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बुधवार, 9 मार्च 2016

सच्चा रखवाला


   ऊटाह प्रांत के पहाड़ों की पद-यात्रा करते हुए एक व्यक्ति को जंगली बकरियों के एक झुंड में एक बकरी कुछ अजीब सी दिखी। और निकटता से देखने पर पता चला कि वह बकरी थी ही नहीं, वरन बकरी के भेस में एक आदमी था। जब अधिकारियों ने उस आदमी से इस बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह अपने कपड़ों पर बकरी के रोएं चिपका कर बकरी का भेस भर कर यह जाँच रहा था कि शिकार पर जाने के लिए ऐसे भेस बदलना कितना कारगर रहेगा।

   उस शिकारी द्वारा इस प्रकार भेस बदल कर जानवरों को धोखा देने के प्रयास से मुझे प्रभु यीशु द्वारा कहे गए शब्द स्मरण हो आए: "झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर में फाड़ने वाले भेडिए हैं। उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोग क्या झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं? इसी प्रकार हर एक अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है" (मत्ती 7:15-17)। झूठे मसीही शिक्षक अपने जीवनों में परमेश्वर के आत्मा के फलों (गलतियों 5:22-23) को नहीं दिखाते; वरन, इसके विपरीत वे शरीर की लालसाओं के अनुसार चलते हैं और अधिकारियों को तुच्छ जानते हैं (2 पतरस 2:10)। वे ढीठ, स्वार्थी और लालची होते हैं (पद 10, 14); वे चिकनी-चुपड़ी बातों के द्वारा लोगों को भ्रमित करके उन्हें अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं (पद 3)। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि ऐसे शिक्षक स्वयं भी विनाश की ओर बढ़ रहे हैं और अपने साथ अनेकों ऐसे लोगों को भी विनाश में ले जाएंगे जो बेपरवाह होकर उन्हें तथा उनकी शिक्षाओं को बाइबल के अनुसार परखते तथा जाँचते नहीं हैं (1 थिस्सुलुनीकियों 5:21)।

   अच्छे चरवाहे, प्रभु यीशु मसीह ने अपने लाभ के बदले, सब की भलाई के लिए अपने प्राण बलिदान कर दिए। प्रभु नहीं चाहता कि उसके अनुयायी, उसकी भेड़ें, किसी के भी द्वारा किसी गलत शिक्षा से बहकाई जाएं। वह चाहता है कि हम उन्हें पहचान लें जो धोखा देते हैं और उन धोखेबाज़ों की शिक्षाओं की बजाए, प्रभु के वचन बाइबल के अनुसार चलें, अपनी आत्माओं के सच्चे रखवाले प्रभु यीशु के प्रति समर्पित रहें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


