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बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

महान एवं महिमामय


   यरुशलेम में परमेश्वर यहोवा के मन्दिर में गाए जाने वाले एक स्तुतिगीत के शब्द "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं" (भजन ४६:१०) परमेश्वर की महानता पर मनन करने को स्मरण कराते हैं। परमेश्वर की महिमा करते रहना और उसकी महानता को स्मरण रखना उसके प्रति सही रवैया बनाए रखने और अपने जीवनों में उसे उचित प्राथमिक स्थान पर बनाए रखने में हमारी बहुत सहायता करता है। परमेश्वर की महिमा और अपने जीवनों में उसे महान रखने के लिए हम उसके गुण, उसके नाम और उसके व्यक्तित्व को आधार बना सकते हैं।

   उसके गुण - यहोवा पूर्णतः विश्वासयोग्य, अनन्त, सर्व-ज्ञानी, सर्व-सामर्थी, सर्व-विद्यमान, अपरिवर्तनीय, अटल, परम-पवित्र, कृपालु, धीरजवन्त, न्यायी, निष्पक्ष, अपरिमित परमेश्वर है। वह पूर्णतः सिद्ध, धर्मी, बुद्धिमान, महिमामय है। वह अपनी सृष्टि से प्रेम रखता है, उनके साथ व्यक्तिगत रीति पर संपर्क रखता है, उनके प्रति करुणामय रहता है और उनके लिए सुलभ एवं उपलब्ध रहता है। वह त्रिएक तथा स्वयंभू है।

   उसके नाम - परमेश्वर यहोवा को उसके वचन बाइबल में अनेक संज्ञाएं दी गईं हैं जो उसके गुणों को दिखाती हैं। बाइबल उसे सृजनहार, पालनहार, तारणहार, प्रेम, ज्योति, उद्धारकर्ता, रक्षक, अच्छा चरवाहा, प्रभु, पिता, शिक्षक भी कहती है। उसे सांत्वना देने वाला, महान, न्यायी, ’मैं हूँ’, सर्वशक्तिमान कहकर भी संबोधित किया गया है।

   उसका व्यक्तित्व - यहोवा शत्रु शैतान के विरुद्ध हमारी ढाल है; वह हमारी सामर्थ है; वह हमारा मार्गदर्शक है; वह संकट के समय हमारा दृढ़ गढ़ है जो अपने बच्चों की सुरक्षा अपनी आँख की पुतली के समान करता है, उनके लिए हर आवश्यक वस्तु उपलब्ध कराता है, उनकी सामर्थ से बाहर किसी परीक्षा में उन्हें पड़ने नहीं देता और प्रतिपल उनकी देखभाल करता रहता है क्योंकि वह ना तो कभी ऊँघता है और ना कभी सोता है।

   परमेश्वर के गुणों पर मनन करें; उसके नामों पर विचार करें; उसके व्यक्तित्व को सराहें। उसे आदर दें, उसकी उपासना करें, उससे प्रेम करें, उसे अपने जीवनों में प्रथम स्थान दें, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहें, उसे अपने जीवनों द्वारा संसार के समक्ष महान करें। यही सच्ची आराधना है, यही मसीही विश्वासी के जीवन का उद्देश्य है। - डेव ब्रैनन


जितने प्राणी हैं सब के सब याह की स्तुति करें! याह की स्तुति करो! - भजन १५०:६

...मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन ४६:१०

बाइबल पाठ: भजन ४६
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १४ 
  • मत्ती २६:५१-७५

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

कहा सो करा

जुआ खेलने की लत से चाहे हम दूर हों परन्तु जुआ खेलने की प्रवृति से कोई भी अनजान नहीं है। जुए के कई रूप हो सकते हैं और इन से छेड़-छाड़ से हमें रोमांच और उत्तेजना मिल सकती है, लेकिन हर प्रकार के जुए में सदा ही जीतने से कहीं अधिक हार की संभावनाएं निहित रहती हैं। एक अनुमान के अनुसार ६० लाख से अधिक अमेरीकी मानसिक तौर से जुए की लत के शिकार हैं। प्रतिदिन वे थोड़े समय की उत्तेजना और रोमांच के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने से नहीं हिचकिचाते।

कुछ मसीही विश्वासियों को इसी प्रकार की समस्या है - आत्मिक जुआ खेलने की प्रवृति। वे परमेश्वर द्वारा पाप और अनैतिक व्यवहार के लिए करी गई उसके न्याय की भविष्यवाणी के विरुद्ध दांव लगाते हैं। उन्हें लगता है कि वे संसार के साथ समझौते और सांसारिक बातों तथा व्यवहार का भी आनन्द ले सकते हैं तथा अपने आत्मिक जीवन की आशीषों को भी बनाए रख सकते हैं।

हम जानते हैं कि भाग्य जैसा कुछ नहीं होता, जो है वह परमेश्वर की इच्छा है - अगर परमेश्वर की इच्छा में बने रहेंगे तो भलाई और आशीषें पाएंगे अन्यथा परशानियाँ और मुसीबतें; लेकिन फिर भी हम पाप से आनन्द लेने में बाज़ नहीं आते। खतरा मोल लेने के रोमांच के वशीभूत हम परमेश्वर के नियमों के विरुद्ध दांव लगा कर हम उस से जीत सकने की आशा बनाए रखते हैं।

परमेश्वर ने कभी हमें किसी प्रकार के कोई सन्देह का स्थान नहीं दिया है कि उसका वचन पूरा होगा कि नहीं - यह संभावना नहीं अवश्यंभावी है। इसमें सन्देह का कोई स्थान नहीं कि जो कुछ परमेश्वर ने कहा है, वह ठीक वैसे ही पूरा भी होगा। इसलिए परमेश्वर के वचन के विपरीत अपनी समझ, बुद्धि, ज्ञान तथा प्रतिभा पर भरोसा रखना मूर्खता है।

पाप के क्षणिक आनन्द की संभावन के लिए दांव लगाने की बजाए हमें परमेश्वर के विश्वास योग्य वचन पर सम्पूर्ण भरोसा रखना चाहिए जिससे अनन्तकाल की आशीषें हमारे साथ बनी रहें, क्योंकि परमेश्वर का गुण है कि जो वह कहता है, वही करता भी है। - मार्ट डी हॉन


संसार का इतिहास गवाह कि परमेश्वर ने जो भी कहा है, वह किया भी है।

मैं जगत के लोगों को उनकी बुराई के कारण, और दुष्टों को उनके अधर्म का दण्ड दूंगा; मैं अभिमानियों के अभिमान को नाश करूंगा और उपद्रव करने वालों के घमण्ड को तोडूंगा। - यशायाह १३:११


बाइबल पाठ: यशायाह १३

Isa 13:1 बाबुल के विषय की भारी भविष्यवाणी जिसको आमोस के पुत्र यशायाह ने दर्शन में पाया।
Isa 13:2 मुंड़े पहाड़ पर एक झंडा खड़ा करो, हाथ से सैन करो और उन से ऊंचे स्वर से पुकारो कि वे सरदारों के फाटकों में प्रवेश करें।
Isa 13:3 मैं ने स्वयं अपने पवित्र किए हुओं को आज्ञा दी है, मैं ने अपने क्रोध के लिये अपने वीरों को बुलाया है जो मेरे प्रताप के कारण प्रसन्न हैं।
Isa 13:4 पहाड़ों पर एक बड़ी भीड़ का सा कोलाहल हो रहा है, मानो एक बड़ी फौज की हलचल हों। राज्य राजय की इकट्ठी की हुई जातियां हलचल मचा रही हैं। सेनाओं का यहोवा युद्ध के लिये अपनी सेना इकट्ठी कर रहा है।
Isa 13:5 वे दूर देश से, आकाश के छोर से आए हैं, हाँ, यहोवा अपने क्रोध के हथियारों समेत सारे देश को नाश करने के लिये आया है।
Isa 13:6 हाय-हाय करो, क्योंकि यहोवा का दिन समीप है; वह सर्वशक्तिमान की ओर से मानो सत्यानाश करने के लिये आता है।
Isa 13:7 इस कारण सब के हाथ ढ़ीले पड़ेंगे, और हर एक मनुष्य का हृदय पिघल जाएगा,
Isa 13:8 और वे घबरा जाएगें। उनको पीड़ा और शोक होगा; उनको जच्चा की सी पीड़ाएं उठेंगी। वे चकित होकर एक दूसरे को ताकेंगे, उनके मुंह जल जायेंगे।
Isa 13:9 देखो, यहोवा का वह दिन रोष और क्रोध और निर्दयता के साथ आता है कि वह पृथ्वी को उजाड़ डाले और पापियों को उस में से नाश करे।
Isa 13:10 क्योंकि आकाश के तारागण और बड़े बड़े नक्षत्र अपना प्रकाश न देंगे, और सूर्य उदय होते होते अन्धेरा हो जाएगा, और चन्द्रमा अपना प्रकाश न देगा।
Isa 13:11 मैं जगत के लोगों को उनकी बुराई के कारण, और दुष्टों को उनके अधर्म का दण्ड दूंगा; मैं अभिमानियों के अभिमान को नाश करूंगा और उपद्रव करने वालों के घमण्ड को तोडूंगा।
Isa 13:12 मैं मनुष्य को कुन्दन से, और आदमी को ओपीर के सोने से भी अधिक महंगा करूंगा।
Isa 13:13 इसलिये मैं आकाश को कंपाऊंगा, और पृथ्वी अपने स्थान से टल जाएगी, यह सेनाओं के यहोवा के रोष के कारण और उसके भड़के हुए क्रोध के दिन होगा।
Isa 13:14 और वे खदेड़े हुए हरिण, वा बिन चरवाहे की भेड़ों की नाईं अपने अपने लोगों की ओर फिरेंगे, और अपने अपने देश को भाग जाएंगे।
Isa 13:15 जो कोई मिले सो बेधा जाएगा, और जो कोई पकड़ा जाए, वह तलवार से मार डाला जाएगा।
Isa 13:16 उनके बाल-बच्चे उनके साम्हने पटक दिए जाएंगे और उनके घर लूटे जाएंगे, और उनकी स्त्रियां भ्रष्ट की जाएंगी।
Isa 13:17 देखो, मैं उनके विरूद्ध मादी लोगों को उभारूंगा जो न तो चान्दी का कुछ विचार करेंगे और न सोने का लालच करेंगे।
Isa 13:18 वे तीरों से जवानों को मारेंगे, और बच्चों पर कुछ दया न करेंगे, वे लड़कों पर कुछ तरस न खाएंगे।
Isa 13:19 और बाबुल जो सब राज्यों का शिरोमणि है, और जिस की शोभा पर कसदी लोग फूलते हैं, वह ऐसा हो जाएगा जैसे सदोम और अमोरा, जब परमेश्वर ने उन्हें उलट दिया था।
Isa 13:20 वह फिर कभी न बसेगा और युग युग उस में कोई वास न करेगा; अरबी लोग भी उस में डेरा खड़ा न करेंगे, और न चरवाहे उस में अपने पशु बैठाएंगे।
Isa 13:21 वहां जंगली जन्तु बैठेंगे, और उल्लू उन के घरों में भरे रहेंगे; वहां शुतुर्मुर्ग बसेंगे, और छगलमानस वहां नाचेंगे। उस नगर के राज-भवनों में हुंडार,
Isa 13:22 और उसके सुख-विलास के मन्दिरों में गीदड़ बोला करेंगे; उसके नाश होने का समय निकट आ गया है, और उसके दिन अब बहुत नहीं रहे।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ३१-३२०
  • प्रेरितों २३:१६-३५

