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रविवार, 8 मार्च 2020

शिक्षा



      सिंगापुर के एक समाचार पत्र में, सन 2010 में, एक विशेष लेख छपा था जिसमें आठ वरिष्ठ नागरिकों के जीवन के अनुभवों के आधार पर जीवन के लिए शिक्षाएं दी गई थीं। उस लेख की आरंभिक पंक्तियाँ थीं: “यदयपि आयु के साथ शरीर और मस्तिष्क के लिए चुनौतियां आती हैं, किन्तु साथ ही अन्य क्षेत्रों में उन्नति भी देखने को मिलती है। सामाजिक और भावनात्मक ज्ञान की बहुतायत होती है, जो ऐसे गुण हैं जिन्हें वैज्ञानिक अब बुद्धिमानी कहने लगे हैं...वृद्धों का ज्ञान।”

      निःसंदेह बुद्धिमान वृद्ध व्यक्तियों के पास जीवन के विषय हमें सिखाने के लिए बहुत कुछ होता है; और उनकी इस बुद्धिमानी की अवहेलना करना मूर्खतापूर्ण हो सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम एक ऐसे ही युवक राजा से मिलते हैं जिसने राजपाट संभालते ही यह गलती की और भारी हानि उठाई।

      राजा सुलैमान की मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र रहूबियाम राजा बना। हम 1 राजाओं 12:3 में पढ़ते हैं कि इस्राएल के लोग उसके पास अपनी एक विनती लेकर गए – कि वह उनके उस कठोर परिश्रम और भारी करों के बोझ को हल्का कर दे जो सुलैमान ने उन पर लगा रखा था; और इसके प्रत्युत्तर में वे वफादारी से सदा उसके सेवा करते रहेंगे। राजा ने इसके विषय निर्णय लेने के लिए पहले वृद्धों से परामर्श लिया, किन्तु उनके द्वारा दिए गए परामर्श की अवहेलना करके उसने अपने साथी युवकों की मूर्खतापूर्ण बात को मान लिया, और प्रजा के बोझ को और भी अधिक बढ़ा दिया। अपनी इस मूर्खता के कारण उसने अपने राज्य का एक बहुत बड़ा भाग गँवा दिया, और इस्राएल दो भागों, यहूदा और इस्राएल, में विभाजित हो गया।

      हम सभी को वर्षों के अनुभव से आने वाली बुद्धिमता के परामर्शों की आवश्यकता होती है, विशेषकर उन लोगों से जो परमेश्वर के भय में और परमेश्वर के साथ चलते रहे हैं, और परमेश्वर के आज्ञाकारी रहे हैं। उस ज्ञान के खजाने बारे में सोचिए जो उन्होंने परमेश्वर से प्राप्त किया है। उनके पास प्रभु के बारे में हमारे साथ बांटने के लिए बहुत कुछ है; हम उन्हें खोजें और उनसे शिक्षा प्राप्त करें। - पोह फैंग चिया

युवावस्था की गलतियों से बचने के लिए वृद्धावस्था से ज्ञान को लें।

बूढ़ों में बुद्धि पाई जाती है, और लम्बी आयु वालों में समझ होती तो है। - अय्यूब 12:12

बाइबल पाठ: 1 राजाओं 12:1-7, 12-17
1 Kings 12:1 रहूबियाम तो शकेम को गया, क्योंकि सब इस्राएली उसको राजा बनाने के लिये वहीं गए थे।
1 Kings 12:2 और जब नबात के पुत्र यारोबाम ने यह सुना, ( जो अब तक मिस्र में रहता था, क्योंकि यारोबाम सुलैमान राजा के डर के मारे भगकर मिस्र में रहता था।
1 Kings 12:3 सो उन लोगों ने उसको बुलवा भेजा ) तब यारोबाम और इस्राएल की समस्त सभा रहूबियाम के पास जा कर यों कहने लगी,
1 Kings 12:4 कि तेरे पिता ने तो हम लोगों पर भारी जूआ डाल रखा था, तो अब तू अपने पिता की कठिन सेवा को, और उस भारी जूए को, जो उसने हम पर डाल रखा है, कुछ हलका कर; तब हम तेरे आधीन रहेंगे।
1 Kings 12:5 उसने कहा, उभी तो जाओ, और तीन दिन के बाद मेरे पास फिर आना। तब वे चले गए।
1 Kings 12:6 तब राजा रहूबियाम ने उन बूढ़ों से जो उसके पिता सुलैमान के जीवन भर उसके साम्हने उपस्थित रहा करते थे सम्मति ली, कि इस प्रजा को कैसा उत्तर देना उचित है, इस में तुम क्या सम्मति देते हो?
1 Kings 12:7 उन्होंने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके आधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे आधीन बने रहेंगे।
1 Kings 12:12 तीसरे दिन, जैसे राजा ने ठहराया था, कि तीसरे दिन मेरे पास फिर आना, वैसे ही यारोबाम और समस्त प्रजागण रहूबियाम के पास उपस्थित हुए।
1 Kings 12:13 तब राजा ने प्रजा से कड़ी बातें कीं,
1 Kings 12:14 और बूढ़ों की दी हुई सम्मति छोड़कर, जवानों की सम्मति के अनुसार उन से कहा, कि मेरे पिता ने तो तुम्हारा जूआ भारी कर दिया, परन्तु मैं उसे और भी भारी कर दूंगा: मेरे पिता ने तो कोड़ों से तुम को ताड़ना दी, परन्तु मैं तुम को बिच्छुओं से ताड़ना दूंगा।
1 Kings 12:15 सो राजा ने प्रजा की बात नहीं मानी, इसका कारण यह है, कि जो वचन यहोवा ने शीलोवासी अहिय्याह के द्वारा नबात के पुत्र यारोबाम से कहा था, उसको पूरा करने के लिये उसने ऐसा ही ठहराया था।
1 Kings 12:16 जब सब इस्राएल ने देखा कि राजा हमारी नहीं सुनता, तब वे बोले, कि दाऊद के साथ हमारा क्या अंश? हमारा तो यिशै के पुत्र में कोई भाग नहीं! हे इस्राएल अपने अपने डेरे को चले जाओ: अब हे दाऊद, अपने ही घराने की चिन्ता कर।
1 Kings 12:17 सो इस्राएल अपने अपने डेरे को चले गए। केवल जितने इस्राएली यहूदा के नगरों में बसे हुए थे उन पर रहूबियाम राज्य करता रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18



शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018

बुद्धिमता



      उपभोगताओं द्वारा प्रयोग किए जाने वाले लगभग सभी उत्पादों पर कुछ चेतावनियाँ लिखी होती हैं, जो उस उत्पाद के प्रयोग से संबंधित होती हैं। नाबाल नामक व्यक्ति पर भी यदि कोई चेतावनी लगी होती तो उसपर लिखा होता: “इस मूढ़ से मूढ़ता ही की अपेक्षा करें।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम दाऊद के जीवन से संबंधित व्यक्तियों में से एक, नाबाल के विषय देखते हैं कि वह दाऊद के प्रति अपने व्यवहार में वासत्व में बुद्धिहीन था। जब दाऊद, शाऊल राजा से अपनी जान बचाता फिर रहा था, तब दाऊद और उसके साथियों ने नाबाल नामक एक धनी व्यक्ति की भेड़ों और चरवाहों को रक्षा प्रदान की थी। जब दाऊद को ज्ञात हुआ कि नाबाल उन्हीं भेड़ों से ऊन क़तर रहा है और एक बड़े भोज का भी आयोजन किया है, तो दाऊद ने अपने साथियों में से दस को उसके पास भेजा कि प्रदान की गई सुरक्षा के प्रतिफल में नम्रता से नाबाल से कुछ भोजन वस्तु माँग लाएँ।

