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Thursday, May 23, 2013

निर्भर


   हमारे परिवार में एक नए शिशु का आगमन हुआ और मैं उस शिशु और उस परिवार के लोगों के लिए आनन्दित तथा धन्यवादी थी। उस शिशु की देखभाल होते देख मुझे स्मरण हो आया कि नवजात शिशु की देखभाल करना कितनी लगन और मेहनत का कार्य है और एक माँ बिना अपनी कुछ भी परवाह किया कितने आनन्द के साथ उसकी देखभाल करती है, उसके लिए कष्ट उठाती रहती है। यह छोटी सी सृष्टि अपनी देखभाल ज़रा भी नहीं कर पाती और उसका पेट भरा रखने, उसे कपड़े पहनाए और गर्म रखने, उसकी साफ-सफाई करने आदि सभी कार्यों के लिए वह अपने आस-पास के व्यसक और अनुभवी लोगों पर पूर्णतया निर्भर है। यदि यह देखभाल उपलब्ध ना हो तो उसका जीवित रह पाना भी संभव नहीं होगा।

   कुछ यही दशा संसार में रहकर संसार को परमेश्वर के जीवन को दिखाने के लिए हम मसीही विश्वासीयों की भी है - परमेश्वर पिता पर पूरी तरह से निर्भर। हम उसी में जीवित रहते और चलते फिरते हैं (प्रेरितों 17:28); हमारा जीवन और हमारी हर श्वास उसी की दी हुई है (प्रेरितों 17:25); वह ही हमारी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है (फिलिप्पियों 4:19)। 

   हमें अपने स्वर्गीय प्रेमी पिता परमेश्वर कि आवश्यकता रहती है:
  • परेशानियों में शांति के लिए (यूहन्ना 16:33)
  • प्रेम के लिए (1 यूहन्ना 3:1)
  • आवश्यकताओं में सहायता के लिए (भजन 46:1; इब्रानियों 4:16)
  • परीक्षा और प्रलोभनों पर विजय के लिए (1 कुरिन्थियों 10:13)
  • अपराधों की क्षमा के लिए (1 यूहन्ना 1:9)
  • उद्देश्यों की पूर्ति के लिए (यर्मियाह 29:11)
  • अनन्त जीवन के लिए (यूहन्ना 10:28)


   बिना परमेश्वर की सहायता के हम कुछ नहीं कर सकते (यूहन्ना 15:5); उससे ही हमने बार बार अनुग्रह पर अनुग्रह प्राप्त किया है और करते रहते हैं (यूहन्ना 1:16)।

   यदि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार और परमेश्वर को भावता हुआ, उसे प्रसन्न करने वाला जीवन व्यतीत करना है तो कभी अपने या अपनी योग्यताओं और क्षमताओं, अपनी बल-बुद्धि-ज्ञान पर भरोसा ना करें। परमेश्वर पिता पर पूरी तरह से निर्भर और समर्पित रहें, और वह दिन प्रति दिन आपकी हर आवश्यकता को पूरा करता रहेगा, एक नवजात शिशु के समान आपको संभाले रहेगा, आपकी देख-भाल और सुरक्षा करता रहेगा और आपको अपने लिए उपयोगी तथा कार्यकारी बनाए रखेगा और इस पृथ्वी पर भी तथा अनन्त जीवन में भी अपनी आशीषों से परिपूर्ण करता रहेगा।  - ऐनी सेटास


परमेश्वर पर निर्भर रहना दुर्बलता नहीं वरन उसकी सामर्थ को अपने में प्रवाहित और कार्यकारी होने देने का माध्यम है।

न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। - प्रेरितों 17:25

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:24-3:3
1 John 2:24 जो कुछ तुम ने आरंभ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरंभ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे।
1 John 2:25 और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है।
1 John 2:26 मैं ने ये बातें तुम्हें उन के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं।
1 John 2:27 और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।
1 John 2:28 निदान, हे बालकों, उस में बने रहो; कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके साम्हने लज्ज़ित न हों।
1 John 2:29 यदि तुम जानते हो, कि वह धार्मिक है, तो यह भी जानते हो, कि जो कोई धर्म का काम करता है, वह उस से जन्मा है।
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 19-21 
  • यूहन्ना 8:1-27