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Saturday, April 22, 2017

सुखद अन्त


   मेरे एक मित्र ने बहुत वर्ष पहले उसके साथ घटी एक घटना के बारे में बताया; वह टी.वी. पर फुटबॉल का खेल देख रहा था, और उसकी छोटी बेटी पास ही में खेल रही थी। अपनी पसन्दीदा टीम के खराब खेल से क्रोधित होकर मेरे मित्र ने आवेश में आकर जो पहली चीज़ उसके हाथ में आई, उसे ज़ोर से पटक दिया। परिणामस्वरूप, उसकी बेटी का पसन्दीदा खिलौना और दिल, दोनों ही टूट गए। मेरे मित्र ने तुरंत ही अपनी बेटी को गले लगा लिया और उससे क्षमा माँगी। उसने वैसा ही एक और खिलौना भी लाकर अपनी बेटी को दे दिया, और उसे लगा कि अब बात ठीक हो गई है। परन्तु उसे आभास नहीं था कि उसके आवेशपूर्ण कार्य ने उसकी चार वर्षीय पुत्री को कितना भयभीत कर दिया था, और उस बेटी को आभास नहीं था कि इससे उसे कितनी गहरी चोट पहुँची थी। परन्तु समय के साथ, क्षमा भी आ गई।

   कई वर्ष के बाद, अब जब उसकी बेटी बड़ी हो गई थी, विवाहित थी, और अपने पहले बच्चे को जन्म देने की तैयारी में थी, तो मेरे मित्र ने वैसा ही एक खिलौना अपनी बेटी को फिर से भेजा। बेटी ने उस खिलौने की तसवीर फेसबुक पर पोस्ट की और साथ ही लिखा, "इस उपहार की, मेरे बचपन तक जाने वाली एक लंबी और पुरानी कहानी है। उस समय यह कहानी सुखद नहीं थी, परन्तु अब इस कहानी का अन्त सुखद है। छुटकारा पाना बहुत मनोरम होता है। धन्यवाद नाना जी!"

   परमेश्वर का वचन बाइबल हम मसीही विश्वासियों से आग्रह करती है कि, "नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है" (इफिसियों 4:24)। प्रभु यीशु में लाए विश्वास से हमें मिले नए मनुष्यत्व को पहने रखें और क्रोध करना छोड़ दें। यदि हम किसी अन्य व्यक्ति के क्रोध का शिकार होते हैं, तो भी परमेश्वर चाहता है कि हम, "एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो" (पद 32)।

   संबंधों को पुनःस्थापित करना सरल नहीं होता, परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से ऐसा होना संभव होता है, और तब उस कहानी का सुखद अन्त भी होता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


पश्चाताप और क्षमा वो गोंद हैं जो टूटे संबंधों को जोड़ देते हैं।

इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। - कुलुस्सियों 3:12-13

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:20-32
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई। 
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए। 
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो। 
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ। 
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। 
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो। 
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। 
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। 
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। 
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। 
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 14-15
  • लूका 17:1-19