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मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

ज्योति

 

         अंग्रेज़ी की एक बहुत जानी-मानी बच्चों की कविता है, ‘ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार; इस कविता को जेन टेलर ने लिखा था, परमेश्वर के उस आकाश मंडल के आश्चर्य को दर्शाने के उद्देश्य से, जहाँ पर पृथ्वी से बहुत ऊपर सितारे टंगे हुए दिखाई देते है। इस कविता के बाद के छंदों में, जिन्हें सामान्यतः नहीं बताया जाता है, एक छंद में तारों के द्वारा यात्रियों का मार्गदर्शन करने की बात कही गई है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को निर्दोष और पवित्र होने की चुनौती दी गई है, जब वे अपने चारों के लोगों के मध्य सुसमाचार बांटते हुए “जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो” (फिलिप्पियों 2:15)। हम अचरज कर सकते हैं कि भला हम सितारों के समान कैसे चमकें? हम अकसर अपने आप को अक्षम और दुर्बल समझते हैं, और हमें यह मानने में कठिनाई होती है कि हमारी ‘ज्योति क्या ऐसी होगी कि उससे किसी के जीवन में उससे कुछ अंतर आए? परन्तु सितारों को सितारे होने के लिए कोई प्रयास नहीं करना पड़ता है; वे तो वैसे होते ही हैं। ज्योति हमारे संसार को बदलती है, और हमें भी बदलती है। परमेश्वर हमारे संसार में भौतिक प्रकाश को लेकर आया (उत्पत्ति 1:3); और प्रभु यीशु मसीह में होकर वह हमारे जीवनों में आत्मिक ज्योति को लाता है (यूहन्ना 1:1-4)।

         हमें, जिन में परमेश्वर की ज्योति है, इस प्रकार चमकना है कि जो लोग हमारे चारों ओर हैं, वे उस ज्योति के मूल स्त्रोत की ओर आकर्षित होने पाएं। जैसे आकाश में टंगे हुए सितारे, बिना स्वतः कोई प्रयास करे, अपनी ज्योति के कारण लोगों को मार्ग दिखाते हैं, उसी प्रकार हमारे जीवनों की ज्योति भी लोगों का मार्गदर्शन करने वाली हो। जब हम पौलुस द्वारा दिए गए निर्देश, परमेश्वर के निष्कलंक सन्तान बने रहो” (पद 15) का पालन करते हैं, तो हम अपनी ज्योति को संसार में दिखने देते हैं।

         पाप के अन्धकार से भरे इस संसार में हमें ज्योति बनकर चमकना है, जिससे औरों को भी जीवन की ज्योति के मूल स्त्रोत – प्रभु यीशु की ओर आकर्षित कर सकें। - एलिसा मॉर्गन

 

प्रभु यीशु जीवनों में ज्योति लाते हैं।


उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:14-16

 फिलिप्पियों 2:14 सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो।

फिलिप्पियों 2:15 ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो)।

फिलिप्पियों 2:16 कि मसीह के दिन मुझे घमण्ड करने का कारण हो, कि न मेरा दौड़ना और न मेरा परिश्रम करना व्यर्थ हुआ।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2

सोमवार, 22 दिसंबर 2014

स्मरण


   परमेश्वर की अद्भुत, प्रेर्णाशील हस्तकला द्वारा विस्मित होने के लिए आपको रात्रि के आकाश को अधिक देर तक निहारना नहीं पड़ेगा। तारापुँजों के विशाल विस्तार और हमारे अपने तारापुँज आकाशगंगा का दूधिया विस्तार हमें स्मरण दिलाता है हमारे परमेश्वर प्रभु यीशु की महान सृजन शक्ति तथा इस सब को संभाल पाने की मानव-समझ से परे क्षमता को (कुलुस्सियों 1:16-17)। जब हम रात में आकाश को निहारते हैं तो प्रतीत होता है मानों परमेश्वर के रंगमंच के दृश्य को सबसे अग्रिम पंक्ति में बैठकर देख रहे हों।

   लेकिन प्रत्येक रात्रि के इस अद्भुत दृश्य की तुलना उस दृश्य की महिमा के सामने कुछ भी नहीं है जो उसने तब दिखाई जिस रात्रि परमेश्वर ने अपने पुत्र को पृथ्वी पर भेजा। वहाँ मैदान में चरवाहे अपनी भेड़ों की रखवाली कर रहे थे कि अचानक ही आकाश स्वर्गदूतों से रौशन हो गया और उन्होंने स्वर्गदूतों को कहते सुना, "कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्‍ति हो" (लूका 2:14)। किसी दूर देश से ज्ञानी पुरुष भी उस राजा को दण्डवत करने आए, और परमेश्वर ने उनके मार्गदर्शन के लिए पूर्व दिशा में एक बहुत चमकदार तारा बना कर दिया।

