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शुक्रवार, 23 मार्च 2012

पहचान गंध

   आप उसे देख नहीं सकते, छू नहीं सकते और ना ही सुन सकते हैं, परन्तु गंध प्रबल और प्रभावी होती है। कुछ फूलों, या इत्रों या किसी वस्तु की गंध तुरंत ही हम में भूतकाल की कुछ ऐसी यादें जगा देती है, कुछ ऐसे लोगों और स्थानों के स्मरण को ताज़ा कर देती है, जिन्हें हम अन्य किसी रीति से शायद स्मरण नहीं कर पाते।

   कुछ प्रसिद्ध लोगों के नाम पर कुछ सुगंधों के नाम रखे जाते हैं। प्रशंसक अपने प्रीय गायक या अभिनेत्री के नाम की सुगंध लगा कर अपनी पहचान उनके साथ बनाते हैं। बहुतेरी स्त्रियाँ किसी विशेष इत्र के प्रयोग के द्वारा अपनी याद लोगों में बैठाना चाहती हैं, उनका प्रयास होता है कि जब लोगों के पास वह सुगंध आए तो लोगों को उन ही की याद आने पाए। गंध के माध्यम से पहचान बनाना एक प्रभावी विधि है; किंतु यह विधि कोई नई बात नहीं है।

   गंध द्वारा पहचान बनाने की बात परमेश्वर ने आरंभ करी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने इस्त्राएलियों के मध्य अपनी आराधना के स्थान पर एक विशेष रीति से तैयार करे गए सुगंधित द्रव्य के लगातार जलाए जाने के लिए कहा (निर्गमन ३०:३४-३५)। इस प्रकार का और इसी गंध का कोई अन्य द्रव्य बनाना लोगों के लिए वर्जित था (निर्गमन ३०:३७-३८), क्योंकि यह विशेष सुगंध लोगों के अन्दर परमेश्वर के स्मरण और उसकी आराधना की पहचान के लिए थी।

   आज संसार में भी एक ऐसी ही विशेष सुगंध के द्वारा परमेश्वर चाहता है कि संसार के लोग उसे पहचाने; एक गंध है जिसे उसने अपनी पहचान गंध बनाया है - उसके लोग, मसीही विश्वासी: "परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं" (२ कुरिन्थियों २:१४-१५)।

   यह तथ्य कि परमेश्वर इतनी प्रभावी रीति से अपनी पहचान हमारे साथ बनाता है, मेरे लिए वास्तव में एक नम्र कर देने वाला तथ्य है। यह मुझे बाध्य करता है कि मैं अपने आप को जांचूँ कि मेरे आस-पास के लोग मुझे और मेरे जीवन तथा व्यवहार को देखकर मेरे परमेश्वर के बारे में क्या सोचते हैं, उसके बारे में क्या धारणा बनाते हैं?

   हम मसीही विश्वासी ही संसार में अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की पहचान गंध हैं। ध्यान रखें कि यह गंध सुगंध ही रहे; हमारे जीवनों मे यह कभी भीनी ना हो, कभी लुप्त ना हो। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के लिए जीया गया जीवन एक मनभावनी सुगंध ही फैलाएगा।

परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। - २ कुरिन्थियों २:१४
बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों २:१४-१७
2Co 2:14  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।
2Co 2:15  क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।
2Co 2:16  कितनो के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है?
2Co 2:17  क्‍योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्‍तु मन की सच्‍चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जान कर मसीह में बोलते हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १३-१५ 
  • लूका १:५७-८०

1 टिप्पणी:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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