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

बोया सो काटोगे

लेखक तथा कैदख़ानों की दशा में सुधार में लगे सामजिक कार्यकर्ता चार्ल्स कोल्सन ने अन्य देशों के लिए जासूसी करने में लगे अमेरीकियों की संख्या में आक्समत वृद्धि से संबंधित एक चर्चा के दौरान कहा कि जो अमेरिका ने बोया है अब वह उसी की कटनी काट रहा है। मध्य बीसवीं शताब्दी के बाद अपने विज्ञान और आर्थिक समृद्धि के नशे में अधिकांश अमेरीकी नागरिकों ने परमेश्वर की मौजूदगी तथा महत्व को त्याग दिया। ना केवल उन्होंने परमेश्वर के अस्तित्व का इन्कार किया वरन उसके द्वारा स्थापित नैतिक मान्दण्डों को भी मानने से इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि वे स्वयं निर्धारित करेंगे कि क्या सही है और क्या गलत। इसके लिए उन्हें किसी अन्य से कुछ सीखने की आवश्यक्ता नहीं है। उनके लिए देशभक्ति, कर्तव्य, वफादारी, भक्ति आदि व्यर्थ बातें हैं जो उनके परिहास का विष्य बनीं। लेकिन आज अमेरीका उनके द्वारा लिए गए निर्ण्यों का कटु प्रतिफल भोग रहा है - अनगिनित गर्भपात, तलाक और टूटे हुए घर-परिवार, परसपर अविश्वास तथा समाज में बढ़ती हुई हिंसा, युवकों में बढ़ती हुई नशे की लत और आत्म हत्याएं आदि सब एक बिखरे, अस्थिर और परमेश्वर विहीन समाज को दिखा रहे हैं जो अपनी दिशा खो चुका है और अनैतिकता की ढाल पर अपने विनाश की ओर तेज़ी से लुढ़कता जा रहा है - क्योंकि उन्होंने अपने बाप-दादों के परमेश्वर और उसके नियमों तथा अपने देश की स्थापना और संविधान बाइबल के आधार को त्याग कर अपना मार्ग और अपने नियम स्वयं तय करने का निर्णय लिया।

बाइबल के पुराने नियम की एक छोटी सी पुस्तक - ओबाद्याह, जिसमें केवल एक ही अध्याय है, में परमेश्वर ने ओबाद्याह भविष्यद्वक्ता द्वारा एदोम के निवासियों को चेतावनी दी - जो बोया है वही काटोगे। उन के शराब और राग रंग के भोज मनाए जाने, उन के घमंड तथा अत्याचार के कारण परमेश्वर ने उन्हें चिताया कि शीघ्र ही उसका न्याय उन पर पड़ने वाला है और फिर वे नशे की नहीं वरन परमेश्वर के प्रकोप की मदिरा पीएंगे। यह भविष्यवाणी थोड़े ही समय बाद पूरी हुई जब एदोम अन्य जातियों से युद्ध में सदा के लिए विनाश में चला गया।

बोने और काटने के मूल सिद्धांत को हमें कभी भूलना नहीं चाहिए। जब हम परमेश्वर की दृष्टि में भला करते हैं तो परमेश्वर से आशीष पाते हैं, और जब वह करते हैं जो उसकी दृष्टि में बुरा है तो उसके न्याय का सामना करते हैं। परमेश्वर का यह सिद्धांत समस्त संसार के जीवन के ताने-बाने में बुना हुआ है। बाइबल के परमेश्वर और उसके नियमों को मानने या ना मानने से यह सिद्धांत किसी के लिए बदलता नहीं, सदा समान रूप से कार्यकारी रहता है; और न केवल व्यक्तियों वरन राष्ट्रों पर भी समान रूप से लागू होता है। परमेश्वर और उसके नियमों का परित्याग करना एवं इस मूल सिद्धांत की अवहेलना करना, अपने ही हाथों अपनी मुसीबत को दावत देना है।

इसे चाहे भविष्य के न्याय की चेतावनी समझें अथवा आती भलाई का वायदा - जैसा बोएंगे वैसा ही काटेंगे। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


जो कांटे बोते हैं उन्हें फूल चुनने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

क्योंकि सारी अन्य जातियों पर यहोवा के दिन का आना निकट है। जैसा तू ने किया है, वैसा ही तुझ से भी किया जाएगा, तेरा व्यवहार लौट कर तेरे ही सिर पर पड़ेगा। - ओबाद्याह १:१५


बाइबल पाठ: ओबाद्याह

Oba 1:1 ओबद्याह का दर्शन। हम लोगों ने यहोवा की ओर से समाचार सुना है, और एक दूत अन्य जातियों में यह कहने को भेजा गया है:
Oba 1:2 उठो! हम उस से लड़ने को उठें! मैं तुझे जातियों में छोटा कर दूंगा, तू बहुत तुच्छ गिना जाएगा।
Oba 1:3 हे पहाड़ों की दरारों में बसने वाले, हे ऊंचे स्थान में रहने वाले, तेरे अभिमान ने तुझे धोखा दिया है; तू मन में कहता है,
Oba 1:4 कौन मुझे भूमि पर उतार देगा? परन्तु चाहे तू उकाब की नाईं ऊंचा उड़ता हो, वरन तारागण के बीच अपना घोंसला बनाए हो, तौभी मैं तुझे वहां से नीचे गिराऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।
Oba 1:5 यदि चोर-डाकू रात को तेरे पास आते, (हाय, तू कैसे मिटा दिया गया है!) तो क्या वे चुराए हुए धन से तृप्त होकर चले न जाते? और यदि दाख के तोड़ने वाले तेरे पास आते, तो क्या वे कहीं कहीं दाख न छोड़ जाते?
Oba 1:6 परन्तु एसाव का धन कैसे खोज कर लूटा गया है, उसका गुप्त धन कैसे पता लगा लगा कर निकाला गया है!
Oba 1:7 जितनों ने तुझ से वाचा बान्धी थी, उन सभों ने तुझे सिवाने तक ढकेल दिया है; जो लोग तुझ से मेल रखते थे, वे तुझ को धोखा देकर तुझ पर प्रबल हुए हैं, वे तेरी रोटी खाते हैं, वे तेरे लिये फन्दा लगाते हैं-- उस में कुछ समझ नहीं है।
Oba 1:8 यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं उस समय एदोम में से बुद्धिमानों को, और एसाव के पहाड़ में से चतुराई को नाश न करूंगा?
Oba 1:9 और हे तेमान, तेरे शूरवीरों का मन कच्चा न हो जाएगा, और यों एसाव के पहाड़ पर का हर एक पुरूष घात होकर नाश हो जाएगा।
Oba 1:10 हे एसाव, एक उपद्रव के कारण जो तू ने अपने भाई याकूब पर किया, तू लज्जा से ढंपेगा और सदा के लिये नाश हो जाएगा।
Oba 1:11 जिस दिन परदेशी लोग उसकी धन सम्पत्ति छीनकर ले गए, और बिराने लोगों ने उसके फाटकों से घुस कर यरूशलेम पर चिट्ठी डाली, उस दिन तू भी उन में से एक था।
Oba 1:12 परन्तु तुझे उचित न था कि तू अपने भाई के दिन में, अर्थात उसकी विपत्ति के दिन में उसकी ओर देखता रहता, और यहूदियों के नाश होने के दिन उनके ऊपर आनन्द करता, और उनके संकट के दिन बड़ा बोल बोलता।
Oba 1:13 तुझे उचित न था कि मेरी प्रजा की विपत्ति के दिन तू उसके फाटक से घुसता, और उसकी विपत्ति के दिन उसकी धन सम्पत्ति पर हाथ लगाता।
Oba 1:14 तुझे उचित न था कि तिरमुहाने पर उसके भागने वालों को मार डालने के लिये खड़ा होता, और संकट के दिन उसके बचे हुओं को पकड़ाता।
Oba 1:15 क्योंकि सारी अन्य जातियों पर यहोवा के दिन का आना निकट है। जैसा तू ने किया है, वैसा ही तुझ से भी किया जाएगा, तेरा व्यवहार लौट कर तेरे ही सिर पर पड़ेगा।
Oba 1:16 जिस प्रकार तू ने मेरे पवित्र पर्वत पर पिया, उसी प्रकार से सारी अन्य जातियां लगातार पीती रहेंगी, वरन वे सुड़क-सुड़क कर पीएंगी, और एसी हो जाएंगी जैसी कभी हुई ही नहीं।
Oba 1:17 परन्तु उस समय सिय्योन पर्वत पर बचे हुए लोग रहेंगे, ओर वह पवित्रस्थान ठहरेगा और याकूब का घराना अपने निज भागों का अधिकारी होगा।
Oba 1:18 तब याकूब का घराना आग, और यूसुफ का घराना लौ, और एसाव का घराना खूंटी बनेगा और वे उन में आग लगा कर उन को भस्म करेंगे, और एसाव के घराने का कोई न बचेगा; क्योंकि यहोवा ही ने ऐसा कहा है।
Oba 1:19 दक्खिन देश के लोग एसाव के पहाड़ के अधिकारी हो जाएंगे, और नीचे के देश के लोग पलिश्तियों के अधिकारी होंगे और यहूदी, एप्रैम और समरिया के देहात को अपने भाग में कर लेंगे, और बिन्यामीन गिलाद का अधिकारी होगा।
Oba 1:20 इस्राएलियों के उस दल में से जो लोग बंधुआई में जा कर कनानियों के बीच सारपत तक रहते हैं, और यरूशलेमियों में से जो लोग बंधुआई में जाकर सपाराद में रहते हैं, वे सब दक्खिन देश के नगरों के अधिकारी हो जाएंगे।
Oba 1:21 और उद्धार करने वाले एसाव के पहाड़ का न्याय करने के लिये सिय्योन पर्वत पर चढ़ आएंगे, और राज्य यहोवा ही का हो जाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन २९-३०
  • प्रेरितों २३:१-१५

बुधवार, 20 जुलाई 2011

नैतिक खराई

आप का क्या विचार है? क्या आप एक ऐसे व्यक्ति को भला मानेंगे जो किसी बेगुनाह की निर्मम हत्या होती देख कर न तो विचिलित हो और ना ही हत्यारे को दण्ड दिलाने के लिए कोई सहयोग करे? क्या आप एक ऐसी सरकार और सामाजिक पद्वति को भला मानेंगे जो प्रत्येक को उसकी मन मर्ज़ी करने की स्वतंत्रता देती है परन्तु किसी को किसी बात के लिए जवाबदेह नहीं मानती, चाहे उनके कारण औरों का कैसा भी और कितना ही नुकसान क्यों न हो रहा हो? शायद ही कोई होगा जो समाज के प्रति व्यक्ति की ज़िम्मेदारी, व्यवहार और जवाबदेही को गलत या अनुचित मानता हो और इस जवाबदेही को निभाने का अंकुश रखने वाले सामाजिक अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्य पालन को भी अनुचित और गलत मानता हो। क्या न्याय और प्रेम परस्पर विरोधी हैं? क्या एक सच्चा और खरा न्यायी, किसी से प्रेम नहीं कर सकता?

व्यक्तिगत रीति से मुझे ऐसे परमेश्वर पर विश्वास करने में परेशानी होगी जो न तो पाप से क्रोधित होता हो और ना ही उसके लिए किसी को कोई दण्ड देता हो।

पिछली सदी के विख्यात दार्शनिक बर्टरैण्ड रसल नरक के बारे में प्रभु यीशु की शिक्षाओं को पढ़ने से नास्तिक हो गए। वे ऐसा परमेश्वर चाहते थे जो कभी क्रोधित नहीं होता और ना ही किसी को दण्डित करता हो। आज का बाइबल पाठ बर्टरैण्ड रसल को कभी रास नहीं आता क्योंकि उस में परमेश्वर के उग्र और न्यायी रूप को दर्शाया गया है।

परमेश्वर ने हमें स्वेच्छा और स्वतंत्रता दी है, लेकिन साथ ही स्वतंत्रता को सही रीति से उपयोग में लाने के लिए अपने नियम भी दिए हैं जिनका पालन वह हमसे चाहता है। जब उसकी अनाज्ञाकारिता होती है और स्वतंत्रता का अनुचित प्रयोग होता है तो वह दण्ड से पहले चेतावनी भी देता है। परमेश्वर खरा और सच्चा न्यायी है, अपने द्वारा दी गई स्वतंत्रता के उपयोग के लिए वह जवाबदेही भी मांगता है।

नहूम के दिनों में निनेनवेह के लोग बहुत क्रूर और निष्ठुर थे तथा दूसरों पर भयानक अत्याचार ढाते थे। नहूम भविष्यद्वक्ता द्वारा परमेश्वर ने अपनी प्रजा इस्त्राएल को आशावासन दिलाया कि वह निनेनवह के लोगों की क्रूरता और निर्मम व्यवहार से परिचित है, उससे क्रोधित है और उनका न्याय करेगा तथा उचित दण्ड देगा।

मैं धन्यवादी हूँ कि मेरा परमेश्वर ऐसी खराई और न्याय के प्रति दृढ़ निश्चय रखता है। उसका यह गुण मुझे विश्वास दिलाता है कि मैं उस पर भरोसा रख सकता हूँ कि वह अपने सब वायदे पूरे करेगा और हर अन्याय का हिसाब लेगा तथा कोई अन्यायी उसके न्याय से कभी भी बचा नहीं रहे सकेगा। - हर्ब वौण्डर लुग्ट


परमेश्वर का न्याय चाहे तुरन्त न हो लेकिन अवश्यंभावी है।

यहोवा जल उठने वाला और बदला लेने वाला ईश्वर है; यहोवा बदला लेने वाला और जलजलाहट करने वाला है; यहोवा अपने द्रोहियों से बदला लेता है, और अपने शत्रुओं का पाप नहीं भूलता। - नहूम १:२

यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है। - नहूं १:७

बाइबल पाठ: नहूम १:१-१५

Nah 1:1 नीनवे के विषय में भारी वचन। एल्कोशी नहूम के दर्शन की पुस्तक।
Nah 1:2 यहोवा जल उठने वाला और बदला लेने वाला ईश्वर है; यहोवा बदला लेने वाला और जलजलाहट करने वाला है; यहोवा अपने द्रोहियों से बदला लेता है, और अपने शत्रुओं का पाप नहीं भूलता।
Nah 1:3 यहोवा विलम्ब से क्रोध करने वाला और बड़ा शक्तिमान है; वह दोषी को किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा। यहोवा बवंडर और आंधी में होकर चलता है, और बादल उसके पांवों की धूलि है।
Nah 1:4 उसके घुड़कने से महानद सूख जाते हैं, और समुद्र भी निर्जल हो जाता है, बाशान और कर्म्मैल कुम्हलाते और लबानोन की हरियाली जाती रहती है।
Nah 1:5 उसके स्पर्श से पहाड़ कांप उठते हैं और पहाडिय़ां गल जाती हैं; उसके प्रताप से पृथ्वी वरन सारा संसार अपने सब रहने वालों समेत थरथरा उठता है।
Nah 1:6 उसके क्रोध का साम्हना कौन कर सकता है? और जब उसका क्रोध भड़कता है, तब कौन ठहर सकता है? उसकी जलजलाहट आग की नाईं भड़क जाती है, और चट्टानें उसकी शक्ति से फट फटकर गिरती हैं।
Nah 1:7 यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है।
Nah 1:8 परन्तु वह उमड़ती हुई धारा से उसके स्थान का अन्त कर देगा, और अपने शत्रुओं को खदेड़ कर अन्धकार में भगा देगा।
Nah 1:9 तुम यहोवा के विरूद्ध क्या कल्पना कर रहे हो? वह तुम्हारा अन्त कर देगा, विपत्ति दूसरी बार पड़ने न पाएगी।
Nah 1:10 क्योंकि चाहे वे कांटों से उलझे हुए हों, और मदिरा के नशे में चूर भी हों, तौभी वे सूखी खूंटी की नाईं भस्म किए जाएंगे।
Nah 1:11 तुझ में से एक निकला है, जो यहोवा के विरूद्ध कल्पना करता और नीचता की युक्ति बान्धता है।
Nah 1:12 यहोवा यों कहता है, चाहे वे सब प्रकार के सामर्थी हों, और बहुत भी हों, तौभी पूरी रीति से काटे जाएंगे और शून्य हो जाएंगे। मैं ने तुझे दु:ख दिया है, परन्तु फिर न दूंगा।
Nah 1:13 क्योंकि अब मैं उसका जूआ तेरी गर्दन पर से उतार कर तोड़ डालूंगा, और तेरा बन्धन फाड़ डालूंगा।
Nah 1:14 यहोवा ने तेरे विषय में यह आज्ञा दी है कि आगे को तेरा वंश न चले, मैं तेरे देवालयों में से ढली और गढ़ी हुई मूरतों को काट डालूंगा, मैं तेरे लिये कबर खोदूंगा, क्योंकि तू नीच है।
Nah 1:15 देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनाने वाला और शान्ति का प्रचार करने वाला आ रहा है! अब हे यहूदा, अपने पर्व मान, और अपनी मन्नतें पूरी कर, क्योंकि वह ओछा फिर कभी तेरे बीच में होकर न चलेगा, और पूरी रीति से नाश हुआ है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन २६-२८
  • प्रेरितों २२

गुरुवार, 23 जून 2011

अधूरी तस्वीर

एक लड़का अपनी माँ के डेस्क पर बैठकर और माँ की कलम दवात लेकर बड़े ध्यान से अपने पालतु कुत्ते की तस्वीर बना रहा था। थोड़ी देर के बाद उसने कलम दवात रख दी और उठ कर जाने लगा। जाने से पहले उसने बड़े गर्व से अपनी माँ को वह तस्वीर दिखाई, माँ ने देख कर तस्वीर की प्रशंसा करी और कहा कि वाकई तसवीर उनके पलतु कुत्ते के समान लगती थी, लेकिन तभी माँ का ध्यान तस्वीर में एक बात की ओर गया और उसने विस्मय से अपने बेटे से पूछा, "अरे, उसकी दुम कहाँ है?" लड़के ने बड़ी लापरवाही से उत्तर दिया, "उसकी दुम तो अभी दवात में ही है।"

बाइबल कि न्यायियों की पुस्तक में रूबेन का गोत्र भी कुछ ऐसी ही पृवर्ति का था। जब इस्त्राएल की चौथी न्यायी दबोरा ने कनानियों पर प्राप्त इस्त्राएल की विजय के उपलक्ष में गीत गाया (न्यायियों ५:२-३१) तो उसने रूबेन के गोत्र का उल्लेख किया। उसने कहा कि "रूबेन की नदियों के पास बड़े बड़े काम मन में ठाने गए" (पद १५), लेकिन फिर साथ ही यह भी कहा कि "तू चरवाहों का सीटी बजाना सुनने को भेड़शालों के बीच क्यों बैठा रहा? रूबेन की नदियों के पास बड़े बड़े काम सोचे गए" (पद १६)। अर्थात रूबेन के लोग योजनाएं तो बहुत बनाते थे परन्तु उनको कार्यान्वित नहीं करते थे; उनके ध्यान इधर उधर हो जाते और योजनाएं धरी की धरी रह जाती थीं।

मसीही विश्वास के जीवन में भी यह बात अन्जानी नहीं है। कुछ विश्वासी भी ऐसे ही योजनाएं तो अनेक बनाते हैं किंतु उनको पूरा कम ही कर पाते हैं। एक आम बात जिसमें यह अधिकतर देखा जाता है वह है हमारा परमेश्वर के वचन को पढ़ने और सीखने का निर्णय, जिसकी अकसर अन्य गतिविधियों द्वारा अवहेलना हो जाती है। कुछ ऐसा ही हमारा प्रार्थना के समय के साथ भी होता है; हम कई बातों और लोगों के लिए प्रार्थना करने का निर्णय तो लेते हैं, कुछ समय तक करते भी हैं, फिर वे निर्णय ढीले पड़ जाते हैं, अन्य बातें प्राथमिकता ले लेती हैं और प्रार्थनाएं अधूरी रह जाती हैं।

हम जिस परमेश्वर की उपासाना करते हैं और जिसपर विश्वास रखते हैं वह कभी कुछ अधूरा नहीं छोड़ता। उसका हर कार्य सिद्ध और संपूर्ण होता है। हमारी योजनाएं कितनी भी अच्छी क्यों न हों, हमारे इरादे कितने भी उमदा क्यों न हों, यदि पूर्णतया कार्यान्वित नहीं होते तो वे कभी परमेश्वर को आदर और महिमा नहीं दे सकते।

किसी भी दुम को दवात में मत छोड़िए, अपने निर्णय की तस्वीर को सदा पूरा कीजिए। - पौल वैन गोर्डर


हम सही मार्ग पर हो सकते हैं, परन्तु मार्ग पर केवल बैठे रह जाने से ही मंज़िल नहीं मिल जाती।

यीशु ने उस से कहा; जो कोई अपना हाथ हल पर रख कर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं। - लूका ९:६२


बाइबल पाठ: लूका ९:५७-६२

Luk 9:57 जब वे मार्ग में चले जाते थे, तो किसी न उस से कहा, जहां जहां तू जाएगा, मैं तेरे पीछे हो लूंगा।
Luk 9:58 यीशु ने उस से कहा, लोमडिय़ों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं, पर मनुष्य के पुत्र को सिर धरने की भी जगह नहीं।
Luk 9:59 उस ने दूसरे से कहा, मेरे पीछे हो ले; उस ने कहा, हे प्रभु, मुझे पहिले जाने दे कि अपने पिता को गाड़ दूं।
Luk 9:60 उस ने उस से कहा, मरे हुओं को अपने मुर्दे गाड़ने दे, पर तू जा कर परमेश्वर के राज्य की कथा सुना।
Luk 9:61 एक और ने भी कहा; हे प्रभु, मैं तेरे पीछे हो लूंगा, पर पहिले मुझे जाने दे कि अपने घर के लोगों से विदा हो आऊं।
Luk 9:62 यीशु ने उस से कहा; जो कोई अपना हाथ हल पर रख कर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं।

एक साल में बाइबल:
  • एस्तर ९-१०
  • प्रेरितों ७:१-२१

मंगलवार, 21 जून 2011

अधूरा

कभी कभी जब मैं समुद्र तट पर सैर के लिए जाता हूँ तो रेत के बने कई अधूरे किले दिखाई देते हैं। संभवतः उन्हें बनाने वालों का ध्यान किसी दूसरी चीज़ की ओर आकर्शित हो गया होगा और उन्होंने अपना यह प्रयास अधूरा ही छोड़ दिया, और किसी अन्य बात में व्यस्त हो गए। अधूरे चित्र, अधूरी कलाकृतियाँ, अधूरे मकान, अधूरे लेख आदि सब गवाह हैं मनुष्य के बातों को अधूरा छोड़ देने की पृवर्त्ति के।