      परन्तु दाऊद के इस निवेदन के प्रति नाबाल का प्रत्युत्तर रूखा और क्रोधित करने वाला था, शिष्टाचार के विपरीत था। नाबाल ने दाऊद के विषय उसके ही साथियों से कहा, “नाबाल ने दाऊद के जनों को उत्तर देकर उन से कहा, दाऊद कौन है? यिशै का पुत्र कौन है? आज कल बहुत से दास अपने अपने स्वामी के पास से भाग जाते हैं। क्या मैं अपनी रोटी-पानी और जो पशु मैं ने अपने कतरने वालों के लिये मारे हैं ले कर ऐसे लोगों को दे दूं, जिन को मैं नहीं जानता कि कहां के हैं?” (1 शमूएल 25:10-11)। दाऊद और उसके साथियों को दिए जा रहे भोज में न्यौता न देने के द्वारा नाबाल ने न केवल आतिथ्य के नियम को तोड़ा, वरन उसने दाऊद के प्रति निंदनीय शब्दों का भी प्रयोग किया, और दाऊद को उसका पारिश्रमिक न देने के द्वारा उसने दाऊद से चोरी भी की।

      वास्तविकता यह है कि हम सब में नाबाल के समान कुछ न कुछ कृतघ्नता का अंश होता है; हम सभी परमेश्वर और उसके वचन तथा आज्ञाओं के प्रति कुछ न कुछ मूर्खतापूर्ण कार्य करते रहते हैं। इसका एकमात्र उपाय है परमेश्वर के सामने अपने पापों को स्वीकार कर लेना, उससे उनके लिए क्षमा माँगना, और उससे विनती करना कि वह हमें मार्गदर्शन तथा अपनी बुद्धिमता प्रदान करे कि हम उन पापों और गलतियों को फिर न दोहराएं। - मारविन विलियम्स


परमेश्वर की बुद्धिमता से हम अपनी मूर्खता के कार्यों का निवारण प्राप्त कर सकते हैं।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 25:1-12
1 Samuel 25:1 और शमूएल मर गया; और समस्त इस्राएलियों ने इकट्ठे हो कर उसके लिये छाती पीटी, और उसके घर ही में जो रामा में था उसको मिट्टी दी। तब दाऊद उठ कर पारान जंगल को चला गया।
1 Samuel 25:2 माओन में एक पुरूष रहता था जिसका माल कर्मेल में था। और वह पुरूष बहुत बड़ा था, और उसके तीन हजार भेड़ें, और एक हजार बकरियां थीं; और वह अपनी भेड़ों का ऊन कतर रहा था।
1 Samuel 25:3 उस पुरूष का नाम नाबाल, और उसकी पत्नी का नाम अबीगैल था। स्त्री तो बुद्धिमान और रूपवती थी, परन्तु पुरूष कठोर, और बुरे बुरे काम करने वाला था; वह तो कालेब-वंशी था।
1 Samuel 25:4 जब दाऊद ने जंगल में समाचार पाया, कि नाबाल अपनी भेड़ों का ऊन कतर रहा है;
1 Samuel 25:5 तब दाऊद ने दस जवानों को वहां भेज दिया, ओर दाऊद ने उन जवानों से कहा, कि कर्मेल में नाबाल के पास जा कर मेरी ओर से उसका कुशल-क्षेम पूछो।
1 Samuel 25:6 और उस से यों कहो, कि तू चिरंजीव रहे, तेरा कल्याण हो, और तेरा घराना कल्याण से रहे, और जो कुछ तेरा है वह कल्याण से रहे।
1 Samuel 25:7 मैं ने सुना है, कि जो तू ऊन कतर रहा है; तेरे चरवाहे हम लोगों के पास रहे, और न तो हम ने उनकी कुछ हानि की, और न उनका कुछ खोया गया।
1 Samuel 25:8 अपने जवानों से यह बात पूछ ले, और वे तुझ का बताएंगे। सो इन जवानों पर तेरे अनुग्रह की दृष्टि हो; हम तो आनन्द के समय में आए हैं, इसलिये जो कुछ तेरे हाथ लगे वह अपने दासों और अपने बेटे दाऊद को दे।
1 Samuel 25:9 ऐसी ऐसी बातें दाऊद के जवान जा कर उसके नाम से नाबाल को सुनाकर चुप रहे।
1 Samuel 25:10 नाबाल ने दाऊद के जनों को उत्तर देकर उन से कहा, दाऊद कौन है? यिशै का पुत्र कौन है? आज कल बहुत से दास अपने अपने स्वामी के पास से भाग जाते हैं।
1 Samuel 25:11 क्या मैं अपनी रोटी-पानी और जो पशु मैं ने अपने कतरने वालों के लिये मारे हैं ले कर ऐसे लोगों को दे दूं, जिन को मैं नहीं जानता कि कहां के हैं?
1 Samuel 25:12 तब दाऊद के जवानों ने लौटकर अपना मार्ग लिया, और लौटकर उसको ये सब बातें ज्यों की त्यों सुना दीं।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40
  • कुलुस्सियों 4



बुधवार, 11 अप्रैल 2018

बुद्धिमता



   हेनरी प्रति सप्ताह 70  घंटे कार्य करता था। वह अपने कार्य को पसन्द करता था और अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने कार्य द्वारा अच्छी आय प्राप्त करता था। वह सदा ही अपने कार्य में बिताए गए समय को कुछ कम करना चाहता था, परन्तु उसने कभी ऐसा किया नहीं। एक संध्या वह एक बड़े अच्छे समाचार के साथ अपने घर आया – उसे अपनी कंपनी का सर्वोच्च पद दिया गया था; परन्तु घर पर कोई नहीं था। समय के साथ, उसके बच्चे बड़े होकर अलग निकल गए थे; उसकी पत्नि ने भी अपने लिए एक जीविका खोज ली थी और वह उसमें व्यस्त हो गई थी। अब हेनरी के साथ उसके आनन्द को बाँटने वाला, उसके अच्छे समाचार को सुनकर हर्षित होने वाला कोई भी नहीं था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा सुलेमान ने कार्य और जीवन के मध्य संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। सुलेमान ने लिखा, “मूर्ख छाती पर हाथ रखे रहता और अपना मांस खाता है” (सभोपदेशक 4:5)। हमें अपने कार्य और जिम्मेदारियों में आलसी होने की सीमा तक भी नहीं जाना चाहिए, परन्तु साथ ही हमें अन्य सभी जिम्मेदारियों को अनदेखा कर के कार्य ही करते रहने की धुन में लगे रहने वाला भी नहीं हो जाना चाहिए, “चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और मन का कुढ़ना हो” (सभोपदेशक 4:6)। कहने का अभिप्राय है कि कम कमा कर भी अपनी कमाई का आनन्द लेना कहीं अधिक भला है। सफलता की वेदी पर संबंधों को बलि चढ़ाना मूर्खता है। सँसार की कोई भी उपलब्धि हो, वह अस्थायी ही होती है, जबकि हमारे संबंध ही हैं जो हमारे जीवनों को सार्थक, आनंदमय, और लाभप्रद बनाते हैं (पद 7-12)।

   व्यतीत करने के लिए अपने समय को ठीक से विभिन्न गतिविधियों के लिए बाँटने के द्वारा हम जीने के लिए कार्य करना सीख सकते हैं, न कि कार्य करते रहने के लिए जीते रहना। यदि हम प्रभु परमेश्वर को अपना स्वामी मानकर उसपर भरोसा रखें, उससे प्रार्थना में यह आशीष माँगें, तो अवश्य ही वह हमें जीने के लिए कार्य करने की बुद्धिमता प्रदान करेगा। - पो फंग चिया


