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Sunday, January 4, 2015

धन्य


   हाल ही में मैंने टेलिविज़न पर एक रेस्टोरां श्रंखला का विज्ञापन देखा जिसमें एक लुभावना दावा किया गया था; उस विज्ञापन के अनुसार, आप उस श्रंखला के किसी भी रेस्टोरां मे जाकर अपना मनपसन्द भोजन द्वारा आनन्दित हो सकते हैं। क्या ही अच्छा होता यदि अपने मनपसन्द भोजन के द्वारा हमें चिरस्थाई आनन्द मिल पाता; किंतु कटु सत्य यह है कि कोई भी रेस्टोरां हमें चिरस्थाई आनन्द दे सकने वाला भोजन नहीं परोस सकता।

   हम अपने जीवन के हर क्षेत्र के अनुभवों के आधार पर जानते हैं कि चिरस्थाई आनन्द ऐसे ही नहीं मिल जाता। हम इस आनन्द की प्राप्ति के लिए भोजन या अनेक प्रकार के अन्य साधन और तरीके अपना सकते हैं; उनके द्वारा क्षणिक या अल्पकालीन आनन्द भी पा सकते हैं किंतु चिरस्थाई आनन्द सदा ही हमारी पहुँच के बाहर बना रहता है। ऐसा क्यों? क्योंकि अधिकांशतः हम जिन चीज़ों के पीछे भागते हैं वे हमारे मन की गहराईयों की आवश्यकता को पूरी नहीं कर पातीं। हमारे ये प्रयास हमें कुछ पल का मज़ा, कुछ सुखद अनुभव देने वाले या फिर कुछ समय के लिए हमारा ध्यान बटांने वाले तो हो सकते हैं लेकिन मन से निकलने वाली अटल और दृढ़ आशा पाने की पुकार को संतुष्ट करने वाले नहीं हो सकते। मन की यह पुकार केवल परमेश्वर ही पूरी कर सकता है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा है: "क्या ही धन्य वह है, जिसका सहायक याकूब का ईश्वर है, और जिसका भरोसा अपने परमेश्वर यहोवा पर है" (भजन 146:5)।

   चिरस्थाई आनन्द और अटल आशा की खोज में हैं? प्रभु यीशु के पास आईए, उसे परख कर देखिए, उसे नज़दीकी से जानिए। जब आप अपने आप को प्रभु यीशु के हाथों में समर्पित कर देंगे, उसकी देखभाल में आपको वह चिरस्थाई आनन्द और अटल आशा मिलेगी जिसके लिए आपका मन लालायित रहता है। स्वेच्छा और सच्चे मन से उसमें लाया गया विश्वास आपको हर चक्र से निकाल कर एक धन्य व्यक्ति बना देगा - अनन्तकाल के लिए। - बिल क्राउडर


जो प्रभु परमेश्वर को जीवन में प्रथम स्थान देता है वह अन्त तक आनन्दित बना रहेगा।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। - यिर्मेयाह 17:7

बाइबल पाठ: भजन 146
Psalms 146:1 याह की स्तुति करो। हे मेरे मन यहोवा की स्तुति कर! 
Psalms 146:2 मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूंगा; जब तक मैं बना रहूंगा, तब तक मैं अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा।
Psalms 146:3 तुम प्रधानों पर भरोसा न रखना, न किसी आदमी पर, क्योंकि उस में उद्धार करने की भी शक्ति नहीं। 
Psalms 146:4 उसका भी प्राण निकलेगा, वही भी मिट्टी में मिल जाएगा; उसी दिन उसकी सब कल्पनाएं नाश हो जाएंगी।
Psalms 146:5 क्या ही धन्य वह है, जिसका सहायक याकूब का ईश्वर है, और जिसका भरोसा अपने परमेश्वर यहोवा पर है। 
Psalms 146:6 वह आकाश और पृथ्वी और समुद्र और उन में जो कुछ है, सब का कर्ता है; और वह अपना वचन सदा के लिये पूरा करता रहेगा। 
Psalms 146:7 वह पिसे हुओं का न्याय चुकाता है; और भूखों को रोटी देता है। यहोवा बन्धुओं को छुड़ाता है; 
Psalms 146:8 यहोवा अन्धों को आंखें देता है। यहोवा झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है; यहोवा धर्मियों से प्रेम रखता है। 
Psalms 146:9 यहोवा परदेशियों की रक्षा करता है; और अनाथों और विधवा को तो सम्भालता है; परन्तु दुष्टों के मार्ग को टेढ़ा मेढ़ा करता है।
Psalms 146:10 हे सिय्योन, यहोवा सदा के लिये, तेरा परमेश्वर पीढ़ी पीढ़ी राज्य करता रहेगा। याह की स्तुति करो!

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 10-12 
  • मत्ती 4