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Thursday, November 14, 2019

महान प्रेम



      हाल ही में हम ने अपनी 22 महीने की पोती, मोरियाह को एक रात के लिए अपने घर अपने साथ रखा; उस अकेली को, बिना उसके बड़े भाईयों के। हमने, जो उसे खेलना अच्छा लगता था, उसके साथ मिलकर खेला; बिना किसी अन्य पर कोई ध्यान या प्रेम की अभिव्यक्ति को विभाजित किए, उस पर ही सप्रेम बहुत ध्यान लगाया। अगले दिन उसे उसके घर छोड़ने के पश्चात, हमने विदा ली और दरवाज़े से बाहर निकलने के लिए आगे बढ़े; हमें बाहर जाता देख, मोरियाह ने भी बिना कुछ कहे, तुरंत अपना बैग उठाया, जो अभी भी दरवाज़े के पास ही रखा था, और हमारे साथ आने के लिए हमारे पीछे हो ली।

      उसकी यह छवि अभी भी मेरी स्मृति में अंकित है: मोरियाह, अपनी चड्डी और दो अलग-अलग प्रकार की सैंडिल पहने हुए, बैग उठाए, दादा–दादी के साथ फिर से जाने के लिए तैयार। जब भी मुझे यह स्मरण आता है, मैं मुस्कुराने लगती हूँ। वह हमारे साथ जाने के लिए इसलिए तत्पर थी क्योंकि उसे उसके प्रति अविभाजित प्रेम और देखभाल पाने की इच्छा थी।

      यद्यपि वह अभी अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर सकती है, हमारी पोती को प्रेम और महत्त्व की अनुभूति हुई थी। एक प्रकार से मोरियाह के प्रति हमारा प्रेम, हमारे, उसके बच्चों, के प्रति परमेश्वर के प्रेम का एक छोटा सा नमूना है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, “देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी” (1 यूहन्ना 3:1)।

      जब हम प्रभु यीशु मसीह पर अपना निज उद्धारकर्ता होने के लिए विश्वास लाते हैं, तो हम अपने प्रभु परमेश्वर की संतान हो जाते हैं, और उसके उस उदार प्रेम को, जो उसने क्रूस पर हमारे लिए अपने जीवन के बलिदान के द्वारा प्रदर्शित किया, समझना आरंभ कर देते हैं (पद 16)। फिर हमारी इच्छा अपनी कथनी और करनी के द्वारा उसे प्रसन्न करने की हो जाते है। उसके प्रति हमारे, और हमारे प्रति उसके उस महान प्रेम के कारण, हम उसके साथ समय बिताने के लिए उत्सुक्त रहते हैं। - एलिसन कीडा

पिता परमेश्वर का प्रेम हमारे प्रति कितना महान है!

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। -  यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 3:1-8
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।
1 John 3:4 जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का विरोध करता है; और पाप तो व्यवस्था का विरोध है।
1 John 3:5 और तुम जानते हो, कि वह इसलिये प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्‍वभाव में पाप नहीं।
1 John 3:6 जो कोई उस में बना रहता है, वह पाप नहीं करता: जो कोई पाप करता है, उसने न तो उसे देखा है, और न उसको जाना है।
1 John 3:7 हे बालकों, किसी के भरमाने में न आना; जो धर्म के काम करता है, वही उस के समान धर्मी है।
1 John 3:8 जो कोई पाप करता है, वह शैतान की ओर से है, क्योंकि शैतान आरम्भ ही से पाप करता आया है: परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5
  • इब्रानियों 10:19-39