समय को बुद्धिमता से बिताने के लिए उसे परमेश्वर के अनन्तकाल में निवेश करें।

पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी। - याकूब 1:5

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 4:4-16
Ecclesiastes 4:4 तब में ने सब परिश्रम के काम और सब सफल कामों को देखा जो लोग अपने पड़ोसी से जलन के कारण करते हैं। यह भी व्यर्थ और मन का कुढ़ना है।
Ecclesiastes 4:5 मूर्ख छाती पर हाथ रखे रहता और अपना मांस खाता है।
Ecclesiastes 4:6 चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और मन का कुढ़ना हो।
Ecclesiastes 4:7 फिर मैं ने धरती पर यह भी व्यर्थ बात देखी।
Ecclesiastes 4:8 कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तौभी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आंखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किस के लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूं? यह भी व्यर्थ और निरा दु:खभरा काम है।
Ecclesiastes 4:9 एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है।
Ecclesiastes 4:10 क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो।
Ecclesiastes 4:11 फिर यदि दो जन एक संग सोए तो वे गर्म रहेंगे, परन्तु कोई अकेला क्योंकर गर्म हो सकता है?
Ecclesiastes 4:12 यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका साम्हना कर सकेंगे। जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती।
Ecclesiastes 4:13 बुद्धिमान लड़का दरिद्र होने पर भी ऐसे बूढ़े और मूर्ख राजा से अधिक उत्तम है जो फिर सम्मति ग्रहण न करे,
Ecclesiastes 4:14 चाहे वह उसके राज्य में धनहीन उत्पन्न हुआ या बन्दीगृह से निकलकर राजा हुआ हो।
Ecclesiastes 4:15 मैं ने सब जीवतों को जो धरती पर चलते फिरते हैं देखा कि वे उस दूसरे लड़के के संग हो लिये हैं जो उनका स्थान लेने के लिये खड़ा हुआ।
Ecclesiastes 4:16 वे सब लोग अनगिनित थे जिन पर वह प्रधान हुआ था। तौभी भविष्य में होने वाले लोग उसके कारण आनन्दित न होंगे। नि:सन्देह यह भी व्यर्थ और मन का कुढ़ना है।


एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 17-18
  • लूका 11:1-28



सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

सेवक


   पारंपरिक अफ्रीकी समाज में, नेतृत्व के लिए उत्तराधिकारी का चयन गंभीर निर्णय होता है। राजा के देहांत के पश्चात अगले अगुवे को चुनने में बहुत सावधानी बरती जाती है। उस नए अगुवे को न केवल राजसी परिवार में से होना होता है, वरन उसे बलवान, निर्भीक और समझदार भी होना होता है। निर्णय करने के लिए पदाभिशिलाषियों से पूछ-ताछ की जाती है, यह जानने के लिए कि वे  प्रजा की सेवा करेंगे या उन पर कठोरता से शासन करेंगे। राजा के उत्तराधिकारी को ऐसा होना चाहिए जो नेतृत्व भी प्रदान करे और सेवा भी करे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा सुलेमान ने अनेकों व्यक्तिगत गलत निर्णय लिए, गलत चुनाव किए, परन्तु वह अपने उत्तराधिकारी को लेकर चिन्तित था। उसने अपनी इस चिंता के विषय लिखा “मैं ने अपने सारे परिश्रम के प्रतिफल से जिसे मैं ने धरती पर किया था घृणा की, क्योंकि अवश्य है कि मैं उसका फल उस मनुष्य के लिये छोड़ जाऊं जो मेरे बाद आएगा। यह कौन जानता है कि वह मनुष्य बुद्धिमान होगा वा मूर्ख? तौभी धरती पर जितना परिश्रम मैं ने किया, और उसके लिये बुद्धि प्रयोग की उस सब का वही अधिकारी होगा। यह भी व्यर्थ ही है” (सभोपदेशक 2:18-19)। सुलेमान के बाद उसका पुत्र रहूबियाम उसकी गद्दी पर बैठा; परन्तु उसने नासमझी से काम लिया और उसका पिता जिस बात के होने से डरता था, वही कर बैठा।

   जब प्रजा के लोगों ने रहूबियाम से कार्य स्थिति को सुधार कर उसे और मानवीय बनाने की माँग की, तो यह उसके पास अवसर था कि वह सेवक और अगुवा होने की दोनों ही जिम्मेदारियों को निभाए। राज्य के प्राचीनों ने उसे परामर्श दिया, “...यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके आधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे आधीन बने रहेंगे” (1 राजा 12:7), किंतु उसने उनकी इस नेक सलाह को नहीं माना। रहूबियाम ने परमेश्वर की इच्छा भी जानने का प्रयास नहीं किया। प्रजा के प्रति उसके कठोर प्रत्युत्तर के कारण राज्य विभाजित हो गया और परमेश्वर के लोगों का आत्मिक पतन गतिमान हो गया (12:14-19)।

   हमारे परिवारों, कार्यस्थल, चर्च, पड़ौस इत्यादि की बातों और निर्णयों में हमें परमेश्वर से मिलने वाली इस समझ-बूझ की बहुत आवश्यकता होती है, जिससे नम्रता के साथ और सेवक बन कर निर्णय लें और कार्य करें न कि रौब गाँठ कर और कठोरता से। - लौरेंस दरामानी


अच्छा अगुवा अच्छा सेवक भी होता है।

यीशु ने उन्हें पास बुलाकर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं। परन्तु तुम में ऐसा न होगा; परन्तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने। जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे। - मत्ती 20: 25-28

बाइबल पाठ: 1 राजा 12:1-15
1 Kings 12:1 रहूबियाम तो शकेम को गया, क्योंकि सब इस्राएली उसको राजा बनाने के लिये वहीं गए थे।
1 Kings 12:2 और जब नबात के पुत्र यारोबाम ने यह सुना, (जो अब तक मिस्र में रहता था, क्योंकि यारोबाम सुलैमान राजा के डर के मारे भगकर मिस्र में रहता था।
1 Kings 12:3 सो उन लोगों ने उसको बुलवा भेजा) तब यारोबाम और इस्राएल की समस्त सभा रहूबियाम के पास जा कर यों कहने लगी,
1 Kings 12:4 कि तेरे पिता ने तो हम लोगों पर भारी जूआ डाल रखा था, तो अब तू अपने पिता की कठिन सेवा को, और उस भारी जूए को, जो उसने हम पर डाल रखा है, कुछ हलका कर; तब हम तेरे आधीन रहेंगे।
1 Kings 12:5 उसने कहा, उभी तो जाओ, और तीन दिन के बाद मेरे पास फिर आना। तब वे चले गए।
1 Kings 12:6 तब राजा रहूबियाम ने उन बूढ़ों से जो उसके पिता सुलैमान के जीवन भर उसके साम्हने उपस्थित रहा करते थे सम्मति ली, कि इस प्रजा को कैसा उत्तर देना उचित है, इस में तुम क्या सम्मति देते हो?
1 Kings 12:7 उन्होंने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके आधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे आधीन बने रहेंगे।
1 Kings 12:8 रहूबियाम ने उस सम्मति को छोड़ दिया, जो बूढ़ों ने उसको दी थी,और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे, और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
1 Kings 12:9 उन से उसने पूछा, मैं प्रजा के लोगों को कैसा उत्तर दूं? उस में तुम क्या सम्मति देते हो? उन्होने तो मुझ से कहा है, कि जो जूआ तेरे पिता ने हम पर डाल रखा है, उसे तू हलका कर।
1 Kings 12:10 जवानों ने जो उसके संग बड़े हुए थे उसको यह उत्तर दिया, कि उन लोगों ने तुझ से कहा है, कि तेरे पिता ने हमारा जूआ भारी किया था, परन्तु तू उसे हमारे लिऐ हलका कर; तू उन से यों कहना, कि मेरी छिंगुलिया मेरे पिता की कमर से भी मोटी है।
1 Kings 12:11 मेरे पिता ने तुम पर जो भारी जूआ रखा था, उसे मैं और भी भारी करूंगा; मेरा पिता तो तुम को कोड़ों से ताड़ना देता था, परन्तु मैं बिच्छुओं से दूंगा।
1 Kings 12:12 तीसरे दिन, जैसे राजा ने ठहराया था, कि तीसरे दिन मेरे पास फिर आना, वैसे ही यारोबाम और समस्त प्रजागण रहूबियाम के पास उपस्थित हुए।
1 Kings 12:13 तब राजा ने प्रजा से कड़ी बातें कीं,
1 Kings 12:14 और बूढ़ों की दी हुई सम्मति छोड़कर, जवानों की सम्मति के अनुसार उन से कहा, कि मेरे पिता ने तो तुम्हारा जूआ भारी कर दिया, परन्तु मैं उसे और भी भारी कर दूंगा: मेरे पिता ने तो कोड़ों से तुम को ताड़ना दी, परन्तु मैं तुम को बिच्छुओं से ताड़ना दूंगा।
1 Kings 12:15 सो राजा ने प्रजा की बात नहीं मानी, इसका कारण यह है, कि जो वचन यहोवा ने शीलोवासी अहिय्याह के द्वारा नबात के पुत्र यारोबाम से कहा था, उसको पूरा करने के लिये उसने ऐसा ही ठहराया था।


एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 36-38
  • मत्ती 23:1-22



रविवार, 4 फ़रवरी 2018

खज़ाना


   मेरे पति टौम और मैं पढ़ने के लिए भिन्न विधियाँ प्रयोग करते हैं। क्योंकि टौम के लिए अंग्रेज़ी प्रथम भाषा नहीं है इसलिए उनकी प्रवृत्ति है कि वे धीरे-धीरे, प्रत्येक शब्द को पढ़ते हुए आगे बढ़ें। लेकिन मैं बहुधा लेख पर सरसरी तौर से नज़रें दौड़ा कर, द्रुत गति से पढ़ लेती हूँ। परन्तु टौम को पढ़ा हुआ मुझसे अधिक स्मरण रहता है; वे बड़ी सरलता से सप्ताह भर पहले पढ़े हुए को भी अद्धृत कर देते हैं, जबकि मेरा पढ़ा हुआ, पुस्तक से ध्यान हटाने के कुछ ही सेकेंडों में गायब हो जाता है।

   ऐसे सरसरी तौर से परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ना मेरे लिए समस्या होता है – और यह केवल वंशावलियों ही के लिए नहीं है। मेरी प्रवृत्ति रहती है कि मैं परिचित परिच्छेदों को, उन कहानियों को जिन्हें मैं बचपन से सुनती आई हूँ, या किसी भजन के भाग को जो अक्सर गए जाने वाले स्तुति गीतों में पाए जाते हैं, ऐसे ही सरसरी तौर से पढ़ लूँ, बस उनपर नज़र दौड़ा लूँ।

   बाइबल में नीतिवचन 2 हमें प्रोत्साहित करता है कि हम समझ-बूझ के मन के साथ परमेश्वर को और अधिक निकटता से, और गहराई से जाननें के प्रयास करें। जब हम बाइबल को ध्यानपूर्वक पढ़ते हैं, उस में समय बिताते हैं, उसे स्मरण करने के प्रयास करते हैं तब हम उसकी सच्चाईयों को बेहतर, तथा और गहराई से जानने पाते हैं (पद 1-2)। कभी-कभी वचन को ऊँची आवाज़ में पढ़ने से हम परमेश्वर की बुद्धिमता को और भरपूरी से समझने पाते हैं। और जब हम परमेश्वर के वचन को प्रार्थना में परमेश्वर के सामाने उद्धृत करते हैं, और उसके लिए परमेश्वर से समझा-बूझ माँगते हैं (पद 3), तो हम उस वचन के लेखक के साथ वार्तालाप का भी आनन्द लेने पाते हैं।

   हम परमेश्वर और उसकी बुद्धिमता को तब जानने पाते हैं जब हम उसे पूरे हृदय से खोजते हैं। जब हम परमेश्वर के वचन को चांदी और छिपे हुए खजाने के समान खोजते हैं तब हमें उसकी समझ मिलती है। - सिंडी हैस कैस्पर


बाइबल को ध्यान के साथ पढ़ें, और प्रार्थनापूर्वक उसका अध्ययन करें।

मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। - कुलुस्सियों 3:16

बाइबल पाठ: नीतिवचन 2:1-5
Proverbs 2:1 हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े,
Proverbs 2:2 और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगा कर सोचे;
Proverbs 2:3 और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे,
Proverbs 2:4 ओर उसको चान्दी के समान ढूंढ़े, और गुप्त धन के समान उसी खोज में लगा रहे;
Proverbs 2:5 तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा।


एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 34-35
  • मत्ती 22:23-46



गुरुवार, 2 नवंबर 2017

बुद्धिमता


   मेरी भांजी के पति ने हाल ही में एक सोशल नेटवर्क साईट पर लिखा, "मैं इन्टरनैट पर और बहुत कुछ कहता, यदि यह धीमी आवाज़ मुझे ऐसा करने के लिए मना नहीं करती। प्रभु यीशु का अनुयायी होने के नाते, आप को लगता होगा कि यह धीमी आवाज़ पवित्र आत्मा की है; किंतु यह है नहीं। यह आवाज़ मेरी पत्नि की है!"

   इसे पढ़कर आने वाली मुस्कान के साथ एक बुद्धिमता का विचार भी आता है - विवेकी मित्र से मिली चेतावनी, परमेश्वर की बुद्धिमता से मिला निर्देष भी हो सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में, सभोपदेशक नामक पुस्तक में लिखा है, "बुद्धिमानों के वचन जो धीमे धीमे कहे जाते हैं वे मूर्खों के बीच प्रभुता करने वाले के चिल्ला चिल्लाकर कहने से अधिक सुने जाते हैं" (सभोपदेशक 9:17)।

   पवित्र-शास्त्र हमें सचेत करता है कि हम अपनी नज़रों में बुद्धिमान या घमण्डी ना बने (नीतिवचन 3:5-7; यशायाह 5:21; रोमियों 12:16)। दूसरे शब्दों में, हम यह मान कर न चलें कि हमारे पास सब बातों के लिए सभी उत्तर उपलब्ध हैं। नीतिवचन में लिखा है, "सम्मति को सुन ले, और शिक्षा को ग्रहण कर, कि तू अन्तकाल में बुद्धिमान ठहरे" (नीतिवचन 19:20)। वह चाहे मित्र हो, या जीवन-साथी, या कोई सहकर्मी अथवा पादरी, परमेश्वर हमें और भी अधिक अपनी बुद्धिमता प्रदान करने के लिए किसी को भी उपयोग कर सकता है।

   नीतिवचन में एक अन्य स्थान पर लिखा है, "समझ वाले के मन में बुद्धि वास किए रहती है, परन्तु मूर्खों के अन्त:काल में जो कुछ है वह प्रगट हो जाता है" (नीतिवचन 14:33)। एक दूसरे की बात सुनना और एक दूसरे से सीखना परमेश्वर की पवित्र-आत्मा से मिलने वाली बुद्धिमता को पहचानने और सीखने का एक तरीका है। - सिंडी हैस कैस्पर


