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बुधवार, 20 नवंबर 2019

शांति


      हमारे घर के पीछे के आँगन में चेरी का एक पुराना पेड़ है, जिसके हाल बिगड़ने लगे थे और लग रहा था कि वह अब मरने लगा है। इसलिए मैंने पेड़ों की देखभाल करने वाले एक विशेषज्ञ को उसे देखने के लिए बुलाया। उस विशेषज्ञ ने उस पेड़ की जांच करके कहा कि वह बहुत “थका” हुआ है और उसे तुरंत देखभाल की आवश्यकता है। मेरी पत्नि ने यह सुनकर वहाँ से जाते हुए पेड़ से बुदबुदा कर कहा, “शांति रखो;” उसके लिए वह एक कठिन सप्ताह रहा था।

      हम सभी के साथ ऐसा होता है, हम कठिन समयों से होकर निकलते हैं, चिंताओं से भरे हुए समय – वे किसी भी बात के कारण, चाहे हमारे पथभ्रष्ट होते हुए समाज, या हमारी वैवाहिक स्थिति, या बच्चों को लेकर हमारी चिंताएं, या हमारे कार्य और व्यवसाय, हमारी आर्थिक स्थिति, हमारा स्वास्थ्य या हमारी सुख-समृद्धि, आदि द्वारा हो सकते हैं। परन्तु हम मसीही विश्वासियों से प्रभु यीशु मसीह ने वायदा किया है कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, हम शांति में रह सकते हैं। प्रभु ने अपने वचन बाइबल में अपने शिष्यों से कहा, “मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे” (यूहन्ना 14:27)।

      प्रभु यीशु के दिन सदा ही परेशानी और अव्यवस्था से भरे होते थे। उसके शत्रु उसे तंग करते रहते थे और उसके परिवार तथा मित्र जन उसे ठीक से समझते नहीं थे। अकसर उसके पास सिर रखने के लिए भी स्थान नहीं होता था। परन्तु फिर भी उसके व्यवहार और आचरण में कभी कोई तनाव अथवा अशांति नहीं होती थी। उसमें एक भीतरी शान्ति थी, एक ठहराव था। उसने जिस शांति को हमें देने का वायदा किया है, वह यही शांति है – बीते, वर्तमान, या आने वाले समय की चिंता से स्वतंत्रता; वही शांति जो उसने अपने जीवन से दिखाई।

      किसी भी परिस्थिति में, वह चाहे कितनी भी भयावह या फिर साधारण हो, हम प्रार्थना में प्रभु के पास आ सकते हैं। वहाँ उसकी उपस्थिति में हम उसे अपनी चिंताएं और भय बता सकते हैं। प्रेरित पौलुस हमें आश्वस्त करता है कि “तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी” (फिलिप्पियों 4:7)। चाहे हम कठिन समय से होकर निकले हों अथवा निकल रहे हों, प्रभु की शांति सदा हमारे साथ बनी रहती है। - डेविड रोपर

समस्याओं के मध्य में भी, प्रभु यीशु में होकर हमें शांति मिल सकती है।

यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? – भजन 27:1

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-27
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में।
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।
John 14:22 उस यहूदा ने जो इस्करियोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्या हुआ कि तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं।
John 14:23 यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।
John 14:24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिसने मुझे भेजा।
John 14:25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
John 14:26 परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
John 14:27 मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2


मंगलवार, 1 अगस्त 2017

शांति


   फ़िनलैंड देश के हेलसिंकी शहर में स्थित कैम्पी चैपल अपने आप में एक अनूठा स्थान है। यह आकार में गोलाकार है और लकड़ी से ढंका हुआ है; उसकी इस विशिष्ट संरचना के कारण व्यस्त शहर की बाहरी आवाज़ें इसके अन्दर तक बहुत कम पहुँचने पाती हैं। इसे बनाने वालों ने इसे एक शांत स्थान होने के लिए, जहाँ आगंतुक आकर अपने आप को शांत कर सकें, बनाया है। यह शहर के भी़ड़ और शोर-गुल से निकलकर शांत होकर बैठने का एक अच्छा स्थल है।

   बहुत से लोग शांति चाहते हैं और कुछ मिनटों की खामोशी हमें शांत कर सकती है। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि वास्तविक शांति परमेश्वर से मेल-मिलाप हो जाने से ही आती है, जो केवल प्रभु यीशु में होकर ही संभव है। प्रेरित पौलुस ने कहा, "सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें" (रोमियों 5:1)। बिना प्रभु यीशु मसीह के, अपने पापों की दशा में होने के कारण हम परमेश्वर के बैरी हैं; परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उसने अपने साथ हमारा मेल-मिलाप करने के लिए प्रभु यीशु को भेजा, जिसका क्रूस पर दिया गया बलिदान हमें पापों की क्षमा प्रदान करता है जिससे परमेश्वर से हमारा मेल-मिलाप संभव हो जाता है। अब परमेश्वर हमें प्रभु यीशु मसीह में होकर, "...अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे" (कुलुस्सियों 1:22)।

   परमेश्वर के साथ शांति हो जाने का तात्पर्य यह नहीं है कि अब हमारे जीवनों में कभी कोई समस्या नहीं आएगी; परन्तु हमें परमेश्वर से यह आश्वासन अवश्य ही मिलता है कि हमारी प्रत्येक परिस्थिति में परमेश्वर हमारे साथ बना रहेगा, हमारा मार्गदर्शन करेगा और हमें सुरक्षित निकाल कर ले आएगा। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना 16:33)। मसीह यीशु के कारण हमें सच्ची शांति प्राप्त हो सकती है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


जब मसीह यीशु हृदय में राज करता है 
तो उसकी शांति हमारे जीवनों में भर जाती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:13-22
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है। 
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। 
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। 
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। 
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। 
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 57-59
  • रोमियों 4


शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

शरणस्थान


   एक युवा महिला अपनी 4 तथा 2 वर्षीय पुत्रियों के साथ हवाई यात्रा कर रही थी, और उन दोनों को व्यस्त रखने में लगी हुई थी जिससे वे दोनों अन्त यात्रियों को परेशान ना करने पाएं। जब विमान-चालक ने सूचना देने के लिए विमान के लाऊडस्पीकरों पर उद्घोषणा करनी आरंभ करी तो छोटी बेटी शांत होकर, अपना सिर झुकाकर बैठ गई, और उद्घोषणा समाप्त होने पर बोली "आमीन", जो कि प्रार्थना कि समाप्ति पर बोला जाता है; उस बच्ची को लगा कि विमान-चालक प्रार्थना कर रहा है!

   मैं भी चाहती हूँ कि मेरा मन भी उस बच्ची के समान रहे, जो तुरंत प्रार्थना में परमेश्वर की ओर मुड़ जाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन-संहिता के अनेकों भजनों के रचियता दाऊद का मन ऐसा ही था। हम दाऊद द्वारा लिखे भजन, भजन 27 में इस बात के संकेत पाते हैं, जहाँ वह कठिन शत्रुओं का सामना करने के बारे में लिखता है (पद 2)। दाऊद लिखता है, "तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा" (भजन 27:8)। कुछ लोगों का मानना है कि इस भजन को लिखते समय दाऊद शाऊल से (1 शमूएल 21:10) या फिर अपने बेटे अबशालोम के षड़यंत्र से (2 शमूएल 15:13-14) जान बचाकर भागने के अपने अनुभवों को स्मरण कर रहा था। प्रार्थना करना और परमेश्वर पर निर्भर रहना दाऊद के रवैये में सर्वोपरि रहते थे; उसने परमेश्वर को अपना शरणस्थान बना रखा था (भजन 27:4-5)।

