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शनिवार, 18 अप्रैल 2020

विश्वासयोग्यता



     बहुत बार हम प्रश्न, “आप कहाँ से हैं?” के द्वारा किसी को और बेहतर जानने का प्रयास करते हैं। किन्तु हम में से अनेकों के लिएकभी-कभी, यह प्रश्न अटपटा होता है, उसका उत्तर दे पाना जटिल होता है, और कभी-कभी हम सारा विवरण हर किसी के साथ बाँटना भी नहीं चाहते हैं। मनुष्य चाहे हमारा आँकलन तथा हमारे विषय अपने निर्णय हमारी पृष्ठभूमि के आधार पर करें किन्तु परमेश्वर के लिए इसका कोई महत्त्व नहीं होता है।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में न्यायियों की पुस्तक का एक पात्र, यिप्ताह भी संभवतः इस प्रश्न से बचना चाहता होगा। यिप्ताह के सौतेले भाइयों ने उसे उसके गिलाद के घर से उसे “तू तो पराई स्त्री का बेटा है” (न्यायियों 11:2) कह कर निकला दिया था। लेख निःसंकोच कहता है कि “वह वेश्या का बेटा था” (पद 1)।

     परन्तु यिप्ताह शूरवीर था (पद 1), और जब एक विरोधी जाति ने गिलाद पर आक्रमण किया, तो वही लोग जिन्होंने उसे निकाल दिया था, अब उसे ढूँढ़ कर वापस लाना चाहते थे। उन लोगों ने यिप्ताह से कहा, “चलकर हमारा प्रधान हो जा, कि हम अम्मोनियों से लड़ सकें” (पद 6)। यिप्ताह ने प्रश्न किया, “क्या तुम ने मुझ से बैर कर के मुझे मेरे पिता के घर से निकाल न दिया था? फिर अब संकट में पड़कर मेरे पास क्यों आए हो?” (पद 7)। उन सभी से इस का आश्वासन लेने के पश्चात कि अब उसके साथ परिस्थितयाँ और व्यवहार भिन्न रखा जाएगा, यिप्ताह ने उनका नेतृत्व करना स्वीकार कर लिया। पवित्र शास्त्र बताता है कि “तब यहोवा का आत्मा यिप्तह में समा गया...” (पद 29)। यिप्ताह ने परमेश्वर पर विश्वास के साथ उन लोगों का कुशल नेतृत्व किया, और उन्हें एक बड़ी विजय दिलवाई। बाइबल के नए नियम में इब्रानियों में दिए गए विश्वास के नायकों में एक नाम यिप्ताह का भी है (इब्रानियों 11:32)।

     बहुत बार परमेश्वर अपने कार्य को करवाने के लिए बिलकुल अनपेक्षित लोगों को चुन लेता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हम कहाँ से हैं, यहाँ तक कैसे पहुंचे हैं, हमने क्या कुछ किया अथवा नहीं किया है। जिस एक बात का फर्क पड़ता है वह है कि हम परमेश्वर की बुलाहट का क्या और कैसे प्रत्युत्तर देते हैं। यदि हम परमेश्वर के प्रेम के प्रति विश्वासयोग्यता के साथ प्रत्युत्तर देते हैं, तो वह हमें अपनी सामर्थ्य से भरकर बहुतायत से प्रयोग करता है। - टिम गुस्ताफासन

परन्तु बहुतेरे जो पहिले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, पहिले होंगे। - मत्ती 19:30

बाइबल पाठ: न्यायियों 11:1-8, 29
न्यायियों 11:1 यिप्तह नाम गिलादी बड़ा शूरवीर था, और वह वेश्या का बेटा था; और गिलाद से यिप्तह उत्पन्न हुआ था।
न्यायियों 11:2 गिलाद की स्त्री के भी बेटे उत्पन्न हुए; और जब वे बड़े हो गए तब यिप्तह को यह कहकर निकाल दिया, कि तू तो पराई स्त्री का बेटा है; इस कारण हमारे पिता के घराने में कोई भाग न पाएगा।
न्यायियों 11:3 तब यिप्तह अपने भाइयों के पास से भागकर तोब देश में रहने लगा; और यिप्तह के पास लुच्चे मनुष्य इकट्ठे हो गए; और उसके संग फिरने लगे।
न्यायियों 11:4 और कुछ दिनों के बाद अम्मोनी इस्राएल से लड़ने लगे।
न्यायियों 11:5 जब अम्मोनी इस्राएल से लड़ते थे, तब गिलाद के वृद्ध लोग यिप्तह को तोब देश से ले आने को गए;
न्यायियों 11:6 और यिप्तह से कहा, चलकर हमारा प्रधान हो जा, कि हम अम्मोनियों से लड़ सकें।
न्यायियों 11:7 यिप्तह ने गिलाद के वृद्ध लोगों से कहा, क्या तुम ने मुझ से बैर कर के मुझे मेरे पिता के घर से निकाल न दिया था? फिर अब संकट में पड़कर मेरे पास क्यों आए हो?
न्यायियों 11:8 गिलाद के वृद्ध लोगों ने यिप्तह से कहा, इस कारण हम अब तेरी ओर फिरे हैं, कि तू हमारे संग चलकर अम्मोनियों से लड़े; तब तू हमारी ओर से गिलाद के सब निवासियों का प्रधान ठहरेगा।
न्यायियों 11:29 तब यहोवा का आत्मा यिप्तह में समा गया, और वह गिलाद और मनश्शे से हो कर गिलाद के मिस्पे में आया, और गिलाद के मिस्पे से हो कर अम्मोनियों की ओर चला।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमुएल 3-5
  • लूका 14:25-35