सच्ची बुद्धिमता का आरंभ और अन्त प्रभु परमेश्वर ही है।

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना। - नीतिवचन 3:5-7

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 9:13-18
Ecclesiastes 9:13 मैं ने सूर्य के नीचे इस प्रकार की बुद्धि की बात भी देखी है, जो मुझे बड़ी जान पड़ी। 
Ecclesiastes 9:14 एक छोटा सा नगर था, जिस में थोड़े ही लोग थे; और किसी बड़े राजा ने उस पर चढ़ाई कर के उसे घेर लिया, और उसके विरुद्ध बड़ी मोर्चेबन्दी कर दी। 
Ecclesiastes 9:15 परन्तु उस में एक दरिद्र बुद्धिमान पुरूष पाया गया, और उसने उस नगर को अपनी  बुद्धि के द्वारा बचाया। तौभी किसी ने उस दरिद्र का स्मरण न रखा। 
Ecclesiastes 9:16 तब मैं ने कहा, यद्यपि दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जाती है और उसका वचन कोई नहीं सुनता तौभी पराक्रम से बुद्धि उत्तम है। 
Ecclesiastes 9:17 बुद्धिमानों के वचन जो धीमे धीमे कहे जाते हैं वे मूर्खों के बीच प्रभुता करने वाले के चिल्ला चिल्लाकर कहने से अधिक सुने जाते हैं। 
Ecclesiastes 9:18 लड़ाई के हथियारों से बुद्धि उत्तम है, परन्तु एक पापी बहुत भलाई नाश करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3


शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

बुद्धिमता


   इंटरनैट पर उपलब्ध समाचार साईट्स को देखते हुए जब आप उस पृष्ठ पर बिलकुल नीचे तक पहुँचते हैं तो वहाँ एक भाग मिलता है जिसमें पाठक उस समाचार विषय के बारे में अपनी टिप्पणी लिख सकते हैं। सबसे प्रतिष्ठित और अच्छी मानी जाने वाली साईट्स पर भी इस टिप्पणी वाले स्थान में अनेकों लोगों द्वारा निरादरपूर्ण बातें, अधूरी जानकारी वाली अपमानजनक बातें, लोगों को अपशब्द कहना, इत्यादि पाएंगे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक बुद्धिमता की बातों का संग्रह है जो लगभग 3000 वर्ष पहले संकलित किया गया था; परन्तु इस पुस्तक की बातें आज भी उतनी ही समकालिक और उपयोगी हैं जितनी कि आज का सबसे ताज़ा समाचार। इस पुस्तक के 26वें अध्याय में दो शिक्षाएं हैं जो प्रथम दृष्टि में परस्पर विरोधी प्रतीत होती हैं, और दोनों ही आज के सामाजिक चर्चा माध्यमों पर सटीक लागू होती हैं: "मूर्ख को उस की मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे" (नीतिवचन 26:4); और फिर "मूर्ख को उसकी मूढ़ता के अनुसार उत्तर देना, ऐसा न हो कि वह अपने लेखे बुद्धिमान ठहरे" (नीतिवचन 26:5)।

   इन दोनों परस्पर विरोधी प्रतीत होने वाली बातों में परस्पर संतुलन वहाँ प्रयुक्त ’के अनुसार’ में है। कहने का तात्पर्य है कि पहली शिक्षा है कि किसी भी बात पर ऐसे उत्तर या टिप्पणी मत दो जैसे मूर्ख देते हैं। दूसरी शिक्षा का अर्थ है कि ऐसे उत्तर या टिप्पणी दो कि मूर्ख की मूर्खता उसकी बुद्धिमता प्रतीत न हो।

   मेरी समस्या है कि जिस मूर्खता का मुझे बहुधा सामना करना पड़ता है, वह मेरी अपनी ही होती है। मैंने भी कभी-कभी टिप्पणी वाले स्थान पर या तो कोई कटाक्ष अथवा निन्दनीय बात लिखी है, या किसी और की टिप्पणी को पलट कर निरादरपूर्ण रीति से उसी के ऊपर डाल दिया है। यह परमेश्वर को कतई नहीं भाता है जब मैं अपने किसी संगी मनुष्य के प्रति ऐसा अनादर करूँ, चाहे वे मूर्खतापूर्ण व्यवहार ही क्यों न कर रहे हों।

   परमेश्वर ने हमें अभिव्यक्ति की अद्भुत स्वतंत्रता दी है। हमें जो कहना है, जब कहना है, जिस प्रकार कहना है, आदि बातों का हम अपनी इच्छा और समझ के अनुसार स्वयं निर्णय कर सकते हैं, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें साथ ही प्रभु यीशु मसीह के शब्दों में यह भी चिताती है कि "और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे" (मत्ती 12:36)। साथ ही परमेश्वर ने हमें एक स्वतंत्रता और दी है, हम जब चाहे उसके पास आकर, उससे आवश्यकता तथा परिस्थिति के अनुसार बुद्धिमता माँग सकते हैं, मार्गदर्शन ले सकते हैं, और वह हमें कभी निराश नहीं करेगा। - टिम गुस्टाफ्सन


जो करो या कहो, प्रेम से करो या कहो।

पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी। - याकूब 1:5

बाइबल पाठ: नीतिवचन 26:1-12
Proverbs 26:1 जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती। 
Proverbs 26:2 जैसे गौरिया घूमते घूमते और सूपाबेनी उड़ते-उड़ते नहीं बैठती, वैसे ही व्यर्थ शाप नहीं पड़ता। 
Proverbs 26:3 घोड़े के लिये कोड़ा, गदहे के लिये बाग, और मूर्खों की पीठ के लिये छड़ी है। 
Proverbs 26:4 मूर्ख को उस की मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे। 
Proverbs 26:5 मूर्ख को उसकी मूढ़ता के अनुसार उत्तर देना, ऐसा न हो कि वह अपने लेखे बुद्धिमान ठहरे। 
Proverbs 26:6 जो मूर्ख के हाथ से संदेशा भेजता है, वह मानो अपने पांव में कुल्हाड़ा मारता और विष पीता है। 
Proverbs 26:7 जैसे लंगड़े के पांव लड़खड़ाते हैं, वैसे ही मूर्खों के मुंह में नीतिवचन होता है। 
Proverbs 26:8 जैसे पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली, वैसे ही मूर्ख को महिमा देनी होती है। 
Proverbs 26:9 जैसे मतवाले के हाथ में कांटा गड़ता है, वैसे ही मूर्खों का कहा हुआ नीतिवचन भी दु:खदाई होता है। 
Proverbs 26:10 जैसा कोई तीरन्दाज जो अकारण सब को मारता हो, वैसा ही मूर्खों वा बटोहियों का मजदूरी में लगाने वाला भी होता है। 
Proverbs 26:11 जैसे कुत्ता अपनी छाँट को चाटता है, वैसे ही मूर्ख अपनी मूर्खता को दुहराता है। 
Proverbs 26:12 यदि तू ऐसा मनुष्य देखे जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान बनता हो, तो उस से अधिक आशा मूर्ख ही से है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 66-67
  • रोमियों 7


शनिवार, 10 दिसंबर 2016

शिक्षक


   सारे शरीर की प्रत्येक कोशिका तक रक्त और पोशाण पहुँचाने के लिए हमारा हृदय प्रतिदिन लगभग 100,000 बार धड़कता है। यदि इसका योग लगाया जाए तो यह एक वर्ष में लगभग 3 करोड़ 50 लाख बार और एक सामान्य जीवनकाल में लगभग 2.5 अरब बार धडकना होता है। चिकित्सा विज्ञान हमें बताता है कि हृदय की प्रत्येक धड़कन लगभग उतना ही बल होता है जितना बल एक टेनिस की गेंद को मुट्ठी में पकड़ कर ज़ोर से दबाने में लगता है। हमारा हृदय और उसका कार्य कितना भी आश्चर्यजनक क्यों ना हो, यह प्राकृतिक संसार की विलक्षण बातों का केवल एक नमूना ही है जो हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने रचा और अपने बारे में हमें समझाने के लिए रखा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब के जीवन की कहानी का, हमें यही सिखाना उद्देश्य है।

