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रविवार, 4 जुलाई 2021

हर बात

 

          मैंने मनमौजी ढंग से चित्रित किए गए और बच्चों के लिए तैयार किए गए परमेश्वर के वचन बाइबल की उस प्रति को खोला और अपने पोते के लिए उसे पढ़ना आरंभ किया। हम तुरंत ही उसके लेख में लिखे गए परमेश्वर के प्रेम और प्रावधानों के वर्णन को पढ़कर रोमांचित हो उठे। मैंने उस बाइबल को पलटकर उसकी जिल्द के सामने के भाग को देखा, और एक बार फिर उसके शीर्षक को पढ़ा – शीर्षक था “द जीसस स्टोरी बुक बाइबल: एवरी स्टोरी व्हिस्पर्स हिज़ नेम (यीशु की कहानी वाली बाइबल: प्रत्येक कहानी उसका नाम बताती है)” – बाइबल की हर बात हमारे उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर के बारे में बताती है।

          सच कहें तो कभी-कभी बाइबल की कुछ बातें, विशेषकर पुराने नियम की, समझना कठिन होता है। ऐसा क्यों है कि जो परमेश्वर को जानते और मानते भी नहीं है वे कई बार परमेश्वर के लोगों पर जयवंत और हावी रहते हैं? परमेश्वर इतनी क्रूरता को कैसे होने देता है जबकि हम जानते हैं कि उसका चरित्र परिशुद्ध है और उसके उद्देश्य हमारी भलाई के लिए हैं?

          अपने पुनरुत्थान के पश्चात प्रभु यीशु अपने दो शिष्यों से मिला, जो इम्माऊस के मार्ग जा रहे थे, और अपने आशा किए हुए मसीहा की मृत्यु हो जाने की निराशा के साथ संघर्ष कर रहे थे, और उन्होंने प्रभु को नहीं पहचाना (लूका 24:19-24)। उन्हें आशा थी कि “...यही इस्राएल को छुटकारा देगा...” (लूका 24:21)। लूका फिर दर्ज करता है कि प्रभु यीशु ने उन्हें किस प्रकार आश्वस्त किया और, “तब उसने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ कर के सारे पवित्र शास्त्रों में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया” (लूका 24:27)।

          बाइबल की हर बात प्रभु के बारे में बताती है, समझने में कठिन बातें भी। बाइबल हमारे संसार का पापों के कारण टूटा हुआ होने और संसार को एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता के बारे में बताती है। बाइबल में दर्ज हर कार्य, हर घटना, हर हस्तक्षेप हमें उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर के गुणों, चरित्र, कार्यों के बारे में बताता है। कैसे परमेश्वर ने अपने लोगों के छुटकारे के लिए योजना बनाई, कार्यान्वित की, और आज लोगों को उनके पापों से छुड़ा रहा है। बाइबल की हर बात उद्धारकर्ता की ओर संकेत करती है। - एलिसा मॉर्गन

 

हे प्रभु मैं आपकी पुस्तक में से आपके बारे में प्रतिदिन सीखता रहूं।


हर एक पवित्र शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। - 2 तीमुथियुस 3:16

बाइबल पाठ: लूका 24:17-27

लूका 24:17 उसने उन से पूछा; ये क्या बातें हैं, जो तुम चलते चलते आपस में करते हो? वे उदास से खड़े रह गए।

लूका 24:18 यह सुनकर, उनमें से क्‍लियुपास नाम एक व्यक्ति ने कहा; क्या तू यरूशलेम में अकेला परदेशी है; जो नहीं जानता, कि इन दिनों में उस में क्या क्या हुआ है?

लूका 24:19 उसने उन से पूछा; कौन सी बातें? उन्होंने उस से कहा; यीशु नासरी के विषय में जो परमेश्वर और सब लोगों के निकट काम और वचन में सामर्थी भविष्यद्वक्ता था।

लूका 24:20 और महायाजकों और हमारे सरदारों ने उसे पकड़वा दिया, कि उस पर मृत्यु की आज्ञा दी जाए; और उसे क्रूस पर चढ़वाया।

लूका 24:21 परन्तु हमें आशा थी, कि यही इस्राएल को छुटकारा देगा, और इन सब बातों के सिवाय इस घटना को हुए तीसरा दिन है।

