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Tuesday, November 20, 2018

दृष्टिकोण



      रैले देखने में एक बलवान कुत्ता प्रतीत होता है – वह आकार में बड़ा है, उसकी मांसपेशियाँ सुडौल हैं, उसके घने बाल हैं, और उसका वज़न 100 पाउंड से भी अधिक है। परन्तु अपने स्वरूप के प्रतिकूल, रैले लोगों के साथ बहुत सरलता से घुल-मिल जाता है। उसका स्वामी उसे लेकर अस्पतालों में जाता है जहाँ  लोग उसके साथ समय बिताने से आनन्दित होते हैं। एक बार एक चार वर्षीय लड़की ने उसे कमरे के पार देख कर उसे सहलाना चाहा, परन्तु उसके आकार को देखकर वह भयभीत रही। अन्ततः उसकी जिज्ञासा उसके भय पर जयवंत हुई और वह रैले के पास आई, उसे थपथपाया, सहलाया और कुछ मिनिट तक उससे बातें भी करती रही। उस लड़की ने जाना कि रैले चाहे देखने में बलवान है परन्तु स्वभाव से बहुत नम्र और मिलनसार है।

      बलवान होते हुए भी नम्र और मिलनसार होने के ये गुण मुझे प्रभु यीशु मसीह के स्वभाव का भी स्मरण करवाते हैं। प्रभु यीशु मसीह के विषय में हम परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में पढ़ते हैं। प्रभु यीशु सुगम्य थे – उन्होंने छोटे बच्चों का स्वागत किया (मत्ती 19:13-15)। वे व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री के साथ उसकी कठिन स्थिति में भी दयालु और कृपालु हुए (यूहन्ना 8:1-11)। सामान्य लोगों के प्रति उनकी अनुकम्पा के अन्तर्गत उन्होंने उन लोगों को परमेश्वर और उसके राज्य के विषय सिखाया (मरकुस 6:34)। लेकिन साथ ही प्रभु यीशु की सामर्थ्य अभूतपूर्व और विस्मयकारी थी। उनके द्वारा दुष्ट-आत्माओं को निकाले जाने, प्रचण्ड आँधी-तूफानों को शान्त करने, और मृतकों को पुनः जीवित करने के द्वारा लोग अवाक रह गए (मरकुस 1:21-34, 4:35-41; यूहन्ना 11)।

      प्रभु यीशु मसीह के प्रति हमारा दृष्टिकोण निर्धारित करता है कि हम उसके साथ कैसा संबंध बनाते हैं। यदि हम केवल उसके बल पर ही ध्यान बनाए रखेंगे, तो हम उससे अंतरंग समबन्ध नहीं बनाने पाएँगे, और एक औपचारिक आदर एवँ आराधना मात्र ही देने पाएँगे। परन्तु यदि हम उसकी दया और कृपा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे, तो हम उसे बहुत हलके में लेने और उसके साथ लापरवाही का व्यवहार करने के जोखिम में पड़ जाएँगे।

      सत्य तो यह है कि अपनी महानता और सामर्थ्य के कारण प्रभु यीशु को हमारी आज्ञाकारिता और समर्पण मिलना चाहिए, और उनकी नम्रता एवँ प्रेम के कारण वे हमारे अंतरंग मित्र भी बनना चाहते हैं। हम प्रभु यीशु मसीह के प्रति क्या दृष्टिकोण रखते हैं? – जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के प्रति हमारा दृष्टिकोण, उसके साथ हमारे संबंध को निर्धारित करता है।

पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। - इब्रानियों  1:1-2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15: 9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2