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रविवार, 19 मई 2019

तैयार



      बच्चों के पालन-पोषण से संबंधित अनेकों वेब-साईट्स पर एक वाक्याँश लिखा हुआ मिलता है, “बच्चे को मार्ग के लिए तैयार कीजिए, न कि मार्ग को बच्चे के लिए।” कहने का अभिप्राय है कि बजाए बच्चे के मार्ग से सभी कठिनाइयों और बाधाओं को निकालने का प्रयास करने के, हमें बच्चों को ऐसे बड़ा करना है कि वे उन सभी कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करते हुए मार्ग पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ते रहने वाले बन जाएँ। हमें उन्हें जीवन की परिस्तिथियों का सामना करना और उनपर विजयी होना सिखाना चाहिए।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा, “उन्हे हम उनकी सन्तान से गुप्त न रखेंगें, परन्तु होनहार पीढ़ी के लोगों से, यहोवा का गुणानुवाद और उसकी सामर्थ और आश्चर्यकर्मों का वर्णन करेंगें। उसने तो याकूब में एक चितौनी ठहराई, और इस्त्राएल में एक व्यवस्था चलाई, जिसके विषय उसने हमारे पितरों को आज्ञा दी, कि तुम इन्हे अपने अपने लड़के बालों को बताना; कि आने वाली पीढ़ी के लोग, अर्थात जो लड़के बाले उत्पन्न होने वाले हैं, वे इन्हे जानें; और अपने अपने लड़के बालों से इनका बखान करने में उद्यत हों, जिस से वे परमेश्वर का आसरा रखें” (भजन 78:4-6)। ऐसा करने का उद्देश्य है कि वे “ईश्वर के बड़े कामों को भूल न जाएं, परन्तु उसकी आज्ञाओं का पालन करते रहें” (पद 7)।

      उस प्रबल आत्मिक प्रभाव के विषय विचार कीजिए जो औरों के आत्मिक जीवनों से हमारे जीवन पर हुआ – उनके व्यवहार और जीवन शैली के द्वारा। उनके कथन और आचरण ने हमारे ध्यान को खींचा, और हमारे अन्दर भी उनके समान प्रभु यीशु का अनुयायी होने की लालसा जागृत की।

      यह एक अद्भुत विशेषाधिकार और दायित्व है कि हम मसीही विश्वासी अगली पीढ़ी के लोगों से परमेश्वर के वचन और योजनाओं को बाँटें, उन्हें प्रभु यीशु मसीह और उसमें लाए गए विश्वास के द्वारा पापों की क्षमा तथा उद्धार के सुसमाचार के बारे में बताएँ। उनके जीवन मार्ग में आगे चाहे जो भी आए, हम प्रभु परमेश्वर के वचन और सामर्थ्य से उन्हें निर्भीक और दृढ़ होकर प्रत्येक परिस्तिथि का सामना करने के लिए तैयार करें। - डेविड मैक्कैस्लैंड

अपने जीवन की कथनी और करनी के द्वारा 
लोगों को प्रभु यीशु मसीह का अनुयायी बनने
 और जीवन मार्ग पर अग्रसर रहने के लिए तैयार करें।

इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों। - 2 तिमुथियुस 2:1-2

बाइबल पाठ: भजन 78:1-8
Psalms 78:1 हे मेरे लोगों, मेरी शिक्षा सुनो; मेरे वचनों की ओर कान लगाओ!
Psalms 78:2 मैं अपना मूंह नीतिवचन कहने के लिये खोलूंगा; मैं प्राचीन काल की गुप्त बातें कहूंगा,
Psalms 78:3 जिन बातों को हम ने सुना, और जान लिया, और हमारे बाप दादों ने हम से वर्णन किया है।
Psalms 78:4 उन्हे हम उनकी सन्तान से गुप्त न रखेंगें, परन्तु होनहार पीढ़ी के लोगों से, यहोवा का गुणानुवाद और उसकी सामर्थ और आश्चर्यकर्मों का वर्णन करेंगें।
Psalms 78:5 उसने तो याकूब में एक चितौनी ठहराई, और इस्त्राएल में एक व्यवस्था चलाई, जिसके विषय उसने हमारे पितरों को आज्ञा दी, कि तुम इन्हे अपने अपने लड़के बालों को बताना;
Psalms 78:6 कि आने वाली पीढ़ी के लोग, अर्थात जो लड़के बाले उत्पन्न होने वाले हैं, वे इन्हे जानें; और अपने अपने लड़के बालों से इनका बखान करने में उद्यत हों, जिस से वे परमेश्वर का आसरा रखें,
Psalms 78:7 और ईश्वर के बड़े कामों को भूल न जाएं, परन्तु उसकी आज्ञाओं का पालन करते रहें;
Psalms 78:8 और अपने पितरों के समान न हों, क्योंकि उस पीढ़ी के लोग तो हठीले और झगड़ालू थे, और उन्होंने अपना मन स्थिर न किया था, और न उनकी आत्मा ईश्वर की ओर सच्ची रही।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 6:22-44



रविवार, 26 अगस्त 2018

आदर



      अच्छे से प्रचार किए जा रहे अपने भाषण में एक राजनीतिज्ञ तथा सम्मानित नेता ने अपने राष्ट्र के ध्यान को अपनी ओर खींचा, यह कहने के द्वारा कि उसके देश के अधिकांश ‘आदरणीय’ सांसद बिलकुल भी आदरणीय नहीं हैं। उनके जीवनों में भ्रष्टाचार, अहंकारी आचरण, छिछोरी भाषा के प्रयोग, और अन्य बुराईयों का हवाल देते हुए उस नेता ने ऐसे सांसदों की निन्दा की और उनसे सुधरने का आग्रह किया। अपेक्षानुसार, उसकी ये टिप्पणियाँ उन सांसदों को पसन्द नहीं आईं और उन्होंने उसके विरुद्ध जवाबी आलोचना की।