शुक्रवार, 7 जून 2019

सुनना



      एक प्रातः मेरी बेटी ने अपना सेल-फोन, कुछ पल के लिए अपनी ग्यारह माह के बेटे को दिया कि उसका मनोरंजन हो सके, और उसके यह करने के एक मिनिट से भी कम समय में मेरे फोन की घन्टी बजी; मैंने जब अपना फोन उठाया तो दूसरी ओर से मेरे नाती की आवाज़ आई। किसी तरह से उसने फोन की ‘स्पीड-डायल’ सुविधा के माध्यम से मेरा नंबर दबा दिया था, और फिर उसके और मेरे बीच एक “वार्तालाप” चला जिसे मैं बहुत समय तक स्मरण रखूँगा। मेरे नाती को कुछ ही शब्द बोलने आते हैं, परन्तु वह मेरी आवाज़ पहचानता है और प्रतिक्रया देता है। इसलिए मैं उससे बात करता रहा और उसे बताया कि मैं उससे कितना प्रेम करता हूँ।

      अपने नाती की आवाज़ सुनकर जो आनन्द मुझे मिला, वह मुझे स्मरण करवाता है कि हमारा परमेश्वर पिता हमारे साथ संबंध बनाने और बनाए रखने के लिए कितना लालियत रहता है। परमेश्वर का वचन बाइबल दिखाती है कि आरंभ से ही परमेश्वर सक्रीय होकर मनुष्य के साथ संबंध बनाने में पहल करता आया है। जब आदम और हव्वा ने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता का पाप किया, और परमेश्वर से छिप गए, तो परमेश्वर ही उनको पुकारता हुआ आया, “तू कहाँ है?” (उत्पत्ति 3:9)।

      प्रभु यीशु मसीह में होकर भी परमेश्वर मानवजाति को खोज रहा है कि उससे एक प्रगाढ़ संबंध बना ले। क्योंकि परमेश्वर हम से प्रेम करता है, हमारे साथ संगति रखना चाहता है, इसलिए उसने प्रभु यीशु मसीह को सभी मनुष्यों के पापों के लिए क्रूस पर बलिदान होने के लिए भेजा। “जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा” (1 यूहन्ना 4:9-10)।

      यह जानना कितना भला है कि परमेश्वर हम से प्रेम करता है और उसने अपने प्रेम को प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रकट किया है, और अब वह हमारे प्रत्युत्तर की प्रतीक्षा कर रहा है। चाहे हमें समझ न भी आता हो कि उसके प्रेम के प्रत्युत्तर में हम उससे क्या कहें, फिर भी हमारा परमेश्वर पिता हमारी वाणी को सुनना चाहता है। - जेम्स बैंक्स


हमारे प्रति परमेश्वर का प्रेम प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट होता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-10
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं।
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया।
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।
Genesis 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है?
Genesis 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 17



बुधवार, 30 मई 2018

प्रत्युत्तर


   मेरी सहेली, मिर्ना, यात्रा के लिए विदेश गई हुई थी, और आराधना सभा में सम्मिलित होने के लिए वहाँ के एक स्थानीय चर्च में गई। उसने ध्यान किया कि चर्च में प्रवेश करने से पहले लोग चर्च की ओर पीठ करके घुटने टेकते और प्रार्थना करते तब ही चर्च में प्रवेश करते थे। पता करने पर मेरी सहेली को ज्ञात हुआ कि पहले परमेश्वर के सामने अपने पापों का अंगीकार करके ही लोग आराधना के लिए चर्च में प्रवेश करते थे।

   दीनता और नम्रता का यह प्रतिरूप, परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद द्वारा भजन 51 में लिखी बात को स्मरण दिलाता है: “टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता” (पद 17)। इस भजन में दाऊद बतशीबा के साथ किए गए व्यभिचार के पाप के विषय अपने पश्चाताप और ग्लानि को व्यक्त कर रहा था। पाप के विषय सच्ची ग्लानि और दुःख मानने का अर्थ है, पाप को परमेश्वर के दृष्टिकोण से देखना – पूर्णतः गलत, उससे घृणा करना और उसमें बने रहने से इन्कार करना।

   जब हम अपने पाप के लिए वास्तव में पश्चातापी होते हैं, उसके कारण टूट कर परमेश्वर के सामने क्षमा याचना के साथ आ जाते हैं, तब परमेश्वर अपने बड़े प्रेम में होकर हमें क्षमा भी करता है और बहाल भी: “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9)। परमेश्वर पिता से मिली यह क्षमा हमें उसके सामने और अधिक खुले मन से जाने और अपने आप को व्यक्त करने की प्रेरणा देती है, और सच्ची आराधना का स्त्रोत बन जाती है। अपने पाप का अंगीकार, पश्चाताप, तथा परमेश्वर से क्षमा प्राप्त करने के पश्चात दाऊद का प्रत्युत्तर था: “हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा” (भजन 51:15)।

   परमेश्वर की पवित्रता तथा प्रेम के प्रति हमारी दीनता और नम्रता ही सही प्रत्युत्तर है; और उससे मिलने वाली क्षमा तथा बहाली के लिए मन से निकली आराधना सही प्रत्युत्तर है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


