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Sunday, August 11, 2013

वचन की सहायता

   प्रभु यीशु की पृथ्वी की सेवकाई का आरंभ तो बहुत अच्छा था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती 3 अध्याय में हम पाते हैं कि उसके बपतिस्मे के समय परमेश्वर पिता ने स्वर्ग से आकाशवाणी के द्वारा कहा: "और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अत्यन्‍त प्रसन्न हूं" (मत्ती 3:17)। लेकिन इसके तुरंत बाद परिस्थिति विकट हो गई - प्रभु यीशु को परीक्षा के लिए जाना पड़ा!

   प्रभु यीशु की यह परीक्षा अनायास अथवा अनपेक्षित नहीं थी - पवित्र आत्मा प्रभु यीशु को बियाबान में ले गया जहाँ स्वर्ग और नरक की ताकतों का सामना हो सके। चालीस दिन तक प्रभु यीशु उपवास में रहा और शैतान द्वारा परखा गया (लूका 4:1)। अपनी इस परीक्षा से विजयी होकर निकलने के द्वारा प्रभु यीशु ने हम मसीही विश्वासियों के लिए एक उदाहराण दिया जिसके द्वारा हम भी अपनी परीक्षाओं के समय में प्रभु यीशु के समान ही जयवंत हो सकते हैं। जैसे शैतान ने हमारे प्रभु की परीक्षा करी थी, वैसे ही आज भी वह प्रभु यीशु के अनुयायीयों की परीक्षा करता रहता है, उन्हें भरमाने और पाप में गिराने के प्रयास करता रहता है।

    मत्ती और लूका रचित सुसमाचारों में दिए प्रभु यीशु की परीक्षा से संबंधित इस खंड में हम यह भी पाते हैं कि शैतान ने उस चालिस दिन के उपवास के अन्त में, जब प्रभु भूखा और थका हुआ था, उसे परमेश्वर पिता के विरुद्ध भड़काने और स्वार्थ सिद्धि के लिए कार्य करने को उकसाने का प्रयास किया। शैतान हमारे साथ भी यही कार्य करता है - जब हम थकित और कमज़ोर होते हैं तब वह प्रलोभनों, अनुचित मार्गों और विधियों के प्रयोग और परमेश्वर के प्रति अनाज्ञाकारी होने के सुझावों के द्वारा हमें बहकाने और गिराने के प्रयास करता है। ऐसी स्थिति में उसकी युक्तियों को व्यर्थ करने और उस पर जयवंत होने के लिए हमें भी वही करना चाहिए जो प्रभु यीशु ने किया - परमेश्वर के वचन की सहायता लेना।

   शैतान के हर प्रयास और प्रलोभन का उत्तर प्रभु यीशु ने परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी परमेश्वर की आज्ञा को उद्धरित करके दिया। जीवन में आने वाली हर परिस्थिति और प्रलोभन तथा आवश्यकता से संबंधित शिक्षा बाइबल में मिलती है। अनेकों ऐसे पद और हवाले हैं जो हमें लुचपन, लालच, झूठ, तरह तरह की बुराइयों आदि के संबंध में चिताते हैं और मार्गदर्शन करते हैं। यदि हम परमेश्वर के वचन को अपने मन में बसा लें और स्मरण रखें तो परिस्थिति के अनुसार शैतान के हमलों का उचित प्रत्युत्तर दे सकते हैं और बुराई तथा पाप में गिरने से बच सकते हैं।

   पाप से बचने के लिए परमेश्वर के वचन की सहायता ही हमारी सर्वोत्तम सहायता है। - जो स्टोवैल


जब शैतान वार करे तो परमेश्वर के वचन से उस पर पलटवार करें।

फिर यीशु पवित्रआत्मा से भरा हुआ, यरदन से लैटा; और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा; और शैतान उस की परीक्षा करता रहा। - लूका 4:1

बाइबल पाठ: मत्ती 4:1-11
Matthew 4:1 तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्‍लीस से उस की परीक्षा हो।
Matthew 4:2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्‍त में उसे भूख लगी।
Matthew 4:3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं।
Matthew 4:4 उसने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।
Matthew 4:5 तब इब्‍लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया।
Matthew 4:6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
Matthew 4:7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।
Matthew 4:8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका वैभव दिखाकर
Matthew 4:9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा।
Matthew 4:10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।
Matthew 4:11 तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 81-83 
  • रोमियों 11:19-36