   हम सभी को शरणस्थान की आवश्यकता रहती है, विशेषकर कठिन परिस्थितियों और परेशानी के समयों में। इस, तथा अन्य भजनों को पढ़ना और प्रार्थना का आधार बनाना हमारे लिए अपने परमेश्वर पिता के साथ वैसा ही निकट संबंध बनाने में सहायक हो सकता है जैसा दाऊद के साथ था। जब हम परमेश्वर को अपना शरणस्थान बना लेंगे, तो स्वतः ही प्रार्थना और आवश्यकता के समयों में हम उसमें शांति तथा विश्राम भी पाएंगे। - ऐनी सेटास


प्रार्थना के समयों में परमेश्वर हमारे हृदयों को शांत करके, 
हमारे मनों को स्थिर करता है।

हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दोहाई दूं, तब मेरी सुन; शत्रु के उपजाए हुए भय के समय मेरे प्राण की रक्षा कर। - भजन 64:1

बाइबल पाठ: भजन 27:1-14
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा।। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9


शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

क्षमा


   मैं एक प्रतिभाशाली प्यानों वादिका से वार्तालाप कर रहा था; उसने मुझ से पूछा कि क्या मैं कोई साज़ बजाता हूँ? मैंने उत्तर दिया, "मैं रेडियो बजा लेता हूँ"; उसने हंसते हुए फिर पूछा कि क्या मैंने कभी कोई साज़ बजा पाने की इच्छा रखी है? मैंने थोड़ी शर्मिन्दगी के साथ उत्तर दिया, "लड़कपन में मैंने कुछ समय तक प्यानो सीखा था, फिर उसे छोड़ दिया।" अब अपने व्यसक जीवन में मुझे पछतावा होता है कि मैंने प्यानो सीखना ज़ारी क्यों नहीं रखा, क्योंकि मुझे संगीत का शौक है और मेरी इच्छा होती है कि आज मैं भी कोई साज़ बजा सकूँ। यह वार्तालाप मेरे लिए इस बात को पुनःस्मरण करने का अवसर था कि हमारे जीवनों में हमारे चुनावों का बहुत प्रभाव होता है - और कुछ चुनावों के कारण हमें पछतावा होता है।

    लेकिन कुछ गलत चुनाव ऐसे भी होते हैं जो हमारे अन्दर दीर्घ-कालीन एवं कष्टदायक पछतावा छोड़ जाते हैं - जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक राजा दाऊद के साथ हुआ। पहले दाऊद ने एक अन्य पुरुष की स्त्री के साथ व्यभिचार किया और फिर अपने पाप को छुपाने के लिए उस स्त्री के पति को मरवा डाला। इस पाप का दोष-बोध उसके लिए बहुत कष्टदायक बना और इससे ग्रसित होकर उसने अपने एक भजन में लिखा, "जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई" (भजन 32:3-4)। लेकिन दाऊद ने अपने पाप का अंगीकार किया और उसे परमेश्वर के सामने मान लिया, जो उसके लिए परमेश्वर से क्षमा और शांति को लेकर आया (पद 5)।

   जब हमारे चुनाव और कार्य हमें पाप और बुराई में ढकेल दें, तो उनका अंगीकार करने और उनके लिए प्रभु यीशु से क्षमा माँग लेने के द्वारा (1 यूहन्ना 1:9) केवल परमेश्वर के अनुग्रह से ही हमें पाप के दोष से छुटकारा मिल सकता है; केवल उस से ही हमें क्षमा की शांति मिल सकती है। केवल परमेश्वर ही है जो हमें सही चुनाव एवं निर्णय ले पाने की बुद्धिमता प्रदान करता है (भजन 32:8)। - बिल क्राउडर


प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली क्षमा हमें पछतावे के बन्धनों से स्वतंत्र करती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35



रविवार, 24 अप्रैल 2016

सदा साथ


   बचपन का मेरा एक बहुत पसन्दीदा खेल था घर के निकट के एक पार्क में सीसौ पर खेलना। एक बच्चा, बीच में घिरनी लगे लंबे से लकड़ी के तख्ते के एक किनारे पर बैठता, और दूसरा बच्चा दूसरे किनारे पर, और दोनों एक दूसरे को बारी-बारी ऊपर उछालते। कभी-कभी जो नीचे होता वह तख्ते के अपने छोर नीचे ही रखे रहता और दूसरे छोर पर जो ऊपर होता वह नीचे लाए जाने के लिए चिल्लाता रहता। लेकिन इससे भी क्रूर तब होता था जब नीचे के छोर वाल तख्ते से एकदम हट जाता और ऊपर के छोर वाला धड़ाम से नीचे आकर धरती से टकराता, चोटिल हो जाता था।

   कभी-कभी हमें लगता है कि प्रभु यीशु ने भी हमारे साथ ऐसा ही किया है। हमने उसपर विश्वास किया कि वह सदा हमारे साथ बना रहेगा, जीवन के उतार-चढ़ाव में हमारा साथ देता रहेगा; लेकिन ऐसा भी होता है कि जीवन अनायास ही कोई अनेपक्षित मोड़ ले लेता है और हम दुःखी तथा चोटिल हो कर रह जाते हैं; हमें लगता है कि प्रभु हमारे जीवनों को छोड़कर चला गया है और हम धड़ाम से नीचे गिर गए हैं।

   लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में विलापगीत का तीसरा अध्याय हमें स्मरण दिलाता है, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है" (विलापगीत 3:22); अर्थात, परमेश्वर हमारे प्रति हर बात में हर समय विश्वासयोग्य है, चाहे हमें लगे कि सब कुछ समाप्त होता जा रहा है। चाहे हम अपने आप को अकेला अनुभव करें, दुःख में पाएं, तो भी हम अकेले कभी नहीं हैं। चाहे हम उसकी उपस्थिति को अनुभव ना भी करें, तो भी हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे साथ बना रहता है, वह हमारा परमविश्वासयोग्य साथी है जो हमें छोड़ कर कभी नहीं जाता, जो कभी हमें नीचे गिरने नहीं देता। - जो स्टोवैल


चाहे सभी साथ छोड़ दें, किंतु प्रभु यीशु कभी साथ नहीं छोड़ता।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:13-26
Lamentations 3:13 उसने अपनी तीरों से मेरे हृदय को बेध दिया है; 
Lamentations 3:14 सब लोग मुझ पर हंसते हैं और दिन भर मुझ पर ढालकर गीत गाते हैं, 
Lamentations 3:15 उसने मुझे कठिन दु:ख से भर दिया, और नागदौना पिलाकर तृप्त किया है। 
Lamentations 3:16 उसने मेरे दांतों को कंकरी से तोड़ डाला, और मुझे राख से ढांप दिया है; 
Lamentations 3:17 और मुझ को मन से उतार कर कुशल से रहित किया है; मैं कल्याण भूल गया हूँ; 
Lamentations 3:18 इसलिऐ मैं ने कहा, मेरा बल नाश हुआ, और मेरी आश जो यहोवा पर थी, वह टूट गई है। 
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 19-20
  • लूका 18:1-23


शनिवार, 23 अप्रैल 2016

आशा और आनन्द


   कुछ दिन पहले मैंने अपने बुज़ुर्ग मित्र बॉब को निकट की एक व्यायामशाला में अपनी ऊँगली पर लगे रक्तचाप मापक यंत्र पर नज़रें गड़ाए हुए, पूरी ताकत से साईकिल चलाते देखा। मैंने उससे पूछा, "यह तुम क्या कर रहे हो?" उसने चढ़ी हुई साँस से भारी हो रखी आवाज़ में व्यंग्य किया, "देख रहा हूँ कि मैं ज़िंदा हूँ या नहीं!" मैंने भी उसी अंदाज़ में एक और प्रश्न पूछा, "और यदि तुम्हें पता चले कि तुम मर चुके हो, तो क्या करोगे?" तो उसने एक बड़ी सी मुस्कुराहट के साथ कहा, "मैं ज़ोर से चिल्लाऊँगा "हालेलुईया" (अर्थात, प्रभु की स्तुति हो)!"