आराधना मुक्त की गई आत्मा का गीत है।

क्योंकि परमेश्वर-भक्ति का शोक ऐसा पश्‍चाताप उत्पन्न करता है जिस का परिणाम उद्धार है और फिर उस से पछताना नहीं पड़ता: परन्तु संसारी शोक मृत्यु उत्पन्न करता है। - 2 कुरिन्थियों 7:10

बाइबल पाठ: भजन 51: 6-17
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।
Psalms 51:14 हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा।
Psalms 51:15 हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।
Psalms 51:16 क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।
Psalms 51:17 टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।
                                                 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57


गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

फल


   मैं अपने किए को पलट नहीं सकती थी। एक महिला ने मेरे आगे अपनी कार को मार्ग में खड़ा किया और पास रखे डिब्बे में कुछ चीज़ों को डालने के लिए चली गई, जिससे पेट्रोल भरवाने के पम्प तक पहुँचाने का मेरा मार्ग अवरुद्ध हुआ। क्योंकि मैं प्रतीक्षा नहीं करना चाहती थी, इसलिए मैंने क्रोधावेश में जोर से हॉर्न बजाया और अपने गाड़ी को पीछे कर के घुमा कर पेट्रोल पम्प की ओर चली गई। तुरंत ही मुझे अपने इस प्रकार अधीर और क्रोधित होने का बुरा लगा, कि मैं उस महिला के लौटकर अपनी कार को आगे बढ़ा लेने का, जिसमें उसे 30 सेकेंड से अधिक नहीं लगते, प्रतीक्षा नहीं कर सकी। मैंने परमेश्वर से क्षमा माँगी। यह ठीक है कि उसे अपनी गाड़ी निर्धारित स्थान पर खड़ी करनी चाहिए थी, परन्तु मुझे भी तो उस कड़ुवाहट के स्थान पर नम्रता और धीरज दिखाना चाहिए था। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी, वह महिला जा चुकी थी, और अब मैं उससे अपने इस कठोर व्यवहार के लिए क्षमा नहीं माँग सकती थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में अनेकों ऐसी शिक्षाएँ दी गई हैं जो हमें सिखाती हैं कि जब औरों के द्वारा हमारे मार्ग या योजनाएं बाधित हों, तो हमें कैसे प्रत्युत्तर देना चाहिए। एक स्थान पर लिखा है, “मूढ़ की रिस उसी दिन प्रगट हो जाती है, परन्तु चतुर अपमान को छिपा रखता है” (नीतिवचन 12:16)। एक अन्य में कहा गया है, “मुकद्दमे से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं” (20:3)। और यह भी है जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है, “मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है, परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है” (29:11)।

   कभी-कभी नम्रता और धैर्य में बढना बहुत कठिन लगता है, परन्तु पौलुस प्रेरित ने बताया है कि ये गुण विक्सित करना परमेश्वर द्वारा संभव है; क्योंकि ये परमेश्वर के पवित्र आत्मा के फल है (गलतियों 5:22-23)। हम अपने व्यवहार में जितना अधिक परमेश्वर के आत्मा के साथ सहयोग करते हैं, उस पर निर्भर होते हैं, उतना अधिक वह हमारे अन्दर अपने फल उत्पन्न करता जाता है।

   हे प्रभु हमें अन्दर से परिवर्तित कीजिए, हमारे अन्दर बहुतायत से अपनी आत्मा के फल उत्पन्न कीजिए! – ऐनी सेटास

                  
परमेश्वर हमारे हृदयों को विशाल करने के लिए हमारे धैर्य की परिक्षा लेता है।

तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। - यूहन्ना 15:16

बाइबल पाठ: गलतियों 5:13-26
Galatians 5:13 हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो।
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।
Galatians 5:15 पर यदि तुम एक दूसरे को दांत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।
Galatians 5:16 पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।
Galatians 5:17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
Galatians 5:18 और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे।
Galatians 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
Galatians 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।
Galatians 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
Galatians 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज,
Galatians 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं।
Galatians 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Galatians 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
Galatians 5:26 हम घमण्‍डी हो कर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 4-5
  • मत्ती 24:29-51



रविवार, 8 अक्टूबर 2017

प्रत्युत्तर


   मुझे गाड़ी चलाते हुए लगभग आधा घंटा ही हुआ था कि पिछली सीट पर बैठी मेरी बेटी ऊँची आवाज़ में रोने लगी। मैंने पूछा, "क्या हो गया?" तो उत्तर मिला कि साथ बैठे उसके भाई ने उसकी बाँह ज़ोर से पकड़ ली थी। भाई का कहना था कि उसे ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि बहन चुटकी भर रही थी। बहन ने कहा कि उसने चुटकी इसलिए भरी क्योंकि भाई ने कुछ ऐसा कहा था जो उसे बुरा लगा था।

   दुर्भाग्यवश, बच्चों में सामान्यतः पाया जाने वाली यह बात, बड़ों के बीच के संबंधों में भी दिखाई देती है। एक व्यक्ति किसी दूसरे को आहत करता है, जिसके प्रत्युत्तर में आहत व्यक्ति कोई अपमानजनक बात कह देता है। फिर एक दूसरे के प्रति चोट पहुँचाने वाले व्यवहार और बातों के उत्तर-प्रत्युत्तर का सिलसिला आरंभ हो जाता है, और समय रहते बात संभाली नहीं गई तो कटु शब्दों तथा ठेस लगाने वाले व्यवहार के कारण संबंध बिगड़ जाते हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि "ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार का बोलना तलवार के समान चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं" (नीतिवचन 12:18); और यह कि "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन 15:1)। बाइबल यह भी सिखाती है कि कभी-कभी कोई प्रत्युत्तर न देना ही किसी बुरे व्यवहार या कटु शब्दों से निपटने का सर्वोत्तम तरीका होता है।

