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Sunday, March 16, 2014

मूर्ख


   मुझे यह एक विरोधाभास लगता है कि वही प्रभु यीशु जो सामान्यतः इतना नम्र और प्रेमी रहता है (मत्ती 19:13-15), उसने कुछ लोगों को मूर्ख कैसे कहा? सुसमाचारों में कई स्थानों पर आया है कि प्रभु यीशु ने यह अपमानजनक शब्द कुछ लोगों के बारे में कहा है; विशेषकर उस समय के धर्म गुरू माने जाने वाले फरीसियों के लिए (मत्ती 23:17-19; लूका 11:39-40)।

   प्रभु यीशु ने यही मूर्ख शब्द अपने बताए एक दृष्टांत में एक ऐसे व्यक्ति के लिए भी कहा है जो लोभी था (लूका 12:13-21)। प्रभु ने उस व्यक्ति को मूर्ख क्यों कहा; इसलिए नहीं कि उसने अपनी बहुतायत से हुई फसल को रखने के लिए पुराने खत्ते तुड़वाकर नए और बड़े खत्ते बनवाना चाहा (पद 16-18)। यदि वह अपनी फसल को बाहर मैदान में खराब मौसम के द्वारा बर्बाद होने के लिए छोड़ देता, तो वह और भी अधिक मूर्ख ठहरता। ना ही वह व्यक्ति इसलिए मूर्ख था क्योंकि उसने सोचा कि फसल की बहुतायत से होने वाली आमदनी अब उसके शेष जीवन भर के लिए पर्याप्त है (पद 19); आखिरकर परमेश्वर के वचन ही में हमें चीटीं से सीखने और समय तथा अवसर रहते संचय करने की शिक्षा मिलती है (नीतिवचन 6:6-8)।

   तो फिर वह व्यक्ति मूर्ख क्यों कहलाया? इसलिए क्योंकि उसकी योजनाओं और कलपनाओं में परमेश्वर का कोई स्थान नहीं था। वह इसलिए मूर्ख था क्योंकि उसने यह ध्यान नहीं किया था कि उसका जीवन परमेश्वर के हाथों में है। वह मूर्ख इसलिए था क्योंकि उसने यहाँ पृथ्वी के अपने कुछ समय के जीवन के लिए तो योजनाएं बनाईं लेकिन उस अनन्त काल के जीवन और स्थान के लिए कोई योजना नहीं बनाई जहाँ अन्ततः उसे भी अन्य सभी के समान ही जाना ही होगा। वह मूर्ख इसलिए था क्योंकि यहाँ कुछ समय के जीवन के लिए उसने वह नश्वर धन तो संचय करना चाहा जिसे वह अपने साथ कभी नहीं ले जा पाएगा, लेकिन अपने लिए स्वर्ग में कभी नाश ना हो सकने वाले धन को एकत्रित करने की कोई योजना नहीं बनाई, कोई प्रयास नहीं किया (मत्ती 6:20)।

   आज आप की क्या स्थिति है? आपका मन और धन कहाँ है? आपकी योजनाओं में परमेश्वर का क्या स्थान है? क्या आप अपने अनन्त के लिए तैयार हैं? यदि नहीं तो प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा माँग कर और उसे अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करने के द्वारा अभी तैयार हो जाईए, नहीं तो उस अवश्यंभावी समय के आ जाने पर आप भी मूर्ख ही कहलाएंगे। - सी० पी० हिया


वह कदापि मूर्ख नहीं है जो उसे दे कर जो वह रख नहीं सकता वह पा लेता है जो वह कभी फिर खो नहीं सकता। - जिम ईलियट

मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं। - भजन 14:1

बाइबल पाठ: लूका 12:13-21
Luke 12:13 फिर भीड़ में से एक ने उस से कहा, हे गुरू, मेरे भाई से कह, कि पिता की संपत्ति मुझे बांट दे। 
Luke 12:14 उसने उस से कहा; हे मनुष्य, किस ने मुझे तुम्हारा न्यायी या बांटने वाला नियुक्त किया है? 
Luke 12:15 और उसने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। 
Luke 12:16 उसने उन से एक दृष्‍टान्‍त कहा, कि किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। 
Luke 12:17 तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्या करूं, क्योंकि मेरे यहां जगह नहीं, जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं। 
Luke 12:18 और उसने कहा; मैं यह करूंगा: मैं अपनी बखारियां तोड़ कर उन से बड़ी बनाऊंगा; 
Luke 12:19 और वहां अपना सब अन्न और संपत्ति रखूंगा: और अपने प्राण से कहूंगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह। 
Luke 12:20 परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा; हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा: तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा? 
Luke 12:21 ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 8-10