मसीह के नाम से धोखा देने वाले अनेक हैं किंतु सच्चा मसीह यीशु केवल एक ही है।

सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। - 1 थिस्सुलुनीकियों 5:21 

बाइबल पाठ: 2 पतरस 2:1-3; 12-19
2 Peter 2:1 और जिस प्रकार उन लोगों में झूठे भविष्यद्वक्ता थे उसी प्रकार तुम में भी झूठे उपदेशक होंगे, जो नाश करने वाले पाखण्‍ड का उद्घाटन छिप छिपकर करेंगे और उस स्‍वामी का जिसने उन्हें मोल लिया है इन्कार करेंगे और अपने आप को शीघ्र विनाश में डाल देंगे। 
2 Peter 2:2 और बहुतेरे उन की नाईं लुचपन करेंगे, जिन के कारण सत्य के मार्ग की निन्‍दा की जाएगी। 
2 Peter 2:3 और वे लोभ के लिये बातें गढ़ कर तुम्हें अपने लाभ का कारण बनाएंगे, और जो दण्‍ड की आज्ञा उन पर पहिले से हो चुकी है, उसके आने में कुछ भी देर नहीं, और उन का विनाश ऊंघता नहीं। 
2 Peter 2:12 पर ये लोग निर्बुद्धि पशुओं ही के तुल्य हैं, जो पकड़े जाने और नाश होने के लिये उत्पन्न हुए हैं; और जिन बातों को जानते ही नहीं, उन के विषय में औरों को बुरा भला कहते हैं, वे अपनी सड़ाहट में आप ही सड़ जाएंगे। 
2 Peter 2:13 औरों का बुरा करने के बदले उन्‍हीं का बुरा होगा: उन्हें दिन दोपहर सुख-विलास करना भला लगता है; यह कलंक और दोष है- जब वे तुम्हारे साथ खाते पीते हैं, तो अपनी ओर से प्रेम भोज कर के भोग-विलास करते हैं। 
2 Peter 2:14 उन ही आंखों में व्यभिचार बसा हुआ है, और वे पाप किए बिना रूक नहीं सकते: वे चंचल मन वालों को फुसला लेते हैं; उन के मन को लोभ करने का अभ्यास हो गया है, वे सन्‍ताप के सन्तान हैं। 
2 Peter 2:15 वे सीधे मार्ग को छोड़कर भटक गए हैं, और बओर के पुत्र बिलाम के मार्ग पर हो लिये हैं; जिसने अधर्म की मजदूरी को प्रिय जाना। 
2 Peter 2:16 पर उसके अपराध के विषय में उलाहना दिया गया, यहां तक कि अबोल गदही ने मनुष्य की बोली से उस भविष्यद्वक्ता को उसके बावलेपन से रोका। 
2 Peter 2:17 ये लोग अन्धे कुंए, और आन्‍धी के उड़ाए हुए बादल हैं, उन के लिये अनन्त अन्धकार ठहराया गया है। 
2 Peter 2:18 वे व्यर्थ घमण्‍ड की बातें कर कर के लुचपन के कामों के द्वारा, उन लोगों को शारीरिक अभिलाषाओं में फंसा लेते हैं, जो भटके हुओं में से अभी निकल ही रहे हैं। 
2 Peter 2:19 वे उन्हें स्‍वतंत्र होने की प्रतिज्ञा तो देते हैं, पर आप ही सड़ाहट के दास हैं, क्योंकि जो व्यक्ति जिस से हार गया है, वह उसका दास बन जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33


मंगलवार, 8 मार्च 2016

बदल देने की सामर्थ


   बहुत से लोगों को ऐसे खेल खेलना पसन्द है जो उनके ज्ञान को जाँचते हैं। हाल ही में मैं और मेरा एक सहकर्मी बाइबल के बारे में अपने ज्ञान को ऐसे ही एक खेल द्वारा जाँच रहे थे। क्योंकि हम अपने कार्यस्थल के एक खुले क्षेत्र में थे इसलिए आस-पास के हमारे अन्य सहकर्मी हमारे वार्तालाप को सुन पा रहे थे। खेल आरंभ करने के बाद शीघ्र ही नूह के जहाज़ से लेकर कुँए पर सामरी स्त्री से वार्तालाप तक के प्रश्नों का आदान-प्रदान होने लगा और हमारे सहकर्मी जो हमारे वार्तालाप को सुन पा रहे थे वे भी इसमें सम्मिलित होने लगे। विभिन्न सहकर्मियों द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल से संबंधित उत्तर देते देखना बड़ा मन-भावन था।

   बाइबल के बारे में जानकारी होना महत्वपूर्ण एवं भला है, परन्तु परमेश्वर चाहता है कि हम उसके वचन से ओत-प्रोत होकर उसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लें, जिससे उसके साथ हमारे संबंधों में हम और बढ़ सकें, और दृढ़ हो सकें। बाइबल को इस तरह से जानने और जीवन में उतार लेने से होने वाले लाभों को देखिए:
  •  परमेश्वर का पवित्र आत्मा बाइबल की बातों के द्वारा हमें मसीह यीशु की अनुरूपता में बढ़ाता है (इफिसियों 4:20-24)
  •  हमें आनन्द और मिलता है (यर्मियाह 15:16)
  •  हम आत्मिक सफलता पाते हैं (यहोशु 1:8)
  •  शैतान के विरुद्ध आत्मिक युद्ध में यह वचन हमें जयवंत करता है (मत्ती 4:1-11)
  •  हमारे सुधार हेतु कार्यकारी है (2 तिमुथियुस 3:15-16)
  •  हमारे मार्ग के लिए उजियाला है (भजन 119:105)
  •  समस्याओं के समाधान के लिए बुद्धि देता है (नीतिवचन 1:1-2)
  •  हमारे विश्वास को बढ़ाता और दृढ़ करता है (रोमियों 10:17)


