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Monday, January 6, 2014

घर


   जब हमारा बेटा स्टीफन बालक था तो वह एक ग्रीष्मकालीन शिविर में गया। उसके जाने के कुछ दिन के बाद ही हमें उसका लिखा एक पत्र मिला जिसमें उसने लिखा, "माँ और पापा आप आज ही आकर मुझे यहाँ से वापस घर ले जाईए।" उस बालक का मन यह नहीं जान सका कि उसके पत्र को हम तक पहुँचने और फिर हमारे द्वारा छुट्टी लेकर उस तक पहुँचने में कुछ दिन लगेंगे। उसका छोटा सा दिल बस इतना जानता था कि वह अपने माता-पिता के बिना व्याकुल था और उसे तो बस तुरंत अपने माता-पिता तथा घर वापस पहुँचना था।

   इस संसार में हम मसीही विश्वासी भी कभी कभी बालक स्टीफन के समान ही व्यवहार करते हैं। हमारे लिए बहुत सरल होता है इस संसार के क्लेषों से निकलकर प्रभु यीशु के साथ रहने की लालसा रखना और अपने स्वर्गीय घर जा कर अनन्त सुख में निवास करने की इच्छा रखना। परमेश्वर की सन्तान होने के नाते हम जानते हैं कि यह संसार कभी हमारा घर नहीं हो सकता, और हम यहाँ कभी स्थाई रीति से सन्तुष्ट और आनन्दित नहीं रह सकते, विशेषकर तब जब परिस्थितियाँ हमारे लिए कठिन और कष्टदायक हों। प्रेरित पौलुस का भी यही हाल था; जब वह रोम में अपने मुकद्दमे की प्रतीक्षा में था तो उसने अपनी एक पत्री में लिखा, "क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है" (फिलिप्पियों 1:23)। वह इस संसार में प्रभु यीशु की सेवकाई करते रहने में प्रसन्न तो था लेकिन साथ ही उसके मन का एक भाग प्रभु के साथ स्वर्ग में होने की भी इच्छा रखता था।

   यह विचार अपने मनों में बनाए रखना कि हम मसीही विश्वासियों के लिए स्वर्ग में एक अनन्तकाल के आनन्द का स्थान, हमारा स्वर्गीय घर तैयार है हमें भविष्य के प्रति आशावान तथा इस संसार के कष्टों और निराशाओं को सहन करने की सामर्थ देता रहता है। प्रभु के साथ उस घर में रहने की आशा को बनाए रखें - वह समय बहुत निकट है। - बिल क्राउडर


घर के समान और कोई स्थान नहीं है, विशेषकर जब वह घर प्रभु यीशु के साथ स्वर्गीय घर हो।

इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। - 2 कुरिन्थियों 5:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:21-30
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है। 
Philippians 1:22 पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं। 
Philippians 1:23 क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है। 
Philippians 1:24 परन्तु शरीर में रहना तुम्हारे कारण और भी आवश्यक है। 
Philippians 1:25 और इसलिये कि मुझे इस का भरोसा है सो मैं जानता हूं कि मैं जीवित रहूंगा, वरन तुम सब के साथ रहूंगा जिस से तुम विश्वास में दृढ़ होते जाओ और उस में आनन्‍दित रहो। 
Philippians 1:26 और जो घमण्‍ड तुम मेरे विषय में करते हो, वह मेरे फिर तुम्हारे पास आने से मसीह यीशु में अधिक बढ़ जाए। 
Philippians 1:27 केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं, कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त हो कर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो। 
Philippians 1:28 और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते यह उन के लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है। 
Philippians 1:29 क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुख भी उठाओ। 
Philippians 1:30 और तुम्हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 16-19