   प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले, धर्म के अधिकारियों ने अपने शब्दों के द्वारा उसे उकसाना चाहा (मत्ती 27:41-43); परन्तु, "वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था" (1 पतरस 2:23)।

   प्रभु यीशु का उदाहरण और उसकी आत्मा से मिलने वाली सामर्थ हमें उन लोगों को, जो हमें ठेस पहुँचाना चाहते हैं, सही प्रकार का प्रत्युत्तर देने की सदबुध्दि देते हैं। यदि हमारा भरोसा अपने प्रभु परमेश्वर पर है तो फिर हमें अपने शब्दों और व्यवहार के प्रत्युत्तर को अपने हथियार नहीं बनाना पड़ेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


किसी कठोर हृदय को तोड़ने वाला बहुधा एक नम्र उत्तर होता है।

हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो। - रोमियों 12:19-21

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:13-25
1 Peter 2:13 प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है। 
1 Peter 2:14 और हाकिमों के, क्योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। 
1 Peter 2:15 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो। 
1 Peter 2:16 और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। 
1 Peter 2:17 सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।
1 Peter 2:18 हे सेवकों, हर प्रकार के भय के साथ अपने स्‍वामियों के आधीन रहो, न केवल भलों और नम्रों के, पर कुटिलों के भी। 
1 Peter 2:19 क्योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार कर के अन्याय से दुख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो यह सुहावना है। 
1 Peter 2:20 क्योंकि यदि तुम ने अपराध कर के घूंसे खाए और धीरज धरा, तो उस में क्या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम कर के दुख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है। 
1 Peter 2:21 और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्ह पर चलो। 
1 Peter 2:22 न तो उसने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली। 
1 Peter 2:23 वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था। 
1 Peter 2:24 वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। 
1 Peter 2:25 क्योंकि तुम पहिले भटकी हुई भेड़ों के समान थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और अध्यक्ष के पास फिर आ गए हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4


शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

प्रत्युत्तर


   सड़क पर सवारियाँ बहुत थीं जिससे यातायात बहुत धीमा चल रहा था, और उस गरम दोपहर में सभी चिड़चिड़े हो रखे थे। मैंने देखा कि दो जवान अपनी कार में बैठे फास्ट-फूड रेस्ट्रॉन्ट से निकल कर मुख्य मार्ग में घुसने के लिए गाड़ियों के बीच कोई स्थान देख रहे थे। मुझे लगा कि यह अच्छा हुआ जब मुझ से आगे वाली गाड़ी के चालक ने उन्हें अपने आगे आकर मुख्य सड़क पर यातायात में घुस जाने दिया। लेकिन जब मुझ से आगे वाले उस ’भले’ कार चालक को इस भलाई के लिए प्रत्युत्तर में कोई धन्यवाद के शब्द या सिर अथवा हाथ हिला कर किया गया धन्यवाद कोई संकेत भी नहीं मिला, तो वह बदतमीज़ हो गया। पहले वह अपनी गाड़ी खिड़की नीची कर के उन पर चिल्लाया; फिर वह अपनी गाड़ी को हॉर्न बजाते, चिल्लाते और अपने गुस्से का प्रदर्शन करते हुए तेज़ी से अपनी गाड़ी उनकी गाड़ी की तरफ बढ़ाने लगा, मानों उन की गाड़ी टकरा देगा।

   यहाँ किस की गलती ज़्यादा थी? क्या उस जवान चालक के धन्यवादी ना होने के कारण, उस ’भले’ चालक के क्रोध प्रदर्शन सही था? क्या उन जवानों के लिए उसे धन्यवाद देना अनिवार्य था?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु ने 10 कोढ़ियों को चंगा किया और उन कोढ़ियों का प्रभु के प्रति कृतज्ञ होना बनता था; लेकिन उन में से केवल एक ही प्रभु को धन्यवाद कहने के लिए लौट कर आया। प्रभु यीशु इस बात से चकित हुए और उन्होंने कहा, "क्या इस परदेशी को छोड़ कोई और न निकला, जो परमेश्वर की बड़ाई करता?" (लूका 17:18)

   यदि उस सृष्टिकर्ता परमेश्वर, राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु को ही 10 में से केवल 1 का धन्यवाद प्रत्युत्तर में मिला, तो हम फिर इससे अधिक की क्या आशा रख सकते हैं? हमारे लिए यह भला है कि हम अपने कार्य परमेश्वर की महिमा के लिए, उसे आदर देने के लिए और उसकी सेवकाई को पूरी करने के लिए करते रहें ना कि अपने भले कार्य लोगों से प्रत्युत्तर में धन्यवाद एकत्रित करने के लिए करें।

   यदि हमारे भले कार्यों के प्रत्युत्तर में हमें कुछ ना भी मिले, तो भी परमेश्वर का अनुग्रह हमारे जीवनों से दिखाई देता रहना चाहिए। - रैंडी किलगोर


उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि 
वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। - 1 पतरस 2:12