   यद्यपि प्रत्येक रात्रि को "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है" (भजन 19:1), लेकिन उस घटना से पहले या बाद में परमेश्वर की महिमा आकाश में वैसी कभी नहीं प्रगट हुई जैसी उस रात को हुई थी, जिस रात इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता ने यह सार्वजनिक घोषणा करी कि वह समस्त मानवजाति से इतना प्रेम करता है कि उसे पाप के दोष से छुड़ाने के लिए स्वयं पृथ्वी पर आने के लिए तैयार है।

   अगली बार जब आप रात्रि को आकाश की ओर देखें और परमेश्वर की हस्तकला से विस्मित हों तो स्मरण रखें कि वह जो यह सब बना कर संभाले रख सकता है, उसी ने आपको भी बनाया है, वही आपको भी संभाल रहा है और वह आपको उस पर लाए गए साधारण विश्वास और पश्चाताप के द्वारा अपनी संगति तथा सहभागिता में आशीषित देखना चाहता है। - जो स्टोवैल


हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम की असाधारण महिमा प्रभु यीशु के पृथ्वी पर आगमन के द्वारा प्रगट करी गई।

क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। - कुलुस्सियों 1:16- 17

बाइबल पाठ: भजन 19:1-6
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 पतरस 1-3


गुरुवार, 7 अगस्त 2014

विस्मयकारी सृष्टि


   अगस्त 2011 में अमेरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष में स्थित हबल दूरबीन से लिए गए चित्रों को मिलाकर बनाया गया एक संयुक्त चित्र प्रकाशित किया, जिसे देखने वाले लोगों के चेहरों पर एक मुस्कुराहट आ गई। चित्र में दो नक्षत्र समूहों को आपस में टकराना आरंभ करते हुए दिखाया गया है, और यह टकराव की स्थिति एक अन्तरिक्षीय विस्मयबोधक चिन्ह (!) के समान दिखाई देती है। जो नवीनतम गणना मैंने पढ़ी है, उसके अनुसार अन्तरिक्ष में लगभग 100 अरब नक्षत्र समूह हैं और प्रत्येक नक्षत्र समूह सैकड़ों अरब तारों से मिलकर बना है, तथा नए नक्षत्र समूह अभी भी खोजे जा रहे हैं।

   जब मैंने वह अन्तरिक्षीय विस्मयबोधक चिन्ह वाले चित्र को देखा, तो मेरा ध्यान हमारे विस्मयकारी सृष्टिकर्ता की ओर गया, आकाशमण्डल जिसकी महिमा का वर्णन कर रहा है (भजन 19:1), किंतु वह तो अपने बनाए आकाशमण्डल से भी बढ़कर है। जब राजा सुलेमान परमेश्वर की उपस्थिति के लिए मन्दिर बनवा चुका, तो परमेश्वर कि महानता को स्मरण कर के उसने प्रार्थना में कहा, "क्या परमेश्वर सचमुच पृथ्वी पर वास करेगा, स्वर्ग में वरन सब से ऊंचे स्वर्ग में भी तू नहीं समाता, फिर मेरे बनाए हुए इस भवन में क्योंकर समाएगा" (1 राजा 8:27)। राजा सुलेमान को एहसास हुआ कि जब परमेश्वर की उपस्थिति स्वर्ग में भी सीमित नहीं रह सकती तो पृथ्वी पर बने पत्थर के एक मन्दिर में क्योंकर सीमित हो सकती है?