लूका 24:22 और हम में से कई स्त्रियों ने भी हमें आश्चर्य में डाल दिया है, जो भोर को कब्र पर गई थीं।

लूका 24:23 और जब उस की लोथ न पाई, तो यह कहती हुई आईं, कि हम ने स्‍वर्गदूतों का दर्शन पाया, जिन्होंने कहा कि वह जीवित है।

लूका 24:24 तब हमारे साथियों में से कई एक कब्र पर गए, और जैसा स्त्रियों ने कहा था, वैसा ही पाया; परन्तु उसको न देखा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 28-29
  • प्रेरितों 13:1-25


सोमवार, 21 दिसंबर 2020

डर

 

          परमेश्वर के वचन बाइबल में जब भी कहीं कोई स्वर्गदूत प्रगट होता है, लगभग हर बार जो पहला वाक्य वह कहता है, होता है “डरो मत!” और इसमें कोई अचरज की बात नहीं है। जब भी कुछ अलौकिक पृथ्वी के लोगों के साथ संपर्क में आता है, पृथ्वी के लोग डर में मारे औंधे मुँह गिर पड़ते हैं। परन्तु लूका परमेश्वर के एक ऐसे स्वरूप में प्रगट होने के बारे में बताता है जिससे डर नहीं लगता है। प्रभु यीशु को जन्म के बाद चरनी में लेटाया गया, और इसमें डरने की क्या बात हो सकती है? एक नवजात शिशु से कोई क्यों डरेगा?

          पृथ्वी पर यीशु परमेश्वर और मनुष्य दोनों ही हैं। परमेश्वर होने के नाते वे आश्चर्यकर्म कर सकते हैं, पापों को क्षमा कर सकते हैं, मृत्यु पर जय पा सकते हैं, और भविष्य बता सकते हैं। परन्तु यहूदियों के लिए जिनके मन में परमेश्वर एक चमकीले बादल या आग के खम्भे के समान था, यीशु बहुत असमंजस का कारण हैं। उनके विचारों के सन्दर्भ में, बैतलहम का एक शिशु, एक बढ़ई का पुत्र, नासरत का एक व्यक्ति, कैसे परमेश्वर का उद्धारकर्ता मसीहा हो सकता था?

          परमेश्वर ने मनुष्य का स्वरूप क्यों लिया? बारह वर्षीय प्रभु यीशु के मंदिर में रब्बियों के साथ चर्चा करने का दृश्य हमने एक संकेत देता है। लूका बताता है, “और जितने उस की सुन रहे थे, वे सब उस की समझ और उसके उत्तरों से चकित थे” (लूका 2:47)। यह पहली बार था कि सामान्य लोग, सीधे से परमेश्वर के प्रत्यक्ष स्वरूप के साथ बात तथा संपर्क कर सकते थे।

          प्रभु यीशु आज भी हम सभी से बात करता है, उसे कभी भी “डरो मत!” कहने की आवश्यकता नहीं होती है। जितने उसके पास नम्रता में विश्वास तथा समर्पण के साथ आते हैं, वह उन सभी से बात करता है। जब हम सच्चे और खरे मन से उसके पास आते हैं, तो हमें उससे बात करने से डरने की आवश्यकता नहीं है। - फिलिप यैन्सी

 

यीशु एक ही व्यक्तित्व में परमेश्वर और मनुष्य दोनों थे, 

जिससे परमेश्वर और मनुष्य दोनों फिर से 

एक साथ आनन्दित रह सकें। - जॉर्ज वाइटफील्ड


जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा। - यूहन्ना 6:37

बाइबल पाठ: लूका 2:42-52

लूका 2:42 जब वह बारह वर्ष का हुआ, तो वे पर्व की रीति के अनुसार यरूशलेम को गए।

लूका 2:43 और जब वे उन दिनों को पूरा कर के लौटने लगे, तो वह लड़का यीशु यरूशलेम में रह गया; और यह उसके माता-पिता नहीं जानते थे।

लूका 2:44 वे यह समझकर, कि वह और यात्रियों के साथ होगा, एक दिन का पड़ाव निकल गए: और उसे अपने कुटुम्बियों और जान-पहचानों में ढूंढ़ने लगे।