बाइबल पाठ: लूका 17:11-19
Luke 17:11 और ऐसा हुआ कि वह यरूशलेम को जाते हुए सामरिया और गलील के बीच से हो कर जा रहा था। 
Luke 17:12 और किसी गांव में प्रवेश करते समय उसे दस कोढ़ी मिले। 
Luke 17:13 और उन्होंने दूर खड़े हो कर, ऊंचे शब्द से कहा, हे यीशु, हे स्‍वामी, हम पर दया कर। 
Luke 17:14 उसने उन्हें देखकर कहा, जाओ; और अपने तई याजकों को दिखाओ; और जाते ही जाते वे शुद्ध हो गए। 
Luke 17:15 तब उन में से एक यह देखकर कि मैं चंगा हो गया हूं, ऊंचे शब्द से परमेश्वर की बड़ाई करता हुआ लौटा। 
Luke 17:16 और यीशु के पांवों पर मुंह के बल गिरकर, उसका धन्यवाद करने लगा; और वह सामरी था। 
Luke 17:17 इस पर यीशु ने कहा, क्या दसों शुद्ध न हुए? तो फिर वे नौ कहां हैं? 
Luke 17:18 क्या इस परदेशी को छोड़ कोई और न निकला, जो परमेश्वर की बड़ाई करता? 
Luke 17:19 तब उसने उस से कहा; उठ कर चला जा; तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 137-139
  • 1 कुरिन्थियों 13


रविवार, 1 नवंबर 2015

प्रेम


   मैंने एक दुकान में पटिया लिखा एक वाक्य देखा, "मन की जाँच इससे नहीं है कि आप दूसरों से कितना प्रेम करते हैं, वरन इससे है कि लोग आपसे कितना प्रेम करते हैं" और इस कथन का उद्धरण किया गया था बच्चों की एक प्रसिद्ध और लोकप्रीय कथा Wizard of Oz से। निःसन्देह Wizard of Oz एक अच्छी कहानी है, लेकिन आत्मिक बातों के लिए कहानियाँ भरोसेमन्द और सदा सत्य कहने वाला स्त्रोत नहीं होतीं। आत्मिक बातों का सदा सत्य बताने वाला और भरोसेमन्द स्त्रोत है परमेश्वर का वचन बाइबल।

   परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में कहा, "...सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं" (मरकुस 12:29-31)। बाइबल हमें ना केवल परमेश्वर से प्रेम करना सिखाती है, वरन मनुष्यों से भी प्रेम करने को कहती है, उन से भी जो हमारे विरोधी और बैरी हैं (मत्ती 5:43-48) जिससे कि हम अपने परमेश्वर पिता के गुण प्रकट करें। ना केवल हमें सब मनुष्यों से प्रेम रखना है परन्तु साथ ही प्रत्युत्तर में कुछ पाने की आशा रखने की बजाए यदि प्रत्युत्तर में बैर भी मिले तो उसमें भी परमेश्वर के धन्यवादी होना, आनन्दित होना है, "धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था" (मत्ती 5:11-12)।

   जब बात प्रेम की आती है तो समझने के लिए जो अति आवश्यक बात है वह है कि प्रेम का स्त्रोत परमेश्वर है (1 यूहन्ना 4:7-8); जैसे मूसा ने इस्त्राएलियों से कहा कि परमेश्वर उनसे प्रेम करने से प्रसन्न होता है (व्यवस्थाविवरण 10:15) इसीलिए उन्हें भी अन्य लोगों से प्रेम करना है, परदेशियों से भी (पद 19)। परमेश्वर चाहता है कि जो उसके प्रेम के पात्र हैं वे उसके प्रेम को दूसरों तक पहुँचाने का माध्यम भी बनें।

   हम प्रेम इसलिए कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हम से प्रेम किया और हमें प्रेम करना सिखाया है (1 यूहन्ना 4:19)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। - 1 यूहन्ना 4:8

हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। - 1 यूहन्ना 4:19

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 10:12-22
Deuteronomy 10:12 और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे, 
Deuteronomy 10:13 और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो? 
Deuteronomy 10:14 सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है; 
Deuteronomy 10:15 तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है। 
Deuteronomy 10:16 इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो। 
Deuteronomy 10:17 क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान्‌ पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है। 
Deuteronomy 10:18 वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है। 
Deuteronomy 10:19 इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे। 
Deuteronomy 10:20 अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना और उसी से लिपटे रहना, और उसी के नाम की शपथ खाना। 
Deuteronomy 10:21 वही तुम्हारी स्तुति के योग्य है; और वही तेरा परमेश्वर है, जिसने तेरे साथ वे बड़े महत्व के और भयानक काम किए हैं, जिन्हें तू ने अपनी आंखों से देखा है। 
Deuteronomy 10:22 तेरे पुरखा जब मिस्र में गए तब सत्तर ही मनुष्य थे; परन्तु अब तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरी गिनती आकाश के तारों के समान बहुत कर दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2


बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

धन्यवादी


   मेरे घर के इलाके लैन्सिंग, मिशिगन में सर्दियों में खिली धूप वाले दिन कम ही होते हैं; लेकिन पिछले वर्ष परमेश्वर ने हमें एक ऐसा खिली धूप वाला दिन दिया। मुझे लगा कि उस दिन के लिए सभी परमेश्वर के धन्यवादी हो रहे थे, सिवाय मेरे। जब मैं अपने दफ्तर से निकलकर घर की ओर चला तो एक व्यक्ति ने टिप्पणी करी, "आज हमें परमेश्वर से कैसा अच्छा दिन उपहार में मिला है।" उसे मेरा प्रत्युत्तर था, "हाँ, लेकिन इस सप्ताहांत तो बर्फ पड़नी ही है।" मेरी सोच कितनी छोटी थी!

