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Wednesday, May 1, 2013

अन्ततः


   मई का महीना मेरे रिहायशी इलाके मिशिगन में बसन्त ऋतु के समय का होता है, और इस महीने के आने पर मेरा मन करता है कि काश किसी प्रकार मैं समय को रोक पाता। शीत काल की पतझड़ से सूखे ठूँठ हुए पेड़ों की डालियों पर नई कोंपलें फूटने लगती हैं और बर्फ की नमी के बाद सूख कर कड़क हुई धरती को चटका कर नए अंकुर उगने लगते हैं, मानो जीवन मृत्यु पर अपनी विजय घोषित कर रहा हो। थोड़े ही दिनों में वहाँ का शुश्क और बंजर दिखने वाला नज़ारा नई पत्तियों, चटक रंग वाले फूलों, उनकी सुगन्ध और पक्षियों की चहचहाट से भर जाता है। प्रकृति की यह मनोहर छटा बस देखते ही बनती है और इन दृश्यों से मन नहीं भरता। यही इच्छा रहती है कि बस अब समय यहीं थम जाए और यह सब ऐसे ही बना रहे।

   मई के महीने में मेरे साथ एक और बात होती है; परमेश्वर के वचन के अपने अध्ययन में प्रतिदिन के अपने बाइबल पाठ में मैं 1 राजा 10 अध्याय पर पहुँचता हूँ। फिर मेरी वही इच्छा होती है - बस अब इस्त्राएल की कहानी यहीं थम जाए। यह अध्याय उस समय का वर्णन है जब इस्त्राएल खुशहाली और संपन्नता की ऊँचाईयों पर पहुँच गया है। सुलेमान इस्त्राएल का राजा बन गया और परमेश्वर के लिए एक भव्य मन्दिर बनवा लिया जिसके समर्पण के समय परमेश्वर अपनी ज्योतिर्मय महिमा के साथ मन्दिर में प्रकट हुआ (1 राजा 8:11)। एक धर्मी, न्यायी और बु्द्धिमान राजा के नीचे इस्त्राएल एकजुट और शान्ति में था। काश इस्त्राएल की कहानी इसी समृद्धि और खुशहाली के वर्णन के साथ अन्त होती, क्योंकि मुझे कहानीयों के आनन्दमय अन्त पसन्द हैं।

    लेकिन समय तो आगे बढ़ ही जाता है और इस्त्राएल की कहानी का अन्त भी यहाँ नहीं होता। इससे अगले ही अध्याय में हम इस्त्राएल के पत्न के मार्ग पर उठे आरंभिक कदमों के बारे में पढ़ते हैं: अपनी संपन्नता और ऐश्वर्य में राजा सुलेमान ने परमेश्वर को छोड़ कर भोग-विलास का जीवन अपना लिया, सैकड़ों अन्य-जाति रानियाँ और रखैलें रख लीं, और उनके बहकावे में आकर परमेश्वर की बजाए उनके देवी-देवताओं की उपासना में लग गया। परिणामस्वरूप परमेश्वर की आशीष और सुरक्षा इस्त्राएल पर से हट गई और इस्त्राएल पत्न के मार्ग पर चल निकला, दो राज्यों में विभाजित हो गया और अन्ततः दास्त्व में चला गया तथा सुलेमान द्वारा बनवाया गया वह भव्य मन्दिर ढा दिया गया।

   जैसे वर्ष के मौसम बदलते रहते हैं, जीवन-मरण, सफलता-असफलता, पाप-पश्चाताप के चक्र भी चलते रहते हैं। हम अच्छे समयों में आनन्दित और बुरे समयों में दुखी हो सकते हैं लेकिन समय ना तो एक के लिए रुकता है और ना ही दूसरे के लिए। लेकिन समय के हर चक्र के साथ यह सृष्टि अपने न्याय के समय की ओर बढ़ती जा रही है और अन्ततः समय थम जाएगा और प्रत्येक परमेश्वर के सामने अपने अपने जीवन का हिसाब देने को खड़ा होगा। कुछ के लिए, जिन्होंने प्रभु यीशु को अपना मुक्तिदाता माना और उससे अपने पापों की क्षमा माँग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर दिया, वह ऐसा समय होगा जब वे परमेश्वर के पास और साथ होंगे और वह उनकी आँखों से हर आँसू पोंछ डालेगा तथा उनके लिए अनन्त आनन्द का आरंभ होगा। शेष के लिए, जिन्होंने पृथ्वी के अपने जीवनकाल में प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा के निमंत्रण को ठुकरा दिया और अपने ही मार्ग चुन लिए, उनके द्वारा किए गए इस चुनाव के अनुसार वह समय उनके लिए सदा के लिए परमेश्वर से दूर अनन्त पीड़ा में रहने का आरंभ होगा। 

   अन्ततः अनन्त आनन्द अथवा अनन्त पीड़ा, एक ना एक में जाना ही है। कहाँ जाएंगे, यह चुनाव आपका अपना है और अभी इस पृथ्वी पर होता है। अन्ततः आपका चुनाव ही आपका अनन्त भविष्य निर्धारित करेगा, इसलिए बहुत सावधानी और बुद्धिमानी से इस चुनाव को कीजिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


समय बदलता है, परमेश्वर नहीं।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:4

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-8
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमेगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।
Revelation 21:8 पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्‍हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्‍धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 10-11 
  • लूका 21:20-38