   अनेक वर्षों से उसके साथ रहते हुए मैंने बॉब में एक अद्भुत भीतरी सामर्थ के अनेक चिन्ह देखे हैं: उस की शारीरिक शक्ति के कम होते, और परेशानियों के बढ़ते जाने पर भी उसमें बड़े धैर्य से सहने की सामर्थ है; और अब जब वह अपनी शारीरिक जीवन यात्रा की समाप्ति की ओर बढ़ रहा है उसमें आशा और विश्वास की कोई घटी नज़र नहीं आती। ना केवल उसके पास अद्भुत आशा है, वरन उसे मृत्यु से भी कोई भय नहीं लगता; मृत्यु की संभावना उस के जोश को दबा नहीं पाती।

   मृत्यु के सामने भी आशा और शान्ति, तथा आनन्द को भी भला कौन बनाए रख सकता है? केवल वे जो विश्वास द्वारा अनन्तकाल के परमेश्वर से जुड़ चुके हैं और जानते हैं कि उनके पास अनन्तकाल की आशा है (1 कुरिन्थियों 15:52, 54)। जिनके पास यह आश्वासन है, उनके लिए भी, मेरे मित्र बॉब के समान ही, मृत्यु का कोई भय बाकी नहीं है, वरन वे मृत्योप्रांत तुरंत ही प्रभु यीशु मसीह को साक्षात देखने के आनन्द के बारे में बता सकते हैं।

   मृत्यु से भयभीत क्यों हों, या रहें? इसके विपरीत आनन्दित क्यों ना हों? जैसा के कवि जौन डौन (1572-1631) ने लिखा, "नींद का एक छोटा सा पल और फिर हम अनन्तकाल के लिए जागृत रहेंगे।" - डेविड रोपर


एक मसीही विश्वासी के लिए, स्वर्ग की प्रातः से पूर्व, मृत्यु संसार रात की अन्तिम छाया है।

इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले। इब्रानियों 2:14-15

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:50-58
1 Corinthians 15:50 हे भाइयों, मैं यह कहता हूं कि मांस और लोहू परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश अविनाशी का अधिकारी हो सकता है। 
1 Corinthians 15:51 देखे, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:52 और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूंकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जांएगे, और हम बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:53 क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले। 
1 Corinthians 15:54 और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तक वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया। 
1 Corinthians 15:55 हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? 
1 Corinthians 15:56 हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। 
1 Corinthians 15:57 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। 
1 Corinthians 15:58 सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 16-18
  • लूका 17:20-37


बुधवार, 30 मार्च 2016

नम्र और दीन


   अंग्रज़ी भाषा के शब्द meek, अर्थात नम्र या दीन, के साथ समस्या है कि वह अंग्रेज़ी के एक अन्य शब्द weak, अर्थात दुर्बल से मेल खाता है, और सामन्यतः लोग इन दोनों शब्दों को एक दूसरे का पर्याय मानते आए हैं। एक प्रसिद्ध शब्दकोष ने meek की और विस्तृत परिभाषा देते हुए उसका अर्थ बताया है, "वह जो बहुत दब्बु है; जिसके ऊपर सरलता से हावी हुआ जा सकता है; जिसमें प्रतिरोध करने की शक्ति नहीं है; जिसमें आत्मसम्मान नहीं है।" ऐसी परिभाषाओं और आँकलन के सामने यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि फिर प्रभु यीशु मसीह ने यह क्यों कहा कि, "धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (मत्ती 5:5)।

   लेकिन प्रभु यीशु मसीह के इस शब्द को प्रयोग करने का तात्पर्य और वास्तविकता इस शब्द को लेकर प्रचलित आम नकारात्मक धारणा से बिलकुल विपरीत है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रयुक्त भाषाओं और शब्दों के प्रसिद्ध विद्वान डब्ल्यु. ई. वाईन इस शब्द के लिए मूल युनानी भाषा में प्रयुक्त हुए शब्द के बारे में बताते हैं कि "यह परमेश्वर के प्रति दिखाए गए रवैये का सूचक है, जिसमें हमारे प्रति परमेश्वर के हर व्यवहार और बर्ताव को हम भला मानकर विश्वास के साथ ग्रहण करते हैं और उसके लिए परमेश्वर से कोई विवाद या विरोध नहीं करते"। इस बात को हम प्रभु यीशु मसीह के जीवन, शिक्षाओं और कार्यों में प्रदर्शित होता देखते हैं; हम देखते हैं कि प्रभु यीशु पिता परमेश्वर की इच्छा को पूरी करने में ही आनन्दित होते थे, यह इच्छापूर्ति ही उनके जीवन का ध्येय था (इब्रानियों 10:7)।

   वाईन आगे कहते हैं कि, "जो दीनता प्रभु यीशु ने दिखाई और अपने अनुयायियों से दिखाने के लिए कहा वह ईश्वरीय सामर्थ का प्रतिफल है। प्रभु यीशु मसीह दीन इसलिए थे क्योंकि स्वर्ग के असीम संसाधन और परमेश्वर की असीम सामर्थ उन्हें उपलब्ध थीं।" यदि प्रभु चाहते तो स्वर्गदूतों की सेना उनके पकड़वाए जाने और क्रुस पर चढ़ाए जाने को कभी भी रोक सकती थीं (मत्ती 26:52-53)। लेकिन उन्होंने अपने संसाधनों और सामर्थ का प्रयोग स्वार्थसिधी अथवा अपनी भलाई के लिए नहीं वरन दूसरों की भलाई के लिए ही किया।

   प्रभु यीशु मसीह ने अपने अनुयायियों से कहा, "मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे" (मत्ती 11:29)। वे नम्र और दीन होने के सिद्ध नमूना थे।

   आज भी प्रभु यीशु हमें अपनी नम्रता और दीनता को ग्रहण करके उस से मिलने वाली शांति और सामर्थ का अनुभव करने के लिए बुला रहे हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के दो निवास-स्थान हैं, एक स्वर्ग और दूसरा दीन और धन्यवादी हृदय। - वॉल्टन

तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं। - इब्रानियों 10:7

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-10
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 9-10
  • लूका 5:17-39


शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

शांति


   अनेक लोगों द्वारा प्रथम विश्व युद्ध मानव इतिहास के सबसे घातक युद्धों में से एक माना जाता है। इस आधुनिक युग में, सारे विश्व के देशों फँसा लेने वाले इस प्रथम युद्ध में लाखों लोगों ने अपनी जान गँवाई। सन 1918 के ग्यारवें महीने, नवंबर, के ग्यारवें दिन के ग्यारवें घण्टे में युद्ध विराम किया गया और उस ऐतिहासिक पल में सारे संसार के लाखों लोग कुछ पल के लिए शांत हो गए और युद्ध की भारी कीमत - जान और माल के नुकसान तथा जीवनों में आई तकलीफ पर विचार किया। यह माना जाता था कि वह "महा-युद्ध", जैसा कि उसे उस समय कहा जाता था, "सब युद्धों का अन्त कर देने वाला युद्ध होगा"।

   लेकिन उस युद्ध के बाद भी अनेक अन्य घातक युद्ध विभिन्न स्थानों पर लड़े गए हैं और लड़े जा रहे हैं। परन्तु फिर भी स्थाई शांति की आशा बनी हुई है। परमेश्वर का वचन बाइबल एक संभव और वास्तविक शांति की आशा के बारे में बताती है जिसके बाद फिर कभी कोई युद्ध या अशांति नहीं होगी। प्रभु यीशु मसीह के पुनःआगमन के साथ बाइबल की यशायाह नबी की पुस्तक में दी गई भविष्यवाणी "वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीट कर हल के फाल और अपने भालों को हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे" (यशायाह 2:4) पूरी होगी और फिर ग्यारवाँ घण्टा गुज़र जाएगा और नए आकाश और नए पृथ्वी में अनन्त शांति का नया और प्रथम घण्टा आरंभ हो जाएगा।