      चाहे हम हम नेतृत्व के पदों पर आसीन सामाजिक अधिकारी न भी हों, परन्तु हम मसीह यीशु के अनुयाईयों को परमेश्वर के वचन बाइबल में “तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की ) निज प्रजा हो” (1 पतरस 2:9) कहा गया है। इसलिए हमारा प्रभु हमें ऐसे जीवन जीने के लिए बुलाता है जिससे उसे आदर मिलता है।

      प्रभु के शिष्य पतरस ने ऐसा करने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिया। उसने कहा, “उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो” (पद 11)। यद्यपि उसने आदरणीय शब्द का प्रयोग तो नहीं किया, किन्तु वह हमें मसीह के योग्य आचरण का जीवन व्यतीत करने के लिए कह रहा था।

      जैसे के प्रेरित पौलुस ने फिलिप्प्यों को लिखी अपनी पत्री में कहा, “निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो” (फिलिप्पियों 4:8)। वास्तव में ये ही वे गुण हैं जिनसे हमारे प्रभु को हमारे जीवनों के द्वारा आदर मिलता है। - लॉरेंस दरमानी


हम परमेश्वर को आदर देते हैं जब हम उसे पिता कहकर संबोधित करते हैं,
 और उसकी सन्तान के समान व्यवहार करते हैं।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:2

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:9-12
1 Peter 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो।
1 Peter 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1 Peter 2:11 हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो।
1 Peter 2:12 अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 119:89-176
  • 1कुरिन्थियों 8



रविवार, 26 नवंबर 2017

धन्यवादी


   जब हमारे बच्चे छोटे ही थे, तो उन में से एक ने, रात्रि के खाने के समय जब उसे मटर की सबज़ी परोसी गई, दृढ़ आवाज़ में कहा "नहीं"। उसके यह कहने पर हमने उससे पूछा, "क्या नहीं?" हमारी अपेक्षा थी कि वह कहेगा, "नहीं चाहिए; धन्यवाद"; परन्तु उसने कहा, "नहीं मटर नहीं चाहिएं!" उसके इस प्रत्युत्तर से अच्छे आचरण पर एक चर्चा आरंभ हो गई। इसी प्रकार, अच्छे व्यवहार के विषय में अनेकों बार चर्चाएं हमारे परिवार में हो चुकी हैं।

   हमारा प्रभु परमेश्वर हमें स्मरण करवाता है कि अच्छे आचरण के अतिरिकत - जो कि बाह्य होता है, हमारे अन्दर एक धन्यवादी हृदय भी होना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में दर्जनों बार स्मरण करवाया गया है कि परमेश्वर से हमारे संबंध में धन्यवादी होना हमारे लाभ के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। भजन 118 का आरंभ तथा अन्त इस आग्रह से होता है, "यहोवा का धन्यवाद करो" (पद 1, 29)। जब भी हम प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति में आएं, हम धन्यवादी हृदय के साथ आएं (भजन 100:4)। जो निवेदन हम उससे करें, उन्हें भी धन्यवाद के साथ प्रस्तुत करें (फिलिप्पियों 4:6)। यह धन्यवादी रवैया हमें प्रभु परमेश्वर से मिलती रहने वाली अनगिनित आशीषों को स्मरण करवाता रहेगा, उसमें हमारे विश्वास को सुदृढ़ बनाए रखेगा, और हमें स्मरण करवाता रहेगा कि हमारी समस्याओं और कष्टों के समय में भी परमेश्वर की उपस्थिति सदा हमारे साथ बनी रहती है।

   इसीलिए भजनकार हम से कहता है, "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है" (भजन 118:1)। - जो स्टोवैल


केवल परमेश्वर के प्रति धन्यवादी हृदय से ही जीवन समृद्ध बनता है। - डीट्रीश बॉनहोफर

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों 4:6

बाइबल पाठ: भजन 118:1-14
Psalms 118:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 118:2 इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:3 हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:4 यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:5 मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया। 
Psalms 118:6 यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 118:7 यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है; मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर सन्तुष्ट हूंगा। 
Psalms 118:8 यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है। 
Psalms 118:9 यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है।
Psalms 118:10 सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:11 उन्होंने मुझ को घेर लिया है, नि:सन्देह घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:12 उन्होंने मुझे मधुमक्खियों के समान घेर लिया है, परन्तु कांटों की आग के समान वे बुझ गए; यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:13 तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पडूं परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की। 
Psalms 118:14 परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1 पतरस 3


बुधवार, 25 अक्टूबर 2017

आचरण और व्यवहार


   हमारे चर्च द्वारा आयोजित की गई सुसमाचार प्रचार सेवा का अन्त एक सभा के साथ हुआ, जिसमें सारे शहर से लोगों को आमंत्रित किया गया था। जिस दल ने इस सेवा-कार्य को आयोजित तथा संचालित किया था, जब उसके सदस्य, जिनमें हमारे चर्च के युवाओं की संगीत मण्डली, परामर्शदाता, और अगुवे सम्मिलित थे, मंच पर आए तो हम सबने बड़े उत्साह से तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया, और उनके द्वारा किए गए कठिन परिश्रम के लिए उनकी सराहना की। लेकिन एक व्यक्ति था जो पूरे कार्यक्रम में लगभग अप्रत्यक्ष रहा; वह था उस दल का अगुवा। कुछ दिन के बाद जब मेरी उससे मुलाकात हुई, तो मैंने उसे धन्यवाद एवं उसके कार्य के लिए उसे शुभकामनाएँ देते हुए कहा, हमने कार्यक्रम के दौरान आपको बहुत कम देखा। उसने कहा, "मैं पृष्ठभूमि में रहकर कार्य करता हूँ"; उसे अपने लिए सम्मान और पहचान अर्जित करने में कोई रुचि नहीं थी। उसका उद्देश्य था कि जिन लोगों ने परिश्रम किया था, उनकी सराहना हो।

