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Saturday, May 14, 2011

बचकर भागने से समस्या

हमारे पालतु कुत्ते पर बहुत से पिस्सु हो गए। हमने उन्हें दूर करने के लिए पिस्सुओं के शैम्पू से उसे नहलाया, पिस्सु मारने वाले पाउडर को उस पर छिड़का और उसके बिस्तर को धुआँ दिया। हमने सोचा कि हम ने समस्या पर विजय पा ली है, लेकिन शीघ्र ही पिस्सु फिर दिखने लगे। ऐसा कई बार हुआ। हम अचंभित थे कि कहाँ से आ रहे थे ये पिस्सु? उसके भोजन से? उसके बिस्तर से? क्या हम से? नहीं, इन में से किसी से भी नहीं। हमारा कुत्ता अभी हाल ही में ’व्यसक’ हुआ था और वह अपने प्रत्येक नए आकर्षण की ओर भागने के लिए तत्पर रहता था। जैसे ही उसे दरवाज़ा ज़रा सा भी खुला मिलता, वह तुरंत अपनी मस्ती मिटाने के लिए बहर भाग जाता। फिर हम चाहे उसे कितना ही पुकारें, उसे बुलाएं या धमकाएं, वह हमारी कदापि नहीं सुनता था। हर अवसर पर वह बाहर भागता और समस्याओं के साथ वापस लौटता - अपने लिए भी और हमारे लिए भी।

इससे कुछ अधिक गंभीर रूप में, दाउद ने अपनी अदम्य लालसाओं और हठ पूर्वक करी गई गलतियों के दुषपरिणाम भोगे। जब उस पर परमेश्वर का हाथ भारी हुआ तो उसने अपनी गलती को पहचाना, और यह भी जाना कि परमेश्वर उसके साथ ऐसा उसे सुधारने के लिए और उसके कुकर्मों के दुषपरिणामों को उससे दूर करने के लिए कर रहा है (भजन ३८:२-५)।

यदि कोई कुत्ता भाग निकले और समस्याएं उत्पन्न कर ले तो उसे रोकने के लिए हम शायद ही कुछ कर पाएं, क्योंकि वह तो अपने नैसर्गिक गुण के वशिभूत है। लेकिन जब हम परमेश्वर से भागकर अपने ऊपर समस्याएं ले आएं, तो हमारे लिए परमेश्वर ही से सहायता है।

दाउद की तरह हम अपने ऊपर हो रहे परमेश्वर के भारी हाथ को पहचान कर उससे क्षमा मांग सकते हैं, और एक नई शुरूआत कर सकते हैं। इससे भी बेहतर है कि इसके पहले कि हमें परमेश्वर के दण्ड का सामना करना पड़े, हम पाप अंगीकार और पश्चाताप के साथ उसके पास आ जाएं।

परमेश्वर से भागने से कभी समस्या का समाधान नहीं होता। - मार्ट डी हॉन


आज्ञाकारिता का एक छोटा सा कदम आशीर्वाद की ओर एक बड़ी छलांग है।

मेरी मूढ़ता के कारण से मेरे कोड़े खाने के घाव बसाते हैं और सड़ गए हैं। मैं बहुत दुखी हूं और झूक गया हूं; दिन भर मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं। - भजन ३८:५, ६

