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Monday, March 3, 2014

सच्ची उपासना


   व्यंगरेखाचित्रकार सार्वजनिक स्थानों पर चित्र बनाने का अपना सामान लगा लेते हैं और जो लोग अपने व्यंगरेखाचित्र के लिए थोड़ा सा पैसा देने को तैयार होते हैं, उनका व्यंगरेखाचित्र बना देते हैं। उनके ये चित्र हमारा मनोरंजन करते हैं क्योंकि वे हमारे शरीर के किसी स्वरूप को ऐसा बढ़ाकर दिखाते हैं कि वह पहचाना तो जाए लेकिन हास्यास्पद भी लगे। शरीर के किसी भाग को अनावश्यक रीति से प्रमुख दिखाने से ही वह रेखाचित्र विनोदात्मक बनता है।

   लेकिन परमेश्वर के किसी गुण को अनावश्यक रीति से प्रमुख दिखाना हास्यास्पद कतई नहीं है। जब परमेश्वर का ऐसा बिगड़ा हुआ स्वरूप लोगों के सामने लाया जाता है तो वे उसे गंभीरता से नहीं लेते और परिस्थिति अनुसार उसे सरलता से खारिज कर देते हैं। जो परमेश्वर को एक क्रोधी और कठोर न्यायी के रूप में देखते हैं वे आसानी से ऐसे लोगों द्वारा बहका लिए जाते हैं जो दया की बातें करते हैं। जो परमेश्वर को गलतियों को नज़रंदाज़ करके बस लाड़ करते रहने वाले नाना-दादा के समान देखते हैं वे उसके न्यायी स्वरूप को स्वीकार नहीं कर पाते। जो परमेश्वर को केवल एक ज्ञानी विचारधारा जैसा देखते हैं वे उसके एक जीवित और प्रेमी व्यक्ति होने को स्वीकार नहीं कर पाते और फिर अन्य विचारधाराओं के चंगुल में फंस जाते हैं। जो परमेश्वर को एक अच्छे मित्र मात्र के समान देखते हैं वे कभी ना कभी कोई और अधिक अच्छा लगने वाला मित्र मिलने पर परमेश्वर से दूर चले जाते हैं।

   परमेश्वर प्रेमी और दयालु भी है और सच्चा न्याय करने वाला खरा न्यायी भी जो पाप को क्षमा करना भी जानता है और उसका दण्ड देना भी। वह एक जीवित और प्रेमी व्यक्ति भी है और निराकार आत्मा भी; वह सबसे अच्छा और विश्वासयोग्य मित्र भी है और चिंता करने तथा आवश्यकताएं पूरी करने वाला प्रेमी पिता भी। परमेश्वर का कोई भी गुण उसके अन्य गुणों से पृथक करके नहीं देखा जा सकता, उसे उसकी संपूर्णता में ही देखना मानना होगा।

   जब हम अपने मसीही विश्वास को व्यावाहरिक रूप में अपने जीवनों द्वारा प्रकट करते हैं तो हमें परमेश्वर के कुछ ऐसे गुणों पर ही, जो हमारी पसन्द के हैं, ज़ोर ना देकर उसके संपूर्ण व्यक्तित्व को दिखाना है। हमारी उपासना परमेश्वर के किसी विशेष गुण ही के प्रति ना हो अन्यथा वह सच्ची उपासना नहीं ठहरेगी। जूली ऐकैरमैन लिंक


जिस परमेश्वर पर हम विश्वास करते हैं वह सर्वसामर्थी, दयालु, बुद्धिमान और न्यायी है।

यहोवा कोप करने में धीरजवन्त और अति करूणामय है, और अधर्म और अपराध का क्षमा करने वाला है, परन्तु वह दोषी को किसी प्रकार से निर्दोष न ठहराएगा, और पूर्वजों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों, और पोतों, और परपोतों को देता है। - गिनती 14:18

बाइबल पाठ: निर्गमन 34:1-9
Exodus 34:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, पहिली तख्तियों के समान पत्थर की दो और तख्तियां गढ़ ले; तब जो वचन उन पहिली तख्तियों पर लिखे थे, जिन्हें तू ने तोड़ डाला, वे ही वचन मैं उन तख्तियों पर भी लिखूंगा। 
Exodus 34:2 और बिहान को तैयार रहना, और भोर को सीनै पर्वत पर चढ़कर उसकी चोटी पर मेरे साम्हने खड़ा होना। 
Exodus 34:3 और तेरे संग कोई न चढ़ पाए, वरन पर्वत भर पर कोई मनुष्य कहीं दिखाई न दे; और न भेड़-बकरी और गाय-बैल भी पर्वत के आगे चरते पाएं। 
Exodus 34:4 तब मूसा ने पहिली तख्तियों के समान दो और तख्तियां गढ़ी; और बिहान को सवेरे उठ कर अपने हाथ में पत्थर की वे दोनों तख्तियां ले कर यहोवा की आज्ञा के अनुसार पर्वत पर चढ़ गया। 
Exodus 34:5 तब यहोवा ने बादल में उतर के उसके संग वहां खड़ा हो कर यहोवा नाम का प्रचार किया। 
Exodus 34:6 और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य, 
Exodus 34:7 हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है। 
Exodus 34:8 तब मूसा ने फुर्ती कर पृथ्वी की ओर झुककर दण्डवत की। 
Exodus 34:9 और उसने कहा, हे प्रभु, यदि तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो तो प्रभु, हम लोगों के बीच में हो कर चले, ये लोग हठीले तो हैं, तौभी हमारे अधर्म और पाप को क्षमा कर, और हमें अपना निज भाग मान के ग्रहण कर।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 13-15