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मंगलवार, 22 मई 2018

लक्ष्य



   सुप्रसिद्ध मसीही लेखक तथा प्रचारक सी. एस. ल्युईस द्वारा लिखित Chronicles of Narnia श्रंखला की पुस्तकों के एक पात्र दृढ़ बातूनी चूहे – रीपिचीप को मैं बहुत पसंद करता हूँ। वह सुदूर पूर्व में महान बब्बर सिंह असलन [जो कहानी में प्रभु यीशु मसीह का प्रतीक है] के साथ जाकर मिलना चाहता है, और ऐसा करने के लिए दृढ़ निश्चय है। रीपिचीप अपने इस दृढ़ निर्णय के विषय कहता है, “जब तक मुझ से हो सकेगा, मैं पूर्व की ओर जलपोत में यात्रा करूँगा। यदि जलपोत अक्षम हो जाएगा तो उसमें से एक छोटी नौका लेकर उसे पूर्व की ओर खेने लगूँगा, यदि वह भी डूब गई, तो अपने चारों हाथों-पांवों से पूर्व की ओर तैरूँगा, और फिर जब मैं और तैरने नहीं पाऊँगा, यदि तब तक मैं असलन के देश में नहीं पहुँचा होऊंगा, तो अपनी नाक सूर्योदय की ओर करके डूब जाऊँगा।”

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इसी दृढ़ निश्चय को दूसरे शब्दों में व्यक्त किया, “निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं...” (फिलिप्पियों 3:14)। उसका लक्ष्य प्रभु यीशु के समान होना था; उसे और किसी बात से कोई सरोकार नहीं था। पौलुस ने स्वीकार किया कि इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए उसे बहुत दूर जाना होगा, परन्तु वह तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक वह उसे न प्राप्त कर ले जिसके लिए प्रभु यीशु मसीह ने उसे बुलाया था।

   हम में से कोई भी वैसा नहीं है जैसा हमें होना चाहिए। परन्तु पौलुस प्रेरित के समान अपने उस लक्ष्य की ओर प्रार्थना के साथ अग्रसर बने रह सकते हैं। पौलुस के समान हमें भी यह कहना पड़ सकता है कि, “यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ।” लेकिन दुर्बलता, असफलता, थकान के बावजूद हमें आगे बढ़ते ही जाना है (पद 12)। परन्तु सब कुछ परमेश्वर पर निर्भर करता है; उसके बिना हम कुछ नहीं कर सकते हैं।

   परमेश्वर आपके साथ है, आपको लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, अग्रसर रहें। - डेविड रोपर


अग्रसर रहने के लिए आवश्यक सामर्थ्य परमेश्वर प्रदान करता है।

जो मुझे सामर्थ्य देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। - फिलिप्पियों 4:13

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:12-16
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 16-18
  • यूहन्ना 7:28-53



शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

आश्वासन


   एक भारी आँधी के कारण फ्रैंकफर्ट के लिए हमारी उड़ान विलंबित हुई जिसके कारण उससे अगली उड़ान को पकड़ना हमारे लिए असंभव हो गया। संबंधित अधिकारियों द्वारा हमें बताया गया कि हमारा नाम अगली संध्या की एक उड़ान में पक्का कर दिया गया है। अगली संध्या जब हम वह उड़ान पकड़ने पहुँचे तो हमें बताया गया कि हमारा नाम पुष्टिकृत यात्रियों की सूची में नहीं वरन पुष्टि होने की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों में है और उड़ान में अभी कोई रिक्त स्थान हमारे लिए नहीं है। यह सब जानने के पश्चात मैं सोचने लगा कि जो कुछ हमें बताया गया क्या वह केवल जानकारी देने में हुई त्रुटि थी या यह उड़ान छूट जाने वाले यात्रियों से व्यवहार का तरीका था। यदि उन यात्रियों को पहले ही यह बता दिया जाता कि वे प्रतीक्षा वाली सूची में हैं तो वे क्षुब्ध होते, कुछ प्रतिक्रीया करते; इसलिए बात को टालने और समय प्राप्त करने के लिए कोई उन से कह दे कि उनके नाम पुष्टिकृत सूची में हैं और फिर बाद में कोई और, पहले व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी से पल्ला झाड़ते हुए उन्हें बताए कि उन्हें अभी प्रतीक्षा करनी होगी।