लूका 2:45 पर जब नहीं मिला, तो ढूंढ़ते-ढूंढ़ते यरूशलेम को फिर लौट गए।

लूका 2:46 और तीन दिन के बाद उन्होंने उसे मन्दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उन की सुनते और उन से प्रश्न करते हुए पाया।

लूका 2:47 और जितने उस की सुन रहे थे, वे सब उस की समझ और उसके उत्तरों से चकित थे।

लूका 2:48 तब वे उसे देखकर चकित हुए और उस की माता ने उस से कहा; हे पुत्र, तू ने हम से क्यों ऐसा व्यवहार किया? देख, तेरा पिता और मैं कुढ़ते हुए तुझे ढूंढ़ते थे।

लूका 2:49 उसने उन से कहा; तुम मुझे क्यों ढूंढ़ते थे? क्या नहीं जानते थे, कि मुझे अपने पिता के भवन में होना अवश्य है?

लूका 2:50 परन्तु जो बात उसने उन से कही, उन्होंने उसे नहीं समझा।

लूका 2:51 तब वह उन के साथ गया, और नासरत में आया, और उन के वश में रहा; और उस की माता ने ये सब बातें अपने मन में रखीं।

लूका 2:52 और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया।

 

एक साल में बाइबल: मीका 4-5; प्रकाशितवाक्य 12

रविवार, 21 जुलाई 2019

क्या कह रहे हैं?



      अपनी पुस्तक Wearing God में लेखिका लौरेन विन्नर कहती हैं कि हमारे वस्त्र औरों से मूक रीति से हम क्या हैं कह देते हैं। जो हम पहनते हैं वो हमारी नौकरी, कार्य, समाज या पहचान, हमारे मिज़ाज, या सामजिक स्तर को बता सकता है। किसी टी-शर्ट के बारे में सोचिए जिस पर कुछ लिखा हो, या किसी व्यवसायी के सूट के बारे में, किसी की वर्दी के बारे में, किसी के ग्रीस से सनी जींस पहने हुए होने के बारे में, आदि – ये सभी वस्त्र उन्हें पहनने वाले व्यक्ति के बारे में कुछ कहते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र, प्रेरित पौलुस के अनुसार, इसी प्रकार से हम मूक रीति से मसीह यीशु का प्रतिनिधित्व भी कर सकते हैं। बाइबल में रोमियों 13:14 में लिखा है कि “वरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाशाओं को पूरा करने का उपाय न करो” इसका क्या अर्थ है? जब हम मसीही विश्वासी बनते हैं तो हम मसीह की पहचान धारण  कर लेते हैं। हम “विश्वास के द्वारा परमेश्वर की सन्तान हैं” (गलातियों 3:26-27); यही हमारा दर्जा है। लेकिन इस दर्जे को दूसरों के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए हमें प्रतिदिन मसीह यीशु के चरित्र और व्यवहार को पहनना पड़ता है। हम ऐसा प्रभु यीशु मसीह के लिए जीवन जीने, परमेश्वर की भक्ति, प्रेम तथा आज्ञाकारिता में बढ़ते जाने, हमें पापों में उलझाने और फंसाने वाले पापों की ओर पीठ मोड़ने, तथा प्रभु की समानता में और अधिक ढलने के दैनिक सतत प्रयास के द्वारा करते हैं।

      मसीह में हमारी यह बढ़ोतरी पवित्र आत्मा के द्वारा होती है जो हमारे अन्दर कार्य करता है (यूहन्ना 14:26), हम में प्रभु के वचन के अध्ययन, प्रार्थना, तथा अन्य मसीही विश्वासियों के साथ संगति रखने में समय बिताने की चाह उत्पन्न करता है (प्रेरितों 2:42)।

      जब और लोग हमारी बातों और व्यवहार को देखते हैं, तो उन्हें क्या लगता है कि हम क्या कह रहे हैं?  - एलीसन कीडा


जब और लोग हमें देखें, तो उन्हें जो दिखाई दे उससे हमारे उद्धारकर्ता की बड़ाई हो।

क्योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्तान हो। और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। - गलातियों 3:26-27

बाइबल पाठ: रोमियों 13:11-14
Romans 13:11 और समय को पहिचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुंची है, क्योंकि जिस समय हम ने विश्वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है।
Romans 13:12 रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्ध लें।
Romans 13:13 जैसा दिन को सोहता है, वैसा ही हम सीधी चाल चलें; न कि लीला क्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और डाह में।
Romans 13:14 वरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाशाओं को पूरा करने का उपाय न करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15