   यदि बाइबल की जानकारी केवल अपने ज्ञानवर्धन के लिए करते हैं तो इस ज्ञान से आत्मिक घमंड आ सकता है (1 कुरिन्थियों 8:1)। परन्तु जब हम पवित्र आत्मा को हमें परमेश्वर के वचन के द्वारा बदल देने की अनुमति देते हैं तो वह हमारे जीवनों को परमेश्वर की इच्छा के अनुसार परिवर्तित और संचालित करता है, और जीवन के हर उतार-चढ़ाव तथा टेढ़े-मेढ़े मार्गों में हम सही मार्ग पर बनाए रखता है, जिससे हम अपने आस-पास के लोगों को परमेश्वर का जीवन तथा प्रेम को दिखाने पाते हैं। - डेनिस फिशर


ज्ञान तो अनेक पुस्तकें बढ़ा सकती हैं, किंतु केवल बाइबल ही जीवन बदल सकती है।

तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; - व्यवस्थाविवरण 6:5-6

बाइबल पाठ: भजन 119:96-106
Psalms 119:96 जितनी बातें पूरी जान पड़ती हैं, उन सब को तो मैं ने अधूरी पाया है, परन्तु तेरी आज्ञा का विस्तार बड़ा है।
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।
Psalms 119:105 तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। 
Psalms 119:106 मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18


सोमवार, 7 मार्च 2016

अनुवाद


   बीते अनेक वर्षों में मुझे संसार के अनेक स्थानों पर अनेक लोगों को परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं को पहुँचाने के अवसर मिले हैं। लेकिन क्योंकि मैं केवल अंग्रेज़ी भाषा ही जानता हूँ इसलिए मुझे अकसर अनुवादकों के साथ कार्य करना पड़ता है जो मेरे मन से निकले शब्दों को अपने लोगों की भाषा में अनुवाद करके बोलते हैं। प्रभावी संवाद इन अनुवदकों के कौशल पर निर्भर होता है; उनकी ज़िम्मेदारी होती है कि वे अंग्रेज़ी में कहे शब्दों का सही और अर्थपूर्ण अनुवाद अपने लोगों के सामने प्रस्तुत करें।

   अनुवाद करने का यह कार्य एक प्रकार से परमेश्वर के लोगों के मध्य परमेश्वर के पवित्र आत्मा के कार्य के एक पहलु के समान है। जब हम मसीही विश्वासी प्रार्थना में होते हैं तो अनेक बार हमें यह समझ नहीं आता कि हम कैसे और क्या प्रार्थना करें, परन्तु हमारे प्रेमी परमेश्वर पिता ने इस समस्या का समाधान पहले से ही हमारे लिए तैयार कर रखा है: "इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है" (रोमियों 8:26)। जब हम पिता परमेश्वर के पास प्रार्थना में आते हैं, तो पवित्र आत्मा हमारी सहायता के लिए आकर हमारे मन की बातों का, जिन्हें हम ठीक से व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं, परमेश्वर के भले उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद करके हमारी ओर से उन्हें परमेश्वर के सामने प्रस्तुत करता है (पद 27)।

   कैसा अद्भुत प्रयोजन! ना केवल परमेश्वर चाहता है कि हम अपने मन की बात उसके सामने कहें, वरन हमारी सहायता के लिए उसने पहले से ही वह सर्वोत्तम अनुवादक हमारे लिए प्रदान कर रखा है जो प्रार्थना में, हमारे मन की बातों को परमेश्वर तक पहुँचाने में, हमारी सहायता करता है।

   परमेश्वर के पवित्र आत्मा की हमारे साथ बनी रहने वालि उपस्थिति के कारण हम निश्चिंत और आश्वस्त रह सकते हैं कि हमारे मन की बात परमेश्वर पिता तक पहुँचने में कभी अधूरी या अनकही नहीं रहेगी। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के पवित्र आत्मा का सहयोग यह निश्चित करता है कि हमारी प्रार्थनाएं परमेश्वर के उद्देश्यों के अनुसार हों।

हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है। तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। - भजन 139:1-4

बाइबल पाठ: रोमियों 8:19-27
Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। 
Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई। 
Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी। 
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है। 
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं। 
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? 
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं। 
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। 
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52


रविवार, 6 मार्च 2016

भय


   अपने बच्चों के साथ खेले गए सबसे आरंभिक खेलों में से एक अकसर होता है माता-पिता द्वारा एक बनावटी भय का प्रयोग। माता-पिता अपने हाथों से अपना चेहरा छुपा लेते हैं और फिर अचानक ही मूँह से "भू" की आवाज़ निकालते हुए चेहरे से हाथ हटाकर बच्चे के सामने अपना चेहरा प्रगट कर देते हैं जिससे बच्चे रोमांचित और आनन्दित होते हैं। ऐसे बनावटी भय से भयभीत होना रोमांचकारी और मज़ेदार होता है, जब तक कि बच्चा वास्तविक भय का सामना नहीं करता; और तब वह भय किसी आनन्द और हंसी का कारण नहीं होता। यह अनुभव भी बच्चों को अकसर तब होता है जब वे एक से दूसरी चीज़ से आकर्षित होकर माता-पिता से दूर चलते चले जाते हैं और फिर अचानक ही उन्हें आभास होता है कि वे अकेले हैं, उन्हें आश्वस्त रखने वाला कोई परिचित जन उनके साथ नहीं है; और तब बच्चों के मूँह से हंसी नहीं वरन चिल्लाकर रोने की आवाज़ निकलती है। उस आवाज़ को सुनते ही माता-पिता उस बच्चे के पास आकर उसे गोद में उठा लेते हैं, पुचकारते हैं आश्वस्त करते हैं, विश्वास दिलाते है कि वे अकेले नहीं हैं।

   जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं हमारे बनावटी भय भी अलग-अलग और भिन्न स्वरूप लेने लगते हैं - डरावने कथानक वाली पुस्तकें और फिल्में, या फिर मनोरंजन पार्कों में ऐसे झूले और कार्य जिनमें भय का समावेश होता है, इत्यादि हमें रोमांचित करने लगते हैं। यह कृत्रिम भय कई दफा इतना रोमांच उत्पन्न करता है कि हम और अधिक रोमांच पाने के लिए और अधिक जोखिम उठाने लग जाते हैं।

   संसार के आकर्षण और रोमांच कई दफा हमें परमेश्वर के मार्गों और परमेश्वर से दूर भी ले जाते हैं, और फिर किसी कठिन या कष्टदायक परिस्थिति में पड़ने पर ही हमें एहसास होता है कि हम उस प्रेम करने और ध्यान रखने वाले परमेश्वर पिता से दूर निकल आए हैं, जैसा कि प्राचीन इस्त्राएलियों ने अनुभव किया (यशायाह 30), और तब हम वास्तव में भयभीत होते हैं। ऐसे में हमें सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारने के लिए कोई विशेष शब्दों के प्रयोग की या फिर किसी स्पष्टीकरण की या अपनी बात को सही दिखाने के लिए कोई तर्क देने की आवश्यकता नहीं है; बस सच्चे दिल से निकली एक पुकार ही काफी है, और परमेश्वर हमारी सहायता के लिए तुरंत हाज़िर हो जाता है, हमें संभालता है, आश्वस्त करता है।

   प्रेम करने वाले माता-पिता के समान परमेश्वर सदा तत्पर रहता है कि हमें आश्वस्त रखे कि उसे हमारी परवाह है और वह यही चाहता है कि उसके बच्चे उसके साथ, उसके संरक्षण में बने रहें जिससे उन्हें कभी किसी परिस्थिति का सामना करने में घबराना ना पड़े; किसी भय से परेशान ना होना पड़े। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर भरोसा रखने से भय हम से दूर रहते हैं।