   यह बड़े धन्यवाद की बात है कि परमेश्वर ऐसा व्यवहार नहीं करता, वह हमें सब बातें स्पष्ट बताता है, कुछ भी नहीं छुपाता। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि, "...सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23)। मनुष्यों के पाप स्वभाव और उस पाप स्वभाव के निवारण के उपाय के विषय में परमेश्वर ने आरंभ से ही हमें बताया हुआ है (उत्पत्ति 3)। परमेश्वर के इसी उपाय का उल्लेख हम पौलुस प्रेरित द्वारा रोम के मसीही विशवासियों के नाम लिखी गई पत्री में भी पाते हैं: "परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं" (रोमियों 3:24)।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु को संसार के सभी लोगों के पापों के दण्ड को उठा लेने के लिए भेजा। उन पापों के लिए क्रूस पर दिए गए उसके बलिदान के द्वारा आज संसार के सभी लोगों के लिए पाप क्षमा का मार्ग खुला और उपलब्ध है। जो कोई प्रभु यीशु पर विश्वास करके उससे पापों की क्षमा माँगता है और अपना जीवन प्रभु को समर्पित करता है, वह सेंत-मेंत अपने पापों से क्षमा तथा परमेश्वर की सन्तान होने एवं उसकी आशीषों को प्राप्त करने का आदर पा लेता है।

   मैं बहुत धन्यवादी हूँ कि परमेश्वर ने सब के लिए सब कुछ इतना स्पष्ट कर के सब के समक्ष रख दिया है; उसने हमें मनुष्यों के अविश्वसनीय आशवासनों को लेकर इधर-उधर भटकते रहने के लिए नहीं छोड़ा। उसने आज तक कभी किसी को इस क्षमा को पाने से वंचित नहीं किया, किसी अन्य बात में नहीं उलझाया। जो कोई स्वेच्छा से उसे ग्रहण करना चाहे उसके लिए परमेश्वर का आश्वासन निश्चित है, कारगर है, सदा सेंत-मेंत उपलब्ध है। - सी. पी. हिया


प्रभु यीशु का बलिदान हमें सुरक्षित करता है; परमेश्वर का वचन उसके लिए हमें निश्चित करता है।

और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसा ही मसीह में सब जिलाए जाएंगे। - 1 कुरिन्थियों 15:22

बाइबल पाठ: रोमियों 3:20-26
Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 54-56
  • रोमियों 3


सोमवार, 6 जनवरी 2014

घर


   जब हमारा बेटा स्टीफन बालक था तो वह एक ग्रीष्मकालीन शिविर में गया। उसके जाने के कुछ दिन के बाद ही हमें उसका लिखा एक पत्र मिला जिसमें उसने लिखा, "माँ और पापा आप आज ही आकर मुझे यहाँ से वापस घर ले जाईए।" उस बालक का मन यह नहीं जान सका कि उसके पत्र को हम तक पहुँचने और फिर हमारे द्वारा छुट्टी लेकर उस तक पहुँचने में कुछ दिन लगेंगे। उसका छोटा सा दिल बस इतना जानता था कि वह अपने माता-पिता के बिना व्याकुल था और उसे तो बस तुरंत अपने माता-पिता तथा घर वापस पहुँचना था।

   इस संसार में हम मसीही विश्वासी भी कभी कभी बालक स्टीफन के समान ही व्यवहार करते हैं। हमारे लिए बहुत सरल होता है इस संसार के क्लेषों से निकलकर प्रभु यीशु के साथ रहने की लालसा रखना और अपने स्वर्गीय घर जा कर अनन्त सुख में निवास करने की इच्छा रखना। परमेश्वर की सन्तान होने के नाते हम जानते हैं कि यह संसार कभी हमारा घर नहीं हो सकता, और हम यहाँ कभी स्थाई रीति से सन्तुष्ट और आनन्दित नहीं रह सकते, विशेषकर तब जब परिस्थितियाँ हमारे लिए कठिन और कष्टदायक हों। प्रेरित पौलुस का भी यही हाल था; जब वह रोम में अपने मुकद्दमे की प्रतीक्षा में था तो उसने अपनी एक पत्री में लिखा, "क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है" (फिलिप्पियों 1:23)। वह इस संसार में प्रभु यीशु की सेवकाई करते रहने में प्रसन्न तो था लेकिन साथ ही उसके मन का एक भाग प्रभु के साथ स्वर्ग में होने की भी इच्छा रखता था।

   यह विचार अपने मनों में बनाए रखना कि हम मसीही विश्वासियों के लिए स्वर्ग में एक अनन्तकाल के आनन्द का स्थान, हमारा स्वर्गीय घर तैयार है हमें भविष्य के प्रति आशावान तथा इस संसार के कष्टों और निराशाओं को सहन करने की सामर्थ देता रहता है। प्रभु के साथ उस घर में रहने की आशा को बनाए रखें - वह समय बहुत निकट है। - बिल क्राउडर