   उसका यह शान्त और निःस्वार्थ व्यवहार मेरे लिए मसीही आचरण पर एक पूरा प्रचार सन्देश था। इसने मुझे स्मरण करवाया कि प्रभु परमेश्वर की सेवकाई में, मुझे अपने लिए सम्मान या पहचान अर्जित करने के प्रयास नहीं करने चाहिएं। चाहे मुझे प्रगट रूप में सम्मान अथ्वा सराहना मिले या नहीं, मैं अपने प्रभु परमेश्वर को सदा आदर दे सकता हूँ, उसके कार्य को पूरा कर सकता हूँ। जब मैं अपने व्यवहार और आचरण में प्रभु यीशु मसीह को सर्वोपरि रखूँगा, तो यह मेरे अन्दर ईर्ष्या और दूसरों के साथ व्यर्थ होड़ में पड़ने की भावना को पनपने से दबा कर रखेगा।

   मेरे जीवन की हर बात में मेरा प्रयास होना चाहिए कि, मुझमें और मेरे द्वारा बस प्रभु यीशु "बढ़े और मैं घटूँ" (यूहन्ना 3:30), क्योंकि वही "सर्वोत्तम है" (यूहन्ना 3:31)। जब यह बात हमारे आचरण और व्यवहार को निर्देषित करेगी, तब ही हम परमेश्वर के कार्य को बढ़ता और उन्नत होता हुए देखेंगे। हम जो भी करते हैं, उसमें और उससे हमें नहीं, प्रभु यीशु मसीह को महिमा मिलनी चाहिए। - लॉरेंस दरमानी


महिमा का स्थान सदा प्रभु यीशु मसीह के लिए है।

इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे[प्रभु यीशु मसीह को] भाते रहें। - 2 कुरिन्थियों 5:9

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3:22-31
John 3:22 इस के बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा। 
John 3:23 और यूहन्ना भी शालेम् के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था। क्योंकि वहां बहुत जल था और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे। 
John 3:24 क्योंकि यूहन्ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था। 
John 3:25 वहां यूहन्ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ। 
John 3:26 और उन्होंने यूहन्ना के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं। 
John 3:27 यूहन्ना ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता। 
John 3:28 तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूं। 
John 3:29 जिस की दुलहिन है, वही दूल्हा है: परन्तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है। 
John 3:30 अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं।
John 3:31 जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है; और पृथ्वी की ही बातें कहता है: जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 6-8
  • 1 तिमुथियुस 5


रविवार, 14 अगस्त 2016

आचरण


   मुझे आज भी अपने मित्र जे इलियट का वह चकित चेहरा याद है जब लगभग 50 वर्ष पूर्व मैं उसके घर के सामने के दरवाज़े से अचानक ही अन्दर घुसा था और मेरे चारों ओर मधुमखियाँ मण्डरा रही थीं। भागता हुआ मैं जब उसके पिछले दरवाज़े से बाहर निकला तो मुझे एहसास हुआ कि अब वे मधुमखियाँ मेरे साथ नहीं थीं - मैं उन्हें जे के घर के अन्दर छोड़ आया था। फिर कुछ ही क्षणों के पश्चात जे अपने पिछले दरवाज़े से भागता हुआ बाहर आया, और उसके पीछे वे मधुमखियाँ थीं जो मैं उसके घर ले आया था!

   उन मधुमखियों ने मुझे दर्जन से भी अधिक बार डंक मारा था, परन्तु मुझे इसका कोई विशेष दुषप्रभाव नहीं हुआ था। परन्तु जे के साथ ऐसा नहीं था; उसे तो एक या दो बार ही "मेरी" मधुमखियों का डंक झेलना पड़ा था, लेकिन फिर भी एलर्जिक प्रतिक्रिया के कारण उसकी आँखें तथा गला सूज गए जो उसके लिए बहुत दर्दनाक हो गया; मेरा कार्य मेरे मित्र के लिए बहुत कष्ट का कारण बन गया था।

   यही बात हमारे पारस्परिक व्यवहार एवं संबंधों में भी लागू होती है। जब हमारा आचरण और व्यवहार हमारे मसीही विश्वास के अनुरूप नहीं होता, हम दूसरों के लिए बहुत कष्ट का कारण बन जाते हैं। हम चाहे अपने गलत आचरण के लिए क्षमा भी माँग लें, फिर भी हमारे द्वारा दिए गए उस डंक की चुभन और निशानी तो रह ही जाती है।

   मसीह यीशु के अनुयायियों से लोग धैर्य और नम्रता के आचरण की आशा रखते हैं। हम मसीही विश्वासी कई दफा यह भूल जाते हैं कि विश्वास या जीवन या फिर दोनों ही से संघर्ष कर रहे लोग अकसर हमारी ओर सही मार्गदर्शन पाने की आशा के साथ देखते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि हम से उन्हें क्रोध की बजाए करुणा, कटुता की बजा अनुकंपा और आलोचना की बजाए प्रोत्साहन मिलेगा। प्रभु यीशु तथा प्रेरित पतरस ने हमें यही निर्देश दिए हैं कि हम ऐसे जीवन जीकर दिखाएं जिनमें हमारे आचरण से परमेश्वर को महिमा मिल सके (मत्ती 5:16, 1 पतरस 2:12)। होने दें कि हमारे आचरण और प्रतिक्रियाओं से हमारे संपर्क में आने वाले लोग हमारे प्रेमी, दयालु परमेश्वर पिता को जान और पहचान सकें। - रैंडी किलगोर