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा। - भजन 50:15 

बाइबल पाठ: यशायाह 30:1-5; 18-19
Isaiah 30:1 यहोवा की यह वाणी है, हाय उन बलवा करने वाले लड़कों पर जो युक्ति तो करते परन्तु मेरी ओर से नहीं; वाचा तो बान्धते परन्तु मेरे आत्मा के सिखाये नहीं; और इस प्रकार पाप पर पाप बढ़ाते हैं। 
Isaiah 30:2 वे मुझ से बिन पूछे मिस्र को जाते हैं कि फिरौन की रक्षा में रहे और मिस्र की छाया में शरण लें। 
Isaiah 30:3 इसलिये फिरौन का शरणस्थान तुम्हारी लज्जा का, और मिस्र की छाया में शरण लेना तुम्हारी निन्दा का कारण होगा। 
Isaiah 30:4 उसके हाकिम सोअन में आए तो हैं और उसके दूत अब हानेस में पहुंचे हैं। 
Isaiah 30:5 वे सब एक ऐसी जाति के कारण लज्जित होंगे जिस से उनका कुछ लाभ न होगा, जो सहायता और लाभ के बदले लज्जा और नामधराई का कारण होगी।
Isaiah 30:18 तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं।
Isaiah 30:19 हे सिय्योन के लोगों तुम यरूशलेम में बसे रहो; तुम फिर कभी न रोओगे, वह तुम्हारी दोहाई सुनते ही तुम पर निश्चय अनुग्रह करेगा: वह सुनते ही तुम्हारी मानेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31


शनिवार, 5 मार्च 2016

सहकर्मी


   मेरे एक मित्र का अपने घर के पिछले आँगन में पत्थरों की नई सीढ़ीयाँ बनाने में सारा दिन लग गया। जब वह काम कर रहा था तो उसकी पाँच वर्षीय बेटी ने आकर कहा कि वह भी इस कार्य में उसकी सहायता करना चाहती है। मेरे मित्र ने अपनी बेटी का दिल रखने के लिए उससे कहा कि वह उसके पास खड़ी होकर उसके लिए गाना गाती रहे जिससे प्रोत्साहित होकर मेरा मित्र काम करता रहेगा, लेकिन उस बच्ची ने ऐसा करने से साफ मना करते हुए कहा कि वह उसकी ’सहायता’ करना चाहती है। इसलिए मेरे मित्र को बड़ी सावधानी बरतते हुए जिससे कि बेटी के हाथ पर कोई चोट ना आए, उसे उन पत्थरों पर हाथ लगाने दिए जिन्हें उठाकर वह सीढ़ी बनाने के लिए रख रहा था।

   उस बच्ची को काम में लिए बिना वह यह कार्य काफी कम समय में कर लेता, परन्तु उसने धैर्य से बच्ची को अपने साथ लगाए रखा। शाम होने पर ना केवल उस मित्र के पास कुछ नई सीढ़ीयाँ थीं वरन एक गर्वान्वित बेटी भी थी जिसने बड़े प्रेम और गौरव के साथ रात्रि के भोजन के समय सब को बताया, "आज मैंने और पिताजी ने मिलकर नई सीढ़ीयाँ बनाईं!"

   संसार के आरंभ से ही परमेश्वर ने अपने कार्य को संभालने और आगे बढ़ाने के लिए हम मनुष्यों को अपना सहकर्मी बनाया है। आदम को भूमि पर काम करने योग्य और पशुओं पर अधिकार देने के बाद परमेश्वर ने अदन की वाटिका लगाई और आदम को उस वाटिका की देखभाल करने की कार्य सौंप दिया (उत्पत्ति 2:15-20)। यही नमूना आगे भी लागू रहा; जब मनुष्यों की दुष्टता पृथ्वी पर बहुत बढ़ गई और परमेश्वर ने जल-प्रलय द्वारा पापी लोगों के नाश की ठान ली तो धर्मियों को बचाने के लिए नाव बनाने का कार्य नूह को सौंपा, जिसके लिए आवश्यक सभी निर्देश परमेश्वर ने नूह को दे दिए। जब पृथ्वी पर परमेश्वर के मन्दिर के बनने का समय आया तो यह मन्दिर स्वर्ग से उतर कर पृथ्वी पर नहीं आ गया, वरन परमेश्वर ने हज़ारों लोगों को इसके योग्य सभी गुणों और योग्यताओं से परिपूर्ण करके इस कार्य को उनसे करवाया (निर्गमन 35-38; 1 राजा 6)। जब प्रभु यीशु ने परमेश्वर के राज्य की पृथ्वी पर आने की घोषणा करी तो उन्होंने अपने चेलों से इस कार्य को पूरा करने के लिए मनुष्यों को खड़ा करने की प्रार्थना करने को कहा: "इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे" (मत्ती 9:38)।

