chronicles 17:6 और यहोवा के मार्गों पर चलते चलते उसका मन मगन हो गया; फिर उसने यहूदा से ऊंचे स्थान और अशेरा नाम मूरतें दूर कर दीं। 
2 Chronicles 17:7 और उसने अपने राज्य के तीसरे वर्ष में बेन्हैल, ओबद्याह, जकर्याह, नतनेल और मीकायाह नामक अपने हाकिमों को यहूदा के नगरों में शिक्षा देने को भेज दिया। 
2 Chronicles 17:8 और उनके साथ शमायाह, नतन्याह, जबद्याह, असाहेल, शमीरामोत, यहोनातान, अदोनिय्याह, तोबिय्याह और तोबदोनिय्याह, नाम लेवीय और उनके संग एलीशामा और यहोराम नामक याजक थे। 
2 Chronicles 17:9 सो उन्होंने यहोवा की व्यवस्था की पुस्तक अपने साथ लिये हुए यहूदा में शिक्षा दी, वरन वे यहूदा के सब नगरों में प्रजा को सिखाते हुए घूमे। 
2 Chronicles 17:10 और यहूदा के आस पास के देशों के राज्य राज्य में यहोवा का ऐसा डर समा गया, कि उन्होंने यहोशापात से युद्ध न किया।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 16-18
  • 2 कुरिन्थियों 6


शनिवार, 11 अगस्त 2012

अनुकरण


   एक दिन जब हम भोजन खाने को मेज़ पर बैठे थे तो मेरे बड़े बेटे ने शिकायत करी कि उसकी छोटी बहन हमेशा ही उसकी नकल करती है - वह जैसे हंसता है, जैसे भोजन खाता है या कुछ और करता है वह भी वैसा ही करती है, और इससे उसे चिढ़ होती है। मैं ने और मेरी पत्नी ने उसे समझाने का प्रयास किया कि यह क्रोध करने की बात नहीं है, क्योंकि इससे उसके पास अवसर है के वह अपने जीवन के अच्छे उदाहरण द्वारा अपनी बहन को भी अच्छी बातें सिखा सके।

   मेरे बेटे के विचारों के विरुद्ध, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने यह चाहा और दूसरों से कहा भी कि वे उसके उदाहरण का अनुकरण करें: "तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं" (१ कुरिन्थियों ११:१)। इस पत्री के दसवें अध्याय में पौलुस मसीही विश्वासियों को उनकी स्वतंत्रता और प्रेम की ज़िम्मेदारियों के बारे में बता रहा था; जब वे किसी अविश्वासी के घर भोजन पर आमंत्रित हों तो जो सामने परोसा जाए उसे खाने के लिए वे स्वतंत्र थे (पद २७)। किंतु यदि उनके सामने रखे भोजन को किसी मूर्ति को अर्पित कर के परोसा गया हो, और किसी अन्य कमज़ोर विश्वासी को इससे ठेस पहुँचती हो तो उस कमज़ोर विश्वासी की स्वतंत्रता का ध्यान रखते हुए, और उसके प्रति अपने प्रेम के कारण, उन्हें वह अर्पित भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए (पद २८)।

   पौलुस ने उन लोगों को प्रोत्साहित किया कि इस बात में वे उसके द्वारा दिखाए गए उदाहरण का अनुसरण करें; क्योंकि पौलुस अपनी नहीं वरन अपने संगी विश्वासियों की भलाई का इच्छुक रहता था, अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के प्रेम, मेल, त्याग और भलाई आदि के महान गुणों का अनुकरण करने के द्वारा।

   पौलुस के समान ही हम सभी मसीही विश्वासियों को अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के उदाहरण का इतनी निकटता से अनुकरण करना है कि हम भी दुसरों से कह सकें, "तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं।" - मार्विन विलियम्स