   जब तक वह दिन ना आए, हम जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं, हमें शांति के राजकुमार प्रभु यीशु के राजदूत बनकर इस संसार के सामने उस आने वाले शांति के राज्य का सुसमाचार सब को पहुँचाना है। - डेनिस फिशर


सच्ची और स्थाई शांति केवल मसीह यीशु में प्राप्त करी जा सकती है।

सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। - 2 कुरिन्थियों 5:20

बाइबल पाठ: मत्ती 24:3-14
Matthew 24:3 और जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, हम से कह कि ये बातें कब होंगी और तेरे आने का, और जगत के अन्‍त का क्या चिन्ह होगा? 
Matthew 24:4 यीशु ने उन को उत्तर दिया, सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए। 
Matthew 24:5 क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:6 तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अन्‍त न होगा। 
Matthew 24:7 क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईंडोल होंगे। 
Matthew 24:8 ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी। 
Matthew 24:9 तब वे क्‍लेश दिलाने के लिये तुम्हें पकड़वाएंगे, और तुम्हें मार डालेंगे और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे। 
Matthew 24:10 तब बहुतेरे ठोकर खाएंगे, और एक दूसरे से बैर रखेंगे। 
Matthew 24:11 और बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:12 और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्‍डा हो जाएगा। 
Matthew 24:13 परन्तु जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। 
Matthew 24:14 और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 25
  • मरकुस 1:23-45


मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

भय


   बच्चों की संगीत मण्डली कई सप्ताह से अभ्यास में लगी हुई थी और अब वह संध्या आ गई थी जब उन्हें अपना क्रिसमस कार्यक्रम प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम के भिन्न भागों में अपनी अपनी भूमिका के अनुसार पोशाकें पहने सामने मंच पर जाने के लिए बच्चे हॉल में पिछले दरवाज़े से प्रवेश करने लगे। तभी हमें कुछ शोर-गुल सुनाई दिया, तो मैंने और मेरी पत्नि ने मुडकर पीछे की ओर देखा; हमारा सबसे छोटा बेटा मैट दरवाज़े के हैंडल को पूरी ताकत से पकड़े ज़ोर ज़ोर से रो रहा था, उसके चेहरे पर भय छाया हुआ था और वह हॉल में प्रवेश करने के लिए कतई तैयार नहीं हो रहा था। उसे बहुत समझाने-बुझाने का प्रयास करने के बाद अन्ततः कार्यक्रम के निर्देशक ने उसे आश्वस्त किया कि उसे मंच पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी; वह हॉल में हमारे साथ बैठ सकता है। तब ही मैट ने हॉल में प्रवेश किया, वह हमारे साथ बैठा और कुछ ही समय में उसका भय भी जाता रहा।

   यद्यपि हम सामान्यतः क्रिसमस को भय के साथ जोड़कर नहीं देखते, लेकिन प्रभु यीशु के जन्म की उस रात को भय विद्यमान था। परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका, उन गड़रियों के विषय में जिन्हें सर्वप्रथम प्रभु यीशु के जन्म का समाचार दिया गया, लिखता है: "और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए" (लूका 2:9)। उन गड़रियों के लिए स्वर्गदूत को देखना भयभीत कर देने वाली घटना थी। परन्तु उस स्वर्गदूत ने उन्हें ढाढ़स बंधाया और उन से कहा, "...मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा" (लूका 2:10)।

   अनेक प्रकार के भय से भरे इस संसार में प्रभु यीशु शांति का राजकुमार बनकर आए (यशायाह 9:6)। आज उनकी इस शांति की सारे संसार को बहुत आवश्यकता है। प्रभु यीशु की संगती हमारे हर भय को शांत करती है, हमें हर बात के लिए आश्वस्त करती है क्योंकि उन्होंने स्वयं कहा है, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना 16:33)।


देहधारी परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए हर भय का अन्त है। - एफ़. बी. मेयर

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: लूका 2:8-20
Luke 2:8 और उस देश में कितने गड़रिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे। 
Luke 2:9 और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। 
Luke 2:10 तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। 
Luke 2:11 कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। 
Luke 2:12 और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे। 
Luke 2:13 तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्‍वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्‍तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया। 
Luke 2:14 कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्‍ति हो।
Luke 2:15 जब स्वर्गदूत उन के पास से स्वर्ग को चले गए, तो गड़रियों ने आपस में कहा, आओ, हम बैतलहम जा कर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें। 
Luke 2:16 और उन्होंने तुरन्त जा कर मरियम और यूसुफ को और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा। 
Luke 2:17 इन्हें देखकर उन्होंने वह बात जो इस बालक के विषय में उन से कही गई थी, प्रगट की। 
Luke 2:18 और सब सुनने वालों ने उन बातों से जो गड़रियों ने उन से कहीं आश्चर्य किया। 
Luke 2:19 परन्तु मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही। 
Luke 2:20 और गड़रिये जैसा उन से कहा गया था, वैसा ही सब सुनकर और देखकर परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति करते हुए लौट गए।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 8-10
  • 3यूहन्ना


बुधवार, 23 जुलाई 2014

परेशानी और शांति


   यदि आपने मर्फी के नियम के बारे में सुना नहीं भी हो, तो भी उसे अनुभव अवश्य किया होगा। मर्फी का नियम कहता है, "यदि कोई भी बात बिगड़ सकती है, तो वह बिगड़ेगी अवश्य"; अर्थात अगर कुछ गलत हो सकने की संभावना है तो देर-सवेर वह होकर रहेगा।

   मर्फी का यह नियम मुझे प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों से कहे गए एक सिद्धांत की याद दिलाता है: "...संसार में तुम्हें क्लेष होता है..." (यूहन्ना 16:33)। अर्थात, हम मसीही विश्वासी इस बात के लिए निश्चित रह सकते हैं कि देर-सवेर हमें संसार से परेशानियों का सामना करना ही पड़ेगा। यह संभावना परमेश्वर की आरंभिक योजना के अनुसार नहीं है, लेकिन जब से मानव जाति शैतान के प्रलोभन में फंस कर पाप में पड़ गई, तभी से सृष्टि की सभी बातें पाप के दुषप्रभावों की आधीनता में आ गईं, और परिणामस्वरूप तब से सृष्टि की सभी बातों में गड़बड़ एवं दुष्क्रीया दिखाई देती है।

   जीवन में परेशानी होने की वास्तविकता तो सर्वविदित है किंतु शांति होने की वस्तविकता अकसर नज़र नहीं आती। यह एक रोचक बात है कि जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को परेशानियों के बारे में चिताया, उसके साथ ही, उसी वाक्य में उन्हें अपनी शांति के बारे में आश्वस्त भी किया: "...ढाढ़स बांधो, मैंने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना 16:33)। "जीत लिया" से प्रभु यीशु का तात्पर्य था मैंने ऐसा कर के दे दिया है जिसका प्रभाव आते समयों में भी मिलता रहेगा। क्रूस पर अपने बलिदान और फिर तीसरे दिन अपने पुनरुत्थान के द्वारा ना केवल प्रभु यीशु ने तब संसार के पाप पर विजय प्राप्त कर ली थी, वरन आज भी वह इस विजय को अपने चेलों के जीवन का अभिन्न अंग बनाए रखता है। हम चाहे जितनी और चाहे जैसी परेशानी का सामना करें, प्रभु यीशु की उपस्थिति और शांति सदा ही हम मसीही विश्वासियों के साथ बनी रहती है, हमें संभाले रहती है।