   जैसे एक पिता अपने बच्चों के साथ करता है, वैसे ही परमेश्वर भी हमें अपने साथ अपना सहकर्मी बना कर इस्तेमाल करता है। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर अपने महान कार्यों को करवाने के लिए दीन और नम्र मनुष्यों को इस्तेमाल करता है।

क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। - 1 कुरिन्थियों 3:9 

बाइबल पाठ: मत्ती 9:35-10:1
Matthew 9:35 और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। 
Matthew 9:36 जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। 
Matthew 9:37 तब उसने अपने चेलों से कहा, पक्के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं। 
Matthew 9:38 इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।
Matthew 10:1 फिर उसने अपने बारह चेलों को पास बुलाकर, उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया, कि उन्हें निकालें और सब प्रकार की बीमारियों और सब प्रकार की दुर्बलताओं को दूर करें।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50


शुक्रवार, 4 मार्च 2016

पक्षपात


   न्यूज़वीक पत्रिका द्वारा सन 2010 में किए गए एक सर्वेक्षण से कुछ चौंका देने वाले आँकड़े सामने आए। इस सर्वेक्षण के अनुसार, लोगों को काम के लिए चुनने और रखने वाले प्रबंधकों में से 57% का मानना था कि देखने में अनाकर्षक व्यक्ति का नौकरी के लिए चुने जाना कठिन था चाहे वह उस कार्य के लिए योग्य शिक्षा रखता हो; 84% प्रबंधकों का मानना था कि उनके अधिकारी अपने से बड़ी उम्र के व्यक्ति को नौकरी के लिए चुनने में आनाकानी करेंगे और 64% का मानना था कि कंपनियों को नौकरी के लिए लोगों के रूप-रंग के अनुसार चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। ये सभी अनुचित और अस्वीकारीय पक्षपात के उदाहरण हैं।

   पक्षपात कोई नई बात नहीं है, और शायद ही कोई स्थान हो जहाँ यह किसी ना किसी रूप में ना मिलता हो। पक्षपात मसीही विश्वासियों की आरंभिक मण्डली में भी दिखाई देने लगा था और प्रभु यीशु के अनुयायी तथा मण्डली के अगुवे याकूब ने इसका सीधे-सीधे सामना किया। एक पास्टर के संवेदनशील हृदय और मण्डली के भविष्य का ध्यान रखते हुए याकूब ने लिखा, "हे मेरे भाइयों, हमारे महिमायुक्त प्रभु यीशु मसीह का विश्वास तुम में पक्षपात के साथ न हो" (याकूब 2:1) और इस पक्षपात का उदाहरण भी दिया: गरीबों की अवहेलना करना और धनी व्यक्तियों का पक्ष लेना (पद 2-4)। याकूब ने समझाया कि ऐसा करना प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के अनुकूल क्यों नहीं है (पद 1); क्योंकि ऐसा करना परमेश्वर के अनुग्रह के साथ विश्वासघात है (पद 5-7), प्रेम के नियम का उल्लंघन है (पद 8) और पाप है (पद 9)। ऐसे पक्षपात करने से बचने का उपाय है प्रभु यीशु के उदाहरण, अपने पड़ौसी से अपने समान प्रेम करो (पद 8), का अनुसरण करना।

   परमेश्वर ने जो प्रेम हमारे प्रति दिखाया है जब हम उसे दूसरों के प्रति दिखाए गए प्रेम और व्यावहार में अपने जीवनों से पूर्णतः प्रगट होने देते हैं, तो हम पक्षपात करने के पाप से बचे रहते हैं। - मार्विन विलियम्स

प्रभु यीशु की ओर ऊपर देखते रहने से हम दूसरों को नीची नज़रों से कभी नहीं देख सकते।

उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। - मत्ती 22:37-39

बाइबल पाठ: याकूब 2:1-10
James 2:1 हे मेरे भाइयों, हमारे महिमायुक्त प्रभु यीशु मसीह का विश्वास तुम में पक्षपात के साथ न हो। 
James 2:2 क्योंकि यदि एक पुरूष सोने के छल्ले और सुन्‍दर वस्‍त्र पहिने हुए तुम्हारी सभा में आए और एक कंगाल भी मैले कुचैले कपड़े पहिने हुए आए। 
James 2:3 और तुम उस सुन्‍दर वस्‍त्र वाले का मुंह देख कर कहो कि तू वहां अच्छी जगह बैठ; और उस कंगाल से कहो, कि तू यहां खड़ा रह, या मेरे पांव की पीढ़ी के पास बैठ। 
James 2:4 तो क्या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्याय करने वाले न ठहरे? 
James 2:5 हे मेरे प्रिय भाइयों सुनो; क्या परमेश्वर ने इस जगत के कंगालों को नहीं चुना कि विश्वास में धनी, और उस राज्य के अधिकारी हों, जिस की प्रतिज्ञा उसने उन से की है जो उस से प्रेम रखते हैं 
James 2:6 पर तुम ने उस कंगाल का अपमान किया: क्या धनी लोग तुम पर अत्याचार नहीं करते? और क्या वे ही तुम्हें कचहिरयों में घसीट घसीट कर नहीं ले जाते? 
James 2:7 क्या वे उस उत्तम नाम की निन्‍दा नहीं करते जिस के तुम कहलाए जाते हो? 
James 2:8 तौभी यदि तुम पवित्र शास्त्र के इस वचन के अनुसार, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख, सचमुच उस राज व्यवस्था को पूरी करते हो, तो अच्छा ही करते हो। 
James 2:9 पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो; और व्यवस्था तुम्हें अपराधी ठहराती है। 
James 2:10 क्योंकि जो कोई सारी व्यवस्था का पालन करता है परन्तु एक ही बात में चूक जाए तो वह सब बातों में दोषी ठहरा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29


गुरुवार, 3 मार्च 2016

तत्काल और तुरंत


   जब 1972 में पोलोरॉइड एस.एक्स.-70 कैमरा संसार के समक्ष लाया गया तो उससे फोटो खींचने में क्रांति सी आ गई। स्मिथसोनियन पत्रिका में लिखे एक लेख में ओवेन एडवर्डस ने उस कैमरे के वर्णन में उसे भौतिक शास्त्र, प्रकाश विज्ञान तथा इलैकट्रौनिक्स से बना अजूबा बताया। उस कैमरे से जब कोई चित्र लिया जाता तो एक खाली चौकोर कागज़ बाहर निकल कर आता और आँखों के सामने ही उस कागज़ में तस्वीर बनकर तैयार हो जाती। लोग इस तत्काल परिणाम से बहुत आकर्षित हुए।

   विख्यात प्रचारक और परमेश्वर के वचन बाइबल के टीकाकार ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने हमारे तत्काल परिणाम पाने की लालसा और हवस में एक गहरा संबंध देखा: "हवस कहती है ’मुझे यह तुरंत चाहिए’; जिसकी लालसा करी गई है वह कोई शारीरिक भूख हो सकती है या कोई आत्मिक अधिकार। हवस परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा नहीं कर सकती, उसे परमेश्वर अपनी लालसाओं के प्रति बहुत उदासीन लगता है।"

   दाऊद ने भजन 27 में घोर समस्या के समय में जब कुछ भी उपाय सूझ नहीं रहा था, तब भी अपने परमेश्वर की प्रतीक्षा करने के बारे में लिखा। निराश और हताश होने कि बजाए दाउद ने अपने भरोसे को बनाए रखा और कहा, "यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता" (भजन 27:13)।

   हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जो तात्काल और तुरंत की उपासना करता है। लेकिन जब हमारी गहरी अभिलाषाओं और लालसाओं के पूरे हो पाने का कोई लक्षण भी दिखाई ना दे रहा हो तब भी भजनकार हम मसीही विश्वासियों से कहता है: "यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह" (भजन 27:14)। - डेविड मैक्कैसलैंड


तत्काल और तुरंत की हवस पर जयवंत होने का उपाय है अपने विचारों और दृष्टिकोण को अनन्त पर केन्द्रित रखना।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 27:1-14
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 28-30
  • मरकुस 8:22-38