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Thursday, March 6, 2014

चिंतक


   मेरे निवास प्रांत इडाहो में एक झील है - हेन्री झील। उस झील के पूर्वी तट पर एक स्थान है जो "टप्पर्स होल" अर्थात टप्पर का स्थान कहलाता है। इस स्थान का यह नाम हैरी टप्पर के नाम पर रखा गया है, जो इडाहो में अपने मछली पकड़ने के कौशल के लिए प्रसिद्ध है।

   हैरी के सम्बंध में जो बात मुझे सबसे अधिक याद आती है, उसके हेन्री झील की बड़ी बड़ी ट्राउट मछली पकड़ने के कौशल के अतिरिक्त, वह है उसका पालतु कुत्ता डिंगो - वाह! डिंगो भी क्या कुत्ता था! डिंगो अपने मालिक हैरी के साथ नाव में चुपचाप बैठा हैरी को मछली पकड़ते हुए देखता रहता था। जैसे ही हैरी के काँटे में कोई मछली फंसती, डिंगो उत्साहित होकर ओर ज़ोर से भौंकने लगता जब तक हैरी उस मछली को बाहर निकाल कर, उसमें से काँटे को निकाल कर मछली को वापस पानी में छोड़ नहीं देता था।

   डिंगो के इस उत्साही व्यवहार से मैंने भी शिक्षा ली कि किसी दूसरे के कार्यों से उत्साहित होना अपने कार्यों से उत्साहित होने से भला है। इसलिए जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में फिलिप्पियों 2:4 को पढ़ता हूँ तो डिंगो को स्मरण करता हूँ, और अपने आप से प्रश्न करता हूँ: क्या मैं दूसरों के हित के बारे में सोचता हूँ? जब परमेश्वर किसी अन्य के जीवन में अथवा उसके जीवन के द्वारा कुछ कर रहा होता है तो क्या मैं उतना और वैसा ही उत्साहित होता हूँ जैसे कि परमेश्वर द्वारा अपने जीवन में या अपने जीवन के द्वारा किए गए किसी कार्य से होता हूँ? क्या मैं दूसरों को अनुग्रह और सफलता में बढ़ते हुए देखना चाहता हूँ, चाहे उनकी इस बढौतरी में मेरा प्रयास लगा हो?

   यही महानता का पैमाना है, क्योंकि जब हम दूसरों के हित के बारे में विचार तथा चिंता करने में लौलीन होते हैं, तब हम परमेश्वर के स्वभाव की समानता में होते हैं। प्रेरित पौलुस ने कहा: "...पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो" (फिलिप्पियों 2:3)। क्या हम ऐसा जीवन जीते हैं? - डेविड रोपर


परमेश्वर के प्रति वास्तविक प्रेम से भरा हुआ जीवन अन्य लोगों के प्रति प्रेम से भी भरा रहेगा।

कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, वरन औरों की। - 1 कुरिन्थियों 10:24 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 22-24