   इसलिए इस पतित संसार से चाहे हमें परेशानियाँ और समस्याएं झेलनी पड़ें, लेकिन सुसमाचार यह है कि प्रभु यीशु की शांति उन सभी कष्टों में हमारे साथ बनी रहेगी, हमें संभाले रहेगी और अन्ततः प्रभु यीशु में हम विजयी ठहरेंगे। - जो स्टोवैल


सभी परेशानियों और समस्याओं के मध्य, विजय एवं शांति प्रभु यीशु में ही उपलब्ध रहती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 7-9


मंगलवार, 22 जुलाई 2014

घेरे हुए


   मेरी सहेली मेलिस्सा की 9 वर्षीय पुत्री, सिडनी, बीमार थी, अस्पताल में भर्ती थी और उसे कीमोथैरपी तथा बोन-मैरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी। मुझे उसके बारे में एक स्वपन दिखाई दिया जिसमें मैंने देखा कि सिडनी अस्पताल के एक केंद्रीय कक्ष में अपने माता-पिता के साथ है, उस कक्ष के चारों ओर अन्य कमरे बने हैं जिनमें उनके परिवार तथा मित्रगण हैं और वे सभी सिडनी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वास्तविक जीवन में, भौतिक रूप से, सिडनी परिवार या मित्रजनों से घिरी हुई नहीं थी, वे उसके चारों ओर उपस्थित नहीं थे किंतु आत्मिक रीति से उन सबकी प्रार्थनाओं और प्रेम ने उसे घेर रखा था।

   प्रेरित पौलुस भी प्रार्थनाओं से घिरे रहने की लालसा रखता था। पौलुस द्वारा भिन्न मसीही मण्डलियों को लिखी पत्रियों में से अधिकांश में उसने उन मण्डलियों से अनुरोध किया कि वे उसे अपनी प्रार्थनाओं में प्रभु के सम्मुख स्मरण रखें (2 कुरिन्थियों 1:11; इफिसीयों 6:18-20; कुलुस्सियों 4:2-4; फिलेमॉन 1:22)। रोम की मसीही मण्डली के सदस्यों को पौलुस ने लिखा: "और हे भाइयों; मैं यीशु मसीह का जो हमारा प्रभु है और पवित्र आत्मा के प्रेम का स्मरण दिला कर, तुम से बिनती करता हूं, कि मेरे लिये परमेश्वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो" (रोमियों 15:30)। पौलुस जानता था कि जब तक सहयोगियों तथा सहकर्मियों की प्रार्थना की सामर्थ उसके साथ नहीं है, वह परमेश्वर के लिए अपनी सेवकाई में प्रभावी नहीं हो सकता।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्रभु यीशु भी हमारे लिए प्रार्थना करता है (यूहन्ना 17:20; इब्रानियों 7:25) और परमेश्वर का पवित्र आत्मा भी प्रार्थना में हमारी सहायता करता है कि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना कर सकें (रोमियों 8:27)। हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कितनी शांति, सांत्वना और सामर्थ की बात है कि अन्य मसीही विश्वासियों, प्रभु यीशु और पवित्र आत्मा की प्रार्थनाएं हमें घेरे हुए रखती हैं, सुरक्षित रखती हैं, प्रभावी बनाती हैं। एक दूसरे के लिए प्रार्थना करते रहें, एक दूसरे को प्रार्थनाओं से घेरे रहें। - ऐनी सेटास


पवित्र आत्मा की प्रेरणा से करी गई प्रार्थना अति प्रभावी होती है।

हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं। - इब्रानियों 13:18

बाइबल पाठ: रोमियों 15:22-33
Romans 15:22 इसी लिये मैं तुम्हारे पास आने से बार बार रूका रहा। 
Romans 15:23 परन्तु अब मुझे इन देशों में और जगह नहीं रही, और बहुत वर्षों से मुझे तुम्हारे पास आने की लालसा है। 
Romans 15:24 इसलिये जब इसपानिया को जाऊंगा तो तुम्हारे पास होता हुआ जाऊंगा क्योंकि मुझे आशा है, कि उस यात्रा में तुम से भेंट करूं, और जब तुम्हारी संगति से मेरा जी कुछ भर जाए, तो तुम मुझे कुछ दूर आगे पहुंचा दो। 
Romans 15:25 परन्तु अभी तो पवित्र लोगों की सेवा करने के लिये यरूशलेम को जाता हूं। 
Romans 15:26 क्योंकि मकिदुनिया और अखया के लोगों को यह अच्छा लगा, कि यरूशलेम के पवित्र लोगों के कंगालों के लिये कुछ चन्दा करें। 
Romans 15:27 अच्छा तो लगा, परन्तु वे उन के कर्जदार भी हैं, क्योंकि यदि अन्यजाति उन की आत्मिक बातों में भागी हुए, तो उन्हें भी उचित है, कि शारीरिक बातों में उन की सेवा करें। 
Romans 15:28 सो मैं यह काम पूरा कर के और उन को यह चन्दा सौंप कर तुम्हारे पास होता हुआ इसपानिया को जाऊंगा। 
Romans 15:29 और मैं जानता हूं, कि जब मैं तुम्हारे पास आऊंगा, तो मसीह की पूरी आशीष के साथ आऊंगा।
Romans 15:30 और हे भाइयों; मैं यीशु मसीह का जो हमारा प्रभु है और पवित्र आत्मा के प्रेम का स्मरण दिला कर, तुम से बिनती करता हूं, कि मेरे लिये परमेश्वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो। 
Romans 15:31 कि मैं यहूदिया के अविश्वासियों बचा रहूं, और मेरी वह सेवा जो यरूशलेम के लिये है, पवित्र लोगों को भाए। 
Romans 15:32 और मैं परमेश्वर की इच्छा से तुम्हारे पास आनन्द के साथ आकर तुम्हारे साथ विश्राम पाऊं। 
Romans 15:33 शान्ति का परमेश्वर तुम सब के साथ रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6


सोमवार, 21 जुलाई 2014

साथ


   हमारे क्षेत्र में इंग्लिश फुटबॉल खेल का एक प्रमुख आकर्षण है सालाना एफ ए कप प्रतियोगिता का फाइनल मैच। सौ वर्ष से भी अधिक समय से यह दिन उत्साह, उत्सव और प्रतिस्पर्धा के साथ मनाया जाता रहा है। लेकिन इस दिन को लेकर मेरे लिए जो सबसे रोमांचकारी बात रही है वह है खेल के आरंभ होने का तरीका। प्रति वर्ष इस सालाना प्रतियोगिता का यह फाईनल मैच आरम्भ होता है एक पारंपरिक भक्ति गीत Abide With Me (रह मेरे साथ) के गाए जाने के द्वारा।

   पहले मुझे यह बड़ा अटपटा सा लगा - भला फुटबॉल के साथ भक्ति गीत का क्या लेना-देना हो सकता है? जब मैंने इस पर थोड़ा विचार किया, तो मुझे समझ आया कि एक मसीही विश्वासी के लिए परमेश्वर की संगति हर समय महत्वपूर्ण है, चाहे वह खेल-कूद, बाज़ार-खरीददारी, व्यवसाय-कार्य स्थल, स्कूल, या अन्य कोई भी कार्य करना क्यों ना हो। प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन का ऐसा कोई पहलु नहीं है जिसमें परमेश्वर की उपस्थिति का प्रभाव नहीं होता; इसलिए यह लालसा कि परमेश्वर हर समय साथ बना रहे हम मसीही विश्वासियों के लिए सबसे स्वाभाविक लालसा है।

   लेकिन परमेश्वर का यह लगातार बना रहने वाला साथ कोई ऐसी बात नहीं है जिसके लिए हमें परमेश्वर के सामने गिड़गड़ाते रहना पड़ेगा, वरन यह तो परमेश्वर पिता की ओर से अपने बच्चों को दिया गया वायदा है: "तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों 13:5)। ना केवल परमेश्वर का साथ हम मसीही विश्वासियों की हर परिस्थिति में संतुष्टि की कुँजी है, वरन यह साथ हमें सद्बुद्धि, शांति, सांत्वना, और सामर्थ भी देता है - हम चाहे जहाँ हों, चाहे कोई भी कार्य कर रहे हों, चाहे जिस भी परिस्थिति में हों। - बिल क्राउडर