अपनी पुस्तक Intercepted Letters में विलियम मार्शल लिखते हैं, "एक ऐसे व्यक्ति के लिए जो स्वभाव से हर चीज़ को पूरा करना और पूरे होते देखना चाहता है यह अधूरेपन की पृवर्त्ति कितनी परेशान कर देने वाली होती है और प्रश्न उठाती है कि ये अधूरे टुकड़े कितने अधूरे जीवनों के भाग हैं? ऐसा अधूरेपन की पृवर्त्ति वाले व्यक्ति को अपने आप से पूछना चाहिए, ’अपने जीवन के परिश्रम को दिखाने के लिए मेरे पास क्या है?’ ऐसे में बस हम यही भरोसा रख सकते हैं कि हमारा परमेश्वर हमारे अधूरे प्रयासों को लेकर अपनी सिद्धता और परिपूर्णता में उन्हें ढाँप लेगा क्योंकि वह कुछ अधूरा नहीं छोड़ता, वह कभी चूक नहीं सकता।"

परमेश्वर और मनुष्यों में कितना बड़ा अन्तर है! सृष्टिकर्ता जो आरंभ करता है, उसे अवश्य पूरा भी करता है। उसकी सभी कारीगरी, बीते अनन्त में योजनाबद्ध हुई, समय के साथ आरंभ हुई और समय की पूर्ति के साथ भविष्य के अनन्त के लिए पूरी भी हो जाएगी और तब उसका हर एक विश्वासी, उस ही के स्वरूप में बदला हुआ होगा।

आज हम मसीह की समानता में आने और बढ़ने के लिए संघर्ष करते रहते हैं, लेकिन यह निश्वित है कि एक दिन हम अपने इस लक्षय तक पहुँच भी जाएंगे; क्योंकि परमेश्वर स्वयं अपने हर एक विश्वासी को तराश रहा है, अपने पुत्र की समानता में ढाल रहा है और जो उसने आरंभ किया है उसे वह पूरा भी करेगा क्योंकि वह कुछ अधूरा नहीं छोड़ता।

यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो निराश होकर हार कभी न माने, क्योंकि परमेश्वर आप में निरंतर कार्यरत है और आपको सम्पूर्णतः मसीह की समान्ता में ढाले बगैर वह आपको कभी अधूरा नहीं छोड़ेगा। आपका भविष्य आपकी किसी भी कलपना से भी कहीं अधिक महिमामय है। - पौल वैन गोर्डर


पापी का मन परिवर्तन क्षण भर में होने वाला आश्चर्यकर्म है; पापी से सन्त बनने की प्रक्रिया जीवन भर की मेहनत है।

और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिस ने तुम में अच्‍छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। - फिलिप्पियों १:६


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों १:१-११

Php 1:1 मसीह यीशु के दास पौलुस और तीमुथियुस की ओर से सब पवित्र लोगों के नाम, जो मसीह यीशु में होकर फिलिप्पी में रहते हैं, अध्यक्षों और सेवकों समेत।
Php 1:2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
Php 1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं।
Php 1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्‍द के साथ बिनती करता हूं।
Php 1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से लेकर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो।
Php 1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिस ने तुम में अच्‍छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा।
Php 1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्‍योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो।
Php 1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति करके तुम सब की लालसा करता हूं।
Php 1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।
Php 1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्‍चे बने रहो और ठोकर न खाओ।
Php 1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे।

एक साल में बाइबल:
  • एस्तर ३-५
  • प्रेरितों ५:२२-४२

शनिवार, 11 जून 2011

दर्पण

जटिल आपसी समस्याओं के कारण एक परिवार विभाजित हो गया। पारिवारिक उथल पुथल से परेशान उनका एक बेटा किसी अन्य के साथ रहने चला गया, और कुछ समय में वह उसे ही अपना घर समझने लगा। एक दिन टेलिविज़न पर खोए हुए बच्चों से संबंधित कार्यक्रम देखते समय हुए उसने अपनी तस्वीर को पहचाना और अपने असली परिवार की जनकारी देखी, तब उसे एहसास हुआ कि उसका वास्तविक परिवार और घर कहीं और है। उसने यह बात अपनी आया को बताई, आया ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया और कुछ समय के बाद वह बेटा अपने वासत्विक घर में अपने परिवार के साथ था।

यह घटना पढ़ कर मुझे बाइबल में २ राजा २२ अध्याय में वर्णित योशिय्याह राजा की याद आई। योशिय्याह एक भला राजा था, परमेश्वर का भय मानता था और वह अपने तथा अपने राज्य के आत्मिक जीवन के संबंध में निश्चिंत था कि वे सही मार्ग पर हैं। उसने परमेश्वर के भवन की सफाई करवाने के लिए पुरोहितों से कहा और उन्हें सफाई के समय वहाँ परमेश्वर के लिखित वचन की एक प्रति मिली। पुरोहित परमेश्वर के वचन की प्रति को योशिय्याह राजा के पास लाया और उसे परमेश्वर का वचन पढ़कर सुनाया। जब योशिय्याह ने परमेश्वर का वचन सुना और उसके समक्ष अपने आप को जाँचा तब उसे एहसास हुआ कि वह और उसकी प्रजा वास्तव में परमेश्वर से कितने दूर हैं और उसकी आज्ञाओं के उल्लंघन में जीवन व्यतीत कर रहे हैं - उनके पाप ने उन्हें परमेश्वर से दूर कर रखा है। योशिय्याह राजा ने अपनी वास्तविक दशा से व्यथित हो कर अपने कपड़े फाड़ डाले और पश्चाताप किया और परमेश्वर की नबी के पास भेजकर परमेश्वर की इच्छा पता करवाई तथा परमेश्वर की ओर लौट आया। योशिय्याह के साथ साथ उसकी प्रजा ने भी पश्चाताप किया और परमेश्वर की ओर मन फिराया (२ राजा २३)। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि योशिय्याह राजा और उसकी प्रजा ने अपने वास्तविक स्वरूप को परमेश्वर के वचन के दर्पण में देखा और पहचाना कि उनकी वास्तविक स्थिति वह नहीं थी जिसे वे मान कर बैठे हुए थे।

यही बात कई बार हमारे व्यक्तिगत जीवन में भी होती है, हम मान लेते हैं कि हम आत्मिक रूप से ठीक हैं और अपनी इन्हीं भावनाओं के आधार पर चलते रहते हैं, जबकि हमारे जीवन में छुपा हुआ पाप हमें परमेश्वर से दूर किये हुए होता है। परमेश्वर ने अपना वचन बाइबल हमें इसलिए दिया कि एक दर्पण के समान वह हमें हमारी वास्तविक दशा दिखा सके। जब हम सच्चे मन से बाइबल को पढ़ने लगते हैं तो वास्तव में हम बाइबल को नहीं पढ़ रहे होते, बाइबल हमें पढ़ती है, हम पर हमारी असलियत प्रगट कर देती है और हमें बोध होता है कि हमारी वास्तविक दशा क्या है।

जहाँ कहीं परमेश्वर हमें हमारे पाप का बोध कराए, हमें उस बात के लिए पश्चाताप और परमेश्वर से क्षमा याचना करके अपने संबंध परमेश्वर से सही कर लेने चाहिएं। तब ही हम अपने सही स्थान पर लौट सकते हैं और बने रह सकते हैं। - मार्ट डी हॉन


कोई भी अन्य पुस्तक हमारे ज्ञानवर्धन के लिए हो सकती है; किंतु पाप से मन परिवर्तन के लिए केवल बाइबल ही सक्षम है।

व्यवस्था की उस पुस्तक की बातें सुनकर राजा ने अपने वस्त्र फाड़े। - २ राजा २२:११


बाइबल पाठ: २ राजा २२:८-२०

2Ki 22:8 और हिलकिय्याह महायाजक ने शापान मंत्री से कहा, मुझे यहोवा के भवन में व्यवस्था की पुस्तक मिली है; तब हिलकिय्याह ने शापान को वह पुस्तक दी, और वह उसे पढ़ने लगा।
2Ki 22:9 तब शापान मंत्री ने राजा के पास लौटकर यह सन्देश दिया, कि जो चान्दी भवन में मिली, उसे तेरे कर्मचारियों ने थैलियों में डाल कर, उनको सौंप दिया जो यहोवा के भवन में काम कराने वाले हैं।
2Ki 22:10 फिर शपान मंत्री ने राजा को यह भी बता दिया, कि हिलकिय्याह याजक ने उसे एक पुस्तक दी है। तब शपान उसे राजा को पढ़कर सुनाने लगा।
2Ki 22:11 व्यवस्था की उस पुस्तक की बातें सुनकर राजा ने अपने वस्त्र फाड़े।
2Ki 22:12 फिर उस ने हिलकिय्याह याजक, शापान के पुत्र अहीकाम, मीकायाह के पुत्र अकबोर, शापान मंत्री और असाया नाम अपने एक कर्मचारी को आज्ञा दी,
2Ki 22:13 कि यह पुस्तक जो मिली है, उसकी बातों के विष्य तुम जाकर मेरी और प्रजा की और सब सहूदियों की ओर से यहोवा से पूछो, क्योंकि यहोवा की बड़ी ही जलजलाहट हम पर इस कारण भड़की है, कि हमारे पुरखाओं ने इस पुस्तक की बातें न मानी कि कुछ हमारे लिये लिखा है, उसके अनुसार करते।
2Ki 22:14 हिलकिय्याह याजक और अहीकाम, अकबोर, शापान और असाया ने हुल्दा नबिया के पास जाकर उस से बातें की, वह उस शल्लूम की पत्नी थी जो तिकवा का पुत्र और हर्हस का पोता और वस्त्रों का रखवाला था, (और वह स्त्री यरूशलेम के नये टोले में रहती थी) ।
2Ki 22:15 उस ने उन से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि जिस पुरुष ने तुम को मेरे पास भेजा, उस से यह कहो,
2Ki 22:16 यहोवा यों कहता है, कि सुन, जिस पुस्तक को यहूदा के राजा ने पढ़ा है, उसकी सब बातों के अनुसार मैं इस स्थान और इसके निवासियों पर विपत्ति डाला चाहता हूँ।
2Ki 22:17 उन लोगों ने मुझे त्याग कर पराये देवताओं के लिये धूप जलाया और अपनी बनाई हुई सब वस्तुओं के द्वारा मुझे क्रोध दिलाया है, इस कारण मेरी जलजलाहट इस स्थान पर भड़केगी और फिर शांत न होगी।
2Ki 22:18 परन्तु यहूदा का राजा जिस ने तुम्हें यहोवा से पूछने को भेजा है उस से तुम यों कहो, कि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा कहता है।
2Ki 22:19 इसलिये कि तू वे बातें सुनकर दीन हुआ, और मेरी वे बातें सुनकर कि इस स्थान और इसके निवासियों देखकर लोग चकित होंगे, और शाप दिया करेंगे, तू ने यहोवा के साम्हने अपना सिर नवाया, और अपने वस्त्र फाड़कर मेरे साम्हने रोया है, इस कारण मैं ने तेरी सुनी है, यहोवा की यही वाणी है।
2Ki 22:20 इसलिये देख, मैं ऐसा करूंगा, कि तू अपने पुरखाओं के संग मिल जाएगा, और तू शांति से अपनी कबर को पहुंचाया जाएगा, और जो विपत्ति मैं इस स्थान पर डाला चाहता हूँ, उस में से तुझे अपनी आखों से कुछ भी देखना न पड़ेगा। तब उन्होंने लौटकर राजा को यही सन्देश दिया।

एक साल में बाइबल:
  • एज़्रा १, २
  • यूहन्ना १९:२३-४२

शुक्रवार, 10 जून 2011

सुरक्षा

सुरक्षा के अनेक स्वरूप होते हैं। खतरा आने पर खरगोश अपने बिल में और हिरन झाड़ियों में छिप जाता है; डर कर एक छोटा बच्चा अपने पिता की टाँगों से लिपटकर, तो युद्ध में एक सैनिक तोपखाने के बचावी हमले में अपने आप को सुरक्षित अनुभव करता है। लेकिन खतरे का आभास होने पर एक मसीही विश्वासी को क्या करना चाहिए? उसकी सुरक्षा क्या है?

