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Monday, December 24, 2012

पृथ्वी पर शान्ति?


   मैं स्वर्गदूतों दोषी ठहराना नहीं चाहता और ना ही उनके साथ कोई बहस करना चाहता हूँ, किंतु यह भी सच है कि मैं अकसर सोचता रहता हूँ कि पृथ्वी पर जिस शान्ति का वायदा स्वर्गदूतों ने प्रभु यीशु के जन्म के समय चरवाहों से किया था उसका क्या हुआ? प्रभु यीशु के जन्म के पश्चात पिछले २००० वर्षों से शान्ति इस पृथ्वी पर एक दुर्लभ बात ही रही है। तब से अब तक अनेक युद्ध अनेक स्थान पर लड़े गए और अनगिनित निर्दोष लोग मारे गए; पारिवारिक कलह और अशान्ति सारे संसार में एक बढ़ता हुआ रोग है जो परिवारों को बरबाद कर रहा है तथा जीवनों में अशान्ति फैला रहा है। समाज में तलाक की संख्या बढ़ती  ही जा रही है, प्रभु की मण्डलियों में भी विभाजन बढ़ते जा रहे हैं और हमारे अशान्त मनों में शान्ति एक सपने की तरह लगती है।

   वह वायदा करी गई शान्ति आखिर है कहाँ? थोड़ा सा विचार और मनन करें तो समझ में आता है कि प्रभु यीशु अपने साथ पृथ्वी पर शान्ति के लिए प्रत्येक आवश्यक बात लेकर आए थे। उन्होंने अपने चेलों को आश्वस्त किया: "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (यूहन्ना १४:२७)। उन्होंने शान्ति के सिद्धांत सिखाए और बताए: लोग अपने पड़ौसियों से अपने समान प्रेम रखें; उन्होंने सिखाया कि हम अपने सताने वालों की ओर अपना दुसरा गाल भी फेर दें, उनके साथ अतिरिक्त मील तक जाएं, लालच से परे रहें, एक दूसरे की कमज़ोरियों को सह लें, और एक दूसरे की सेवा और एक दूसरे से वैसे ही प्रेम करें जैसे प्रभु यीशु ने हमसे किया है। यह सब करने की सामर्थ देने के लिए उन्होंने अपने प्रत्येक विश्वासी को अपना आत्मा प्रदान किया जो सदा उनके साथ रहता है।

   सच तो यह है कि इस शान्ति को लाना प्रभु ने हमारे ही हाथों में छोड़ा है। परमेश्वर के वचन बाइबल से भी हम यही सीखते हैं; प्रेरित पौलुस ने रोमियों के नाम अपनी पत्री में लिखा: "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों १२:१८)। पृथ्वी पर शान्ति की विधि प्रभु यीशु ने सिखाई है, उसके लिए आवश्यक सामर्थ भी प्रदान करी है, लेकिन उसे कार्यान्वित करना हमारे ही हाथों में है।

   इस क्रिसमस पर जब हम शान्ति के राजकुमार प्रभु यीशु के जन्म का उत्सव मनाते हैं तो पृथ्वी के लोगों को अपने जीवनों द्वारा व्यावाहरिक रूप से प्रभु यीशु की शान्ति की भेंट प्रदान करें। - जो स्टोवैल


जब हम परमेश्वर के साथ मेल और शान्ति को अपने जीवनों में स्थान देंगे तो उसे दूसरों के साथ भी बांटने पाएंगे।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना १४:२७

बाइबल पाठ: रोमियों १२:९-२१
Rom 12:9  प्रेम निष्‍कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। 
Rom 12:10  भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्‍पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। 
Rom 12:11  प्रयत्‍न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। 
Rom 12:12  आशा में आनन्‍दित रहो; क्‍लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो। 
Rom 12:13   पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो। 
Rom 12:14   अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Rom 12:15  आनन्‍द करने वालों के साथ आनन्‍द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Rom 12:16  आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्‍तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्‍टि में बुद्धिमान न हो। 
Rom 12:17  बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्‍ता किया करो। 
Rom 12:18   जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Rom 12:19  हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्‍तु क्रोध को अवसर दो, क्‍योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Rom 12:20  परन्‍तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्‍योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Rom 12:21  बुराई से न हारो परन्‍तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • हबक्कुक १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य १५