घर के समान और कोई स्थान नहीं है, विशेषकर जब वह घर प्रभु यीशु के साथ स्वर्गीय घर हो।

इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। - 2 कुरिन्थियों 5:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:21-30
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है। 
Philippians 1:22 पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं। 
Philippians 1:23 क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है। 
Philippians 1:24 परन्तु शरीर में रहना तुम्हारे कारण और भी आवश्यक है। 
Philippians 1:25 और इसलिये कि मुझे इस का भरोसा है सो मैं जानता हूं कि मैं जीवित रहूंगा, वरन तुम सब के साथ रहूंगा जिस से तुम विश्वास में दृढ़ होते जाओ और उस में आनन्‍दित रहो। 
Philippians 1:26 और जो घमण्‍ड तुम मेरे विषय में करते हो, वह मेरे फिर तुम्हारे पास आने से मसीह यीशु में अधिक बढ़ जाए। 
Philippians 1:27 केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं, कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त हो कर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो। 
Philippians 1:28 और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते यह उन के लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है। 
Philippians 1:29 क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुख भी उठाओ। 
Philippians 1:30 और तुम्हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 16-19


रविवार, 5 जनवरी 2014

भविष्य


   कुछ पुरानी फाइलों को देखते हुए मेरी नज़र टाईम पत्रिका के 1992 के एक विशेषांक पर गई, जिसका शीर्षक था: "वर्ष 2000 से आगे: नई शताब्दी में क्या आशा की जा सकती है।" उस विशेषांक में, आज से दो दशक पूर्व करी गई भविष्यवाणियों को पढ़ना बहुत रोचक था। भविष्यवाणी की कुछ सामान्य बातें तो सही निकलीं और पूरी हुईं, लेकिन तब किसी ने भी आज विद्यमान उन अविषकारों और घटनाओं की कलपना भी नहीं करी थी जिन्होंने आज हमारे जीवनों को मौलिक रूप से प्रभावित तथा परिवर्तित कर दिया है। मेरे लिए उस पत्रिका में लिखा हुआ सबसे प्रभावी कथन था, "भविष्यवाणी करने का सबसे प्रथम नियम होना चाहिए कि अनेपक्षित ही भविष्य को अज्ञेय बनाए रखता है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब हमें स्मरण कराता है कि भविष्य के प्रति वह प्रत्येक दृष्टिकोण जो परमेश्वर को नज़रंदाज़ करता है मूर्खतापूर्ण है। याकूब ने लिखा: "तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे" (याकूब 4:13-15)।

   बहुत से लोग अपनी योजनाओं का बयान करते हुए कहते हैं "यदि प्रभु की इच्छा हुई तो..."; यह वाक्यांश भले ही घिसा-पिटा लगता हो लेकिन परमेश्वर की सार्वभौमिकता और नियंत्रण को स्वीकार करना कभी असंगत नहीं हो सकता। इस वर्ष को आरंभ करते हुए यदि हम परमेश्वर की इच्छा और उद्देश्य में आगे बढ़ते रहेंगे तो भविष्य हमारे लिए कोई घबराने या चिंतित करने वाला विष्य नहीं रहेगा, वरन अपने लिए सदा ही परमेश्वर की भली योजना के होने के आश्वासन के साथ हम भविष्य की ओर आनन्द के साथ देखने वाले बन जाएंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो मसीह यीशु को अपना उद्धारकर्ता मान चुकें हैं वे भविष्य की ओर सुनिश्चय तथा आनन्द से देखते रह सकते हैं।

और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा। - 1 यूहन्ना 2:17

बाइबल पाठ: याकूब 4:13-17
James 4:13 तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। 
James 4:14 और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। 
James 4:15 इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। 
James 4:16 पर अब तुम अपनी ड़ींग पर घमण्‍ड करते हो; ऐसा सब घमण्‍ड बुरा होता है। 
James 4:17 इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 12-15


शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

अपने बड़े नाम के कारण

   प्राचीन इस्त्राएल का समाज गिलगाल में एकत्रित हुआ कि अपने प्रथम राजा, शाउल, का राज्याभिषेक करे (१ शमूएल ११:१५)। परमेश्वर ने इस्त्राएल से वायदा किया था कि वह ही उनकी देखभाल करेगा और उनकी सुरक्षा होगा, और परमेश्वर ऐसा करता भी आया था। किंतु अपने आस-पास की अन्य जातियों और उनके व्यवहार को देख कर इस्त्राएल ने परमेश्वर से मांग करी कि उन्हें भी अन्य जातियों के समान एक राजा चाहिए। परमेश्वर इस बात से प्रसन्न तो नहीं हुआ लेकिन फिर भी उसने अपने नबी शमूएल से कहा कि शाउल को राजा नियुक्त कर दे, और साथ ही अपनी प्रजा को आश्वासन दिलवाया, "यहोवा तो अपने बड़े नाम के कारण अपनी प्रजा को न तजेगा, क्योंकि यहोवा ने तुम्हें अपनी ही इच्छा से अपनी प्रजा बनाया है" (१ शमूएल १२:२२)। यह परमेश्वर के प्रेम और विश्वासयोग्यता का प्रमाण है कि जिसे वह अपना लेता है, उसे फिर कभी नहीं तजता; किसी परिस्थिति में नहीं, किसी भी कारण से नहीं।