बाइबल पाठ: भजन ३८

Psa 38:1 हे यहोवा क्रोध में आकर मुझे झिड़क न दे, और न जलजलाहट में आकर मेरी ताड़ना कर!
Psa 38:2 क्योंकि तेरे तीर मुझ में लगे हैं, और मैं तेरे हाथ के नीचे दबा हूं।
Psa 38:3 तेरे क्रोध के कारण मेरे शरीर में कुछ भी आरोग्यता नहीं, और मेरे पाप के कारण मेरी हडि्डयों में कुछ भी चैन नहीं।
Psa 38:4 क्योंकि मेरे अधर्म के कामों में मेरा सिर डूब गया, और वे भारी बोझ की नाई मेरे सहने से बाहर हो गए हैं।
Psa 38:5 मेरी मूढ़ता के कारण से मेरे कोड़े खाने के घाव बसाते हैं और सड़ गए हैं।
Psa 38:6 मैं बहुत दुखी हूं और झूक गया हूं; दिन भर मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं।
Psa 38:7 क्योंकि मेरी कमर में जलन है, और मेरे शरीर में आरोग्यता नहीं।
Psa 38:8 मैं निर्बल और बहुत ही चूर हो गया हूं; मैं अपने मन की घबराहट से कराहता हूं।
Psa 38:9 हे प्रभु मेरी सारी अभिलाषा तेरे सम्मुख है, और मेरा कराहना तुझ से छिपा नहीं।
Psa 38:10 मेरा हृदय धड़कता है, मेरा बल घटता जाता है और मेरी आंखों की ज्योति भी मुझ से जाती रही।
Psa 38:11 मेरे मित्र और मेरे संगी मेरी विपत्ति में अलग हो गए, और मेरे कुटुम्बी भी दूर जा खड़े हुए।
Psa 38:12 मेरे प्राण के ग्राहक मेरे लिये जाल बिछाते हैं, और मेरी हानि के यत्न करने वाले दुष्टता की बातें बोलते, और दिन भर छल की युक्ति सोचते हैं।
Psa 38:13 परन्तु मैं बहिरे की नाई सुनता ही नहीं, और मैं गूंगे के समान मूंह नहीं खोलता।
Psa 38:14 वरन मैं ऐसे मनुष्य के तुल्य हूं जो कुछ नहीं सुनता, और जिसके मुंह से विवाद की कोई बात नहीं निकलती।
Psa 38:15 परन्तु हे यहोवा, मैं ने तुझ ही पर अपनी आशा लगाई है; हे प्रभु, मेरे परमेश्वर, तू ही उत्तर देगा।
Psa 38:16 क्योंकि मैं ने कहा, ऐसा न हो कि वे मुझ पर आनन्द करें जो, जब मेरा पांव फिसल जाता है, तब मुझ पर अपनी बड़ाई मारते हैं।
Psa 38:17 क्योंकि मैं तो अब गिरने ही पर हूं, और मेरा शोक निरन्तर मेरे साम्हने है।
Psa 38:18 इसलिये कि मैं तो अपने अधर्म को प्रगट करूंगा, और अपने पाप के कारण खेदित रहूंगा।
Psa 38:19 परन्तु मेरे शत्रु फुर्तीले और सामर्थी हैं, और मेरे विरोधी बैरी बहुत हो गए हैं।
Psa 38:20 जो भलाई के बदले में बुराई करते हैं, वह भी मेरे भलाई के पीछे चलने के कारण मुझ से विरोध करते हैं।
Psa 38:21 हे यहोवा, मुझे छोड़ न दे! हे मेरे परमेश्वर, मुझ से दूर न हो!
Psa 38:22 हे यहोवा, हे मेरे उद्धारकर्ता, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर!

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा ४-६
  • लूका २४:३६-५३

स्वच्छ हृदय की प्रार्थनाएं

पश्चिमी देश से आया एक पर्यटक एक मध्यपूर्व के देश में एक घर में आमंत्रित किया गया। उस घर में आने पर उसने देखा कि घर के एक सेवक ने उस घर के बेटे को एक बर्तन में पानी और एक गलीचा दिया। बेटे ने तीन बार अपने हाथ, पैर, मूँह, गला और कान धोए फिर गलीचा बिछा कर वह उसपर घुटने टेक कर बैठ गया और अपना सर झुका कर प्रार्थना करने लगा।

बाइबल के पुराने नियम में परमेश्वर के सन्मुख आते समय अपने आप को धो कर साफ कर लेने के लिए निर्देश हैं; ये इस बात को याद दिलाने के लिए थे कि परमेश्वर के सन्मुख स्व्च्छ मन से आएं, किसी पाप को मन में छुपाए हुए नहीं। दाउद ने भजन ६६ में लिखा, "यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता" (भजन ६६:१८); एक अन्य भजन में वह कहता है, "यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्र स्थान में कौन खड़ा हो सकता है? जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिस ने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है। वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करने वाले परमेश्वर की ओर से धर्मी ठहरेगा" (भजन २४:३-५)।

जो लोग पाप में बने हुए हैं, उनका यह आशा रखना कि परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं की ओर कान लगाएगा और उनका उत्तर देगा मूर्खता है। धर्मी मनुष्यों की प्रार्थनाएं ही प्रभावी प्रार्थनाएं होती हैं (याकूब ५:१६)। परमेश्वर का वचन हमें आश्वस्त करता है कि, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें स