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Monday, March 17, 2014

सांत्वना का वचन


   इस्त्राएल के लोग संघर्ष में थे। वे अशूर के लोगों द्वारा बन्धक बना कर एक दूर देश में जा कर रहने के लिए विवश किए गए थे। परमेश्वर का भविष्यद्वक्ता यशायाह इन थके-माँदे लोगों की सहायाता के लिए उन्हें को क्या दे सकता था?

   उसने उन्हें आशा की ऐसी भविष्यवाणी दी जो ना केवल उनके लिए परमेश्वर से एक सन्देश था वरन जो आते समय में प्रतिज्ञा किए हुए जगत के उद्धारकर्ता से भी संबंधित था। यशायाह 50:4 में स्वयं उस उद्धारकर्ता ने उस आने वाले विश्राम और सांत्वना के विषय में कहा: "प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं"।

   ये आशा के दोहरी परिपूर्णता के वचन थे - उन दासत्व में पड़े हुए लोगों के लिए भी और आने वाली पीढ़ी के उन लोगों के लिए भी जो अपने जीवन में मसीह यीशु के अनुग्रह से मिलने वाले उद्धार को स्वीकार कर लेंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में आकर हम सुसमाचारों में दिए गए वृतांत में पाते हैं कि कैसे प्रभु यीशु ने जीवन की परिस्थितियों से थके हुए लोगों को उनकी आवश्यकतानुसार उपयुक्त वचन सुनाकर उसके लिए करी गई इस भविष्यवाणी को पूरा किया। प्रभु यीशु ने कहा, "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   ये वास्तव में अनुग्रह और अनुकंपा से भरे शब्द हैं जिनके द्वारा प्रभु यीशु ने हमारे लिए उदाहरण छोड़ा है कि हम परेशान और थके हुए लोगों को कैसे संभाल सकते हैं। क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसे प्रोत्साहन के शब्दों की या एक सुनने वाले मित्र की आवश्यकता है? परमेश्वर के वचन बाइबल से लेकर कहा गया सांत्वना का वचन जीवन से थके हुओं को परमेश्वर की शांति देने के लिए बहुत कारगर होता है; उसे प्रयोग करना सीखिए भी तथा कीजिए भी। - डेनिस फिशर


दुखी हृदयों को आराम देने के लिए सांत्वना के शब्द आवश्यक होते हैं।

सज्जन उत्तर देने से आनन्दित होता है, और अवसर पर कहा हुआ वचन क्या ही भला होता है! - नीतिवचन 15:23

बाइबल पाठ: यशायाह 50:4-10
Isaiah 50:4 प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। 
Isaiah 50:5 प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और मैं ने विरोध न किया, न पीछे हटा। 
Isaiah 50:6 मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया।
Isaiah 50:7 क्योंकि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है, इस कारण मैं ने संकोच नहीं किया; वरन अपना माथा चकमक की नाईं कड़ा किया क्योंकि मुझे निश्चय था कि मुझे लज्जित होना न पड़ेगा। 
Isaiah 50:8 जो मुझे धर्मी ठहराता है वह मेरे निकट है। मेरे साथ कौन मुकद्दमा करेगा? हम आमने-साम्हने खड़े हों। मेरा विरोधी कौन है? वह मेरे निकट आए। 
Isaiah 50:9 सुनो, प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है; मुझे कौन दोषी ठहरा सकेगा? देखो, वे सब कपड़े के समान पुराने हो जाएंगे; उन को कीड़े खा जाएंगे।
Isaiah 50:10 तुम में से कौन है जो यहोवा का भय मानता और उसके दास की बातें सुनता है, जो अन्धियारे में चलता हो और उसके पास ज्योति न हो? वह यहोवा के नाम का भरोसा रखे, और अपने परमेश्वर पर आशा लगाए रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 11-13