   अय्युब परमेश्वर का भय मानने वाला और उसकी आराधना में लगे रहने वाला ऐसा व्यक्ति था जिसकी धार्मिकता की गवाही स्वयं परमेश्वर ने दी। लेकिन उस पर और उसके परिवार पर शैतान के हमलों से विपत्तियों के पहाड़ टूट पड़े, उसका सब कुछ जाता रहा, उसके बेटे-बहुएं मर गए, संपत्ति लुट गई और शरीर घावों से भर गया। लेकिन इतना सब होने पर भी अय्युब परमेश्वर के विरुद्ध नहीं बोला; वह खिन्न अवश्य हुआ, उसने अपना विसमय और इन विपरीत परिस्थितियों के आने  के कारण को समझ ना पाने की बात अवश्य की, परन्तु परमेश्वर की निन्दा या बुराई कदापि नहीं की। अपनी इन घोर मुसीबतों और दुःखों के कारण को जानने के लिए उसने परमेश्वर से प्रश्न भी किया, लेकिन परमेश्वर ने उसे इस बात का कोई उत्तर नहीं दिया; और ना ही सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने उसे यह बताया कि भविष्य में वह यीशु के रूप में समस्त मानव जाति के पापों से बचने का मार्ग बनाने के लिए कैसी-कैसी पीड़ाओं को सहेगा, अपना प्राण भी बलिदान कर देगा। अन्ततः जब परमेश्वर ने अय्युब से बोलना आरंभ किया, तो उसने अय्युब को उसकी पीड़ाओं के लिए कोई स्पष्टिकरण नहीं दिया, वरन अय्युब का ध्यान प्रकृति में विद्यमान उसकी आश्चर्यजनक रचनाओं की ओर खींचा, जो सदा ही मनुष्य के बयान और समझ से बाहर परमेश्वर की बुद्धिमता और सामर्थ की गवाही देती रहती हैं (अय्युब 38:1-11)।

   तो आज हमारे लिए हमारे हृदय की क्या शिक्षा है? हमारा हृदय हमारे लिए वैसा ही शिक्षक है जैसा तट पर आने वाली लहरें, रात में चमकने वाले सितारे हैं। हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सामर्थ और बुद्धिमता हमें वाजिब कारण प्रदान करती हैं कि हम उसमें विश्वास करें, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहें और चलें, और संसार के सामने उसके इन विलक्षण गुणों के गवाह बनें। - मार्ट डीहॉन


जब हम सृष्टि में विदित परमेश्वर की बुद्धिमता पर मनन करते हैं, 
तो हमारे प्रति उसकी चिंता और देखभाल की सामर्थ को समझने पाते हैं।

इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:19-20

बाइबल पाठ: अय्युब 38:1-11
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया, 
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है? 
Job 38:3 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे। 
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे। 
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा? 
Job 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया, 
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे? 
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया; 
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया, 
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़े लगा दिए, कि 
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 1


गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

बोल


   आपने यह कथन सुना होगा, "समयानुसार कहना या करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।" परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, सही समयानुसार बोलना या चुप रहना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। अपने अनुभवों के आधार पर उन अवसरों के बारे में सोचें जब परमेश्वर ने अनायास ही आपको किसी को तरो-ताज़ा करने के लिए उपयुक्त बोल दिए; या ऐसे अवसरों को जब आप कुछ बोलना चाहते थे किंतु आपका अनेपक्षित रीति से शान्त ही बने रहना आपके लिए अधिक बुद्धिमतापूर्ण ठहरा।

   बाइबल बताती है कि अन्य बातों के समान बोलने या चुप रहने का भी सही समय होता है: "फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है" (सभोप्देशक 3:7)। राजा सुलेमान ने भली-भांति बोले गए भले बोलों की उपमा चांदी में जड़े गए सुनहरे सेबों से दी है (नीतिवचन 25:11-12); अर्थात सुन्दर, बहुमूल्य और बेशकीमती कलाकृति के समान। बोलने के सही समय की पहचान रखना, बोलने तथा सुनने वालों, दोनों ही के लिए लाभकारी होता है; चाहे वे बोल प्रेम, प्रोत्साहन, प्रशंसा के हों या ताड़ना अथवा डाँट के। इसी प्रकार शान्त रहने का भी समय और उपयोगिता होती है; जब मन किसी का अपमान करने, उसे नीचा दिखाने या इधर-उधर उसकी बुराई करने को उकसा रहा हो, तो बुद्धिमान राजा सुलेमान के कहे अनुसार, अपनी ज़ुबान पर लगाम देना और शान्त रहने के उचित समय को पहचानना बुद्धिमतापूर्ण होता है: "जो अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता है, वह निर्बुद्धि है, परन्तु समझदार पुरूष चुपचाप रहता है। जो लुतराई करता फिरता वह भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है" (नीतिवचन 11:12-13)। जब बड़बोला हो कर या क्रोधित हो कर पाप कर जाने की लालसा मन में उठती है, वह चाहे किसी मनुष्य के विरोध में हो या परमेश्वर के, तो बोलने में धैर्यवन्त होना ही गलती कर बैठने का प्रतिरोधक होता है: "जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है" (नीतिवचन 10:19); "हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब 1:19)।

   कई बार यह जान पाना कि क्या कहें और कब कहें कठिन होता है। ऐसे में हम मसीही विश्वासियों की अगुवाई हमारे अन्दर बसने वाला परमेश्वर का आत्मा करता है और सही निर्णय करने में वही हमारा सहायक होता है। वही हमें सही समय पर सही रीति से सही बोल का प्रयोग करने की सद्बुद्धि देता है, जिससे हम औरों की भलाई और अपने परमेश्वर पिता की महिमा का कारण ठहरें। - मार्विन विलियम्स


सही समय पर कहे गए सही शब्द उत्तम कलाकृति के समान होते हैं।

जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों। - सभोपदेशक 5:1-2

बाइबल पाठ: नीतिवचन 25:11-15
Proverbs 25:11 जैसे चान्दी की टोकरियों में सोनहले सेब हों वैसे ही ठीक समय पर कहा हुआ वचन होता है। 
Proverbs 25:12 जैसे सोने का नथ और कुन्दन का जेवर अच्छा लगता है, वैसे ही मानने वाले के कान में बुद्धिमान की डांट भी अच्छी लगती है। 
Proverbs 25:13 जैसे कटनी के समय बर्फ की ठण्ड से, वैसे ही विश्वासयोग्य दूत से भी, भेजने वालों का जी ठण्डा होता है। 
Proverbs 25:14 जैसे बादल और पवन बिना दृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ-मूठ दान देने वाले का बड़ाई मारना होता है।
Proverbs 25:15 धीरज धरने से न्यायी मनाया जाता है, और कोमल वचन हड्डी को भी तोड़ डालता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1


शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

क्षमा


   मैं एक प्रतिभाशाली प्यानों वादिका से वार्तालाप कर रहा था; उसने मुझ से पूछा कि क्या मैं कोई साज़ बजाता हूँ? मैंने उत्तर दिया, "मैं रेडियो बजा लेता हूँ"; उसने हंसते हुए फिर पूछा कि क्या मैंने कभी कोई साज़ बजा पाने की इच्छा रखी है? मैंने थोड़ी शर्मिन्दगी के साथ उत्तर दिया, "लड़कपन में मैंने कुछ समय तक प्यानो सीखा था, फिर उसे छोड़ दिया।" अब अपने व्यसक जीवन में मुझे पछतावा होता है कि मैंने प्यानो सीखना ज़ारी क्यों नहीं रखा, क्योंकि मुझे संगीत का शौक है और मेरी इच्छा होती है कि आज मैं भी कोई साज़ बजा सकूँ। यह वार्तालाप मेरे लिए इस बात को पुनःस्मरण करने का अवसर था कि हमारे जीवनों में हमारे चुनावों का बहुत प्रभाव होता है - और कुछ चुनावों के कारण हमें पछतावा होता है।