   हमारे सीमित और नश्वर मन-मस्तिष्क के समझ पाने की क्षमता से कहीं कहीं अधिक बढ़कर प्रभु परमेश्वर की हस्ती है, लेकिन फिर भी उसने हमारे लिए यह संभव किया है कि हम उसे प्रभु यीशु में होकर जान सकें, जिसे उसने हमारे पापों की क्षमा और उद्धार के लिए इस संसार में मरने और फिर मृतकों में से पुनः जी उठने के लिए भेजा है। जब हम प्रभु यीशु पर विश्वास कर के अपने पापों से पश्चाताप करते हैं तथा अपना जीवन उसे समर्पित करते हैं, हमारे जीवन भी उसकी महिमा करने वाली उसकी विस्मयकारी सृष्टि का एक भाग बन जाते हैं। - एनी सेटास


सृष्टि में हम परमेश्वर की हस्तकला, और पापों से हमारे छुटकारे में हम उसके हृदय को देखते हैं।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: 1 राजा 8:22-30
1 Kings 8:22 तब सुलैमान इस्राएल की पूरी सभा के देखते यहोवा की वेदी के साम्हने खड़ा हुआ, और अपने हाथ स्वर्ग की ओर फैलाकर कहा, हे यहोवा! 
1 Kings 8:23 हे इस्राएल के परमेश्वर! तेरे समान न तो ऊपर स्वर्ग में, और न नीचे पृथ्वी पर कोई ईश्वर है: तेरे जो दास अपने सम्पूर्ण मन से अपने को तेरे सम्मुख जानकर चलते हैं, उनके लिये तू अपनी वाचा पूरी करता, और करुणा करता रहता है। 
1 Kings 8:24 जो वचन तू ने मेरे पिता दाऊद को दिया था, उसका तू ने पालन किया है, जैसा तू ने अपने मुंह से कहा था, वैसा ही अपने हाथ से उसको पूरा किया है, जैसा आज है। 
1 Kings 8:25 इसलिये अब हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा! इस वचन को भी पूरा कर, जो तू ने अपने दास मेरे पिता दाऊद को दिया था, कि तेरे कुल में, मेरे साम्हने इस्राएल की गद्दी पर विराजने वाले सदैव बने रहेंगे: इतना हो कि जैसे तू स्वयं मुझे सम्मुख जानकर चलता रहा, वैसे ही तेरे वंश के लोग अपनी चालचलन में ऐसी ही चौकसी करें। 
1 Kings 8:26 इसलिये अब हे इस्राएल के परमेश्वर अपना जो वचन तू ने अपने दास मेरे पिता दाऊद को दिया था उसे सच्चा सिद्ध कर। 
1 Kings 8:27 क्या परमेश्वर सचमुच पृथ्वी पर वास करेगा, स्वर्ग में वरन सब से ऊंचे स्वर्ग में भी तू नहीं समाता, फिर मेरे बनाए हुए इस भवन में क्योंकर समाएगा। 
1 Kings 8:28 तौभी हे मेरे परमेश्वर यहोवा! अपने दास की प्रार्थना और गिड़गिड़ाहट की ओर कान लगाकर, मेरी चिल्लाहट और यह प्रार्थना सुन! जो मैं आज तेरे साम्हने कर रहा हूँ; 
1 Kings 8:29 कि तेरी आंख इस भवन की ओर अर्थात इसी स्थान की ओर जिसके विषय तू ने कहा है, कि मेरा नाम वहां रहेगा, रात दिन खुली रहें: और जो प्रार्थना तेरा दास इस स्थान की ओर करे, उसे तू सुन ले। 
1 Kings 8:30 और तू अपने दास, और अपनी प्रजा इस्राएल की प्रार्थना जिस को वे इस स्थान की ओर गिड़गिड़ा के करें उसे सुनना, वरन स्वर्ग में से जो तेरा निवासस्थान है सुन लेना, और सुनकर क्षमा करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36


बुधवार, 2 मार्च 2011

उपकारी बन्धन

मेरे बचपन के पसंदीदा कामों में से एक था पतंग उड़ाना। घंटों तक उस कागज़ की बनी ’चिड़िया’ को अपनी उंगली से अटके धागे के साथ अटखेलियां कराने में मुझे बड़ा मज़ा आता। यदि वह पतंग बोल सकती तो शायद कहती, "देखो मैं कैसे मज़े से इतनी ऊँचाई पर उड़ सकती हूँ, आकाश में लहरा सकती हूँ। यह सब उस लड़के के बावजूद जो इस धागे से मुझे बांधकर अपनी उंगली के इशारों से मुझे नचा रहा है, मुझे यह कतई पसंद नहीं है। यदि यह धागा मुझे बांधे हुए न होता तो मैं और भी कितना ऊँचा उड़ जाती, कहां कहां चली जाती।"