मसीह यीशु का अनुकरण करके ऐसा जीवन जीएं जो दूसरों के लिए अनुकरणीय हो।

तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं। - १ कुरिन्थियों ११:१

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १०:२३-११:१
1Co 10:23  सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब लाभ की नहीं: सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब वस्‍तुओं से उन्नित नहीं। 
1Co 10:24   कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, वरन औरों की। 
1Co 10:25  जो कुछ कस्‍साइयों के यहां बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 
1Co 10:26  क्‍योकि पृथ्वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है। 
1Co 10:27   और यदि अविश्वासियों में से कोई तुम्हें नेवता दे, और तुम जाना चाहो, तो जो कुछ तुम्हारे साम्हने रखा जाए वही खाओ: और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 
1Co 10:28  परन्‍तु यदि कोई तुम से कहे, यह तो मूरत को बलि की हुई वस्‍तु है, तो उसी बताने वाले के कारण, और विवेक के कारण न खाओ। 
1Co 10:29  मेरा मतलब, तेरा विवेक नहीं, परन्‍तु उस दूसरे का। भला, मेरी स्‍वतंत्रता दूसरे के विचार से क्‍यों परखी जाए? 
1Co 10:30  यदि मैं धन्यवाद करके साझी होता हूं, तो जिस पर मैं धन्यवाद करता हूं, उसके कारण मेरी बदनामीं क्‍यों होती है? 
1Co 10:31   सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महीमा के लिये करो। 
1Co 10:32   तुम न यहूदियों, न यूनानियों, और न परमेश्वर की कलीसिया के लिये ठोकर का कारण बनो। 
1Co 10:33  जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्न रखता हूं, और अपना नहीं, परन्‍तु बहुतों का लाभ ढूंढ़ता हूं, कि वे उद्धार पाएं।
1Co 11:1     तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८१-८३ 
  • रोमियों ११:१९-३६

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

सफल जीवन



   आईज़क हॉन मध्य १८वीं शताब्दी में, इंगलैंड में लौवुड नामक एक छोटे से स्थान के चर्च के पादरी थे; वे एक ऐसे पादरी थे जिनकी कोई खास पहचान नहीं थी। उनकी सेवकाई के अन्त समय उनके चर्च के सदस्यों में २६ महिलाएं और ७ पुरुष थे जिनमें से केवल ४ पुरुष ही चर्च किसी नियमित रूप से आते थे।

   आज के इस विशाल सामूहिक सम्पर्क और बड़े बड़े चर्चों के समय में कौन इस "सफल कार्य" मानता? हमारे आज के संसार में आईज़क हॉन ऐसे पादरियों में गिने जाते जो कुछ प्रभाव नहीं छोड़ सके; ना उन्हें किसी पादरियों की सभा को संभोधित करने का निमंत्रण मिलता और ना ही कोई उनसे चर्च की बढ़ोतरी से संबंधित कोई लेख लिखने का आग्रह करता।

   लेकिन फिर भी जब ८८ वर्ष की आयु में उनका देहान्त हुआ तब उनके चर्च के लोगों ने उनकी याद में अपने चर्च की दीवार पर एक पट्टी लगवाई जो आज भी विद्यमान है और जिस पर अन्य बातों के साथ साथ लिखा है: "बहुत ही कम ऐसे अगुवे हैं जो इतने नम्र हैं, जो इतने आदरणीय हैं। वे ईश्वरीय अनुग्रह द्वारा स्वर्ग के लिए तैयार किए गए थे और ौन्होंने पतझड़ आने तक भी डाल पर बने रहने वाले पक्के फल के समान जीवन समाप्त किया; पाठक, इनके जीवन के समान जीवन की लंबाई की नहीं वरन वैसे ही सफल जीवन की कामना करना।"

   उनका जीवन परमेश्वर के वचन बाइबल के १ पतरस ५:५-६ को स्मरण दिलाता है: "...क्‍योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्‍तु दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए।"

   चाहे इस संसार के लोग पादरी आईज़क हॉन को सफल मानें या ना मानें, परन्तु वे स्वर्ग की दृष्टि से सफल थे और स्वर्ग में उनका प्रतिफल कोई उनसे ले नहीं सकता - वे परमेश्वर की दृष्टि में नम्र और सफल थे। हमारे प्रभु यीशु के द्वारा मिलने वाली सामर्थ से, उनके समान नम्रता और विश्वासयोग्यता के साथ जीवन व्यतीत करके हम भी सफल जीवन जीने वाले बन सकते हैं। - डेविड रोपर


नम्रता सफलता का नुसखा है।

जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्‍होंने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्‍हें स्मरण रखो; और ध्यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देख कर उन के विश्वास का अनुकरण करो। 

बाइबल पाठ: १ पतरस ५:१-७
1Pe 5:1  तुम में जो प्राचीन हैं, मैं उन की नाईं प्राचीन और मसीह के दुखों का गवाह और प्रगट होने वाली महिमा में सहभागी होकर उन्‍हें यह समझाता हूं। 
1Pe 5:2  कि परमेश्वर के उस झुंड की, जो तुम्हारे बीच में हैं रखवाली करो; और यह दबाव से नहीं, परन्‍तु परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार आनन्‍द से, और नीच-कमाई के लिये नहीं, पर मन लगा कर। 
1Pe 5:3   और जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं, उन पर अधिकार न जताओ, वरन झुंड के लिये आदर्श बनो। 
1Pe 5:4   और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने को नहीं। 
1Pe 5:5  हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्‍योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्‍तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1Pe 5:6  इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1Pe 5:7  और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्‍योंकि उस को तुम्हारा ध्यान है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७७-७८ 
  • रोमियों १०