   अपनी पत्रियों में प्रेरित पौलुस ने अपने पाठकों को लिखा कि वे परमेश्वर के प्रति एक धन्यवादी दृष्टिकोण विकसित करें। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड की पुस्तकों के अन्य सभी लेखकों की अपेक्षा पौलुस ने ही सबसे अधिक, अर्थात 23 बार धन्यवादी होने के लिए लिखा है। जिन बातों के लिए धन्यवादी होने के लिए पौलुस ने लिखा है, उनसे हम इस विषय में कुछ महत्वपूर्ण बातें सीख सकते हैं।

   पौलुस के धन्यवाद सदा ही परमेश्वर को संबोधित थे, वह अपने सहायकों के लिए भी परमेश्वर को धन्यवाद करता था, उन्हें परमेश्वर की ओर से उसे दिया गया उपहार मानता था - उन्हें उसके साथ जोड़ने के लिए, उन से उसे मिलने वाली सहायता के लिए और उनकी आत्मिक बढ़ोतरी, उनके प्रेम और उनके विश्वास के लिए भी वह परमेश्वर का धन्यवाद करता था (1 कुरिन्थियों 1:4; 1 थिस्सुलुनीकियों1:2)।

   हर बात के लिए वह परमेश्वर को अपने धन्यवाद प्रभु यीशु में होकर अर्पित करता था (कुलुस्सियों 3:15, 17)। पौलुस का मानना था कि प्रभु यीशु के अनुयायियों को हर बात के लिए परमेश्वर का धन्यवादी होना चाहिए क्योंकि परमेश्वर सर्वशक्तिमान है और सब बातों में अपने विश्वासियों की भलाई के लिए कार्य कर रहा है (1 थिस्सुलुनीकियों 5:18)।

   परमेश्वर के प्रति यही धन्यवादी मन हम सब का भी होना चाहिए, हम परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान करे गए विभिन्न उपहारों के प्रति सचेत रहें, और कृतज्ञ होकर उसका धनय्वाद करते रहें। जो कुछ परमेश्वर ने हमारे लिए किया है और कर रहा है, उसके प्रत्युत्तर में हम कम से कम धन्यवाद तो कह ही सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के उपहारों के लिए स्वाभाविक प्रत्युत्तर कृतज्ञ एवं धन्यवादी होना है।

और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। - इफिसियों 5:20

बाइबल पाठ: 1 थिस्सुलुनीकियों 5:16-25
1 Thessalonians 5:16 सदा आनन्‍दित रहो। 
1 Thessalonians 5:17 निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो। 
1 Thessalonians 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है। 
1 Thessalonians 5:19 आत्मा को न बुझाओ। 
1 Thessalonians 5:20 भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो। 
1 Thessalonians 5:21 सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। 
1 Thessalonians 5:22 सब प्रकार की बुराई से बचे रहो। 
1 Thessalonians 5:23 शान्‍ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें। 
1 Thessalonians 5:24 तुम्हारा बुलाने वाला सच्चा है, और वह ऐसा ही करेगा। 
1 Thessalonians 5:25 हे भाइयों, हमारे लिये प्रार्थना करो।

एक साल में बाइबल: 
  • मरकुस 4-6


गुरुवार, 18 जुलाई 2013

विजयी

   भजनकार "अहंकारियों के अपमान" से बहुत आहत और परेशान हो गया था (भजन 123:4); संभवतः आप भी हो गए हों। आपके पड़ौस के, दफतर के, या कक्षा के लोग शायद आपके मसीही विश्वास का उपहास करते हों और मसीह यीशु का अनुकरण करने के आपके निर्णय को ठट्ठों में उड़ाते हों। लाठी और पत्थर तो केवल हमारे शरीरों को ही घाव देते और हमारी हड्डियाँ ही तोड़ते हैं, लेकिन शब्दों के घाव और भी गहरे तथा पीड़ादायक होते हैं, और उन उपहास करने वालों के शब्द-बाणों ने आपको गहरे और पीड़ादायक घाव दे रखे हों।

   ऐसे अहंकारियों के उपहास का प्रत्युत्तर देने के दो तरीके हो सकते हैं; या तो हम उन के समान हो जाएं और ईंट का जवाब पत्थर से देने लगें, अन्यथा उनके इस उपहास को अपने लिए आदर की बात और सही मार्ग पर होने का प्रमाण समझें! परमेश्वर का वचन भी हमें यही, दूसरा विकल्प ही सिखाता है: "फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है" (1 पतरस 4:14)। हमारे लिए थोड़े समय के लिए यह निन्दा सहना, अनन्तकाल तक क्लेष सहने से कहीं उत्तम है।

