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Thursday, October 30, 2014

डटे रहें


   मैं एक व्यस्त चौराहे पर अपनी कार में रुकी हुई थी और मोड़ मुड़ने के संकेत की प्रतीक्षा कर रही थी। मुझे एंब्यूलैंस के साइरन की धव्नि सुनाई दी और मैंने पीछे का दृश्य दिखाने वाले दर्पण में देखा कि एक एंब्यूलैंस तेज़ी से मेरी ही ओर आ रही है। इतने में बत्ती का रंग बदला और मोड़ मुड़ने का संकेत हो गया, मेरे पीछे खड़ी कार के चालक ने हॉर्न बजा कर मुझे मोड़ मुड़ने के लिए दबाव दिया, लेकिन मैंने देख लिया था कि एंब्यूलैंस तेज़ी से आ रही है यदि मैंने गाड़ी मोड़ी तो मैं उसके रास्ते में आ जाऊँगी और परिणाम सबके लिए बहुत दुखदाई होगा, इसलिए मैं उस चालक के दबाव के बावजूद अपने स्थान पर डटी रही, और जब एंब्यूलैंस निकल गई मैंने तब ही मोड़ मुड़ा।

   आत्मिक बातों के लिए भी हमें अनेक बार ऐसे ही अनुभव से होकर निकलना पड़ता है, जब संसार तथा संसार के लोगों के दबाव के बावजूद, जो सही है हम उस पर ही डट कर खड़े रहें। परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र राजा सुलेमान को यह पाठ कठिन रीति से सीखना पड़ा। राजा सुलेमान का राज्यकाल बहुत अच्छे से आरंभ हुआ था और अपने शासन के आरंभ ही में उसने परमेश्वर से दर्शन पाया तथा परमेश्वर से मांगा कि उसे राज्य करने की बुद्धिमता मिल जाए (1 राजा 3:9); परमेश्वर ने सुलेमान की प्रार्थना सुनी और उसे सदबुद्धि प्रदान करी। परमेश्वर ने सुलेमान द्वारा ही अपने लिए मन्दिर का निर्माण भी करवाया। मन्दिर का निर्माण पूरा होने के बाद मन्दिर के समर्पण के समय सुलेमान द्वारा करी गई प्रार्थना परमेश्वर के प्रति उसके समर्पण और निष्ठा को दिखाती है (1 राजा 8:23, 61)। लेकिन सुलेमान ज़्यादा दिन तक परमेश्वर के प्रति समर्पित और वफादार नहीं रहा; परमेश्वर के निर्देशों के विरुद्ध उसने अनेक अन्यजाति स्त्रियों से विवाह कर लिए और उन्हें अपने घर ले आया; उन स्त्रियों ने उसके मन को बदल डाला और सुलेमान जीवते सच्चे परमेश्वर की उपासना के अलावा अन्य देवी-देवताओं की उपासना तथा मूर्ति-पूजा में पड़ गया, और उसके जीवन का अन्त समय आने तक "उसका हृदय परमेश्वर की ओर सच्चा ना रहा" (1 राजा 11:1-6; नहेमियाह 13:26), और इसके बहुत विनाशकारी परिणाम ना केवल उसके अपने परिवार में वरन पूरे इस्त्राएल में देखने को मिले।

   जैसा सुलेमान के साथ हुआ, वैसा ही आज हमारे साथ भी हो सकता है - संसार के लोग विभिन्न रीतियों से हम मसीही विश्वासियों पर दबाव डाल सकते हैं कि हम अपने प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह और उसके जीवते सच्चे वचन बाइबल के प्रति अपने समर्पण और वफादारी को छोड़ कर संसार द्वारा दिखाए जा रहे मार्ग पर मुड़ जाएं। लेकिन यदि हम सत्य को जानते तथा पहचानते हैं तो हम गलत मोड़ लेकर नुकसान उठाने की बजाए परमेश्वर की सहायता से सही स्थान पर डटे रहेंगे (फिलिप्पियों 2:16)। जब कभी आप अपने मसीही विश्वास में अपने आप को निर्णय के किसी चौराहे पर खड़ा पाएं और सही मार्ग चुनना कठिन लगे तो परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन करें, वह आपके पाँव के लिए दीपक और मार्ग के लिए उजियाले का कार्य करेगी (भजन 119:105)।

   आत्मिक बातों तथा उनसे संबंधित निर्णयों में असमंजस से बचने के लिए सदा ही परमेश्वर के सारे आत्मिक हथियारों को धारण करे रहें (इफिसियों 6:10-18), सब बातों के लिए परमेश्वर पवित्र आत्मा से मार्गदर्शन तथा सहायता लें (1 कुरिन्थियों 2:10-12) और अन्य मसीही विश्वासियों के साथ संगति एवं प्रार्थना में बने रहें। गलत मोड़ मुड़ने के लिए संसार चाहे कितना भी दबाव डाले, कैसा भी प्रलोभन दे, सच्चे परमेश्वर के सच्चे मार्ग पर डटे रहने में ही भलाई तथा आशीष है। - जैनिफर बेन्सन शुल्ट


गलतियों में पड़ने से बचने के लिए सच्चाई को दृढ़ता से थामे रहें।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: 1 राजा 11:1-13
1 Kings 11:1 परन्तु राजा सुलैमान फ़िरौन की बेटी, और बहुतेरी और पराई स्त्रियों से, जो मोआबी, अम्मोनी, एदोमी, सीदोनी, और हित्ती थीं, प्रीति करने लगा। 
1 Kings 11:2 वे उन जातियों की थीं, जिनके विषय में यहोवा ने इस्राएलियों से कहा था, कि तुम उनके मध्य