कभी कभी पतंग उड़ाते समय मेरा ध्यान बंट जाता और मैं धागे को ढीला छोड़ देता। ढील मिलते ही वह पतंग डगमगाती हुई नीचे की ओर आने लगती और यदि समय रहते मैं उसे न संभालता तो किसी पेड़ में फंस कर फट जाती और कभी उड़ने नहीं पाती। ऐसे में वह घमंडी पतंग क्या कहती? यदि वह सच्ची होती तो उसे मानना पड़ता कि जिस धागे और लड़के को वह रोकने वाले बन्धन समझ रही थी वे ही उसके उड़ सकने और सुरक्षित रहने के वास्तविक कारण थे। उनके नियंत्रण से ही उसका जीवन था, उसकी क्षमता थी, वह उड़ पाती थी।

हमारे मसीही जीवन की उन्नति का एक बड़ा कारण हमारे जीवन में आने वाली कठिनाईयां और बाधाएं हैं। हम इन परीक्षाओं के कारण अक्सर फड़फड़ाते हैं लेकिन यदि परमेश्वर इन्हें हमारे जीवनों से निकल दे तो हमारे जीवन उस ढील मिली पतंग की तरह डगमगाने वाले हो जाएंगे और कमज़ोर होकर कर नीचे की ओर गिरने लगेंगे। याकूब ने कहा "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।" - याकूब १:२, ३

ये परीक्षाएं ही वे उपकारी बन्धन हैं जिन से बांध कर और अपनी निगरानी में रखकर परमेश्वर अपने बच्चों को उंचाईयों को छूते हुए देखना चाहता है। - पौल वैन गोर्डर


यदि जीवन मार्ग में परीक्षाओं के रोड़े ना होते तो जीवन मार्ग में सम्भलकर चलना भी नहीं होता।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है। - याकूब १:२, ३

बाइबल पाठ: याकूब १:१-१२
परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर होकर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।
पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है और उस को दी जाएगी।
पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्‍योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्‍योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा।
क्‍योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल फड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती २६-२७
  • मरकुस ८:१-२१

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

सूर्यास्त में परमेश्वर की वाणी

सूर्यास्त की सुन्दरता पर किसने अचंभा नहीं किया होगा? सूर्य जब पश्चिमी क्षितिज की ओर बढ़ता है तो आकाश पर छाई रंगों की छटा से हम मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। कुछ पल को हिचकिचाता सा सूर्य, आकाश पर गुलाबी, नारंगी और लाल रंगों की रंगत बिखेरता हुआ आंखों से ओझल हो जाता है। सूर्यास्त के इस महिमामय दृश्य में परमेश्वर की महिमामयी किंतु शांतिदायक आवाज़ से दिन भर की कुण्ठाएं शान्त हो जाती हैं।

धरती के वायुमण्डल के कारण सूर्य की किरणों की गति कुछ धीमी हो जाती है और वे कुछ मुड़ जाती हैं, इसलिये डूबता सूर्य अंडाकार दिखाई देता है; वायुमण्डल में विद्यमान धूल और धुएं के कारण विभिन्न रंग दिखाई देते हैं, जो हमें इतने सुखद लगते हैं। जितना सुन्दर हमने उसे देखा है, सूर्यास्त का दृश्य उससे भी अधिक सुन्दर हो सकता है। नक्षत्र वैज्ञानिक जौन बी. इरविन "Encyclopedia Science Supplement" में लिखते हैं कि, "जब परिस्थितियां सही हों तो, सूर्यास्त के अंतिम पीले-नारंगी रंग अचानक चमकीले हरे रंग में बदल जाते हैं। यह चमकदार हरा रंग दिन को उत्तेजक विस्मयबोधक चिन्ह के साथ अन्त करता है।"

मसीही विश्वासी के लिये, प्रत्येक सूर्यास्त, दिन के अन्त पर परमेश्वर की ओर से लगा विस्मयबोधक चिन्ह है; जैसे परमेश्वर कह रहा हो, "अपनी चिन्ताएं किनारे कर दो। अपने कार्यों से विश्राम लो। अपनी निराशाओं को भूल जाओ। मैं अभी भी यहीं हूँ, अपनी सृष्टि का ध्यान रख रहा हूँ, उसे नियंत्रित रख रहा हूँ। मैं बदला नहीं हूँ। सूर्य से आगे, मेरी ओर देखो और शान्त हो जाओ।" - डेव एग्नर


सृष्टि में परमेश्वर की आवाज़ हमें उसके पराक्रम का आश्वासन देती है।

ईश्वर परमेश्वर यहोवा ने कहा है, और उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक पृथ्वी के लोगों को बुलाया है। - भजन ५०:१


