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Wednesday, March 2, 2011

उपकारी बन्धन

मेरे बचपन के पसंदीदा कामों में से एक था पतंग उड़ाना। घंटों तक उस कागज़ की बनी ’चिड़िया’ को अपनी उंगली से अटके धागे के साथ अटखेलियां कराने में मुझे बड़ा मज़ा आता। यदि वह पतंग बोल सकती तो शायद कहती, "देखो मैं कैसे मज़े से इतनी ऊँचाई पर उड़ सकती हूँ, आकाश में लहरा सकती हूँ। यह सब उस लड़के के बावजूद जो इस धागे से मुझे बांधकर अपनी उंगली के इशारों से मुझे नचा रहा है, मुझे यह कतई पसंद नहीं है। यदि यह धागा मुझे बांधे हुए न होता तो मैं और भी कितना ऊँचा उड़ जाती, कहां कहां चली जाती।"

कभी कभी पतंग उड़ाते समय मेरा ध्यान बंट जाता और मैं धागे को ढीला छोड़ देता। ढील मिलते ही वह पतंग डगमगाती हुई नीचे की ओर आने लगती और यदि समय रहते मैं उसे न संभालता तो किसी पेड़ में फंस कर फट जाती और कभी उड़ने नहीं पाती। ऐसे में वह घमंडी पतंग क्या कहती? यदि वह सच्ची होती तो उसे मानना पड़ता कि जिस धागे और लड़के को वह रोकने वाले बन्धन समझ रही थी वे ही उसके उड़ सकने और सुरक्षित रहने के वास्तविक कारण थे। उनके नियंत्रण से ही उसका जीवन था, उसकी क्षमता थी, वह उड़ पाती थी।

हमारे मसीही जीवन की उन्नति का एक बड़ा कारण हमारे जीवन में आने वाली कठिनाईयां और बाधाएं हैं। हम इन परीक्षाओं के कारण अक्सर फड़फड़ाते हैं लेकिन यदि परमेश्वर इन्हें हमारे जीवनों से निकल दे तो हमारे जीवन उस ढील मिली पतंग की तरह डगमगाने वाले हो जाएंगे और कमज़ोर होकर कर नीचे की ओर गिरने लगेंगे। याकूब ने कहा "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।" - याकूब १:२, ३

ये परीक्षाएं ही वे उपकारी बन्धन हैं जिन से बांध कर और अपनी निगरानी में रखकर परमेश्वर अपने बच्चों को उंचाईयों को छूते हुए देखना चाहता है। - पौल वैन गोर्डर


यदि जीवन मार्ग में परीक्षाओं के रोड़े ना होते तो जीवन मार्ग में सम्भलकर चलना भी नहीं होता।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है। - याकूब १:२, ३

बाइबल पाठ: याकूब १:१-१२
परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर होकर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।
पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है और उस को दी जाएगी।
पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्‍योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्‍योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा।
क्‍योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल फड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती २६-२७
  • मरकुस ८:१-२१