हम मसीही विश्वासियों का सबसे महान सौभग्य है प्रभु यीशु की संगति और उसका आनन्द।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 13:1-8
Hebrews 13:1 भाईचारे की प्रीति बनी रहे। 
Hebrews 13:2 पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है। 
Hebrews 13:3 कैदियों की ऐसी सुधि लो, कि मानो उन के साथ तुम भी कैद हो; और जिन के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उन की भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है। 
Hebrews 13:4 विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और बिछौना निष्‍कलंक रहे; क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों, और परस्त्रीगामियों का न्याय करेगा। 
Hebrews 13:5 तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। 
Hebrews 13:6 इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।
Hebrews 13:7 जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्हों ने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्हें स्मरण रखो; और ध्यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देखकर उन के विश्वास का अनुकरण करो। 
Hebrews 13:8 यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3


शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

शांति


   फोटोग्राफर ऐन गेडेस ने सोए हुए बच्चों की तस्वीरों को एक कला का रूप दे दिया है। उनके द्वारा ली गई सोए हुए बच्चों की तस्वीरें मुस्कुराहट उत्पन्न करती हैं; आराम से सोए हुए बच्चे की तस्वीर से बढ़कर कुछ और शांति की छवि नहीं हो सकती।

   लेकिन सभी माता-पिता भली-भांति जानते हैं कि बच्चों की देखभाल करना, उन्हें शांत रखना और फिर आराम से सुला देना कितना थका देने वाला और अन्वरत ज़िम्मेदारी का कार्य है क्योंकि अपनी उत्सुकतता और मासूमियत में बच्चे अनायास ही पल भर ही में किसी जोखिम में पड़ जाने की क्षमता रखते हैं। उन्हें दिन भर सुरक्षित रखने, उनके पीछे पीछे भागने, उनका मनोरंजन करने, उनका मार्गदर्शन करने, उनकी लड़ाईयाँ सुलझाने, उन्हें तैयार रखने के बाद जब शाम ढलती है तब सभी अभिभावक बच्चों को आराम से सुलाने के इच्छुक हो जाते हैं। रात में सभी खिलौनों को वापस स्थान पर रखने और बच्चों को पाएजामे पहनाने के बाद, बच्चे धीमे हो जाते हैं और माता या पिता के साथ लिपटकर लेटकर कोई कहानी सुनने के साथ सो जाते हैं। उस सोते हुए बच्चे की मनोरम शांति को देखकर दिन भर करी गई दौड़धूप और उठाई गई परेशानी निरर्थक नहीं लगती।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी बताती है कि परमेश्वर पिता का भी अपने बच्चों के प्रति इच्छित स्थिति शांति की ही है (लैव्यवस्था 26:6), लेकिन बहुधा अपनी अपरिपक्वता के कारण हम परेशानियों में पड़ जाते हैं और झगड़े उत्पन्न कर लेते हैं। बच्चों के अभिभावकों के समान ही परमेश्वर भी हर पल हर क्षण हमारी देखभाल करता रहता है, हमें सुरक्षित रखता है, हमारी आवश्यकताएं पूरी करता रहता है, और चाहता है कि गलत बातों के करने और उनमें पड़ने से हटकर हम उन्हें छोड़ कर उसके निकट आ जाएं और शांत होकर उसके प्रेम भरे मार्गों में सुरक्षा और तसल्ली के साथ विश्राम करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


उसकी इच्छा में ही हमारी शांति है। - डान्ते

मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है। - भजन 4:8

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 26:1-12
Leviticus 26:1 तुम अपने लिये मूरतें न बनाना, और न कोई खुदी हुई मूर्ति वा लाट अपने लिये खड़ी करना, और न अपने देश में दण्डवत करने के लिये नक्काशीदार पत्थर स्थापन करना; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। 
Leviticus 26:2 तुम मेरे विश्राम दिनों का पालन करना और मेरे पवित्रस्थान का भय मानना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 26:3 यदि तुम मेरी विधियों पर चलो और मेरी आज्ञाओं को मानकर उनका पालन करो, 
Leviticus 26:4 तो मैं तुम्हारे लिये समय समय पर मेंह बरसाऊंगा, तथा भूमि अपनी उपज उपजाएगी, और मैदान के वृक्ष अपने अपने फल दिया करेंगे; 
Leviticus 26:5 यहां तक कि तुम दाख तोड़ने के समय भी दावनी करते रहोगे, और बोने के समय भी भर पेट दाख तोड़ते रहोगे, और तुम मनमानी रोटी खाया करोगे, और अपने देश में निश्चिन्त बसे रहोगे। 
Leviticus 26:6 और मैं तुम्हारे देश में सुख चैन दूंगा, और तुम सोओगे और तुम्हारा कोई डराने वाला न हो; और मैं उस देश में दुष्ट जन्तुओं को न रहने दूंगा, और तलवार तुम्हारे देश में न चलेगी। 
Leviticus 26:7 और तुम अपने शत्रुओं को मार भगा दोगे, और वे तुम्हारी तलवार से मारे जाएंगे। 
Leviticus 26:8 और तुम में से पांच मनुष्य सौ को और सौ मनुष्य दस हजार को खदेड़ेंगे; और तुम्हारे शत्रु तलवार से तुम्हारे आगे आगे मारे जाएंगे; 
Leviticus 26:9 और मैं तुम्हारी ओर कृपा दृष्टि रखूंगा और तुम को फलवन्त करूंगा और बढ़ाऊंगा, और तुम्हारे संग अपनी वाचा को पूर्ण करूंगा। 
Leviticus 26:10 और तुम रखे हुए पुराने अनाज को खाओगे, और नये के रहते भी पुराने को निकालोगे। 
Leviticus 26:11 और मैं तुम्हारे बीच अपना निवासस्थान बनाए रखूंगा, और मेरा जी तुम से घृणा नहीं करेगा। 
Leviticus 26:12 और मैं तुम्हारे मध्य चला फिरा करूंगा, और तुम्हारा परमेश्वर बना रहूंगा, और तुम मेरी प्रजा बने रहोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 148-150


शनिवार, 3 मई 2014

चिंता


   कुछ वर्ष पहले की बात है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के हमारे सामूहिक अध्ययन के समय हमारे दल के अगुवे ने हम सब के सामने चुनौती रखी कि हम बाइबल से एक पूरा अध्याय कण्ठस्त करें और फिर सब लोगों के सामने खड़े होकर उसे दोहराएं। तुरंत ही अपने अन्दर ही अन्दर मैं इसका विरोध करने लगी और इसे लेकर दुखी होने लगी - एक पूरा अध्याय; कण्ठस्त; सबके सामने दोहराना - मुझे से कभी नहीं होगा क्योंकि कुछ भी कण्ठस्त कर लेना कभी भी मेरी क्षमताओं में सम्मिलित नहीं रहा था। मैं सोच सोच कर ही घबरा रही थी कि मेरी बारी आएगी, मैं हिचकिचाते हुए बोलना आरंभ करूंगी और फिर कहीं अटक कर रुक जाऊंगी, सभी लोग मेरी ओर देख रहे होंगे और मैं खामोश खड़ी कसमसा रही होऊंगी, अगले शब्द स्मरण करने और अपनी शर्मिन्दगी छुपाने के असफल प्रयास कर रही होऊंगी।

   इसके कुछ दिन के पश्चात, बड़े अनमने भाव से कोई अध्याय कण्ठस्त करने के लिए मैं अपनी बाइबल के पन्ने पलटने लगी; लेकिन स्मरण करने के लिए मुझे कुछ भी सही सूझ नहीं पड़ रहा था। फिर मैं फिलिप्पियों 4 अध्याय पर आकर रुक गई। उस अध्याय का एक पद मेरे सामने था, और मैंने उसे मन और मुँह की शान्ति के साथ ध्यान से पढ़ा, "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं" (फिलिप्पियों 4:6)। बस मुझे मिल गया था कि मुझे कौन सा अध्याय स्मरण करना है, और यह भी कि मैं कैसे अपनी ज़िम्मेदारी से संबंधित हर चिंता से बच कर निश्चिंत आगे बढ़ सकती हूँ, इस कार्य को भली भांति कर सकती हूँ।

   परमेश्वर की कद्पि यह इच्छा नहीं है कि हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहें, क्योंकि चिंता हमारे प्रार्थना के जीवन को पंगु कर देती है। प्रेरित पौलुस ने हमें लिखा है कि चिंता करने और घबराने की बजाए हमें परमेश्वर से सहायता मांगनी चाहिए। जब हम पौलुस की कही इस बात को अपनी चिंताओं पर जयवन्त होने का अपना जीवन मार्ग बना लेंगे, तब परमेश्वर की शांति हमारे मन-मस्तिष्क को स्थिर और हमें शांति में बनाए रखेगी (पद 7)।

   किसी ने कटाक्ष करते हुए कहा है, "जब हम आसानी से चिंता कर सकते हैं, तो फिर प्रार्थना में ज़ोर क्यों लगाएं?" कहने का तात्पर्य स्पष्ट है, चिंता करने से कुछ नहीं मिलता, लेकिन प्रार्थना हमें उसके संपर्क में ले आती है जो सृष्टि को चलाता है और हमारी प्रत्येक चिंता का हल दे सकता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि हमारे हाथ प्रार्थना में परमेश्वर के आगे जुड़े हुए हैं तो उन्हें चिंता में मरोड़ना असंभव है।

अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन 55:22

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:1-9
Philippians 4:1 इसलिये हे मेरे प्रिय भाइयों, जिन में मेरा जी लगा रहता है जो मेरे आनन्द और मुकुट हो, हे प्रिय भाइयो, प्रभु में इसी प्रकार स्थिर रहो।
Philippians 4:2 मैं यूओदिया को भी समझाता हूं, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें। 
Philippians 4:3 और हे सच्चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर, क्योंकि उन्होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकिर्मयों समेत परिश्रम किया, जिन के नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं। 
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 33-36


मंगलवार, 18 मार्च 2014

सफलता की फिसलन


   रसायनशास्त्री और लेखक डॉ० ओ० ए० बत्तिस्ता द्वारा लिखित 19,000 से अधिक सूक्तियों में से एक यह बुद्धिमानी भरा कथन है: "जैसे ही आप धन, प्रशंसा और ख्याति में रुचि रखना बन्द कर देते हैं, समझ लीजिए कि आप सफलता की चोटी पर पहुँच गए हैं"। लेकिन दुर्भाग्यवश जब कभी हमारी किसी उपलब्धि की प्रशंसा होती है या हम उसके लिए पुरुस्कृत किए जाते हैं तो इस कथन का बिलकुल विपरीत घटित होने लगता है - एक नम्र हृदय शीघ्र ही अहंकार से फूला मन बन जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, इस्त्राएल का प्रथम राजा शाऊल भी इसी रोग का शिकार हुआ था। अपने आरंभ के समय में उसने अपने आप को इस्त्राएल के सबसे छोटे गोत्र के एक महत्वहीन परिवार के एक सदस्य के रूप में देखा था (1 शमूएल 9:21)। लेकिन कुछ ही वर्षों में परमेश्वर द्वारा मिली सफलताओं के कारण उसका मन इतना फूल गया कि उसने अपने सम्मान में एक स्मारक खड़ा करवा लिया और अपने व्यवहार का अन्तिम निर्णय लेने वाला बन गया (1 शमूएल 15:11-12)। परमेश्वर के नबी शमूएल ने राजा शाऊल द्वारा करी गई परमेश्वर की इस अनाज्ञाकारिता के लिए उसका सामना किया और उसे स्मरण दिलाया कि: "शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया?" (1 शमूएल 15:17)

   जिसे हम सफलता कहते हैं उसकी फिसलन भरी ढलान से फिसल कर विनाश को नीचे चल पड़ने की ओर पहला कदम होता है अभिमान। इस कदम के उठाए जाने का आरंभ तब होता है जब हम परमेश्वर द्वारा हमें दी गई सफलताओं का श्रेय उसे देने के स्थान पर उन्हें अपनी उपलब्धियाँ मान कर वह श्रेय स्वयं लेने लग जाते हैं तथा उसकी आज्ञाओं को अपनी इच्छाओं के अनुसार तोड़ना-मरोड़ना भी आरंभ कर देते हैं।

   सच्ची सफलता तब ही आती है जब हम परमेश्वर की आज्ञाकारिता में दीनता और नम्रता के साथ बने रहते हैं और अपनी नहीं वरन अपने जीवनों और कार्यों द्वारा परमेश्वर की प्रशंसा करते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड।


सच्ची नम्रता हर सफलता का श्रेय परमेश्वर को ही देती है।

इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे; - व्यवस्थाविवरण 8:11

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 15:10-23
1 Samuel 15:10 तब यहोवा का यह वचन शमूएल के पास पहुंचा, 
1 Samuel 15:11 कि मैं शाऊल को राजा बना के पछताता हूं; क्योंकि उसने मेरे पीछे चलना छोड़ दिया, और मेरी आज्ञाओं का पालन नहीं किया। तब शमूएल का क्रोध भड़का; और वह रात भर यहोवा की दोहाई देता रहा।
1 Samuel 15:12 बिहान को जब शमूएल शाऊल से भेंट करने के लिये सवेरे उठा; तब शमूएल को यह बताया गया, कि शाऊल कर्म्मेल को आया था, और अपने लिये एक निशानी खड़ी की, और घूमकर गिलगाल को चला गया है। 
1 Samuel 15:13 तब शमूएल शाऊल के पास गया, और शाऊल ने उस से कहा, तुझे यहोवा की ओर से आशीष मिले; मैं ने यहोवा की आज्ञा पूरी की है। 
1 Samuel 15:14 शमूएल ने कहा, फिर भेड़-बकरियों का यह मिमियाना, और गय-बैलों का यह रंभाना जो मुझे सुनाई देता है, यह क्यों हो रहा है? 
1 Samuel 15:15 शाऊल ने कहा, वे तो अमालेकियों के यहां से आए हैं; अर्थात प्रजा के लोगों ने अच्छी से अच्छी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि करने को छोड़ दिया है; और बाकी सब को तो हम ने सत्यानाश कर दिया है। 
1 Samuel 15:16 तब शमूएल ने शाऊल से कहा, ठहर जा! और जो बात यहोवा ने आज रात को मुझ से कही है वह मैं तुझ को बताता हूं। उसने कहा, कह दे। 
1 Samuel 15:17 शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया? 
1 Samuel 15:18 और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी, और कहा, जा कर उन पापी अमालेकियों को सत्यानाश कर, और जब तक वे मिट न जाएं, तब तक उन से लड़ता रह। 
1 Samuel 15:19 फिर तू ने किस लिये यहोवा की वह बात टालकर लूट पर टूट के वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है? 
1 Samuel 15:20 शाऊल ने शमूएल से कहा, नि:सन्देह मैं ने यहोवा की बात मानकर जिधर यहोवा ने मुझे भेजा उधर चला, और अमालेकियों को सत्यानाश किया है। 
1 Samuel 15:21 परन्तु प्रजा के लोग लूट में से भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, अर्थात सत्यानाश होने की उत्तम उत्तम वस्तुओं को गिलगाल में तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि चढ़ाने को ले आए हैं। 
1 Samuel 15:22 शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। 
1 Samuel 15:23 देख बलवा करना और भावी कहने वालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 14-16


सोमवार, 17 मार्च 2014

सांत्वना का वचन


   इस्त्राएल के लोग संघर्ष में थे। वे अशूर के लोगों द्वारा बन्धक बना कर एक दूर देश में जा कर रहने के लिए विवश किए गए थे। परमेश्वर का भविष्यद्वक्ता यशायाह इन थके-माँदे लोगों की सहायाता के लिए उन्हें को क्या दे सकता था?

