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Monday, January 2, 2017

कहाँ हो?


   उन दोनों किशोरों ने अपने माता-पिता की कार की आवाज़ सुनी और वे घबरा गए। अब वे घर के अस्त-व्यस्त हाल को कैसे समझा पाएंगे? उस प्रातः बाहर जाने से पहले, उनके पिता द्वारा दिए गए निर्देश बहुत स्पष्ट थे: कोई पार्टी नहीं, किसी उद्दण्ड मित्र को अन्दर आने नहीं देना। परन्तु वे मित्र आए, पिता के निर्देशों के बावजूद उन्होंने उन्हें घर के भीतर आने दिया, और अब सारा घर अस्त-व्यस्त पड़ा था और वे दोनों किशोर नशे में बदहाल थे। भय के मारे, वे छिप गए।

   कुछ ऐसा ही आदम और हव्वा को लगा होगा जब उन्होंने परमेश्वर का अनाज्ञाकारी होने को चुना, और फिर परमेश्वर के आने की आवाज़ को सुना। भयभीत होकर वे छुप गए। परमेश्वर ने उन्हें पुकारा, "तुम कहाँ हो?" (उत्पत्ति 3:9)। आदम ने उत्तर दिया, "मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया" (उत्पत्ति 3:10)। पाप हमें भयभीत करता है, हमें नंगा अनुभव करवाता है, और अपनी शर्मनाक हालत को छुपाने के अपने ही प्रयासों में हम और अधिक बुराईयों में धंसते चले जाते हैं, परमेश्वर से और भी दूर होते चले जाते हैं।

   परमेश्वर आज भी संसार के हर जन को बुला रहा है; उन्हें आवाज़ दे रहा है: "तुम कहाँ हो?" आज भी बहुतेरे परमेश्वर की आवाज़ से दूर भाग रहे हैं, उससे छिपने के प्रयास कर रहे हैं, उसकी आवाज़ को संसार की आवाज़ों से दबा देने के प्रयास कर रहे हैं। परन्तु परमेश्वर की नज़रों से कोई छुप नहीं सकता; वह सब के बारे में सब कुछ जानता है; कौन कहाँ और कैसे छुपा है उसे पता है। जो आज उसकी आवाज़ को सुनकर क्षमा-याचना के साथ उसके अनुग्रह को प्राप्त करने के लिए उसके सामने नहीं आएंगे, एक दिन उन्हें उसके न्याय सिंहासन के सामने अपने जीवन और पापों का हिसाब देने और उनका दण्ड पाने के लिए खड़ा होना पड़ेगा।

   परमेश्वर के "तुम कहाँ हो?" को सुनकर भय में छुपने की बजाए, पश्चाताप के साथ उसके सामने आने और यह कहने कि "... हे परमेश्वर मुझ पापी पर दया कर" (लूका 18:13) के परिणाम कहीं अधिक सुखद हैं। - लॉरेंस दरमानी


पाप को ढ़ांप देने के लिए एक ही स्थान है - प्रभु यीशु के लहु में।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-10
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना? 
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं। 
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे। 
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे, 
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे। 
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। 
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये। 
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए। 
Genesis 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है? 
Genesis 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 4-6
  • मत्ती 2