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Saturday, November 2, 2013

मूँह

   मैं अपने कुछ मित्रों के साथ बातें करते हुए मार्ग पर चल रहा था कि अचानक ही मुझे ठोकर लगी और मैं मूँह के बल गिर पड़ा। मुझे गिरने के बारे में ज़्यादा तो स्मरण नहीं है पर इतना स्मरण है कि मेरा मूँह सड़क की गन्दगी और मिट्टी से भर गया। उफ! कितना बुरा स्वाद था, मैं तुरंत ही अपनी चोट की परवाह करने से पहले ही अपने मूँह को साफ करने और गन्दगी को बाहर निकाल देने के प्रयासों में लग गया, लेकिन वह बुरा स्वाद बहुत देर तक मेरे मूँह में बना रहा और मुझे परेशान करता रहा। जो तब मेरे मूँह में गया, उससे मुझे कोई आनन्द तो कतई नहीं मिला, लेकिन अपने मूँह की रखवाली करना मैंने अवश्य सीख लिया।

   मूँह में जो जाता है हम उसके बारे में तो सचेत रहते हैं, और हमें रहना भी चाहिए, नहीं तो कोई हानिकारक पदार्थ हमारे अन्दर जा सकता है, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जो मूँह से बाहर आता है, उसके प्रति हमें और भी अधिक सचेत रहना चाहिए। जब बाइबल में नीतिवचन के लेखक ने लिखा: "बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है" (नीतिवचन 15:2), तो जो शब्द हिन्दी में ’उबल’ अनुवादित हुआ है उसका मूल भाषा में अर्थ है "प्रचण्ड वेग से बाहर आना"। मूँह से निकली बात वापस नहीं ली जा सकती और अविवेकपूर्ण दोषारोपण, क्रोध भरे शब्द, गाली बकना आदि मूँह से बाहर आने वाली वो बातें हैं जो बेहिसाब और जीवन भर के लिए हानि पहुँचा सकती हैं।

   प्रेरित पौलुस ने इसके बारे में बड़ी स्पष्टता से कहा: "कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो" (इफिसियों 4:29)। इससे पहले वह कहता है कि कोई झूठ नहीं केवल सच मूँह से निकले (पद 25) और फिर इसके आगे कहता है, "सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए" (इफिसियों 4:31), अर्थात किसी के चरित्र पर कोई लांछन ना लगाया जाए। जो भी हमारे मूँह से बाहर आए वह हितकर और प्रेरक होना चाहिए।

   जो हमारे मूँह में जाता है उसकी तो हम उसके अन्दर जाने से पहले भली-भांति जाँच परख करते हैं, और यह उचित भी है। लेकिन जो मूँह से बाहर आता है क्या उसके प्रति भी हम उतने ही चिंतित और परखने वाले रहते हैं जबकि बाहर आने वाले के प्रति तो हमें और भी अधिक कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए। हमारे मसीही जीवन और गवाही तथा हमारे द्वारा हमारे तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने मूँह से बाहर आने वाली बातों के प्रति अति संवेदनशील एवं सचेत रहें और बहुत नाप-तोल कर ही कोई बात मूँह से बाहर आने दें। - डेव एग्नर


अपने मन के विचारों के प्रति सावधान रहें - वे कभी भी शब्द बनकर मूँह से बाहर आ सकते हैं।

इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - इफिसियों 4:25

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-7
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है। 
Proverbs 15:6 धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है। 
Proverbs 15:7 बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29 
  • तीतुस 3