काश लोगों को मुझ में मैं कम और प्रभु यीशु अधिक दिखाई दें।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:1-12
1 Peter 2:1 इसलिये सब प्रकार का बैर भाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके। 
1 Peter 2:2 नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ। 
1 Peter 2:3 यदि तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है। 
1 Peter 2:4 उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है। 
1 Peter 2:5 तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाईं आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों। 
1 Peter 2:6 इस कारण पवित्र शास्त्र में भी आया है, कि देखो, मैं सिय्योन में कोने के सिरे का चुना हुआ और बहुमूल्य पत्थर धरता हूं: और जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह किसी रीति से लज्ज़ित नहीं होगा। 
1 Peter 2:7 सो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है, पर जो विश्वास नहीं करते उन के लिये जिस पत्थर को राजमिस्त्रीयों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया। 
1 Peter 2:8 और ठेस लगने का पत्थर और ठोकर खाने की चट्टान हो गया है: क्योंकि वे तो वचन को न मान कर ठोकर खाते हैं और इसी के लिये वे ठहराए भी गए थे। 
1 Peter 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1 Peter 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1 Peter 2:11 हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। 
1 Peter 2:12 अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 89-90
  • रोमियों 14


रविवार, 19 जून 2016

आचरण तथा उदाहरण


   मैं अपनी आँखों की जाँच के लिए चक्षु-चिकित्सक के यहाँ बैठा हुआ अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहा था जब वहाँ लगे एक पोस्टर पर मेरा धयान गया, जिसमें लिखा था कि बच्चे 12 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते जितना सीखते हैं उसका 80% आँखों के माध्यम से होता है। यह पढ़कर मैं उन सब बातों पर विचार करने लगा जो बच्चे देखते हैं और जो उन पर प्रभाव डालती हैं, जैसे कि पुस्तकें और पढ़ना, टेलिविज़न, फिल्में, घटनाएँ, आस-पास का वातावरण, लोगों का आचरण और व्यवहार - विशेषकर परिवार जनों का, आदि।

   बच्चों पर पिता का प्रभाव बहुत सशक्त होता है, इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्हें चिताया, "और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो" (इफिसियों 6:4)। एक पिता के स्थाई बने रहने वाले अच्छे आचरण के सामर्थी उदाहरण पर थोड़ा विचार कीजिए जिससे बच्चे प्रभावित होते हैं, उस उदाहरण से वे सही दिशा में बढ़ते हैं, और चाहे सिद्ध ना हों किंतु प्रशंसा के पात्र बनते हैं। जब हमारे जीवन का उदाहरण परमेश्वर के चरित्र को बिगाड़ने की बजाए उसके भले चरित्र को प्रतिबिंबित करता है तो यह बच्चों के जीवन में भलाई के लिए कार्यकारी होने वाला एक सशक्त प्रभाव बन जाता है।

   यह किसी भी अभिभावक के लिए चुनौतीपूर्ण है, इसलिए कोई संयोग नहीं कि प्रेरित पौलुस ने इस संदर्भ में आगे लिखा, "निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो" (इफिसियों 6:10)। केवल परमेश्वर के मार्गदर्शन और सामर्थ से ही हम उसके प्रेम और धैर्य को दर्शा सकते हैं। हम अपने बच्चों को अपने प्रचार की अपेक्षा, अपने आचरण तथा उदाहरण द्वारा कहीं अधिक सिखाते हैं, और बचपन में डाली गई नींव पर ही आगे चलकर वे अपने जीवनों का निर्माण करते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


वे माता-पिता आदर्णीय हैं जो ना केवल हमें जीवन देते हैं, 
वरन उस जीवन को अच्छाई से जीना भी सिखाते हैं।

कोई तेरी जवानी को तुच्‍छ न समझने पाए; पर वचन, और चाल चलन, और प्रेम, और विश्वास, और पवित्रता में विश्वासियों के लिये आदर्श बन जा। - 1 तिमुथियुस 4:12

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:1-11
Ephesians 6:1 हे बालकों, प्रभु में अपने माता पिता के आज्ञाकारी बनो, क्योंकि यह उचित है। 
Ephesians 6:2 अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)। 
Ephesians 6:3 कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे। 
Ephesians 6:4 और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो।
Ephesians 6:5 हे दासो, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। 
Ephesians 6:6 और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। 
Ephesians 6:7 और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो।
Ephesians 6:8 क्योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र; प्रभु से वैसा ही पाएगा। 
Ephesians 6:9 और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दोनों का स्‍वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।
Ephesians 6:10 निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। 
Ephesians 6:11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13
  • प्रेरितों 4:23-37


गुरुवार, 5 नवंबर 2015

पुरुस्कार


   हमारे चर्च में बच्चों के लिए मसीही सेवकाई में हम जब बच्चों को कोई अच्छा व्यवहार करते देखते हैं तो उन्हें एक कार्ड देते हैं। बच्चे उन कार्डों को जमा करते रहते हैं और फिर उन कार्डों के बदले में, अपने अच्छे आचरण और व्यवहार के लिए पुरुस्कार ले लेते हैं। इसका उद्देश्य है किसी बुरे आचरण अथवा दुर्व्यवहार की बजाए, अच्छे आचरण और व्यवहार पर उनका ध्यान केंद्रित रखना। इस सेवकाई के अन्तर्गत जब चर्च के एक अगुवे ने 11 वर्षीय टायरी को एक कार्ड देना चाहा तो उसने कहा, "जी नहीं; धन्यवाद, मुझे कार्ड नहीं चाहिए। मैं केवल अच्छा व्यवहार बनाए रखना चाहता हूँ, चाहे उसके लिए मुझे कोई पुरुस्कार मिले या ना मिले।" उसके लिए सही कार्य करना ही अपने आप में एक पुरुस्कार था। उसका चरित्र अच्छा है और वह अच्छी बातों के साथ जीना चाहता है, चाहे उसे इसके लिए पुरुस्कार मिले या नहीं मिले।

   हम मसीही विश्वासियों को भी एक दिन पुरुस्कार मिलेंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "क्योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों पाए" (2 कुरिन्थियों 5:10)। लेकिन यह प्रतिफल या पुरुस्कार प्राप्त करना ही हमारे लिए अच्छे आचरण को करने का कारण नहीं होना चाहिए; और ना ही हमारा अच्छा आचरण और अच्छे कार्य हमें उद्धार दिला सकते हैं, जो केवल पापों से पश्चाताप और मसीह यीशु पर लाए गए विश्वास से है। हमारे अच्छे आचर्फ़ण एवं व्यवहार का आधार है परमेश्वर के प्रति हमारा प्रेम। परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम के कारण, उसकी प्रसन्नता के लिए, हमें वह आचरण और व्यवहार प्रदर्शित करना चाहिए जो हमारे मसीही विश्वास के अनुरूप है, उसकी इच्छा के अनुसार है, हमारे मसीही विश्वास की प्रत्यक्ष गवाही है।

   यदि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं तो उसे, जिसने हम से हमारे पापों की दशा में भी हम से प्रेम किया (रोमियों 5:8), उसकी प्रसन्नता के लिए हमें वही करना चाहिए जो उसे पसन्द है, और पवित्र मन तथा शुद्ध ध्येय से उसकी आज्ञाकारिता में बने रहना चाहिए। हमारा सर्वोत्त्म पुरुस्कार होगा अनन्तकाल तक स्वर्ग में अपने परमेश्वर पिता के साथ बने रहना। - ऐनी सेटास


परमेश्वर को प्रसन्न करना ही हमारा उसके आज्ञाकारी रहने का मुख्य कारण है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:1-11
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। 
2 Corinthians 5:9 इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे भाते रहें। 
2 Corinthians 5:10 क्योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों पाए। 
2 Corinthians 5:11 सो प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्हारे विवेक पर भी प्रगट हुआ होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2



मंगलवार, 18 अगस्त 2015

भला


   कभी कभी जब मैं दफतर जाने के लिए बाहर निकलने को होता हूँ, तो मेरी पत्नि मुझे यह कहकर टोक देती है, "आप ऐसे कपड़े पहन कर तो दफतर नहीं जा सकते!" यह मेरे पहने कपड़ों में किसी असंगति के कारण होता है; या तो मेरी टाई, या फिर मेरी पतलून मेरी जैकेट से मेल नहीं खा रही होती है, या ऐसी ही कोई अन्य असंगति उसे दिखाई दे जाती है। यद्यपि पहरावे और फैशन संबंधित चुनावों के बारे में टोका जाना अपमानजनक लग सकता है, लेकिन मैंने अनुभव से यह भी जान लिया है कि मेरी पत्नि का यह सुधार के लिए टोकना मेरे लिए भला ही होता है।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हम मसीही विश्वासियों को सदा ऐसे आचरण और व्यवहार को धारण कर लेने के लिए कहती है जो हमारे मसीही विश्वास के अनुरूप हों। जैसे जीवन के कार्यों में कई दफा हम अपने पहने हुए कपड़ों से अपनी पहचान प्रगट करते हैं, वैसे ही हम अपने धारण किए हुए आचरण और व्यवहार से हमारे जीवनों में मसीह यीशु की उपस्थिति को प्रगट करते हैं। प्रेरित पौलुस ने धारण करने के लिए कुछ आचरणों और व्यवहारों की सूची दी है; ये हैं करुणा, भलाई, दीनता, नम्रता और सहनशीलता (कुलुस्सियों 3:12) और इनके अतिरिक्त, प्रेम और परमेश्वर की शान्ति (कुलुस्सियों 3:14-15)।

   प्रभु यीशु के समान आचरण और व्यवहार को धारण कर पाना, प्रभु यीशु के साथ संगति रखने से आरंभ होता है और उसके साथ बिताए गए समय द्वारा परिपक्व होता है। यदि आप कभी प्रभु को आप से कहते सुनें, "आप ऐसे तो संसार के सामने नहीं जा सकते", तो रुक जाएं, उसे अवसर दें कि वह आपके आचरण या व्यवहार में आई असंगित को दूर करे, आपको और अधिक अपनी समानता में बदले। उसे ऐसा करने देना सदा ही आपके भले ही के लिए होगा। - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु के आचरण और व्यवहार को धारण किए रहना हमारे जीवनों में बनी हुई उसकी उपस्थिति को दिखाता है।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:2

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-17
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। 
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। 
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। 
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो। 
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। 
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 100-102
  • 1 कुरिन्थियों 1


शुक्रवार, 5 जून 2015

व्यवहार


   व्यवहार को कैसे बदला जा सकता है? अपनी पुस्तक The Social Animal में डेविड ब्रुक्स लिखते हैं कि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवहार बदलने के लिए लोगों को बुरे व्यवहार के दूर-गामी दुषपरिणामों के बारे में बताना चाहिए; जैसे कि, "धुम्रपान से कैंसर हो सकता है; व्यभिचार से परिवार नाश हो जाते हैं; झूठ बोलने से विश्वास जाता रहता है। उन विशेषज्ञों तर्क यह है कि जब आप लोगों को उनके दुर्व्यवहार के दुषपरिणाम तथा मूर्खता समझाएंगे, तो लोग वह दुर्वयवहार करने से रुकने को प्रेरित होंगे, क्योंकि नैतिक निर्णय तथा आत्मसंयम बर्तने के लिए युक्ति और इच्छा दोनों की आवश्यकता होती है। लेकिन यह तर्क कामयाब नहीं रहा, देखा यही जाता है कि दुर्व्यवहार के दुषपरिणाम जानने के बावजूद लोग वह दुर्व्यवहार करने से कम ही रुकते हैं"। दूसरे शब्दों में व्यवहार परिवर्तन के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है।

   मसीह यीशु के अनुयायी होने के नाते, हम अपने आत्मिक जीवन में बढ़ना चाहते हैं, आत्मिक व्यवहार में पनपना चाहते हैं। लगभग दो हज़ार वर्ष पहले प्रभु यीशु ने अपने चेलों को बताया था कि वे इस परिवर्तन तथा बढ़ोतरी को कैसे प्राप्त कर सकते हैं। प्रभु ने कहा: "तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते" (यूहन्ना 15:4)। प्रभु यीशु दाखलाता है, और उसके अनुयायी, शाखाएं हैं। यदि हम सच्चे मन से विचार करें तो यह अवश्य स्वीकार करेंगे कि प्रभु यीशु से अलग रहकर हम आत्मिक रीति से असहाय एवं प्रभावहीन होते हैं।