बाइबल पाठ: भजन ५०:१-६

ईश्वर परमेश्वर यहोवा ने कहा है, और उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक पृथ्वी के लोगों को बुलाया है।
सिय्योन से, जो परम सुन्दर है, परमेश्वर ने अपना तेज दिखाया है।
हमारा परमेश्वर आएगा और चुपचाप न रहेगा, आग उसके आगे आगे भस्म करती जाएगी और उसके चारों ओर बड़ी आंधी चलेगी।
वह अपनी प्रजा का न्याय करने के लिये ऊपर से आकाश को और पृथ्वी को भी पुकारेगा:
मेरे भक्तों को मेरे पास इकट्ठा करो, जिन्होंने बलिदान चढ़ाकर मुझ से वाचा बान्धी है!
और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति १६-१७
  • मत्ती ५:२७-४८

बुधवार, 22 दिसंबर 2010

उद्धारकर्ता या न्यायी?

किसी रात जब आप शहर की रौशनी और चकाचौंध से दूर हों तो अपनी नज़रें ऊपर उठाकर देखियेगा, वहां आकाश में आपको क्षितिज से क्षितिज तक चमकते सितारों का पुंज दिखाई देगा और दूधिया आकाशगंगा की पट्टी, जिसका हम एक हिस्सा हैं, दिखाई देगी। परमेश्वर, अपने पवित्र वचन बाइबल में पूछता है "अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखो, किस ने इनको सिरजा?" (यशायाह ४०:२६)

खगोल शास्त्री साईमन ड्राइवर का कहना है कि यदि आपकी दृष्टि ठीक है तो आप लगभग ५००० सितारे देख सकते हैं। लेकिन इससे भी कहीं आधिक संख्या उन नक्षत्रों की है जिन्हें बिना विशेष उपकरणों के नहीं देखा जा सकता। सन १९९५ में Hubble Deep Field Study के वैज्ञानिक अपने अंत्रिक्ष अनुसंधान द्वारा इस निषकर्ष पर पहुंचे कि आकाश में करोड़ों नक्षत्र पुंज (galaxy) हैं और हर नक्षत्र पुंज में करोड़ों नक्षत्र हैं। एक अनुमान के अनुसार, पृथ्वी के हर ज़र्रे के लिये १० से भी अधिक नक्षत्र आकाश में मौजूद हैं।

लेकिन फिर भी, हर रात परमेश्वर "...इन गणों को गिन गिन कर निकालता, उन सब को नाम ले लेकर बुलाता है; वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।" (यशायाह ४०:२६) भजनकार कहता है "वह तारों को गिनता, और उन में से एक एक का नाम रखता है।" (भजन १४७:४) जो ऐसा सामर्थी और सर्वज्ञानी परमेश्वर है उसके लिये फिर क्यों लोग सोचते हैं कि "...मेरा मार्ग यहोवा के छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?" (यशायाह ४०:२७) जो परमेश्वर प्रत्येक नक्षत्र का स्थान निर्धारित करके उसे नाम लेकर बुला सकता और उसको संभाल सकता है, वह आप को भी अपनी उसी सामर्थ से संभाल सकता है। ऐसा अद्भुत परमेश्वर किसी कल्पना का विष्य नहीं है और न ही उसके न्याय को, जिसका प्रमाण उसने प्रभु यीशु को मुर्दों से जिलाकर दिया, हंसी में उड़ाया जा सकता है। "सो परमेश्वर का वंश होकर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों की अनाकानी करके, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। क्‍योंकि उस ने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उस ने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।" (प्रेरितों १७:२९-३१)

आज रात अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखिये और अपने आप से पूछिये, ऐसे अद्भुत और पराक्रमी परमेश्वर से आप किस रूप में मिलना चाहेंगे - अपने निज उद्धारकर्ता और रक्षक के रूप में, या न्याय सिहांसन पर बैठ कर आपके जीवन का हिसाब लेने वाले के रूप में? फैसला आपका है! - डेविड रोपर


हम आंखों से सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सामर्थ को देखते हैं और मन से उसके प्रेम को अनुभव करते हैं।

अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखो, किस ने इनको सिरजा? - यशायाह ४०:२६


बाइबल पाठ: यशायाह ४०:२५-२७

सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है।
अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखो, किस ने इनको सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले लेकर बुलाता है; वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में से कोई बिना आए नहीं रहता।
हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?

एक साल में बाइबल:
  • मीका ६, ७
  • प्रकाशितवाक्य १३