गुरुवार, 27 जून 2019

प्रार्थना



      प्रार्थना करना परमेश्वर के साथ संवाद करना है, किसी सूत्र या औपचारिकता का निर्वाह करना नहीं। किन्तु फिर भी कभी-कभी हमें अपने प्रार्थना के समय को तरोताज़ा करने के लिए किसी “विधि” की आवश्यकता पड़ती है। हम परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन संहिता का या किसी अन्य भाग, जैसे कि प्रभु की प्रार्थना का उपयोग कर सकते हैं; या फिर हम ACTS विधि – Adoration (आराधना), Confession (अंगीकार), Thanksgiving (धन्यवाद), तथा Supplication (विनती) का भी प्रयोग कर सकते हैं। हाल ही में मैंने औरों के लिए प्रार्थना में सहायता के लिए इस “पाँच ऊँगली विधि” के बारे में जाना:
·         जब आप दोनों हाथ मिलाकर जोड़ते हो, तो आपके हाथों के अंगूठे आपके सबसे निकट होते हैं। इसलिए अपने निकट जनों के लिए प्रार्थना के साथ आरंभ करें (फिलिप्पियों 1:3-5)।
·         अगली उँगली तर्जनी है, जो दिशा संकेत देती है। उनके लिए प्रार्थना करें जो शिक्षा प्रदान करते हैं, बाइबल शिक्षक और प्रचारक, और वे जो बच्चों को सिखाते हैं (1 थिस्सलुनीकियों 5:25)।
·         इससे अगली उँगली सबसे लंबी होती है। उनके लिए प्रार्थना करें जो आपके ऊपर अधिकारी हैं – राष्ट्रीय और स्थानीय अगुवे एवँ अधिकारी, और कार्यस्थल पर आपके पर्वेक्षक (1 तिमुथियुस 2:1-2)।
·         चौथी उँगली सामान्यतः सबसे दुर्बल होती है। उनके लिए प्रार्थना करें जो परेशानियों में हैं या दुखों में पड़े हैं (याकूब 5:13-16)।
·         फिर आती है छोटी ऊँगली जो परमेश्वर की महानता के सामने आपके ‘कद’ की सूचक है। परमेश्वर से मांगें कि वह आपकी आवश्यकताओं की पूर्ति करे (फिलिप्पियों 4:6, 19)।

      प्रार्थना के लिए आप कोई भी विधि क्यों न प्रयोग करें, परन्तु परमेश्वर पिता से बातें अवश्य करें। वह आपके मन की बात को सुनना चाहता है। - ऐनी सेटास


प्रार्थना में महत्व हमारे शब्दों का नहीं है; हमारी मनोदशा का है।

निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:17

बाइबल पाठ: याकूब 5:13-18
James 5:13 यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे: यदि आनन्‍दित हो, तो वह स्‍तुति के भजन गाए।
James 5:14 यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मल कर उसके लिये प्रार्थना करें।
James 5:15 और विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठा कर खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप भी किए हों, तो उन की भी क्षमा हो जाएगी।
James 5:16 इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।
James 5:17 एलिय्याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्य था; और उसने गिड़िगड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा।
James 5:18 फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फलवन्‍त हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 8-10
  • प्रेरितों 8:26-40



गुरुवार, 6 दिसंबर 2018

दयालुता



      जब मैं बच्चा था, तब मैं एल. फ्रैंक बौम की ‘लैंड ऑफ ओज़’ श्रंखला की पुस्तकों को बड़ी रुचि के साथ पढ़ता था। हाल ही में उसी श्रंखला की एक पुस्तक रिंकीटिंक इन ओज़ मेरे हाथ लगी, समस्त मूल कलाकृतियों के साथ। एक बार फिर मैं बौम के उस व्यावाहारिक भलाई से भरे चरित्र, राजा रिंकीटिंक की मस्खरी हरकतों पर हँसा। उस पुस्तक के एक अन्य चरित्र, राजकुमार इंगा ने राजा का सही वर्णन दिया: “उनका हृदय दयालु और कोमल है, और यह बुद्धिमान होने से कहीं बेहतर है।”