जब दाउद ने भजन ३१ लिखा था तब वह जानता था कि उसके लिए परिस्थितियाँ ठीक नहीं हैं। वह कमज़ोर, थका हुआ और दुख में था; उसका दिल टूट चुका था। उसके शत्रु उसका पीछा कर रहे थे और उसके मित्र उसे छोड़ कर भाग चुके थे। दाउद शरीर और सामर्थ में कमज़ोर तो था लेकिन असहाय और असुरक्षित नहीं था। वह जानता था कि परमेश्वर ही उसकी सुरक्षा का सर्वोत्तम स्थान है और परमेश्वर से उसके सही संबंध ही उसकी सुरक्षा की सही और सबसे कारगर नीति हैं। उसने अपनी सुरक्षा परमेश्वर में ही ढूँढी। जैसे जब किसी धौंस देने वाले बदमाश के आगे एक बच्चा अपने बड़े भाई को सहायता के लिए पुकाराता है, दाउद ने परमेश्वर को पुकारा। क्योंकि दाउद परमेश्वर की संगति में रहता था, उसने अपने आप को उसी की सुरक्षा में छुपा लिया जो उससे कभी न बदलने वाले प्रेम से प्रेम रखता था और पहले भी अनेक बार उसकी सहायता कर चुका था।

दाउद के समान क्या हम भी परमेश्वर में अपनी सुरक्षा को खोजने के लिए ऐसे ही तत्पर रहते हैं? परमेश्वर सदैव विश्वासयोग्य है; वह दाउद के लिए छिपने का सुरक्षित स्थान था, वह हमारे लिए भी मुसीबत में छिपने का सुरक्षित स्थान है। - मार्ट डी हॉन


मसीही विश्वासी की सुरक्षा खतरे की अनुपस्थिति से नहीं वरन उसके साथ परमेश्वर की उपस्थिति से है।

क्योंकि तू मेरे लिये चट्टान और मेरा गढ़ है इसलिये अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई कर, और मुझे आगे ले चल। - भजन ३१:३


बाइबल पाठ: भजन ३१:१-१६
Psa 31:1 हे यहोवा मेरा भरोसा तुझ पर है, मुझे कभी लज्जित होना न पड़े? तू अपने धर्मी होने के कारण मुझे छुड़ा ले!
Psa 31:2 अपना कान मेरी ओर लगा कर तुरन्त मुझे छुड़ा ले!
Psa 31:3 क्योंकि तू मेरे लिये चट्टान और मेरा गढ़ है इसलिये अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई कर, और मुझे आगे ले चल।
Psa 31:4 जो जाल उन्होंने मेरे लिये बिछाया है उस से तू मुझ को छुड़ा ले, क्योंकि तू ही मेरा दृढ़ गढ़ है।
Psa 31:5 मैं अपनी आत्मा को तेरे ही हाथ में सौंप देता हूं; हे यहोवा, हे सत्यवादी ईश्वर, तू ने मुझे मोल लेकर मुक्त किया है।
Psa 31:6 जो व्यर्थ वस्तुओं पर मन लगाते हैं, उन से मैं घृणा करता हूं परन्तु मेरा भरोसा यहोवा ही पर है।
Psa 31:7 मैं तेरी करूणा से मगन और आनन्दित हूं, क्योंकि तू ने मेरे दु:ख पर दृष्टि की है, मेरे कष्ट के समय तू ने मेरी सुधि ली है,
Psa 31:8 और तू ने मुझे शत्रु के हाथ में पड़ने नहीं दिया; तू ने मेरे पांवों को चौड़े स्थान में खड़ा किया है।
Psa 31:9 हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर क्योंकि मैं संकट में हूं; मेरी आंखे वरन मेरा प्राण और शरीर सब शोक के मारे घुले जाते हैं।
Psa 31:10 मेरा जीवन शोक के मारे और मेरी अवस्था कराहते कराहते घट चली है; मेरा बल मेरे अधर्म के कारण जाता रह, ओर मेरी हडि्डयां घुल गईं।
Psa 31:11 अपने सब विरोधियों के कारण मेरे पड़ोसियों में मेरी नामधराई हुई है, अपने जान पहिचान वालों के लिये डर का कारण हूं; जो मुझ को सड़क पर देखते है वह मुझ से दूर भाग जाते हैं।
Psa 31:12 मैं मृतक की नाई लोगों के मन से बिसर गया, मैं टूटे बासन के समान हो गया हूं।
Psa 31:13 मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना, चारों ओर भय ही भय है! जब उन्होंने मेरे विरूद्ध आपस में सम्मति की तब मेरे प्राण लेने की युक्ति की।
Psa 31:14 परन्तु हे यहोवा मैं ने तो तुझी पर भरोसा रखा है, मैं ने कहा, तू मेरा परमेश्वर है।
Psa 31:15 मेरे दिन तेरे हाथ में है, तू मुझे मेरे शत्रुओं और मेरे सताने वालों के हाथ से छुड़ा।
Psa 31:16 अपने दास पर अपने मुंह का प्रकाश चमका; अपनी करूणा से मेरा उद्धार कर।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास ३४-३६
  • यूहन्ना १९:१-२२

गुरुवार, 9 जून 2011

छिपने का स्थान

अमरीकी राष्ट्रपति जौन कैनेडी ने कहा था कि प्रत्येक दिन हमें भयानक विपत्ति के क्षण के नज़दीक लाता जा रहा है। एक वैज्ञानिक पत्रिका Bulletin of Atomic Scientists एक २४ घंटे की घड़ी और उसकी सूईयों के द्वारा मानव इतिहास को दर्शाते हैं। मानव विनाश के खतरे की गंभीरता के अनुसार घड़ी की सूईयाँ आगे या पीछे करी जाती हैं और उनकी घड़ी के अनुसार २४ घंटे पूरे होने में कुछ ज़्यादा देर नहीं है। मानव जाति के विनाश के खतरे बढते ही जा रहे हैं, हर जगह फैलते हुए आतंकवाद और परमाणु अस्त्रों की उपस्थिति ने इस खतरे को बहुत बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों में इस बात पर कोई दो राय नहीं है कि यदि परमाणु युद्ध हुआ तो ममानव जाति का विनाश तय है।

अपनी पुस्तक No Place to Hide में एक वैज्ञानिक डॉ। डेविड ब्रैडली, जो परमाणु अस्त्रों के प्रारंभिक दिनों में उनके परीक्षण के समय निकली विकिरण और ऊर्जा का निरीक्षण करते थे, ने लिखा "अगर हम विचारें कि हमारे शरीर में रेडियम के एक ग्राम का दस लाखवाँ भाग भी यदि आ जाए तो हमारे लिए घातक हो जाएगा, तो यह तथ्य हमारा ध्यान Calculus से हटकर मसीही विश्वास की ओर ले जाने के लिए काफी है।" उनका यह कहना बिलकुल सही है क्योंकि मसीही विश्वासी जैसा परमेश्वर के प्रेम और उपस्थिति में सुरक्षित है, वैसा और कोई कहीं भी नहीं है।

भजन ९१ में भजनकार ने प्रभु परमेश्वर को, उसकी सुरक्षा के गुण के लिए कई संज्ञाएं दी हैं जैसे, छिपने का गुप्त स्थान, छाया मिलने (अर्थात निकट होने) का स्थान, शरणस्थान, दृढ़ गढ़, रक्षक, छुटकारा देने वाला आदि, क्योंकि हम उसमें सदा सुरक्षित हैं। चाहे हमारा खतरा परमाणु युद्ध से हो, किसी बीमारी से हो, किसी पारिवारिक परेशानी से हो या किसी शैतानी आक्रमण से हो, कोई भी या कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो, परमेश्वर हमारा दृढ़ गढ़ बना रहता है।

किसी भी मसीही विश्वासी के लिए इन खतरनाक अनिश्चित दिनों में परमेश्वर ही एकमात्र निशित सुरक्षित छिपने का स्थान है। - डेव एग्नर


परमेश्वर हमारे जितना निकट बना रहता है, उतना निकट कोई भी खतरा कभी नहीं आ सकता।

तू मेरी आड़ और ढ़ाल है; मेरी आशा तेरे वचन पर है। - भजन ११९:११४

बाइबल पाठ: भजन ११९:११३-१२०

Psa 119:113 मैं दुचित्तों से तो बैर रखता हूं, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रीति रखता हूं।
Psa 119:114 तू मेरी आड़ और ढ़ाल है; मेरी आशा तेरे वचन पर है।
Psa 119:115 हे कुकर्मियों, मुझ से दूर हो जाओ, कि मैं अपने परमेश्वर की आज्ञाओं को पकड़े रहूं।
Psa 119:116 हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे सम्भाल, कि मैं जीवित रहूं, और मेरी आशा को न तोड़!
Psa 119:117 मुझे थाम रख, तब मैं बचा रहूंगा, और निरन्तर तेरी विधियों की ओर चित्त लगाए रहूंगा!
Psa 119:118 जितने तेरी विधियों के मार्ग से भटक जाते हैं, उन सब को तू तुच्छ जानता है, क्योंकि उनकी चतुराई झूठ है।
Psa 119:119 तू ने पृथ्वी के सब दुष्टों को धातु के मैल के समान दूर किया है; इस कारण मैं तेरी चितौनियों में प्रीति रखता हूं।
Psa 119:120 तेरे भय से मेरा शरीर कांप उठता है, और मैं तेरे नियमों से डरता हूं।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास ३२-३३
  • यूहन्ना १८:१९-४०

शुक्रवार, 3 जून 2011

निराशा में भी आशा

अंग्रेज़ी कवि एलिक्ज़ैंडर पोप ने लिखा, "आशा मनुष्य के अन्दर सदा उत्पन्न होती रहती है, क्योंकि मनुष्य धन्य होने के लिए ही सृजा गया है।" किंतु जब आशा जाती रहे तो मनुष्य क्या करे, किसकी ओर मुड़े?

