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Monday, May 23, 2016

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   जब लोग मुझ से पूछते हैं कि "मैं कैसा हूँ" तो कभी-कभी मेरा उत्तर होता है, "जैसा होना चाहिए उससे अधिक अच्छा हूँ!" मुझे स्मरण है कि यह सुनकर एक नेकनीयत व्यक्ति ने प्रत्युत्तर में कहा, "अरे नहीं जो; आप तो बहुत अधिक के योग्य हैं" और मेरा उत्तर था, "वास्तव में ऐसा नहीं है।" यह सब उत्तर-प्रत्युत्तर के पीछे मेरा संकेत तथा विचार उसकी ओर होता है जो मुझे परमेश्वर से मिलना चाहिए - उसका न्याय और मेरे पापों का दण्ड।

   हम बड़ी सरलता से यह भूल जाते हैं कि अपने अन्दर से, अपने मन-ध्यान-विचारों में हम कैसे घोर पापी हैं। अपने बारे में आवश्यकता से अधिक बढ़कर राय रखने से, हमारे प्रति दिखाए उसके महान अनुग्रह के लिए परमेश्वर के प्रति हमारी कृतज्ञता घट जाती है। हमारे पापों की क्षमा और उद्धार के लिए जो कीमत परमेश्वर ने चुकाई है, उसका महत्व हमारे लिए कुछ हलका हो जाता है।

   जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने किया, वैसे ही यदि हम भी अपने जीवनों के लिए करें, तो हम भी भजनकार के समान यही कहेंगे, "उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है" (भजन 103:10)। जब हम अपने आप को परमेश्वर की पवित्रता और खराई के सामने रखते हैं, तो हमारी अपनी सारी धार्मिकता जाती रहती है और हम यह एहसास करने पाते है कि सिवाए परमेश्वर के न्याय और नर्क के हमारे लिए और कोई विकल्प नहीं है; और स्वर्ग की तो कोई संभावना ही नहीं है। यदि हम स्वर्ग के भागी हो सकते हैं तो वह केवल एक आधार पर - यदि वहाँ जाना किसी की दया से हमें भेंट में मिल सके; और यही प्रभु यीशु ने हमारे लिए किया है। प्रभु यीशु ने हमारे सारे पाप अपने ऊपर लेकर हमारे लिए उनका दण्ड सह लिया और अपनी दया में होकर अपनी धार्मिकता तथा स्वर्ग जाने का अधिकार हमें भेंट में दे दिया। अब जो कोई स्वेच्छा से प्रभु यीशु की यह भेंट स्वीकार करता है, वह उसकी इस दया और अनुग्रह का पात्र बन जाता है, स्वर्ग जाने का हकदार बन जाता है - अपने किन्ही कर्मों से नहीं, वरन केवल प्रभु के अनुग्रह के कारण। इसीलिए भजनकार आगे कहता है, "जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है" (भजन 103:11)।

   जब हम इस बात का एहसास करते हैं कि वास्तव में हम अन्दर से कैसे हैं, और इस बात का भी कि परमेश्वर हमारी इस वास्तविकता को हम से भी अधिक विस्तार से जानता है, और फिर भी वह हम से प्रेम करता है, हमारी भलाई के लिए योजनाएं बनाता है, हमें सदा अपने साथ बनाए रखना चाहता है, तो हम उसके प्रति कृतज्ञता, धन्यवाद और अराधना में नतमस्तक हो जाते हैं।

   प्रभु परमेश्वर ने वास्त्व में हमें जैसे के हम हकदार थे, हमें उससे कहीं बेहतर और कहीं अधिक दिया है। - जो स्टोवैल


इस महान छुटकारे के अलावा यदि अब परमेश्वर हमारे लिए और कुछ ना भी करे, 
तो भी उसने हमारे लिए बहुत कुछ कर दिया है।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। - इफिसियों 2:4-6

बाइबल पाठ: भजन 103:1-14
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! 
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। 
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, 
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है, 
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है। 
Psalms 103:7 उसने मूसा क&