   मसीह यीशु ने अपने चेलों को सिखाया "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो" (मत्ती 5:44); इसलिए पहला विकल्प - उपहास का वैसा ही प्रत्युत्तर देना, और "ईंट का जवाब पत्थर से देना" हम मसीही विश्वासीयों के लिए नहीं है। इसके विपरीत परमेश्वर का वचन हमें निर्देश देता है कि "अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो" (रोमियों 12:14)। ऐसा करने से ही हम बुराई पर विजयी होने पाएंगे अन्यथा अपना पलटा आप लेने से तो हम बुराई को और बढ़ावा ही देंगे, उसे मिटाने नहीं पाएंगे - क्या मानव जति के इतिहास में आज तक कभी किसी युद्ध या बदले में किए गए वार ने किसी समस्या का अन्त किया है? जो भी समाधान निकले हैं वे आपसी समझौते और परस्पर एक दूसरे को आदर देने से ही संभव हुए हैं, पलटा लेने से नहीं।

   परमेश्वर हमारी हर परिस्थिति को जानता है और वह हर बात में हमारे लिए भलाई भी उत्पन्न करता है। लोगों के उपहास और निन्दा के द्वारा भी: "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे" (याकूब 1:2-4)। जब हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता को भी इन बातों का सामना करना पड़ा तो हम जो उसके अनुयायी हैं, इन सब से कैसे बच कर रह सकते हैं? लेकिन जैसे मसीह यीशु के लिए, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों के लिए भी ये दुख आदर और आशीष का कारण ही बनेंगे: "सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो" (1 पतरस 4:1-2)।

   बिना युद्ध भूमि में जाए विजय प्राप्त नहीं होती; लेकिन अपने प्रत्येक संतान से परमेश्वर का यह वायदा भी है कि हमें केवल युद्ध भूमि में जाकर खड़ा ही होना है, युद्ध परमेश्वर का है और विजयी सामर्थ भी वही देगा। इसलिए, "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)। - डेविड रोपर


जब औरों के व्यवहार से आप अपने आप को आहत और अपमानित अनुभव करें तो मसीह यीशु की ओर देखिए।

हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है। - भजन 123:4 

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-21
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो।
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो।
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22 
  • प्रेरितों 21:1-17


मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

प्रभावी प्रत्युत्तर


   बाइबल कॉलेज में दाखिला लेने के पश्चात मैं प्रभु यीशु के बारे में लोगों को निर्भीकता से बताने लगा। परिणामस्वरूप मेरे कुछ पुराने साथियों के साथ मेरी अनबन भी हो गई। स्कूल के अपने पुराने मित्रों के साथ हुए कार्यक्रम में यह बात स्पष्ट हो गई। एक युवती ने मेरा परिहास किया क्योंकि मैंने उससे प्रश्न किया कि क्या उसने इस बात पर विचार किया है कि मृत्योप्रांत वह अपना अनन्त जीवन कहां बिताएगी? मेरे एक अन्य मित्र एड ने, जो मेरे मसीही विश्वास के बारे में जानता था, मसीह यीशु के क्रूस का ठठ्ठा किया। इन बातों से मैंने अपने आप को बहुत तिरस्कृत और अपमानित अनुभव किया।

   किंतु उसी संध्या को मैं एक अवर्णनीय प्रेम से भर गया। मुझे प्रभु यीशु की आज्ञा स्मरण हो आई: "परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिथे प्रार्थना करो" (मत्ती ५:४४)। मेरी आंखें भर आईं और मैंने परमेश्वर से एड को, जिसने उसके क्रूस का ठठ्ठा किया था, क्षमा करने और उसे उद्धार देने के लिए प्रार्थना करी।

   लगभग एक वर्ष के बाद मुझे एड का एक पत्र मिला जिसमें उसने मुझसे मिलने की इच्छा व्यक्त करी थी। जब हम मिलने पाए तो उसने बताया कि कैसे अपने पापों के लिए उसने रो रो कर क्षमा मांगी तथा प्रभु यीशु को अपना जीवन समर्पित किया, उसे अपने जीवन का स्वामी बनाया। बाद में मुझे यह जान कर अचंभा हुआ कि एड एक मिशनरी बनकर ब्राज़ील चला गया कि प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार उस देश में सुनाए।

   उस अनुभव से जो पाठ मैंने सीखा वह था कि आत्मिक विरोध का सबसे प्रभावी प्रत्युत्तर है प्रार्थना। जो हम और हमारी समझ नहीं कर सकती वह प्रभु और प्रभु की सामर्थ कर सकती है। हमारो प्रार्थनाएं प्रभु के कार्य को प्रभावी बनाती हैं। अपने आस-पास ध्यान कीजिए, आपके विरोधीयों को आपकी प्रार्थनओं की बहुत आवश्यक्ता है; आपके द्वारा उन की भलाई के लिए परमेश्वर से करी गई प्रार्थनाएं ही उनके विरोध का प्रभावी प्रत्युत्तर हैं! - डेनिस फिश


लोग हमारे सन्देश का मज़ाक उड़ा सकते हैं परन्तु वे हमारी प्रार्थनाओं के सामने असहाय हैं।

परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। - मत्ती ५:४४

बाइबल पाठ: मत्ती ५:३-१६
Mat 5:3  धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Mat 5:4  धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएंगे। 
Mat 5:5  धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्‍योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Mat 5:6   धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं क्योंकि वे तृप्त किए जाएंगे।
Mat 5:7  धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्‍योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Mat 5:8  धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Mat 5:9  धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Mat 5:10  धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Mat 5:11  धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Mat 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्‍होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Mat 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्‍तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्‍तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Mat 5:14  तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Mat 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्‍तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Mat 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्‍वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे ५-८ 
  • प्रकाशितवाक्य २