      यह बात कितनी साधारण किन्तु कितनी विवेकपूर्ण है। परन्तु शायद ही कोई होगा जिसने अपने किसी प्रिय जन का हृदय अपनी किसी कठोर बात के द्वारा दुखाया न हो। ऐसा करने के द्वारा हम न केवल उस समय की शान्ति और सुख में परेशानी उत्पन्न करते हैं परन्तु जिनसे हम प्रेम करते हैं उनके प्रति की गई भलाई में से भी बहुत कुछ बिगाड़ देते हैं। एक 18वीं सदी की लेखिका हन्नाह मोर ने कहा, “एक छोटी सी दयाहीनता, बहुत बड़ा अपराध होती है।”

      भला समाचार यह है कि कोई भी दयालु हो सकता है। हो सकता है कि हम कोई प्रोत्साहित करने वाला सन्देश प्रचार न कर सकें, कठिन प्रश्नों के उत्तर न देने पाएँ, या बहुत से लोगों तक सुसमाचार सन्देश न पहुँचा पाएँ; परन्तु हम सभी दयालु अवश्य हो सकते हैं।

      कैसे? प्रार्थना के द्वारा। हमारे हृदयों को नम्र करने का यही एक तरीका है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने कहा: “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार पर रखवाली कर! मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे; मैं अनर्थकारी पुरूषों के संग, दुष्ट कामों में न लगूं, और मैं उनके स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं में से कुछ न खाऊं!” (भजन 141: 3-4)।

      ऐसे सँसार में जहाँ प्रेम ठण्डा पड़ गया है, परमेश्वर के हृदय से आने वाली दयालुता किसी के भी लिए सबसे अधिक सहायक और स्वस्थ करने वाली बात हो सकती है। - डेविड रोपर


यह ज्ञान कि परमेश्वर ने मुझ से असीम प्रेम किया है, 
मुझे बाध्य करेगा कि मैं भी सँसार में जाऊँ तथा औरों से ऐसा ही प्रेम करूँ। - ओस्वोल्ड चैम्बर्स

और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्‍डा हो जाएगा। परन्तु जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। - मत्ती 24:12-13


बाइबल पाठ: भजन 141
Psalms 141:1 हे यहोवा, मैं ने तुझे पुकारा है; मेरे लिये फुर्ती कर! जब मैं तुझ को पुकारूं, तब मेरी ओर कान लगा!
Psalms 141:2 मेरी प्रार्थना तेरे साम्हने सुगन्ध धूप, और मेरा हाथ फैलाना, संध्या काल का अन्नबलि ठहरे!
Psalms 141:3 हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार पर रखवाली कर!
Psalms 141:4 मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे; मैं अनर्थकारी पुरूषों के संग, दुष्ट कामों में न लगूं, और मैं उनके स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं में से कुछ न खाऊं!
Psalms 141:5 धर्मी मुझ को मारे तो यह कृपा मानी जाएगी, और वह मुझे ताड़ना दे, तो यह मेरे सिर पर का तेल ठहरेगा; मेरा सिर उस से इन्कार न करेगा। लोगों के बुरे काम करने पर भी मैं प्रार्थना में लौलीन रहूंगा।
Psalms 141:6 जब उनके न्यायी चट्टान के पास गिराए गए, तब उन्होंने मेरे वचन सुन लिये; क्योंकि वे मधुर हैं।
Psalms 141:7 जैसे भूमि में हल चलने से ढेले फूटते हैं, वैसे ही हमारी हडि्डयां अधोलोक के मुंह पर छितराई हुई हैं।
Psalms 141:8 परन्तु हे यहोवा, प्रभु, मेरी आंखे तेरी ही ओर लगी हैं; मैं तेरा शरणागत हूं; तू मेरे प्राण जाने न दे!
Psalms 141:9 मुझे उस फन्दे से, जो उन्होंने मेरे लिये लगाया है, और अनर्थकारियों के जाल से मेरी रक्षा कर!
Psalms 141:10 दुष्ट लोग अपने जालों में आप ही फंसें, और मैं बच निकलूं।


एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 3-4
  • 1 यूहन्ना 5



बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

सुनें


   एक पुरानी कहावत है, "परमेश्वर ने आपको केवल एक मूँह किंतु दो कान किसी उद्देश्य से ही दिए हैं"; सुन पाना जीवन के लिए आवश्यक योग्यताओं में से एक है। परस्पर संबंधों के विषय में परामर्श देने वाले कहते हैं कि हमें एक दूसरे की बात सुननी चाहिए। आत्मिक अगुवे कहते हैं कि हमें परमेश्वर की बात सुननी चाहिए। किंतु शायद ही कोई होगा जो यह कहता है कि हमें अपनी कही बात भी सुननी चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हमारे अन्तरात्मा की आवाज़ सदा ही सही होती है; और ना ही मैं यह कह रहा हूँ कि हमें परमेश्वर अथवा दूसरों की सुनने की बजाए अपनी ही सुनते रहना चाहिए। लेकिन जो मैं कहना चाह रही हूँ वह यह है कि हमें अपने आप को इसलिए सुनना चाहिए जिससे हम जान सकें कि दूसरे हमें कैसा सुनते हैं।

   जब मूसा इस्त्राएलियों को मिस्त्र की गुलामी से निकाल कर ले चला, तब उन इस्त्राएलियों को किसी के द्वारा अपनी बात सुनने का परामर्श दिया जाना चाहिए था। यद्यपि परमेश्वर उन्हें अद्भुत आश्चर्यकर्मों के द्वारा मिस्त्र की गुलामी से निकाल कर लाया था, परन्तु निकल आने के कुछ ही दिनों में ही वे कुड़कुड़ाने लगे (निर्गमन 16:2)। चाहे भोजन की उनकी आवश्यकता उचित थी, परन्तु उस आवश्यकता को व्यक्त करने का उनका तरीका गलत था (पद 3)।

   जब भी हम भय, क्रोध, अज्ञानता अथवा घमण्ड में होकर बोलते हैं तो लोगों को हमारे शब्दों से अधिक हमारी भावनाएं सुनाई देती हैं, चाहे हमारी कही बात सही ही क्यों ना हो; लेकिन सुनने वाले यह नहीं जान पाते कि हमारे भाव प्रेम और चिंता के कारण हैं अथवा अनादर और तिरिस्कार के कारण, इसलिए हमें और हमारी बात के गलत समझे जाने का जोखिम बना रहता है। किंतु यदि कुछ भी बोलने से पहले हम अपनी सुन लें, अर्थात अपनी बात और भाव का आँकलन कर लें, तो हम अपने असावधानी से कहे शब्दों से किसी की हानि करने या परमेश्वर का दिल दुखाने से बचे रहेंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


उतावलेपन और बिना सोचे-समझे कहे गए शब्द भलाई कम, हानि अधिक करते हैं।

बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों। - सभोपदेशक 5:2

बाइबल पाठ: निर्गमन 16:1-8
Exodus 16:1 फिर एलीम से कूच कर के इस्राएलियों की सारी मण्डली, मिस्र देश से निकलने के महीने के दूसरे महीने के पंद्रहवे दिन को, सीन नाम जंगल में, जो एलीम और सीनै पर्वत के बीच में है, आ पहुंची। 
Exodus 16:2 जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरुद्ध बकझक करने लगी। 
Exodus 16:3 और इस्राएली उन से कहने लगे, कि जब हम मिस्र देश में मांस की हांडियों के पास बैठकर मनमाना भोजन खाते थे, तब यदि हम यहोवा के हाथ से मार डाले भी जाते तो उत्तम वही था; पर तुम हम को इस जंगल में इसलिये निकाल ले आए हो कि इस सारे समाज को भूखों मार डालो। 
Exodus 16:4 तब यहोवा ने मूसा से कहा, देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊंगा; और ये लोग प्रतिदिन बाहर जा कर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे, इस से मैं उनकी परीक्षा करूंगा, कि ये मेरी व्यवस्था पर चलेंगे कि नहीं। 
Exodus 16:5 और ऐसा होगा कि छठवें दिन वह भोजन और दिनों से दूना होगा, इसलिये जो कुछ वे उस दिन बटोरें उसे तैयार कर रखें। 
Exodus 16:6 तब मूसा और हारून ने सारे इस्राएलियों से कहा, सांझ को तुम जान लोगे कि जो तुम को मिस्र देश से निकाल ले आया है वह यहोवा है। 
Exodus 16:7 और भोर को तुम्हें यहोवा का तेज देख पडेगा, क्योंकि तुम जो यहोवा पर बुड़बुड़ाते हो उसे वह सुनता है। और हम क्या हैं, कि तुम हम पर बुड़बुड़ाते हो? 
Exodus 16:8 फिर मूसा ने कहा, यह तब होगा जब यहोवा सांझ को तुम्हें खाने के लिये मांस और भोर को रोटी मनमाने देगा; क्योंकि तुम जो उस पर बुड़बुड़ाते हो उसे वह सुनता है। और हम क्या हैं? तुम्हारा बुड़बुड़ाना हम पर नहीं यहोवा ही पर होता है।

