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Tuesday, December 11, 2012

प्रभावी प्रत्युत्तर


   बाइबल कॉलेज में दाखिला लेने के पश्चात मैं प्रभु यीशु के बारे में लोगों को निर्भीकता से बताने लगा। परिणामस्वरूप मेरे कुछ पुराने साथियों के साथ मेरी अनबन भी हो गई। स्कूल के अपने पुराने मित्रों के साथ हुए कार्यक्रम में यह बात स्पष्ट हो गई। एक युवती ने मेरा परिहास किया क्योंकि मैंने उससे प्रश्न किया कि क्या उसने इस बात पर विचार किया है कि मृत्योप्रांत वह अपना अनन्त जीवन कहां बिताएगी? मेरे एक अन्य मित्र एड ने, जो मेरे मसीही विश्वास के बारे में जानता था, मसीह यीशु के क्रूस का ठठ्ठा किया। इन बातों से मैंने अपने आप को बहुत तिरस्कृत और अपमानित अनुभव किया।

   किंतु उसी संध्या को मैं एक अवर्णनीय प्रेम से भर गया। मुझे प्रभु यीशु की आज्ञा स्मरण हो आई: "परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिथे प्रार्थना करो" (मत्ती ५:४४)। मेरी आंखें भर आईं और मैंने परमेश्वर से एड को, जिसने उसके क्रूस का ठठ्ठा किया था, क्षमा करने और उसे उद्धार देने के लिए प्रार्थना करी।

   लगभग एक वर्ष के बाद मुझे एड का एक पत्र मिला जिसमें उसने मुझसे मिलने की इच्छा व्यक्त करी थी। जब हम मिलने पाए तो उसने बताया कि कैसे अपने पापों के लिए उसने रो रो कर क्षमा मांगी तथा प्रभु यीशु को अपना जीवन समर्पित किया, उसे अपने जीवन का स्वामी बनाया। बाद में मुझे यह जान कर अचंभा हुआ कि एड एक मिशनरी बनकर ब्राज़ील चला गया कि प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार उस देश में सुनाए।

   उस अनुभव से जो पाठ मैंने सीखा वह था कि आत्मिक विरोध का सबसे प्रभावी प्रत्युत्तर है प्रार्थना। जो हम और हमारी समझ नहीं कर सकती वह प्रभु और प्रभु की सामर्थ कर सकती है। हमारो प्रार्थनाएं प्रभु के कार्य को प्रभावी बनाती हैं। अपने आस-पास ध्यान कीजिए, आपके विरोधीयों को आपकी प्रार्थनओं की बहुत आवश्यक्ता है; आपके द्वारा उन की भलाई के लिए परमेश्वर से करी गई प्रार्थनाएं ही उनके विरोध का प्रभावी प्रत्युत्तर हैं! - डेनिस फिश


लोग हमारे सन्देश का मज़ाक उड़ा सकते हैं परन्तु वे हमारी प्रार्थनाओं के सामने असहाय हैं।

परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। - मत्ती ५:४४

बाइबल पाठ: मत्ती ५:३-१६
Mat 5:3  धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Mat 5:4  धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएंगे। 
Mat 5:5  धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्‍योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Mat 5:6   धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं क्योंकि वे तृप्त किए जाएंगे।
Mat 5:7  धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्‍योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Mat 5:8  धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Mat 5:9  धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Mat 5:10  धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Mat 5:11  धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Mat 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्‍होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Mat 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्‍तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्‍तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Mat 5:14  तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Mat 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्‍तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Mat 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्‍वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे ५-८ 
  • प्रकाशितवाक्य २