एक अस्पताल के निर्देशक ने अपने साथ बीती घटना बताई: कैंसर से ग्रसित एक जवान व्यक्ति हर बार की तरह अपना इलाज लेने उसके अस्पताल में आया। उस दिन एक नया चिकित्सक बैठा था; उस विकित्सक ने बेपरवाही और कुछ बेरहमी से उस युवक से कहा - "तुम जानते हो न कि तुम इस साल भर भी ज़िन्दा नहीं रहने वाले हो।" अपना इलाज लेने के बाद लौटते हुए वह जवान अस्पताल के निर्देशक के पास आया और रो पड़ा; रोते हुए वह बोला, "उस डॉक्टर ने मेरी आशा मुझसे छीन ली।" निर्देशक ने कहा, "ठीक बात है, उसने ऐसा किया तो है; अब यह समय है कि कोई नई आशा खोजी जाए।"

इस घटना पर टिप्पणी करते हुए लुइस स्मीड्स ने लिखा, "जब आशा समाप्त हो जाए तो क्या उसे फिर से जगाया जा सकता है? जब परिस्थिति बिलकुल निराशाजनक हो तो क्या कोई आशा रखी जा सकती है? ये वे प्रश्न हैं जो हमें अनन्त काल की आशा की ओर मोड़ देते हैं, क्योंकि मसीही विश्वास में आशा किसी "संभव" पर नहीं वरन परमेश्वर की अटल प्रतिज्ञाओं पर है।" क्योंकि न परमेश्वर का अन्त हो सकता है, न उसकी भलाई और उसकी प्रतिज्ञाओं का, इसलिए मसीही विश्वास में आशा का भी कोई अन्त संभव नहीं; क्योंकि परमेश्वर आशा का दाता है (रोमियों १५:१३) इसलिए हर निराशा में भी मसीही विश्वासी की आशा वर्तमान रहती है।

जब हमारी आशा परमेश्वर और हमें पाप तथा मृत्यु से छुड़ाने वाले उसके पुत्र हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह पर आधारित है, तो कवि एलिक्ज़ैंडर पोप द्वारा उपरोक्त कही बात एक सदा विद्यमान वास्तविकता बन जाती है; हम हर निराशा में भी धन्य होते हैं। आशा का दाता हमारा परमेश्वर तब भी हम में आशा को प्रवाहित करता रहता है जब हमारी अपनी सारी आशा समाप्त हो जाती है। - डेनिस डी हॉन


परमेश्वर पर अपने विश्वास द्वारा ही हम अपनी हर परिस्थिति को संभाल पाते हैं।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिस ने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। - यर्मियाह १७:७

बाइबल पाठ: यर्मियाह १७:५-८

Jer 17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।
Jer 17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा।
Jer 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिस ने परमेश्वर को अपना आधार माना हो।
Jer 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास १९-२०
  • यूहन्ना १३:२१-३८

गुरुवार, 2 जून 2011

प्रशंसा की आवश्यक्ता

केन को उसके मित्र ने अपने घर भोजन पर बुलाया। भोजन तो बहुत बढ़िया था किंतु भोजन के बाद परोसा गया मिष्ठान इतना अच्छा नहीं था; लेकिन फिर भी केन को उस मिष्ठान की तारीफ करने के लिए कुछ अच्छा मिल गया और उसने तारीफ करी भी।

अगली बार जब केन अपने मित्र के घर भोजन पर आया तो फिर से भोजनोपरांत वैसा ही मिष्ठान परोसा गया, और इस बार यह मिष्ठान भोजन के समान ही लाजवाब था। केन बिना किसी भी प्रकार का एक भी शब्द कहे, परोसा हुआ सब कुछ खाता गया। अन्ततः उसके मित्र की पत्नी से रहा नहीं गया और वह बोल उठी, "पिछली बार जो मिष्ठान मैंने परोसा था, मैं स्वयं उससे शर्मिंदा थी, लेकिन आप ने उसकी तारीफ करी; इस बार जो मिष्ठान मैंने परोसा है, शायद उससे अच्छा मैंने इसे कभी नहीं बनाया, लेकिन आप ने उसके विष्य में कुछ भी नहीं कहा?" केन ने उत्तर दिया, "इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि आज जो आपने परोसा है वह लाजवाब है, और जो पिछली बार परोसा था वह इतना अच्छा नहीं था। चाहे प्रशंसा का कारण आज हो, लेकिन प्रशंसा की आवश्यक्ता तो उसी दिन थी।"

लोगों के साथ हमारे सबंध कुछ इसी तरह हैं - कुछ लोगों को अधिक प्रशंसा की आवश्यक्ता होती है, कुछ को कम। यदि कोई चीज़ वास्तव में बुरी है तो झूठे ही उसे भला कहने या उसकी प्रशंसा करना गलत है। लेकिन किसी व्यक्ति में कितनी भी त्रुटि अथवा अपूर्णता क्यों न हो, हम उसमें कोई न कोई प्रशंसा के योग्य गुण पा सकते हैं।

एक कुचला हुआ सरकण्डा या लौ रहित धुंआ देती हुई बाती किस काम की हो सकती है? कुचला सरकण्डा तो अपने आप ही सीधा नहीं रह सकता, वह किसी दूसरे को क्या सहारा देगा; धुंआ देती बाती से दीवार काली और साँस में धुंए की बेचैनी ही मिल सकती है, लेकिन प्रभु यीशु के लिए कहा गया, "यह मेरा सेवक है, जिसे मैं ने चुना है, मेरा प्रिय, जिस से मेरा मन प्रसन्न है: मैं अपना आत्मा उस पर डालूंगा और वह अन्यजातियों को न्याय का समाचार देगा। वह न झगड़ा करेगा, और न धूम मचाएगा, और न बाजारों में कोई उसका शब्‍द सुनेगा। वह कुचले हुए सरकण्‍डे को न तोड़ेगा, और धूआं देती हुई बत्ती को न बुझाएगा, जब तक न्याय को प्रबल न कराए। और अन्यजातियां उसके नाम पर आशा रखेंगी। " - मती १२:१८-२१

हमारे चारों ओर निराशा से भरे लोग हैं। मसीही विश्वासी होने के कारण हमारी यह ज़िम्मादारी है कि अपने प्रभु के समान हम न किसी को तुच्छ जाने और न किसी का तिरिस्कार करें, इन कुचले हुए सरकंडों और धुंआ देती बातियों को भी उभारें। हमारा जरा सा प्रयास, एक सकरात्मक रवैया और थोड़ी सी प्रशंसा ऐसे हतोत्साहित लोगों को भी प्रोत्साहन देने में सक्षम है।

निराश लोगों में भी प्रशंसा के कारण खोजिए, समाज को इसकी बहुत आवश्यक्ता है।

जिस किसी के चेहरे पर आपको मुस्कान दिखाई न दे, उसे अपनी मुस्कान दे दीजिए।

उदास मन दब जाता है, परन्तु भली बात से वह आनन्दित होता है। - नीतिवचन १२:२५


बाइबल पाठ: नीतिवचन १२:१७-२८

Pro 12:17 जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साक्षी देता, वह छल प्रगट करता है।
Pro 12:18 ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोचविचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं।
Pro 12:19 सच्चाई सदा बनी रहेगी, परन्तु झूठ पल ही भर का होता है।
Pro 12:20 बुरी युक्ति करने वालों के मन में छल रहता है, परन्तु मेल की युक्ति करने वालों को आनन्द होता है।
Pro 12:21 धर्मी को हानि नहीं होती है, परन्तु दुष्ट लोग भारी विपत्ति में डूब जाते हैं।
Pro 12:22 झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है।
Pro 12:23 चतुर मनुष्य ज्ञान को प्रगट नहीं करता है, परन्तु मूढ़ अपने मन की मूढ़ता ऊंचे शब्द से प्रचार करता है।
Pro 12:24 कामकाजी लोग प्रभुता करते हैं, परन्तु आलसी बेगारी में पकड़े जाते हैं।
Pro 12:25 उदास मन दब जाता है, परन्तु भली बात से वह आनन्दित होता है।
Pro 12:26 धर्मी अपने पड़ोसी की अगुवाई करता है, परन्तु दुष्ट लोग अपनी ही चाल के कारण भटक जाते हैं।
Pro 12:27 आलसी अहेर का पीछा नहीं करता, परन्तु कामकाजी को अनमोल वस्तु मिलती है।
Pro 12:28 धर्म की बाट में जीवन मिलता है, और उसके पथ में मृत्यु का पता भी नहीं।

एक साल में बाइबल:
२ इतिहास १७-१८
यूहन्ना १३:१-२०

बुधवार, 1 जून 2011

निश्चित छुटकारा

इस संसार के किसी भी आनन्द से बढ़कर परमेश्वर की संगति का आनन्द है; लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल कहीं भी यह नहीं कहता कि परमेश्वर के लोग शारीरिक दुख, मानसिक अस्वस्थता या आत्मिक अन्धकार का कभी सामना नहीं करेंगे।

महान प्रचारक स्पर्जन अकसर घोर निराशा में पड़ जाया करता था। स्पर्जन की जीवनी के लेखक आर्नल्ड डालिमोर ने लिखा, "इन निराशा के अन्धकार के समयों में वे किस वेदना से होकर निकलते होंगे, हम नहीं जानते...ऐसे में परमेश्वर से करी गई उनकी प्रार्थनाएं भी उन को ढाढ़स नहीं बन्धा पातीं थीं। उनकी निराशा के विशाल दुर्ग के नीचे जैसे अन्धकार की गहरी काल कोठरियाँ थीं।"

भजन ८८ परमेश्वर के भक्त हेमन द्वारा लिखा भजन है और संपूर्ण भजन संग्रह में एकमात्र ऐसा भजन है जो आरंभ से लेकर अन्त तक शोक और उदासी से भरा हुआ है। दाउद के लिखे कई भजनों में दुख और उदासी तो हैं लेकिन वे अन्ततः आशा पर समाप्त होते हैं, लेकिन हेमन का यह भजन अन्धकार के साथ अन्त होता है।

ऐसा शोकमय भजन कैसे हमें प्रोत्साहित कर सकता है? सर्वप्रथम यह भजन हमें सिखाता है कि परमेश्वर के लोग भी घोर निराशा और दुख से होकर निकल सकते हैं; दूसरे, यह भजन यह भी सिखाता है कि इन निराशा की परिस्थितियों में क्या करें - हेमन के समान अपनी व्यथा परमेश्वर के आगे मुक्त भाव से उंडेल दें; तीसरे, इस भजन का भजन संग्रह में विद्यमान होना इस बात का प्रमाण है कि हृदय से निकली वेदना की पुकार परमेश्वर अन्सुनी नहीं करता।

हेमन के इस भजन में बाइबल के ज्ञानी प्रभु यीशु की वेदना के समानन्तर में हेमन की वेदना के वर्णन को पाते हैं। हम जानते हैं कि जब कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु समस्त संसार का पाप लिए हुए चढ़ाए गए, तब परमेश्वर ने भी उनसे मुँह मोड़ लिया था। वे परमेश्वर द्वारा उस समय इसलिए त्यागे गए जिससे फिर हम अपने पाप के कारण त्यागे न जाएं; अब जो प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं वे कभी परमेश्वर द्वारा त्यागे नहीं जाएंगे।

हमारे लिए अब परमेश्वर का वायदा है कि चाहे हमें अपनी व्यथा का अन्त न भी दिखाई दे, लेकिन क्लेशों से छुटकारा निश्चित है। - डेनिस डी हॉन


जैसे परमेश्वर हमारे साथ उजाले में रहता है, निश्चय ही वैसे ही वह अंधियारे में भी हमारे साथ बना रहता है।

क्योंकि मेरा प्राण क्लेश में भरा हुआ है, और मेरा प्राण अधोलोक के निकट पहुंचा है। - भजन८८:३