    परमेश्वर का वचन बाइबल प्रत्येक मसीही विश्वासी को आज भी यही आश्वासन देती है। हम विश्वासी उसकी निज प्रजा हैं (१ पतरस २:९), और वह हमें कभी नहीं तजेगा, यद्यपि वह जानता है कि हम कमज़ोर पड़कर उसे छोड़ देंगे; वह यह भी जानता है कि हम कमज़ोर, टूट जाने वाले और पाप में पड़ जाने में भी सक्षम हैं। परन्तु उसके लिए यह कोई नई बात नहीं है, वह हमारे विषय में यह बातें पहले से ही जानता है, फिर भी उसने हमें अपने निकट बुलाया है और हमें यह अधिकार दिया कि हम उसे "हे अब्बा, हे पिता" कह कर संबोधित कर सकें (रोमियों ८:१५)। हम मसीही विश्वासियों के उद्धार की निश्चितता हमारे अपने किसी प्रयास, किसी योग्यता अथवा किसी कार्य पर निर्भर नहीं है, वरन परमेश्वर के चरित्र पर आधारित है (१ यूहन्ना ५:२०)।

   यह निश्चितता और परमेश्वर का यह आश्वासन हमें पाप करते रहने या पाप में बने रहने के लिए कदापि कोई बहाना या अवसर नहीं प्रदान करता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, "सो हम क्‍या कहें? क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं, हम जब पाप के लिए मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍योंकर जीवन बिताएं?" (रोमियों ६:१, २)। हमारा व्यवहार और दिन-प्रतिदिन के कार्यों में हमारे चुनाव परमेश्वर के नाम और प्रतिष्ठा, संसार के समक्ष मसीही गवाही और परमेश्वर के साथ हमारी सहभागिता की ओर संसार के लोगों का ध्यान लेकर जाते हैं। इसलिए अपनी जीवन शैली और व्यवहार में हमें संपूर्ण प्रयास के साथ परमेश्वर और उसके नाम के प्रति वफादार रहना है कि हम में होकर उसपर कोई आंच नहीं आए। किंतु साथ ही हमें यह आश्वासन भी है कि यदि हम कहीं कमज़ोर भी पड़ गए, और हमसे कोई गलती या पाप भी हो गया, तौ भी परमेश्वर हमें, जो मसीह यीशु में होकर वास्तव में उसके हो चुके हैं, कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा ( इब्रानियों १३:५)।

   हम निश्चिंत रह सकते हैं कि जिसे प्रभु परमेश्वर अपने अनुग्रह में होकर उद्धार देता है, अपने बड़े नाम के कारण उसकी रक्षा भी करता है - सदैव और सर्वदा। - डेविड रोपर


परमेश्वर के कभी न बदलने वाले अनुग्रह में रोप कर स्थापित किए हुए जीवन वहां से कभी उखाड़े नहीं जा सकते।
तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो? क्‍योंकि उस ने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों १३:५
बाइबल पाठ: रोमियों ८:२८-३९
Rom 8:28  और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिए सब बातें मिल कर भलाई ही को उत्‍पन्न करती है? अर्थात उन्‍हीं के लिए जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Rom 8:29  क्‍योंकि जिन्‍हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Rom 8:30  फिर जिन्‍हें उस ने पहिले से ठहराया, उन्‍हें बुलाया भी, और जिन्‍हें बुलाया, उन्‍हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्‍हें धर्मी ठहराया, उन्‍हें महिमा भी दी है।
Rom 8:31  सो हम इन बातों के विषय में क्‍या कहें यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Rom 8:32  जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्‍तु उसे हम सब के लिए दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्‍योंकर न देगा?
Rom 8:33   परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहराने वाला है।
Rom 8:34  फिर कौन है जो दण्‍ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिए निवेदन भी करता है।
Rom 8:35  कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Rom 8:36   जैसा लिखा है, कि तेरे लिए हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Rom 8:37  परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़ कर हैं।
Rom 8:38  क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Rom 8:39  न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १, २ 
  • लूका १९:२८-४८