   प्रभु यीशु की संगति में रहने से, उसमें बने रहने से ही हमें आत्मिक रीति से परिवर्तित होते हैं, प्रभु का जीवन हम में पनपता और बढ़ता है। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु द्वारा परिवर्तित मन से ही परिवर्तित व्यवहार आरंभ होता है।

पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। जो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। - 1 यूहन्ना 2:5-6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:1-13
John 15:1 सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है। 
John 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले। 
John 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। 
John 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। 
John 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। 
John 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाईं फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। 
John 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। 
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। 
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15



शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

समकालीन

   नई शताब्दी के इस आरंभिक समय में हम पहले से चले आ रहे और समय के साथ प्रमाणित मापदंडों के उपयोग के विषय में बहुत से लोगों को प्रश्न उठाते हुए देखते हैं। इस बात का एक सजीव उदाहरण है एक किशोर गायिका द्वारा, जो मसीह यीशु में विश्वास रखने का दावा करती है, दिया गया एक साक्षात्कार। इस साक्षात्कार में अपने द्वारा पहने जाने वाले बहुत छोटे और शरीर प्रदर्श्नात्मक वस्त्रों तथा शालीनता के मापदंडों के बारे में चर्चा करते हुए वह बोली "यह विचार बहुत पुरानी सोच का है।"

   इस युवती की यह बात सही भी है और गलत भी। सही इसलिए क्योंकि मसीही विश्वास से संबंध रखने वाले मापदंड वास्तव मे काफी प्राचीन हैं - वे आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे गए थे। गलत इसलिए क्योंकि उसका यह धारणा रखना कि क्योंकि बात पुरानी है इसलिए यों ही बेपरवाही से नज़रंदाज़ करी जा सकती हैं सही नहीं है। वास्तविकता यही है कि परमेश्वर के बाइबल के सिद्धांत "पुराने" नहीं समसामयिक हैं, क्योंकि परमेश्वर अटल और स्थिर है तथा उसके मापदंड और उसका वचन दोनो ही कभी बदलते नहीं हैं।

   जहाँ तक शालीनता का प्रश्न है, जब बाइबल महिलाओं के लिए कहती है कि "वैसे ही स्‍त्रियां भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्‍त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथने, और सोने, और मोतियों, और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से" (1 तिमुथियुस 2:9 ) तो वह इसलिए कि सबके जीवन से परमेश्वर ही की महिमा हो और उसे ही आदर पहुँचे - और यह सिद्धांत केवल स्त्रियों पर ही नहीं वरन सभी पर लागू होता है, क्योंकि परमेश्वर के वचन में यह भी लिखा है कि "इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए" (रोमियों 12:2)। ये सिद्धांत, परमेश्वर के वचन के अन्य सिद्धांतों के समान आज भी एक भला और आदरणीय जीवन जीने के लिए हमारा वैसे ही मार्गदर्शन करते हैं जैसा तब करते थे जब पहली बार लिखे गए थे।

   इसलिए चाहे आप कोई पॉप-स्टार हों या सामान्य व्यक्ति, यदि आप परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार आचरण और जीवन व्यतीत कर रहें हैं तो "पुरानी सोच" का होने की चिंता ना करें - आप समकालीन ही हैं और सदा रहेंगे। - डेव ब्रैनन


जाँच कर देखिए - क्या आपके निर्णय और चुनाव परमेश्वर को महिमा एवं आदर देते हैं अथवा संसार और मनुष्यों को?

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 2:8-10; 1 पतरस 3:3-5
1 Timothy 2:8 सो मैं चाहता हूं, कि हर जगह पुरूष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठा कर प्रार्थना किया करें।
1 Timothy 2:9 वैसे ही स्‍त्रियां भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्‍त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथने, और सोने, और मोतियों, और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से।
1 Timothy 2:10 क्योंकि परमेश्वर की भक्ति ग्रहण करने वाली स्‍त्रियों को यही उचित भी है।

1 Peter 3:3 और तुम्हारा सिंगार, दिखावटी न हो, अर्थात बाल गूंथने, और सोने के गहने, या भांति भांति के कपड़े पहिनना।
1 Peter 3:4 वरन तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्‍त मनुष्यत्‍व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्ज़ित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है।
1 Peter 3:5 और पूर्वकाल में पवित्र स्‍त्रियां भी, जो परमेश्वर पर आशा रखती थीं, अपने आप को इसी रीति से संवारती और अपने अपने पति के आधीन रहती थीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6 
  • प्रेरितों 17:16-34


बुधवार, 15 मई 2013

सुनिश्चित कीजिए


एक पुस्तक जिसका शीर्षक है "UnChristian" (गैरमसीही) उन कारणों को बताती है जिनके कारण बहुत से ऐसे लोग जो प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं रखते, मसीह यीशु पर विश्वास रखने वालों से चिढ़ते हैं। दिए गए कारणों में प्रमुख है मसीही अविश्वासियों के प्रति मसीही विश्वासियों का व्यवहार। इस पुस्तक के लिए किए गए शोध में पाया गया कि मसीह यीशु पर विश्वास ना रखने वालों की दृष्टि में मसीही विश्वासी पाखण्डी, आलोचनात्मक एवं ऊँगुली उठाने वाले, कठोर, और अपने समान विश्वास ना रखने वालों के प्रति प्रेम या सहिषुण्ता ना दिखाने वाले होते हैं।

