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Saturday, May 28, 2011

परमेश्वर पर आशा

रेडियो बाइबल क्लास के दफतर में एक पत्र आया जिस पर भेजने वाले ने न अपना नाम लिखा था और न उसका कोई पता था। पत्र में लिखा था कि, "जब तक यह पत्र आपके पास पहुँचेगा, मैं आत्म हत्या कर चुका होऊँगा। मैंने दो वर्ष पहले मसीह को ग्रहण किया था; कुछ समय से मेरा संसार मेरे चारों ओर बिखरता जा रहा है और अब मुझ में और सहने की शक्ति नहीं बची है। मैं अब पुनः बुरी आदतों में तो जा नहीं सकता और न ही फिर से बुरा बन सकता हूँ। मुझ में और परमेश्वर में दूरियाँ आ गई हैं....अब प्रभु ही मेरी सहायता करे।"

मसीही विश्वासी भी ऐसी घोर निराशा के शिकार हो सकते हैं कि वे अपने जीवन को ही समाप्त कर देना चाहें। १ राजा १९ अध्याय में हम पढ़ते हैं कि एलिय्याह शारीरिक और आत्मिक रीति से इतना थक गया कि उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी कि वह उसके प्राण ले ले। यद्यपि यह आत्म हत्या नहीं है, लेकिन उसकी यह प्रार्थना वैसी ही निराशा से उत्पन्न हुई। लेकिन परमेश्वर ने एलिय्याह की प्रार्थना का उतर उसे निराशा से निकालने के द्वारा दिया। परमेश्वर ने एलियाह को भोजन और निद्रा द्वारा पहले विश्राम दिया, फिर उसकी शिकायत सुनी, फिर धीमी शाँत आवाज़ में उससे बात करके, उसे एक नया कार्य सौंप कर परमेश्वर ने उसे पुनः प्रोत्साहित किया और कोमलता से उसकी गलती को सुधारा।

घोर निराशा में पड़कर ही लोग आत्म हत्या करते हैं। उनके लिए सत्य का स्वरूप इतना बिगड़ चुका होता है कि वे अपने इस दुष्कार्य के स्वार्थ और पाप को पहचान नहीं पाते। लेकिन परमेश्वर उन्हें फिर से स्थापित करना चाहता है। उन्हें बहाल करने के लिए कभी कभी वह स्वयं ही उनसे बातें करता है, परन्तु अधिकांशतः वह अपने संवेदनशील और परवाह करने वाले लोगों को निराश जनों की सहायता के लिए भेजता है।

प्रभु यीशु मसीह ने कहा, "पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍तकाल तक न मरेगा; मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (युहन्ना ११:२५, २६; १४:६)। निराशा में पड़े लोगों को मसीह यीशु में मिलने वाली आनन्त आशा का सन्देश दे कर मसीह के प्रत्येक विश्वासी निराश लोगों की सहायता के लिए परमेश्वर की आशा बन सकते हैं। - डेनिस डी हॉन


जब हम विनाश के सबसे निकट होते हैं, परमेश्वर की सहायता भी हमारे सबसे निकट होती है।

वहां उस ने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ। - १ राजा १९:४


बाइबल पाठ: १ राजा १९:१-१०

1Ki 19:1 तब अहाब ने ईज़ेबेल को एलिय्याह के सब काम विस्तार से बताए कि उस ने सब नबियों को तलवार से किस प्रकार मार डाला।
1Ki 19:2 तब ईज़ेबेल ने एलिय्याह के पास एक दूत के द्वारा कहला भेजा, कि यदि मैं कल इसी समय तक तेरा प्राण उनका सा न कर डालूं तो देवता मेरे साथ वैसा ही वरन उस से भी अधिक करें।
1Ki 19:3 यह देख एलिय्याह अपना प्राण लेकर भागा, और यहूदा के बेशॅबा को पहुंच कर अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया।
1Ki 19:4 और आप जंगल में एक दिन के मार्ग पर जाकर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, वहां उस ने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ।
1Ki 19:5 वह झाऊ के पेड़ तले लेट कर सो गया और देखो एक दूत ने उसे छूकर कहा, उठकर खा।
1Ki 19:6 उस ने दृष्टि करके क्या देखा कि मेरे सिरहाने पत्थरों पर पकी हुई एक रोटी, और एक सुराही पानी धरा है; तब उस ने खाया और पिया और फिर लेट गया।
1Ki 19:7 दूसरी बार यहोवा का दूत आया और उसे छूकर कहा, उठकर खा, क्योंकि तुझे बहुत भारी यात्रा करनी है।
1Ki 19:8 तब उस ने उठकर खाया पिया, और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन रात चलते चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा।
1Ki 19:9 वहां वह एक गुफा में जाकर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?
1Ki 19:10 उस ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास ४-६
  • यूहन्ना १०:२४-४२