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Saturday, March 18, 2017

प्रलोभन


   मेरे देश में हाल ही में हुए चुनावों में, घर चलाने के लिए संघर्षरत एक माँ ने, जिसे मैं जानता हूँ, एक पैकिट बच्चों के लंगोटों के लिए अपना वोट बेच दिया। हम चुनाव के लिए खड़े होने वाले सभी प्रत्याशियों के गुणों के बारे में चर्चा कर चुके थे, इसलिए उसने जिस प्रत्याशी को वोट दिया, उसके लिए मुझे दुःख हुआ। मैंने उससे पूछा, "तुम्हारे दृढ़ निश्चय का क्या हुआ?" परन्तु वह शान्त खड़ी रही। उसके द्वारा जिसे वोट दिया गया था वह प्रत्याशी जीत गया; और उसकी जीत के छः महीने के बाद करों में बढ़ोतरी कर दी गई, जिससे सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ गईं, लंगोट के पैकिट की भी, और उसके लिए घर चलना और भी अधिक कठिन हो गया।

   सारे संसार भर में अनेकों देशों में राजनैतिक भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। इसी प्रकार आत्मिक भ्रष्टाचार भी कोई नई बात नहीं है। शैतान ने तो प्रभु यीशु को भी अपनी चाल में फंसाने का प्रयास किया, कि वह अपनी दृढ़ निश्चयता को बेच दे (मत्ती 4:1-10)। जब प्रभु यीशु चालीस दिन के उपवास के बाद थके हुए और भूखे थे तो शैतान उनके पास तत्कालिक संतुष्टि के प्रलोभन लेकर आया - सहितान ने उन्हें तुरंत उपलब्ध हो जाने वाली रोटी, चमकत्कारिक छुटकारा, और संसार भर के राज्यों का वैभव देने का प्रस्ताव किया।

   परन्तु प्रभु यीशु वास्तविकता को बेहतर जानते थे। वे जानते थे कि समझौतों और जल्दबाज़ी में किए गए निर्णय खतरनाक शत्रु होते हैं। उनसे किसी दुःख के मार्ग का प्रस्ताव तो मिल सकता है, परन्तु उस मार्ग के अन्त में मिलने वाला दुःख, किसी भी कल्पना से बढ़कर होता है। शैतान द्वारा लाए गए प्रत्येक प्रलोभन के लिए प्रभु यीशु ने उसे परमेश्वर के वचन बाइबल की बात से उत्तर देकर निरुत्तर किया; प्रभु ने हर प्रलोभन के विषय शैतान से कहा "लिखा है..."; वह उस बात पर अडिग रहे जिसे वह जानते थे कि परमेश्वर के वचन में लिखी है और परमेश्वर की ओर से सत्य है।

   हम जब भी प्रलोभनों और परीक्षाओं में पड़ें, परमेश्वर हमारी सहायता करने को तत्पर और तैयार रहता है, यदि हम उसकी बात मानें और उसकी आज्ञाकारिता में बने रहें। उसके वचन बाइबल के सत्य हमें हर बात में सच्चा मार्गदर्शन देते हैं। - कीला ओकोआ


परमेश्वर के मार्ग सरल नहीं हैं, 
परन्तु वे अक्षय अनन्त आनन्द तक ले जाते हैं।

तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं। तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:104-105

बाइबल पाठ: मत्ती 4:1-10
Matthew 4:1 तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्‍लीस से उस की परीक्षा हो। 
Matthew 4:2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्‍त में उसे भूख लगी। 
Matthew 4:3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं। 
Matthew 4:4 उसने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। 
Matthew 4:5 तब इब्‍लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। 
Matthew 4:6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे। 
Matthew 4:7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर। 
Matthew 4:8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका वैभव दिखाकर 
Matthew 4:9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा। 
Matthew 4:10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47