    लेकिन कुछ गलत चुनाव ऐसे भी होते हैं जो हमारे अन्दर दीर्घ-कालीन एवं कष्टदायक पछतावा छोड़ जाते हैं - जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक राजा दाऊद के साथ हुआ। पहले दाऊद ने एक अन्य पुरुष की स्त्री के साथ व्यभिचार किया और फिर अपने पाप को छुपाने के लिए उस स्त्री के पति को मरवा डाला। इस पाप का दोष-बोध उसके लिए बहुत कष्टदायक बना और इससे ग्रसित होकर उसने अपने एक भजन में लिखा, "जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई" (भजन 32:3-4)। लेकिन दाऊद ने अपने पाप का अंगीकार किया और उसे परमेश्वर के सामने मान लिया, जो उसके लिए परमेश्वर से क्षमा और शांति को लेकर आया (पद 5)।

   जब हमारे चुनाव और कार्य हमें पाप और बुराई में ढकेल दें, तो उनका अंगीकार करने और उनके लिए प्रभु यीशु से क्षमा माँग लेने के द्वारा (1 यूहन्ना 1:9) केवल परमेश्वर के अनुग्रह से ही हमें पाप के दोष से छुटकारा मिल सकता है; केवल उस से ही हमें क्षमा की शांति मिल सकती है। केवल परमेश्वर ही है जो हमें सही चुनाव एवं निर्णय ले पाने की बुद्धिमता प्रदान करता है (भजन 32:8)। - बिल क्राउडर


प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली क्षमा हमें पछतावे के बन्धनों से स्वतंत्र करती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35



मंगलवार, 8 मार्च 2016

बदल देने की सामर्थ


   बहुत से लोगों को ऐसे खेल खेलना पसन्द है जो उनके ज्ञान को जाँचते हैं। हाल ही में मैं और मेरा एक सहकर्मी बाइबल के बारे में अपने ज्ञान को ऐसे ही एक खेल द्वारा जाँच रहे थे। क्योंकि हम अपने कार्यस्थल के एक खुले क्षेत्र में थे इसलिए आस-पास के हमारे अन्य सहकर्मी हमारे वार्तालाप को सुन पा रहे थे। खेल आरंभ करने के बाद शीघ्र ही नूह के जहाज़ से लेकर कुँए पर सामरी स्त्री से वार्तालाप तक के प्रश्नों का आदान-प्रदान होने लगा और हमारे सहकर्मी जो हमारे वार्तालाप को सुन पा रहे थे वे भी इसमें सम्मिलित होने लगे। विभिन्न सहकर्मियों द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल से संबंधित उत्तर देते देखना बड़ा मन-भावन था।

   बाइबल के बारे में जानकारी होना महत्वपूर्ण एवं भला है, परन्तु परमेश्वर चाहता है कि हम उसके वचन से ओत-प्रोत होकर उसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लें, जिससे उसके साथ हमारे संबंधों में हम और बढ़ सकें, और दृढ़ हो सकें। बाइबल को इस तरह से जानने और जीवन में उतार लेने से होने वाले लाभों को देखिए:
  •  परमेश्वर का पवित्र आत्मा बाइबल की बातों के द्वारा हमें मसीह यीशु की अनुरूपता में बढ़ाता है (इफिसियों 4:20-24)
  •  हमें आनन्द और मिलता है (यर्मियाह 15:16)
  •  हम आत्मिक सफलता पाते हैं (यहोशु 1:8)
  •  शैतान के विरुद्ध आत्मिक युद्ध में यह वचन हमें जयवंत करता है (मत्ती 4:1-11)
  •  हमारे सुधार हेतु कार्यकारी है (2 तिमुथियुस 3:15-16)
  •  हमारे मार्ग के लिए उजियाला है (भजन 119:105)
  •  समस्याओं के समाधान के लिए बुद्धि देता है (नीतिवचन 1:1-2)
  •  हमारे विश्वास को बढ़ाता और दृढ़ करता है (रोमियों 10:17)


   यदि बाइबल की जानकारी केवल अपने ज्ञानवर्धन के लिए करते हैं तो इस ज्ञान से आत्मिक घमंड आ सकता है (1 कुरिन्थियों 8:1)। परन्तु जब हम पवित्र आत्मा को हमें परमेश्वर के वचन के द्वारा बदल देने की अनुमति देते हैं तो वह हमारे जीवनों को परमेश्वर की इच्छा के अनुसार परिवर्तित और संचालित करता है, और जीवन के हर उतार-चढ़ाव तथा टेढ़े-मेढ़े मार्गों में हम सही मार्ग पर बनाए रखता है, जिससे हम अपने आस-पास के लोगों को परमेश्वर का जीवन तथा प्रेम को दिखाने पाते हैं। - डेनिस फिशर


ज्ञान तो अनेक पुस्तकें बढ़ा सकती हैं, किंतु केवल बाइबल ही जीवन बदल सकती है।

तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; - व्यवस्थाविवरण 6:5-6

बाइबल पाठ: भजन 119:96-106
Psalms 119:96 जितनी बातें पूरी जान पड़ती हैं, उन सब को तो मैं ने अधूरी पाया है, परन्तु तेरी आज्ञा का विस्तार बड़ा है।
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।
Psalms 119:105 तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। 
Psalms 119:106 मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18


मंगलवार, 8 सितंबर 2015

ज्योतिर्मय


   पतझड़ ऋतु की एक संध्या को जब आकाश अंधियारा था और पूर्णिमा का चाँद निकलने वाला था, मेरे शहर ग्रैंड रैपिड्स में नदी के किनारे हज़ारों लोग एकत्रित हुए और उन्होंने आकाश को रौशन करती हुई हज़ारों कन्दीलें उड़ाईं, जिन्होंने उगते हुए चाँद के साथ मिलकर उस संध्या के अन्धेरे आकाश को एक ज्योतिर्मय कलाकृति का रूप दे दिया। उन उड़ती हुई कन्दीलों और उगते हुए चाँद से बना दृश्य देखते ही बनता था।