बाइबल पाठ: भजन ८८

Psa 88:1 हे मेरे उद्धारकर्त्ता परमेश्वर यहोवा, मैं दिन को और रात को तेरे आगे चिल्लाता आया हूं।
Psa 88:2 मेरी प्रार्थना तुझ तक पहुंचे, मेरे चिल्लाने की ओर कान लगा!
Psa 88:3 क्योंकि मेरा प्राण क्लेश में भरा हुआ है, और मेरा प्राण अधोलोक के निकट पहुंचा है।
Psa 88:4 मैं कबर में पड़ने वालों में गिना गया हूं; मैं बलहीन पुरूष के समान हो गया हूं।
Psa 88:5 मैं मुर्दों के बीच छोड़ा गया हूं, और जो घात होकर कबर में पड़े हैं, जिनको तू फिर स्मरण नहीं करता और वे तेरी सहायता रहित हैं, उनके समान मैं हो गया हूं।
Psa 88:6 तू ने मुझे गड़हे के तल ही में, अन्धेरे और गहिरे स्थान में रखा है।
Psa 88:7 तेरी जलजलाहट मुझी पर बनी हुई है, और तू ने अपने सब तरंगों से मुझे दु:ख दिया है;
Psa 88:8 तू ने मेरे पहिचान वालों को मुझ से दूर किया है और मुझ को उनकी दृष्टि में घिनौना किया है। मैं बन्दी हूं और निकल नही सकता;
Psa 88:9 दु:ख भोगते भोगते मेरी आंखे धुन्धला गई। हे यहोवा मैं लगातार तुझे पुकारता और अपने हाथ तेरी ओर फैलाता आया हूं।
Psa 88:10 क्या तू मुर्दों के लिये अदभुत् काम करेगा? क्या मरे लोग उठकर तेरा धन्यवाद करेंगे?
Psa 88:11 क्या कबर में तेरी करूणा का, और विनाश की दशा में तेरी सच्चाई का वर्णन किया जाएगा?
Psa 88:12 क्या तेरे अदभुत् काम अन्धकार में, वा तेरा धर्म विश्वासघात की दशा में जाना जाएगा?
Psa 88:13 परन्तु हे यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी है, और भोर को मेरी प्रार्थना तुझ तक पहुंचेगी।
Psa 88:14 हे यहोवा, तू मुझ को क्यों छोड़ता है? तू अपना मुख मुझ से क्यों छिपाता रहता है?
Psa 88:15 मैं बचपन ही से दु:खी वरन अधमुआ हूं, तुझ से भय खाते मैं अति व्याकुल हो गया हूं।
Psa 88:16 तेरा क्रोध मुझ पर पड़ा है, उस भय से मैं मिट गया हूं।
Psa 88:17 वह दिन भर जल की नाई मुझे घेरे रहता है, वह मेरे चारों ओर दिखाई देता है।
Psa 88:18 तू ने मित्र और भाईबन्धु दोनों को मुझ से दूर किया है, और मेरे जान- पहिचान वालों को अन्धकार में डाल दिया है।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास १५-१६
  • यूहन्ना १२:२७-५०

सोमवार, 30 मई 2011

विश्वास की भविष्यवाणी

एक लंबी और कठिन शीत ऋतु के बाद बसन्त के सुखदायी, साफ आसमान और चमकती धुप के दिन आरंभ हुए। ऐसे में ध्रुवीय ठंडी हवाओं से भरा एक तूफान आया, और ऐसा लगने लगा कि शीत ऋतु फिर से आरंभ हो गई है। जो बन्द घरों में रहना पसन्द नहीं करते, वे घबराने लगे; जो आंगन में बार बार जमने वाली बर्फ को साफ करते करते थक चुके थे वे फिर इसी काम में लगने के विचार से पस्त होकर अपनी कुर्सियों पर पसर गए और घर गर्म रखने के खर्च का अन्दाज़ लगाने लगे। हर तरफ निराशा का माहौल था, लेकिन दुबारा ठंडा हो जाने पर किसी ने भी यह निश्कर्ष नहीं निकाला कि सदियों से चला आ रहा मौसम बदलने का क्रम आक्समत ही रुक गया है या बदल गया है, और न ही किसी ने कहा कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर घूमने की दिशा उलट गई है। पुनः ठंडे हुए मौसम से निराश होने वालों ने जब बीते समयों का ध्यान किया तो उनको याद आया कि बदलती ऋतु में ऐसे ठंडे तूफान पहले भी आए हैं, और वे आश्वस्त हो गए कि बसन्त ऋतु फिर शीघ्र ही अपनी पूरी बहार में आ जाएगी।

ऐसे ही जब हम अपनी बीते समयों की आशीशों को ध्यान करते हैं तो हमें वर्तमान में आशा और आते समय के लिए हिम्मत मिलती है। भजन ७७ का लेखक निराशा में इतना धंस चुका था कि अब उसे कोई आशा नहीं रही थी, उसकी नींद जाती रही थी और वह अपनी दशा के बारे में किसी से कोई बात भी करना नहीं चाहता था। लेकिन फिर कुछ हुआ - उसने अपने पुरखाओं को स्मरण किया; उसे ध्यान आय कि वे भी घोर निराशाजनक परिस्थितियों से होकर निकले थे और परमेश्वर ने उन्हें सभी परिस्थितियों में न केवल सुरक्षित रखा, वरन उनसे सकुशल निकाला भी। अपने पुरखाओं के प्रति परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को स्मरण करने से भजन के लेखक का विश्वास भी पु्नर्जीवित हो गया।

परमेश्वर का वचन बाइबल हमें स्मरण दिलाती है कि विकट परिस्थितियों से होकर निकलने वाले हम प्रथम नहीं हैं। परमेश्वर के लोग सदा ही ऊँच-नीच का सामना करते रहे हैं और परमेश्वर उन्हें हर परिस्थिति से निकालता रहा है।

निराशा का अन्धकार कितना ही गहरा क्यों न हो, विश्वास की भविष्यवाणी सदा उज्जवल भविष्य ही की रहती है। - मार्ट डी हॉन


बीते समय में परमेश्वर से मिली भलाई और भविष्य के लिए उसकी प्रतिज्ञाएं हमें वर्तमान में आशा देती हैं।

मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं। - भजन ७७:१०


बाइबल पाठ: भजन ७७:१-१५

Psa 77:1 मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा।
Psa 77:2 संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा, रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं।
Psa 77:3 मैं परमेश्वर का स्मरण कर कर के करहाता हूं, मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला)
Psa 77:4 तू मुझे झपकी लगने नहीं देता, मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती।
Psa 77:5 मैंने प्राचीनकाल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है।
Psa 77:6 मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं:
Psa 77:7 क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा और फिर कभी प्रसन्न न होगा?
Psa 77:8 क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है?
Psa 77:9 क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उस ने क्रोध करके अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला)
Psa 77:10 मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं।
Psa 77:11 मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा।
Psa 77:12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा।
Psa 77:13 हे परमेश्वर तेरी गति पवित्राता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है?
Psa 77:14 अद्भुत काम करनेवाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।
Psa 77:15 तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास १०-१२
  • यूहन्ना ११:३०-५७

रविवार, 29 मई 2011

परमेश्वर की चिंता

१९वीं सदी का विख्यात कवि विलियम कूपर यद्यपि मसीही विश्वासी था, तौ भी वह निराशा की गहराईयों में इतना उतर चुका था कि उसने आत्म हत्या करने की ठान ली। उसने एक कोहरे भरी रात में बघ्घी मंगवाई जिससे वह लंडन शहर की थेम्स नदी में डूबकर आत्म हत्या कर सके। घने कोहरे में दो घंटे तक बघ्घी चलाते रहने के पश्चात कोचवान ने कूपर से कबूल किया कि वह मार्ग भटक गया है और उसे अब पता नहीं है कि वह कहाँ है। इस देरी से खिसियाकर कूपर बघ्घी से उतर पड़ा, यह सोचकर कि अब वह स्वयं पैदल ही नदी का मार्ग ढूँढ लेगा। थोड़ी ही दूर चलकर उसने पाया कि वह अपने ही घर के दरवाज़े के सामने खड़ा है। तब कूपर को एहसास हुआ कि बघ्घी वहीं उसी इलाके के चक्कर लगाए जा रही थी; और उसने परमेश्वर के उसे विनाश से रोक लेने वाले हाथ को पहचाना।

परमेश्वर के आत्मा द्वारा कायल होकर कूपर ने जान लिया कि उसकी मुसीबतों से निकलने का मार्ग नदी में कूदना नहीं, परमेश्वर की ओर अपनी नज़र लगाना है। वह परमेश्वर के प्रति कृतज्ञाता से भर गय और उसने वहीं बैठकर अपनी कृतज्ञता का एक भजन परमेश्वर के लिए लिखा जो उस समय से आज तक अनगिनत लोगों के लिए सांत्वना और आशा का कारण रहा है। उस भजन के भाव इस प्रकार हैं: "परमेश्वर रहस्यमय ढंग से अपने अद्भुत कार्य करता है; वह समुद्र पर अपने पाँव जमाता और तूफान पर सवारी करता है; हे भयभीत संत, नई हिम्मत बाँध; जिन निराशा के बादलों से तू इतना भयभीत है वे तो वास्तव में करुणा से भरे हैं और परमेश्वर की आशीश बन कर तुझपर बरसेंगे।"

भजनकार ने लिखा है, "देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है, कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उनको जीवित रखे।" (भजन ३३:१८, १९)

इसीलिए प्रेरित पतरस ने लिखा, "परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्‍योंकि उस को तुम्हारा ध्यान है" (१ पतरस ५:६, ७)।

हमारी आवश्यक्ताएं परमेश्वर की चिंता हैं और उनकी पूर्ति उसकी ज़िम्मेवारी। - हैनरी बौश



कोई जीवन आशा रहित नहीं है, जब तक मसीह को ही जीवन से न निकाल दिया गया हो।

देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है, कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उनको जीवित रखे। - भजन ३३:१८, १९


बाइबल पाठ: भजन ३४:१-२२

Psa 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psa 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा, नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।
Psa 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।
Psa 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उस ने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psa 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psa 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psa 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उनको बचाता है।
Psa 34:8 परख कर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है।
Psa 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगों, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती!
Psa 34:10 जवान सिहों को तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं, परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।
Psa 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
Psa 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?
Psa 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।
Psa 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर, मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।
Psa 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psa 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मर्ण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psa 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psa 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्वार करता है।
Psa 34:19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियां पड़ती तो हैं, परन्त यहोवा उसको उन सब से मुक्त करता है।
Psa 34:20 वह उसकी हड्डी हड्डी की रक्षा करता है, और उन में से एक भी टूटने नहीं पाती।
Psa 34:21 दुष्ट अपनी बुराई के द्वारा मारा जाएगा, और धर्मी के बैरी दोषी ठहरेंगे।
Psa 34:22 यहोवा अपने दासों का प्राण मोल लेकर बचा लेता है; और जितने उसके शरणागत हैं उन में से कोई भी दोषी न ठहरेगा।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास ७-९
  • यूहन्ना ११:१-२९

शनिवार, 28 मई 2011

परमेश्वर पर आशा

रेडियो बाइबल क्लास के दफतर में एक पत्र आया जिस पर भेजने वाले ने न अपना नाम लिखा था और न उसका कोई पता था। पत्र में लिखा था कि, "जब तक यह पत्र आपके पास पहुँचेगा, मैं आत्म हत्या कर चुका होऊँगा। मैंने दो वर्ष पहले मसीह को ग्रहण किया था; कुछ समय से मेरा संसार मेरे चारों ओर बिखरता जा रहा है और अब मुझ में और सहने की शक्ति नहीं बची है। मैं अब पुनः बुरी आदतों में तो जा नहीं सकता और न ही फिर से बुरा बन सकता हूँ। मुझ में और परमेश्वर में दूरियाँ आ गई हैं....अब प्रभु ही मेरी सहायता करे।"

मसीही विश्वासी भी ऐसी घोर निराशा के शिकार हो सकते हैं कि वे अपने जीवन को ही समाप्त कर देना चाहें। १ राजा १९ अध्याय में हम पढ़ते हैं कि एलिय्याह शारीरिक और आत्मिक रीति से इतना थक गया कि उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी कि वह उसके प्राण ले ले। यद्यपि यह आत्म हत्या नहीं है, लेकिन उसकी यह प्रार्थना वैसी ही निराशा से उत्पन्न हुई। लेकिन परमेश्वर ने एलिय्याह की प्रार्थना का उतर उसे निराशा से निकालने के द्वारा दिया। परमेश्वर ने एलियाह को भोजन और निद्रा द्वारा पहले विश्राम दिया, फिर उसकी शिकायत सुनी, फिर धीमी शाँत आवाज़ में उससे बात करके, उसे एक नया कार्य सौंप कर परमेश्वर ने उसे पुनः प्रोत्साहित किया और कोमलता से उसकी गलती को सुधारा।

