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Friday, July 12, 2013

समकालीन

   नई शताब्दी के इस आरंभिक समय में हम पहले से चले आ रहे और समय के साथ प्रमाणित मापदंडों के उपयोग के विषय में बहुत से लोगों को प्रश्न उठाते हुए देखते हैं। इस बात का एक सजीव उदाहरण है एक किशोर गायिका द्वारा, जो मसीह यीशु में विश्वास रखने का दावा करती है, दिया गया एक साक्षात्कार। इस साक्षात्कार में अपने द्वारा पहने जाने वाले बहुत छोटे और शरीर प्रदर्श्नात्मक वस्त्रों तथा शालीनता के मापदंडों के बारे में चर्चा करते हुए वह बोली "यह विचार बहुत पुरानी सोच का है।"

   इस युवती की यह बात सही भी है और गलत भी। सही इसलिए क्योंकि मसीही विश्वास से संबंध रखने वाले मापदंड वास्तव मे काफी प्राचीन हैं - वे आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे गए थे। गलत इसलिए क्योंकि उसका यह धारणा रखना कि क्योंकि बात पुरानी है इसलिए यों ही बेपरवाही से नज़रंदाज़ करी जा सकती हैं सही नहीं है। वास्तविकता यही है कि परमेश्वर के बाइबल के सिद्धांत "पुराने" नहीं समसामयिक हैं, क्योंकि परमेश्वर अटल और स्थिर है तथा उसके मापदंड और उसका वचन दोनो ही कभी बदलते नहीं हैं।

   जहाँ तक शालीनता का प्रश्न है, जब बाइबल महिलाओं के लिए कहती है कि "वैसे ही स्‍त्रियां भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्‍त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथने, और सोने, और मोतियों, और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से" (1 तिमुथियुस 2:9 ) तो वह इसलिए कि सबके जीवन से परमेश्वर ही की महिमा हो और उसे ही आदर पहुँचे - और यह सिद्धांत केवल स्त्रियों पर ही नहीं वरन सभी पर लागू होता है, क्योंकि परमेश्वर के वचन में यह भी लिखा है कि "इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए" (रोमियों 12:2)। ये सिद्धांत, परमेश्वर के वचन के अन्य सिद्धांतों के समान आज भी एक भला और आदरणीय जीवन जीने के लिए हमारा वैसे ही मार्गदर्शन करते हैं जैसा तब करते थे जब पहली बार लिखे गए थे।

   इसलिए चाहे आप कोई पॉप-स्टार हों या सामान्य व्यक्ति, यदि आप परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार आचरण और जीवन व्यतीत कर रहें हैं तो "पुरानी सोच" का होने की चिंता ना करें - आप समकालीन ही हैं और सदा रहेंगे। - डेव ब्रैनन


जाँच कर देखिए - क्या आपके निर्णय और चुनाव परमेश्वर को महिमा एवं आदर देते हैं अथवा संसार और मनुष्यों को?

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 2:8-10; 1 पतरस 3:3-5
1 Timothy 2:8 सो मैं चाहता हूं, कि हर जगह पुरूष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठा कर प्रार्थना किया करें।
1 Timothy 2:9 वैसे ही स्‍त्रियां भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्‍त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथने, और सोने, और मोतियों, और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से।
1 Timothy 2:10 क्योंकि परमेश्वर की भक्ति ग्रहण करने वाली स्‍त्रियों को यही उचित भी है।

1 Peter 3:3 और तुम्हारा सिंगार, दिखावटी न हो, अर्थात बाल गूंथने, और सोने के गहने, या भांति भांति के कपड़े पहिनना।
1 Peter 3:4 वरन तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्‍त मनुष्यत्‍व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्ज़ित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है।
1 Peter 3:5 और पूर्वकाल में पवित्र स्‍त्रियां भी, जो परमेश्वर पर आशा रखती थीं, अपने आप को इसी रीति से संवारती और अपने अपने पति के आधीन रहती थीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6 
  • प्रेरितों 17:16-34