   मुझे पूरा विश्वास है कि मसीही विश्वासियों के प्रति यह दृष्टिकोण जैसे मुझे कतई पसन्द नहीं आया था, एक मसीही विश्वासी होने के नाते आपको भी यह पसन्द नहीं आएगा। लेकिन प्रश्न मेरी और आपकी पसन्द-नापसन्द का नहीं है; बहुत बार नापसन्द आने वाली बातें भी सत्य होती हैं, और हम मसीही विश्वासियों को सत्य का सच्चाई से सामना करना अवश्य है। प्रभु यीशु के शिष्य प्रेरित यूहन्ना ने अपनी लिखी पहली पत्री में कुछ सशक्त शब्दों का प्रयोग किया है। एक स्थान पर वह लिखता है: "देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना" (1 यूहन्ना 3:1)। परमेश्वर के साथ एक मसीही विश्वासी के संबंध के आधार को लिखने के बाद यूहन्ना आगे तीक्ष्ण तुलनात्मक अन्तर प्रस्तुत करता है: एक मसीही विश्वासी धार्मिकता से प्रेम करता है, पाप से बचकर रहता है, और अन्य लोगों के प्रति प्रेम में बने रहता है; इसकी तुलना में मसीह में अविश्वासी रहने वालों के जीवन में पाप करने और पाप में बने रहने की प्रवृति, एक दुसरे के प्रति भेद-भाव, तिरिस्कार और नफरत की भावनाएं रहती हैं, और वे अनन्त मृत्यु के भागी हैं।

   यूहन्ना ने बहुत चुभने वाले प्रबल शब्द प्रयोग करे हैं जिससे कि पढ़ने वाले पहचान सकें कि हम या तो प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर की सन्तान हैं अन्यथा प्रभु यीशु से दूर रहकर, जानते बूझते हुए या अनजाने में, शैतान की आधीनता में रहने वाले लोग - बीच का या तीसरा कोई स्थान है ही नहीं। साथ ही यूहन्ना यह भी चिताता है कि केवल एक ही मानक है जो प्रमाणित करता है कि हम वास्तव में परमेश्वर की सन्तान हैं - प्रत्यक्ष व्यवहार और जीवन में सर्वविदित प्रेम (यूहन्ना 3:10, 18-19; 4:7-8)। यह नहीं हो सकता कि हम पाप का जीवन भी व्यतीत करें और परमेश्वर की सन्तान होने का दावा भी करें - हमारा प्रचार नहीं वरन हमारा चरित्र और व्यवहार, हमारा आचरण हमारी वास्तविकता को प्रगट करता है।

   आप यदि मसीही विश्वासी हैं तो यह सुनिश्चित करना भी आपका कर्तव्य है कि आपका जीवन और कार्य आपके शब्दों और आपके विश्वास का सजीव उदाहरण हों। अपने जीवन की गवाही से मसीह यीशु के लिए लोगों को ठोकर देने वाले नहीं वरन लोगों को आकर्षित करने वाले बनें। - डेव एग्नर



मसीह यीशु के अनुयायी होने की दो आवश्यकताएं हैं - पहला मसीह यीशु में विश्वास, दूसरा उस विश्वास के अनुरूप आचरण।

इसी से परमेश्वर की सन्तान, और शैतान की सन्तान जाने जाते हैं; जो कोई धर्म के काम नहीं करता, वह परमेश्वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता। - 1 यूहन्ना 3:10 

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 3:1-10,14-18
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।
1 John 3:4 जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का विरोध करता है; ओर पाप तो व्यवस्था का विरोध है।
1 John 3:5 और तुम जानते हो, कि वह इसलिये प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्‍वभाव में पाप नहीं।
1 John 3:6 जो कोई उस में बना रहता है, वह पाप नहीं करता: जो कोई पाप करता है, उसने न तो उसे देखा है, और न उसको जाना है।
1 John 3:7 हे बालकों, किसी के भरमाने में न आना; जो धर्म के काम करता है, वही उस की नाईं धर्मी है।
1 John 3:8 जो कोई पाप करता है, वह शैतान की ओर से है, क्योंकि शैतान आरम्भ ही से पाप करता आया है: परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे।
1 John 3:9 जो कोई परमेश्वर से जन्मा है वह पाप नहीं करता; क्योंकि उसका बीज उस में बना रहता है: और वह पाप कर ही नहीं सकता, क्योंकि परमेश्वर से जन्मा है।
1 John 3:10 इसी से परमेश्वर की सन्तान, और शैतान की सन्तान जाने जाते हैं; जो कोई धर्म के काम नहीं करता, वह परमेश्वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता।
1 John 3:14 हम जानते हैं, कि हम मृत्यु से पार हो कर जीवन में पहुंचे हैं; क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्यु की दशा में रहता है।
1 John 3:15 जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्यारे में अनन्त जीवन नहीं रहता।
1 John 3:16 हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए।
1 John 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है?
1 John 3:18 हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 22-23 
  • यूहन्ना 4:31-54


मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

श्रद्धा

मेरे पिताजी परमेश्वर के प्रति श्रद्धालु व्यवहार बनाए रखने के लिये बड़े कट्टर थे। उनके समक्ष यदि कोई परमेश्वर को हल्के में संबोधित करता तो वे क्रुद्ध हो जाते। उनका नियम था कि जब वे सबके सामने बाइबल पढ़ें तो उनके परिवार जन सीधे और सतर्क बैठें, जैसे वे किसी उच्च पदाधिकरी के समक्ष बैठे हों। वे जब परमेश्वर को संबोधित करते थे तो उनके हावभाव से उनकी श्रद्धा और आश्चर्य प्रगट होता था कि हम पापी मनुष्य भी परम पवित्र सृष्टिकर्ता से वार्तालाप कर सकते हैं।

हमारा सर्वसामर्थी परमेश्वर चाहता है कि हम उसे "अब्बा, पिता" करके संबोधित करें, और वह हमें बिना किसी घबराहट या हिचकिचाहट के अपने समक्ष आने का निमंत्रण भी देता है। परन्तु बाइबल के सैंकड़ों खण्ड हैं जहां यह बात स्पष्ट करी गई है कि हमें परमेश्वर के प्रति श्रद्धा और भय का आचरण कभी नज़रांदज़ नहीं करना है।