घोर निराशा में पड़कर ही लोग आत्म हत्या करते हैं। उनके लिए सत्य का स्वरूप इतना बिगड़ चुका होता है कि वे अपने इस दुष्कार्य के स्वार्थ और पाप को पहचान नहीं पाते। लेकिन परमेश्वर उन्हें फिर से स्थापित करना चाहता है। उन्हें बहाल करने के लिए कभी कभी वह स्वयं ही उनसे बातें करता है, परन्तु अधिकांशतः वह अपने संवेदनशील और परवाह करने वाले लोगों को निराश जनों की सहायता के लिए भेजता है।

प्रभु यीशु मसीह ने कहा, "पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍तकाल तक न मरेगा; मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (युहन्ना ११:२५, २६; १४:६)। निराशा में पड़े लोगों को मसीह यीशु में मिलने वाली आनन्त आशा का सन्देश दे कर मसीह के प्रत्येक विश्वासी निराश लोगों की सहायता के लिए परमेश्वर की आशा बन सकते हैं। - डेनिस डी हॉन


जब हम विनाश के सबसे निकट होते हैं, परमेश्वर की सहायता भी हमारे सबसे निकट होती है।

वहां उस ने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ। - १ राजा १९:४


बाइबल पाठ: १ राजा १९:१-१०

1Ki 19:1 तब अहाब ने ईज़ेबेल को एलिय्याह के सब काम विस्तार से बताए कि उस ने सब नबियों को तलवार से किस प्रकार मार डाला।
1Ki 19:2 तब ईज़ेबेल ने एलिय्याह के पास एक दूत के द्वारा कहला भेजा, कि यदि मैं कल इसी समय तक तेरा प्राण उनका सा न कर डालूं तो देवता मेरे साथ वैसा ही वरन उस से भी अधिक करें।
1Ki 19:3 यह देख एलिय्याह अपना प्राण लेकर भागा, और यहूदा के बेशॅबा को पहुंच कर अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया।
1Ki 19:4 और आप जंगल में एक दिन के मार्ग पर जाकर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, वहां उस ने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ।
1Ki 19:5 वह झाऊ के पेड़ तले लेट कर सो गया और देखो एक दूत ने उसे छूकर कहा, उठकर खा।
1Ki 19:6 उस ने दृष्टि करके क्या देखा कि मेरे सिरहाने पत्थरों पर पकी हुई एक रोटी, और एक सुराही पानी धरा है; तब उस ने खाया और पिया और फिर लेट गया।
1Ki 19:7 दूसरी बार यहोवा का दूत आया और उसे छूकर कहा, उठकर खा, क्योंकि तुझे बहुत भारी यात्रा करनी है।
1Ki 19:8 तब उस ने उठकर खाया पिया, और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन रात चलते चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा।
1Ki 19:9 वहां वह एक गुफा में जाकर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?
1Ki 19:10 उस ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास ४-६
  • यूहन्ना १०:२४-४२

शुक्रवार, 27 मई 2011

ज्ञानवृद्धि का उद्देश्य

कुछ साल पहले मैं एक विद्यार्थी से चर्चा कर रहा था; उसका कहना था कि वह धर्म में बहुत रुचि रखता है, और धर्म के बारे में सब कुछ जान लेना चाहता है। जब मैंने उसके इस शौक के बारे में उससे थोड़ी गहराई से जानकारी ली तो पता चला कि वह केवल अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए ऐसा करना चाहता था। उसकी जिज्ञासा उसे यह जाने को उकसाती थी कि धर्म में आखिर ऐसा क्या है जिससे लोग उसमें आस्था रखते हैं, परन्तु उसके लिए परमेश्वर का कोई महत्व नहीं था, और ना ही वह अपने लिए परमेश्वर की इच्छा जानने या उसे मानने में कोई रुचि रखता था।

यदि आप बाइबल के बारे में अपनी जानकारी केवल अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए चाहते हैं, ना कि इसलिए कि परमेश्वर को निकटता से जानकर उसकी इच्छा पूरी करने में जुटें, तो आप भी उस छात्र से भिन्न नहीं हैं।

प्रेरित पतरस ने कहा कि हमें अपने परमेश्वर संबंधी ज्ञान को केवल एक उद्देश्य के लिए बढ़ाना चाहिए - कि हमारा विश्वास परिपक्व हो सके। पतरस ने लिखा कि, "और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न करके, अपने विश्वास पर सदगुण, और सदगुण पर समझ। और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। क्‍योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी" (२ पतरस १:५-८)। मसीही विश्वास में परिपक्वता का यही मार्ग है।

परमेश्वर हमें केवल ज्ञानवर्धन के लिए अपने ज्ञान के खोजी होने को नहीं कहता, वरन इसलिए क्योंकि, "अनन्‍त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्‍चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जानें" (युहन्ना १७:३); और अपने जीवनों में परमेश्वर को केंद्रबिंदु बना कर प्रेम और सदगुणों से भर जाएं और परमेश्वर के लिए फलदायी हों। - मार्ट डी हॉन


जिस ज्ञान से समझ-बूझ और परिपक्वता न बढ़े वह खातरनाक होता है।

अनन्‍त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्‍चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जानें। - युहन्ना १७:३


बाइबल पाठ: २ पतरस १:१-११

2Pe 1:1 शमौन पतरस की और से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्‍होंने हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धामिर्कता से हमारा सा बहुमूल्य विश्वास प्राप्‍त किया है।
2Pe 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।
2Pe 1:3 क्‍योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सदगुण के अनुसार बुलाया है।
2Pe 1:4 जिन के द्वारा उस ने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूटकर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ।
2Pe 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न करके, अपने विश्वास पर सदगुण, और सदगुण पर समझ।
2Pe 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।
2Pe 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
2Pe 1:8 क्‍योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी।
2Pe 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुलकर शुद्ध होने को भूल बैठा है।
2Pe 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्‍योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे।
2Pe 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्‍त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।

एक साल में बाइबल:
  • २ इतिहास १-३
  • यूहन्ना १०:१-२३

गुरुवार, 26 मई 2011

संतुलित सत्य

१९वीं सदी में प्रचलित एक बच्चों की कहानी मुझे बहुत विचलित करती है क्योंकि यह कहानी परमेश्वर के बारे में बहुत गलत दृष्टीकोण देती है।

यह कहानी एक छोटे बच्चे के बारे में है, जिसने अपनी माँ की आज्ञा के विरुद्ध, उसकी पीठ पीछे केक का एक छोटा टुकड़ा लेकर खा लिया। इस कारण उस कहानी में इस बच्चे को नीच, निन्दनीय, कपटी और किसी भी आदरणीय या उदार भावना से सर्वथा विहीन आदि कहा गया। उसके बाद इस "धोखेबाज़ लड़के" का परमेश्वर के सिंहासन के सामने न्याय के लिए प्रस्तुत किया जाना और वहाँ उसे कठोर दंड की आज्ञा के साथ कहा जाना कि, " हे श्रापित लोगों, मेरे साम्हने से उस अनन्‍त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है" (मत्ती २५:४१) दिखाया गया है।

यह कहानी अनज्ञाकारिता और झूठ के विरुद्ध चेतावनी देने की बात में तो ठीक है, लेकिन यह परमेश्वर के विलंब से कोप करने, धैर्य रखने, क्षमा देने जैसे गुणों को बिलकुल अन्देखा कर देती है और परमेश्वर के गुणों का असंतुलित चित्रण प्रस्तुत करती है। इसकी तुलना में, १ कुरिन्थियों ६:९-११ में हम अधर्म और अनुचित चाल-चलन के विरुद्ध कड़ी चेतावनी तो पाते हैं, किंतु साथ ही अधर्म के निन्दनीय कार्यों की सूची के बाद ये कोमल शब्द भी पाते हैं, " और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्‍तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे" (१ कुरिन्थियों ६:११); क्योंकि हमारा परमेश्वर किसी भी पापी के नाश से नहीं वरन प्रत्येक के बचाए जाने से प्रेम रखता है, "प्रभु यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं दुष्ट के मरने से कुछ भी प्रसन्न होता हूँ? क्या मैं इस से प्रसन्न नहीं होता कि वह अपने मार्ग से फिरकर जीवित रहे?" (यहेजकेल १८:२३)। प्रभु यीशु ने कहा " परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्‍तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए" (युहन्ना ३:१७); "यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूं।" (मरकुस २:१७)

कुछ मसीही बिना परमेश्वर की करूणा का ध्यान करे परमेश्वर के कोप पर इतना ज़ोर देते हैं कि वे उसकी दया और क्षमाशीलता को भूल जाते हैं। दूसरी ओर कुछ ऐसे मसीही भी हैं जो परमेश्वर की दया, करुणा और क्षमाशीलता पर इतना ज़ोर देते हैं कि वे उसकी पवित्रता, न्याय और पाप से घृणा (पापी से नहीं) को नज़रांदाज़ कर देते हैं और पाप के प्रति परमेश्वर के दृष्टीकोण को बहुत हल्का प्रदर्शित करते हैं। जहाँ हमें परमेश्वर की पवित्रता, न्याय के प्रति कटिबद्धता और पाप से घृणा को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए वहीं उसके प्रेम, दया और अनुग्रह को भी अन्देखा नहीं करना चाहिए।

जब हम परमेश्वर के गुणों को सही जानने और समझने लगेंगे तब ही हम अपना जीवन भी सही जी सकेंगे। सत्य के संतुलित ज्ञान द्वारा ही हम लोगों को भी सही मार्गदर्शन दे सकते हैं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


परमेश्वर के अनुग्रह के वर्णन के बिना परमेश्वर के क्रोध की शिक्षा अधूरी तथा असंतुलित है।

जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है और परमेश्वर उस में बना रहता है। - १ युहन्ना ४:१६


पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्‍योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्‍योंकि मैं पवित्र हूं। - १ पतरस १:१६


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ६:९-२०

1Co 6:9 क्‍या तुम नहीं जानते, कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे धोखा न खाओ, न वेश्यागामी, न मूर्त्तिपूजक, न परस्त्रीगामी, न लुच्‍चे, न पुरूषगामी।
1Co 6:10 न चोर, न लोभी, न पियक्कड़, न गाली देने वाले, न अन्‍धेर करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस होंगे।
1Co 6:11 और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्‍तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे।
1Co 6:12 सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब वस्‍तुएं लाभ की नहीं, सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित हैं, परन्‍तु मैं किसी बात के आधीन न हूंगा।
1Co 6:13 भोजन पेट के लिये, और पेट भोजन के लिये है, परन्‍तु परमेश्वर इस को और उस को दोनों को नाश करेगा, परन्‍तु देह व्यभिचार के लिये नहीं, वरन प्रभु के लिये और प्रभु देह के लिये है।
1Co 6:14 और परमेश्वर ने अपनी सामर्थ से प्रभु को जिलाया, और हमें भी जिलाएगा।
1Co 6:15 क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं सो क्‍या मैं मसीह के अंग लेकर उन्‍हें वेश्या के अंग बनाऊं? कदापि नहीं।
1Co 6:16 क्‍या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है क्‍योंकि वह कहता है, कि वे दोनों एक तन होंगे।
1Co 6:17 और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।
1Co 6:18 व्यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्‍तु व्यभिचार करने वाला अपनी ही देह के विरूद्ध पाप करता है।
1Co 6:19 क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्‍दिर है जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो?
1Co 6:20 कयोंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।

एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास २८-२९
  • यूहन्ना ९:२४-४१