एक साल में बाइबल: लैव्यवस्था 21-22; मत्ती 28

शनिवार, 2 नवंबर 2013

मूँह

   मैं अपने कुछ मित्रों के साथ बातें करते हुए मार्ग पर चल रहा था कि अचानक ही मुझे ठोकर लगी और मैं मूँह के बल गिर पड़ा। मुझे गिरने के बारे में ज़्यादा तो स्मरण नहीं है पर इतना स्मरण है कि मेरा मूँह सड़क की गन्दगी और मिट्टी से भर गया। उफ! कितना बुरा स्वाद था, मैं तुरंत ही अपनी चोट की परवाह करने से पहले ही अपने मूँह को साफ करने और गन्दगी को बाहर निकाल देने के प्रयासों में लग गया, लेकिन वह बुरा स्वाद बहुत देर तक मेरे मूँह में बना रहा और मुझे परेशान करता रहा। जो तब मेरे मूँह में गया, उससे मुझे कोई आनन्द तो कतई नहीं मिला, लेकिन अपने मूँह की रखवाली करना मैंने अवश्य सीख लिया।

   मूँह में जो जाता है हम उसके बारे में तो सचेत रहते हैं, और हमें रहना भी चाहिए, नहीं तो कोई हानिकारक पदार्थ हमारे अन्दर जा सकता है, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जो मूँह से बाहर आता है, उसके प्रति हमें और भी अधिक सचेत रहना चाहिए। जब बाइबल में नीतिवचन के लेखक ने लिखा: "बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है" (नीतिवचन 15:2), तो जो शब्द हिन्दी में ’उबल’ अनुवादित हुआ है उसका मूल भाषा में अर्थ है "प्रचण्ड वेग से बाहर आना"। मूँह से निकली बात वापस नहीं ली जा सकती और अविवेकपूर्ण दोषारोपण, क्रोध भरे शब्द, गाली बकना आदि मूँह से बाहर आने वाली वो बातें हैं जो बेहिसाब और जीवन भर के लिए हानि पहुँचा सकती हैं।

   प्रेरित पौलुस ने इसके बारे में बड़ी स्पष्टता से कहा: "कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो" (इफिसियों 4:29)। इससे पहले वह कहता है कि कोई झूठ नहीं केवल सच मूँह से निकले (पद 25) और फिर इसके आगे कहता है, "सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए" (इफिसियों 4:31), अर्थात किसी के चरित्र पर कोई लांछन ना लगाया जाए। जो भी हमारे मूँह से बाहर आए वह हितकर और प्रेरक होना चाहिए।

   जो हमारे मूँह में जाता है उसकी तो हम उसके अन्दर जाने से पहले भली-भांति जाँच परख करते हैं, और यह उचित भी है। लेकिन जो मूँह से बाहर आता है क्या उसके प्रति भी हम उतने ही चिंतित और परखने वाले रहते हैं जबकि बाहर आने वाले के प्रति तो हमें और भी अधिक कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए। हमारे मसीही जीवन और गवाही तथा हमारे द्वारा हमारे तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने मूँह से बाहर आने वाली बातों के प्रति अति संवेदनशील एवं सचेत रहें और बहुत नाप-तोल कर ही कोई बात मूँह से बाहर आने दें। - डेव एग्नर


अपने मन के विचारों के प्रति सावधान रहें - वे कभी भी शब्द बनकर मूँह से बाहर आ सकते हैं।

इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - इफिसियों 4:25

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-7
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है। 
Proverbs 15:6 धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है। 
Proverbs 15:7 बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29 
  • तीतुस 3