निर्गमन १९ अध्याय में परमेश्वर का अपने लोगों को अपने निकट आने का निमंत्रण और उसकी उपस्थिति से उत्पन्न पराक्रमी और भय पैदा करने वाली घटनाओं का अद्भुत समागम है, जिससे इस्त्राएली लोग उसके प्रति श्रद्धा और भय को समझ सकें। जब इस्त्राएली प्रजा पर्वत के नीचे परमेश्वर की बात सुनने को जमा हुई और परमेश्वर पर्वत की चोटी पर उतरा तब पर्वत की चोटी से बड़ी आग और धुआं उठा, भीष्ण गड़गड़ाहट की दिल दहला देने वाली ध्वनि हुई और तेज़ बिजली आकाश में कौन्धने लगी। पर्वत कांपने लगा और तुरही का ऊंचा शब्द हुआ और तब इस्त्राएली लोगों ने परमेश्वर को मूसा से बात करते सुना और वे आदर, भय और श्रद्धा से भर गए।

परमेश्वर कितना महान और पवित्र है, उसकी तुलना में हम कितने छोटे और कमज़ोर हैं और हमारी कोई सामर्थ या पवित्रता तो है ही नहीं। लेकिन फिर भी हमारे प्रति वह अपने प्रेम को प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट करता है और समस्त मानव जाति को, वे चाहे जो भी हों और जैसे भी हों, प्रभु यीशु में होकर अपने पास आने का खुला निमंत्रण देता है।

जब हम परमेश्वर के सन्मुख अपनी औकात का ध्यान रखते हैं तो हम भय के साथ उसकी सेवा और आनन्द के साथ उसकी संगति भी कर सकते हैं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


सच्ची उपासना परमेश्वर की सच्ची पहिचान से होती है।

डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपके हुए मगन हो। - भजन २:११


बाइबल पाठ: निर्गमन १९:१-१९

इस्त्राएलियों को मिस्र देश से निकले हुए जिस दिन तीन महीने बीत चुके, उसी दिन वे सीनै के जंगल में आए।
और जब वे रपीदीम से कूच करके सीनै के जंगल में आए, तब उन्होंने जंगल में डेरे खड़े किए; और वहीं पर्वत के आगे इस्त्राएलियों ने छावनी डाली।
तब मूसा पर्वत पर परमेश्वर के पास चढ़ गया, और यहोवा ने पर्वत पर से उसको पुकार कर कहा, याकूब के घराने से ऐसा कह, और इस्त्राएलियों को मेरा यह वचन सुना,
कि तुम ने देखा है कि मै ने मिस्रियों से क्या क्या किया, तुम को मानो उकाब पक्षी के पंखों पर चढ़ा कर अपने पास ले आया हूं।
इसलिये अब यदि तुम निश्चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे, समस्त पृथ्वी तो मेरी है।
और तुम मेरी दृष्टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे। जो बातें तुझे इस्त्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।
तब मूसा ने आकर लोगों के पुरनियों को बुलवाया, और ये सब बातें, जिनके कहने की आज्ञा यहोवा ने उसे दी थी, उनको समझा दीं।
और सब लोग मिल कर बोल उठे, जो कुछ यहोवा ने कहा है वह सब हम नित करेंगे। लोगों की यह बातें मूसा ने यहोवा को सुनाईं।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, सुन, मैं बादल के अंधियारे में होकर तेरे पास आता हूं, इसलिये कि जब मैं तुझ से बातें करूं तब वे लोग सुनें, और सदा तेरी प्रतीति करें। और मूसा ने यहोवा से लोगों की बातों का वर्णन किया।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, लोगों के पास जा और उन्हें आज और कल पवित्र करना, और वे अपने वस्त्र धो लें,
और वे तीसरे दिन तक तैयार हो रहें, क्योंकि तीसरे दिन यहोवा सब लोगों के देखते सीनै पर्वत पर उतर आएगा।
और तू लोगों के लिये चारों ओर बाड़ा बान्ध देना, और उन से कहना, कि तुम सचेत रहो कि पर्वत पर न चढ़ो और उसके सिवाने को भी न छूओ और जो कोई पहाड़ को छूए वह निश्चय मार डाला जाए।
उसको कोई हाथ से तो न छूए, परन्तु वह निश्चय पत्थरवाह किया जाए, वा तीर से छेदा जाए; चाहे पशु हो चाहे मनुष्य, वह जीवित न बचे। जब महाशब्द वाले नरसिंगे का शब्द देर तक सुनाई दे, तब लोग पर्वत के पास आएं।
तब मूसा ने पर्वत पर से उतर कर लोगों के पास आकर उनको पवित्र कराया और उन्होंने अपने वस्त्र धो लिए।
और उस ने लोगों से कहा, तीसरे दिन तक तैयार हो रहो, स्त्री के पास न जाना।
जब तीसरा दिन आया तब भोर होते बादल गरजने और बिजली चमकने लगी, और पर्वत पर काली घटा छा गई, फिर नरसिंगे का शब्द बड़ा भरी हुआ, और छावनी में जितने लोग थे सब कांप उठे।
तब मूसा लोगों को परमेश्वर से भेंट करने के लिये छावनी से निकाल ले गया, और वे पर्वत के नीचे खड़े हुए।
और यहोवा जो आग में होकर सीनै पर्वत पर उतरा था, इस कारण समस्त पर्वत धुएं से भर गया, और उसका धुआं भट्टे का सा उठ रहा था, और समस्त पर्वत बहुत कांप रहा था
फिर जब नरसिंगे का शब्द बढ़ता और बहुत भारी होता गया, तब मूसा बोला, और परमेश्वर ने वाणी सुना कर उसको उत्तर दिया।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती ४-६
  • मरकुस ४:१-२०