   जब मैंने उस घटना के चित्र देखे तो मुझे अफसोस हुआ कि मैं उस संध्या अपने शहर ग्रैंड रैपिड्स में नहीं थी वरन न्यू यॉर्क में एक सभा में भाग लेने गई हुई थी। लेकिन कुछ दिन पश्चात मैंने यह एहसास किया कि जो घटना ग्रैंड रपिड्स में हुई थी वही तो सांकितेक रूप में न्यू यॉर्क की उस सभा में भी हुई थी, जहां संसार के 100 से भी अधिक शहरों से आए 1000 से अधिक लोग यह सीखने के लिए एकत्रित हुए थे कि संसार भर के लोगों के जीवनों में विद्यमान पाप के अन्धकार को कैसे प्रभु यीशु में उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार तथा प्रसार द्वारा ज्योतिर्मय करा जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भविष्यद्वक्ता दानिय्येल ने एक ऐसे समय की भविष्यवाणी की थी जब वे लोग जो दूसरों को प्रभु की ओर मोड़ेंगे वे सदाकाल तक आकाश के सितारों के समान चमकेंगे (दानिय्येल 12:3)। हम मसीही विश्वासी जब अपने आस-पास के स्थानों में विद्यमान पाप के अन्धकार से भरे जीवनों में प्रभु यीशु के सुसमाचार की ज्योति को प्रज्वलित करते हैं, उनके जीवनों को ज्योतिर्मय करते हैं, तो हम भी परमेश्वर के राज्य में सदाकाल तक चमकते रहने वाले लोग बन जाते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब जगत की ज्योति संसार के लोगों को ज्योतिर्मय करती है तो उससे सारे संसार के लोग आकर्षित होते हैं।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: दानिय्येल 12:1-3
Daniel 12:1 उसी समय मीकाएल नाम बड़ा प्रधान, जो तेरे जाति-भाइयों का पक्ष करने को खड़ा रहता है, वह उठेगा। तब ऐसे संकट का समय होगा, जैसा किसी जाति के उत्पन्न होने के समय से ले कर अब तक कभी न हुआ होगा; परन्तु उस समय तेरे लोगों में से जितनों के नाम परमेश्वर की पुस्तक में लिखे हुए हैं, वे बच निकलेंगे। 
Daniel 12:2 और जो भूमि के नीचे सोए रहेंगे उन में से बहुत से लोग जाग उठेंगे, कितने तो सदा के जीवन के लिये, और कितने अपनी नामधराई और सदा तक अत्यन्त घिनौने ठहरने के लिये। 
Daniel 12:3 तब सिखाने वालों की चमक आकाशमण्डल की सी होगी, और जो बहुतों को धर्मी बनाते हैं, वे सर्वदा की नाईं प्रकाशमान रहेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 3-5
  • 2 कुरिन्थियों 1


सोमवार, 7 सितंबर 2015

अगम्य ज्ञान


   इंटरनैट की एक वेबसाईट FlightAware पर कैथी अपने पति चक द्वारा शिकागो जाने के लिए उड़ाए जा रहे छोटे वायुयान की प्रगति को देख रही थी। कंप्यूटर पर बैठकर, कुछ बटन दबाने के द्वारा उसे लगातार जानकारी मिल रही थी कि कब चक के वायुयान ने उड़ान भरी, उस समय वह वायुयान कहाँ पर था तथा वह कब उतर जाएगा। कुछ दशक पहले जब चक पश्चिमी अफ्रीका में वायुयान चालक था तो कैथी का उससे संपर्क केवल रेडियों के माध्यम से ही हो पाता था। कैथी को स्मरण है कि कैसे एक बार उसे तीन दिन तक पता ही नहीं चल पाया कि चक के क्या हाल हैं; वह जान नहीं सकी कि चक का वायुयान बिगड़ गया था और उड़ पाने के योग्य नहीं था, किंतु चक सुरक्षित था।

   हम चाहे एक-दूसरे के बारे में जानकारी रख पाएं अथवा ना रख पाएं, परमेश्वर हर समय और हर बात के लिए हमारे बारे में सारी जानकारी रखता है (अय्युब 34:21)। परमेश्वर की नज़रों से कुछ छिपा नहीं है (इब्रानियों 4:13), वह हमारे विचारों और मुँह से निकलने वाले शब्दों को भी अच्छे से जानता है (1 इतिहास 28:9; भजन 139:4)। परमेश्वर यह भी जानता है कि आने वाले समय में क्या होने वाला है (यशायाह 46:10)। परमेश्वर सब कुछ जानता है (1 यूहन्ना 3:20) और वह मुझे तथा आपको बड़ी बारीकी से जानता है (भजन 139:1-10)। वह हमारी प्रत्येक परीक्षा, पीड़ा, बीमारी, चिंता, दुख इत्यादि सब कुछ भली-भांति जानता है।

   यह बात कि हमारा परमेश्वर पिता हमारे बारे में सब कुछ बड़ी बारीकी से जानता है, ही प्रेरित पतरस द्वारा दिए गए निर्देश, "और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है" (1 पतरस 5:7) का आधार है। परमेश्वर का ज्ञान तथा बुद्धिमता कैसे अगम्य है (रोमियों 11:33)। - सिंडी हैस कैस्पर


हम सदैव अपने सर्वज्ञानी परमेश्वर पिता पर पूरा भरोसा रख सकते हैं।

आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम्य हैं! - रोमियों 11:33

बाइबल पाठ: भजन 139:1-10
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 1-2
  • 1 कुरिन्थियों 16


शनिवार, 21 जून 2014

लुभावना एवं घातक


   ऑस्ट्रेलिया में करे गए एक अध्ययन में पाया गया कि यदि सिग्रेट के डिब्बे दिखने में साधारण से हों, लुभावने ना हों तो वे युवाओं को धुम्रपान के लिए कम आकर्षित करेंगे। इस निशकर्ष के कारण ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह कानून पारित किया कि सिग्रेट के डिब्बों पर आकर्षक रंग, चिन्ह और धुम्रपान बढ़ावा देने वाले वाक्य नहीं वरन धुम्रपान से सेहत को होने वाले नुकसान संबंधी चेतावनी की बातें और धुम्रपान से खराब हुए फेफड़ों के चित्र दिखाने होंगे। अर्थात अब वहाँ धुम्रपान को लुभावना और सामाजिक रीति से उत्कृष्ठ व्यक्तित्व का चिन्ह नहीं किंतु घातक और निम्न कोटी का दिखाया जाएगा। लेकिन केवल सिग्रेट का डिब्बे ही एक ऐसा उत्पाद नहीं है जो बाहर से दिखने में लुभावने परन्तु अन्दर से प्रभाव में घातक होते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में बारंबार यह चेतावनी आई है कि हम अपने द्वारा किए गए सभी चुनावों के दूरगामी परिणामों के बारे में ध्यानपूर्वक विचार कर लें। इस पुस्तक के कई पदों में प्रयुक्त वाक्याँश "अन्त में" इस बात को ध्यान दिलाता है कि हम जिस बात या वस्तु की चाह कर रहे हैं आगे चलकर अन्ततः उसके परिणाम क्या होंगे - आनन्द अथवा दुख, आदर अथवा निरादर, जीवन अथवा मृत्यु। क्योंकि परमेश्वर हमें हर नुकसान से बचा कर रखना चाहता है इसलिए "...बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है" (नीतिवचन 2:6-7)।

   संसार की लुभावनी बातों को लेकर किए गए मूर्खतापूर्ण चुनावों के घातक परिणामों से बचने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल की बुद्धिमानी की बातों को अपना मार्गदर्शक बना लें, "तब तू धर्म और न्याय, और सीधाई को, निदान सब भली-भली चाल समझ सकेगा" (नीतिवचन 2:9)। - डेविड मैक्कैसलैंड


उचित तथा महत्वपूर्ण को पहचान पाना ही बुद्धिमानी है।

यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। - भजन 25:8-9

बाइबल पाठ: नीतिवचन 2:6-20
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं। 
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।। 
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।। 
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।। 
Psalms 25:12 वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? यहोवा उसको उसी मार्ग पर जिस से वह प्रसन्न होता है चलाएगा। 
Psalms 25:13 वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा। 
Psalms 25:14 यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उस से डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा। 
Psalms 25:15 मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा।। 
Psalms 25:16 हे यहोवा मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; क्योंकि मैं अकेला और दीन हूं। 
Psalms 25:17 मेरे हृदय का क्लेश बढ़ गया है, तू मुझ को मेरे दु:खों से छुड़ा ले। 
Psalms 25:18 तू मेरे दु:ख और कष्ट पर दृष्टि कर, और मेरे सब पापों को क्षमा कर।। 
Psalms 25:19 मेरे शत्रुओं को देख कि वे कैसे बढ़ गए हैं, और मुझ से बड़ा बैर रखते हैं। 
Psalms 25:20 मेरे प्राण की रक्षा कर, और मुझे छुड़ा; मुझे लज्जित न होने दे, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 82-84