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

खामोशी

   कभी कभी किसी झूठे दोषारोपण के लिए खामोशी ही सही प्रत्युत्तर होता है, और कभी कभी किसी बात के लिए खामोश रहना अनुचित होता है। 
   जब प्रभु यीशु को धर्मसभा के सामने ला कर खड़ा किया गया और उसपर दोष मढ़े गए तो वह खामोश रहा (मरकुस १४:५३-६१)। वह जानता था कि उस परिस्थिति में अपना बचाव करना व्यर्थ है क्योंकि अधिकारी तो उसे दोषी ठहराकर उस का दण्ड निर्धारित भी कर चुके थे, जो चल रहा था वह उस दण्ड के निर्णय को लागू करने से पहले करी जाने वाली मात्र औपचारिकता थी, वहां उसे अपनी कोई सफाई देने का अवसर नहीं दिया जा रहा था और ना ही दण्ड के बदले जाने की कोई संभावना थी। खामोश रहकर वह यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा उसके विष्य में करी गई भविष्यवाणी "वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला" (यशायाह ५३:७) भी पूरी कर रहा था। किंतु इसी प्रभु यीशु ने, इन्हीं धर्मशास्त्रियों को उनके झूठ और दोषारोपण के लिए लताड़ा भी था, और उन्हें चुनौती भी दी थी कि उसमें कोई पाप साबित कर के दिखा दें (यूहन्ना ८:१३-५९)।

   एक पास्टर ने अपने चर्च के कार्य से इस्तीफा दे दिया क्योंकि चर्च के कुछ सदस्यों ने उसके बारे में गलत बातें चर्च मण्डली में फैलाईं थीं। उस पास्टर का मानना था कि उन परिस्थितियों में उसका अपनी प्रतिरक्षा करना उसके मसीही विश्वास के आचार के विरुद्ध होता। कभी कभी ऐसा होता है, किंतु उस परिस्थिति में बेहतर होता कि वह पास्टर स्वभाव ही से बखेड़ा खड़ा करने वाले उन लोगों का सामना करता, उनके झूठे आरोपों की पोल खोलता और अपना इस्तीफा देने की बजाए उन लोगों को चर्च के सामने गलती मानने या फिर अनुशासन का सामना करने में से एक चुनने को कहता।

   खामोश रहना गलत करने वालों को गलती करते रहने के लिए प्रोतसाहित भी कर सकता है। किंतु यदि हम केवल अपने आहत अहम के बचाव के लिए या मनुष्यों में अपनी महत्वता को प्रमाणीत करने के लिए ही प्रत्युत्तर देना चाहते हैं, तो मौन रहना और परमेश्वर के समय और न्याय की प्रतीक्षा करना ही बेहतर है।

   क्या आप पर झूठा दोषारोपण किया जा रहा है? यदि आप को लगता है कि प्रत्युत्तर देना व्यर्थ है, या आपका प्रत्युत्तर आपके चोट खाए अहम की रक्षा ही के अन्तर्गत है, तो परमेश्वर से सहने का अनुग्रह मांगें और खामोश रहें। परन्तु यदि आप समझते हैं कि गलत करने वालों को और उनकी गलती को सुधारने या किसी अन्याय को सुधारने का आपके पास उचित अवसर है तो उसके लिए परमेश्वर से सामर्थ और सदबुद्धि मांग कर अवश्य ही अपनी खामोशी तोड़िए और उचित कार्यवाही कीजिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


खामोशी बहूमूल्य होती है; यदि आप बात को सुधार नहीं सकते तो खामोशी को बनाए रखिए।
तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं? परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है? - मरकुस १४:६०-६१
बाइबल पाठ: मरकुस १४:५३-६५
Mar 14:53  फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए, और सब महायाजक और पुरिनए और शास्त्री उसके यहां इकट्ठे हो गए।
Mar 14:54  पतरस दूर ही दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन के भीतर तक गया, और प्यादों के साथ बैठ कर आग तापने लगा।
Mar 14:55  महायाजक और सारी महासभा यीशु के मार डालने के लिये उसके विरोध में गवाही की खोज में थे, पर न मिली।
Mar 14:56 क्‍योंकि बहुतेरे उसके विरोध में झूठी गवाही दे रहे थे, पर उन की गवाही एक सी न थी।
Mar 14:57  तब कितनों ने उठकर उस पर यह झूठी गवाही दी।
Mar 14:58 कि हम ने इसे यह कहते सुना है कि मैं इस हाथ के बनाए हुए मन्‍दिर को ढ़ा दूंगा, और तीन दिन में दूसरा बनाऊंगा, जो हाथ से न बना हो।
Mar 14:59  इस पर भी उन की गवाही एक सी न निकली।
Mar 14:60 तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं?
Mar 14:61 परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है?
Mar 14:62  यीशु ने कहा, हां मैं हूं: और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी और बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।
Mar 14:63 तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, अब हमें गवाहों का क्‍या प्रयोजन है?
Mar 14:64 तुम ने यह निन्‍दा सुनी: तुम्हारी क्‍या राय है? उन सब ने कहा, वह वध के योग्य है।
Mar 14:65 तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुंह ढांपने और उसे घूंसे मारने, और उस से कहने लगे, कि भविष्यद्वाणी कर: और प्यादों ने उसे लेकर थप्‍पड़ मारे।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १-२ 
  • लूका १४:१-२४