   उसने उन्हें आशा की ऐसी भविष्यवाणी दी जो ना केवल उनके लिए परमेश्वर से एक सन्देश था वरन जो आते समय में प्रतिज्ञा किए हुए जगत के उद्धारकर्ता से भी संबंधित था। यशायाह 50:4 में स्वयं उस उद्धारकर्ता ने उस आने वाले विश्राम और सांत्वना के विषय में कहा: "प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं"।

   ये आशा के दोहरी परिपूर्णता के वचन थे - उन दासत्व में पड़े हुए लोगों के लिए भी और आने वाली पीढ़ी के उन लोगों के लिए भी जो अपने जीवन में मसीह यीशु के अनुग्रह से मिलने वाले उद्धार को स्वीकार कर लेंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में आकर हम सुसमाचारों में दिए गए वृतांत में पाते हैं कि कैसे प्रभु यीशु ने जीवन की परिस्थितियों से थके हुए लोगों को उनकी आवश्यकतानुसार उपयुक्त वचन सुनाकर उसके लिए करी गई इस भविष्यवाणी को पूरा किया। प्रभु यीशु ने कहा, "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   ये वास्तव में अनुग्रह और अनुकंपा से भरे शब्द हैं जिनके द्वारा प्रभु यीशु ने हमारे लिए उदाहरण छोड़ा है कि हम परेशान और थके हुए लोगों को कैसे संभाल सकते हैं। क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसे प्रोत्साहन के शब्दों की या एक सुनने वाले मित्र की आवश्यकता है? परमेश्वर के वचन बाइबल से लेकर कहा गया सांत्वना का वचन जीवन से थके हुओं को परमेश्वर की शांति देने के लिए बहुत कारगर होता है; उसे प्रयोग करना सीखिए भी तथा कीजिए भी। - डेनिस फिशर


दुखी हृदयों को आराम देने के लिए सांत्वना के शब्द आवश्यक होते हैं।

सज्जन उत्तर देने से आनन्दित होता है, और अवसर पर कहा हुआ वचन क्या ही भला होता है! - नीतिवचन 15:23

बाइबल पाठ: यशायाह 50:4-10
Isaiah 50:4 प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। 
Isaiah 50:5 प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और मैं ने विरोध न किया, न पीछे हटा। 
Isaiah 50:6 मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया।
Isaiah 50:7 क्योंकि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है, इस कारण मैं ने संकोच नहीं किया; वरन अपना माथा चकमक की नाईं कड़ा किया क्योंकि मुझे निश्चय था कि मुझे लज्जित होना न पड़ेगा। 
Isaiah 50:8 जो मुझे धर्मी ठहराता है वह मेरे निकट है। मेरे साथ कौन मुकद्दमा करेगा? हम आमने-साम्हने खड़े हों। मेरा विरोधी कौन है? वह मेरे निकट आए। 
Isaiah 50:9 सुनो, प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है; मुझे कौन दोषी ठहरा सकेगा? देखो, वे सब कपड़े के समान पुराने हो जाएंगे; उन को कीड़े खा जाएंगे।
Isaiah 50:10 तुम में से कौन है जो यहोवा का भय मानता और उसके दास की बातें सुनता है, जो अन्धियारे में चलता हो और उसके पास ज्योति न हो? वह यहोवा के नाम का भरोसा रखे, और अपने परमेश्वर पर आशा लगाए रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 11-13


गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

सब ठीक है


   हाल ही में मेरी और मेरे पति की पुनःमुलाकात एक जवान व्यक्ति, मैथ्यु, से हुई जिसे हम उसके बचपने में जानते थे। बीती यादों को ताज़ा करते हुए हम ने मैथ्यु द्वारा, उसके लड़कपन के समय, एक क्रिसमस कार्यक्रम में गाए भजन "All is Well" (सब ठीक है) को स्मरण किया। एक सुन्दर भजन को भली भांति गाए जाने की वह एक अच्छी याद थी। यह भजन लोगों को ऊँची आवाज़ में प्रभु यीशु के जन्म की खुशी और सब कुछ ठीक होने के कारण परमेश्वर की स्तुति करने को प्रेरित करता है।

   क्रिसमस के समय इस भजन के बोल बहुत से लोगों के लिए बड़े शांतिदायक होते हैं, लेकिन कुछ लोग इस भजन के सन्देश को ग्रहण नहीं कर पाते क्योंकि उनके जीवनों में सब कुछ ठीक नहीं होता है, वे किसी समस्या, किसी प्रीय जन की मृत्यु के शोक, बेरोज़गारी, किसी गंभीर बीमारी या बनी हुई निराशा से जूझ रहे होते हैं और इस गीत को सुनकर उनके मन से चीत्कार निकलती है - "नहीं! सब ठीक नहीं है!"

   लेकिन उन लोगों के लिए जो प्रभु यीशु के जन्म के आनन्द को मनाते हैं, जो प्रभु यीशु की सामर्थ को जानते हैं, जो प्रभु यीशु को समर्पित जीवन व्यतीत करते हैं, उनके लिए हर प्रतिकूल परिस्थिति में भी मसीह यीशु के उनके जीवन में उपस्थित तथा कार्यरत होने के कारण सब कुछ ठीक रहता है। हम मसीही विश्वासी अपने किसी कष्ट या पीड़ा में कभी अकेले नहीं हैं, परमेश्वर सदैव हमारे साथ रहता है और हमें कभी ना छोड़ने का उसका वायदा है (इब्रानियों 13:5)। परमेश्वर का वायदा है कि हर परिस्थिति में उसका अनुग्रह हमारे लिए काफी है (1 कुरिन्थियों 12:9)। परमेश्वर ने हमारी हर आवश्यकता की पूर्ति का वायदा किया है (फिलिप्पियों 4:19)। और सबसे बढ़कर परमेश्वर का वायदा हमें अनन्त आशीष का जीवन देने का है (यूहन्ना 10:27-28), जो एक ऐसा वायदा है जो कभी किसी और ने अपने किसी अनुयायी से नहीं किया।

   जब हम परमेश्वर की अपने विश्वासियों से करी गई इन प्रतिज्ञाओं को स्मरण करते हैं तो हमारे पास उस भजन के लेखकों के साथ सहमत होने के सिवाए और कुछ करने को नहीं रह जाता, क्योंकि जैसा उस गीत में आया है, "मेरे आगे, मेरे पीछे परमेश्वर है और सब ठीक है"। - सिंडी हैस कैस्पर


जब परमेश्वर की शान्ति मन में होती है तो हम परमेश्वर की उपस्थिति के तकिए पर सर रखकर आराम से सो सकते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।। 
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।। 
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • योना 1-4 
  • प्रकाशितवाक्य 10


गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

प्रेम से परिपूर्ण


   मेरे एक मित्र ने अपनी दादी को अपने जीवन में सबसे प्रभावी व्यक्तियों में से एक बताया। अपनी दादी से मिले भरपूर प्रेम और देखभाल के कारण वह उनके एक चित्र को सदा अपने कार्यस्थल की मेज़ पर रखे रहता है, जिससे वह सदा उनके निस्वार्थ प्रेम को स्मरण रखने पाए। उसका कहना है कि उन्होंने ही उसे प्रेम का अर्थ और प्रेम करना सिखाया है।

   सभी को ऐसा ही मानवीय प्रेम पाने का सौभाग्य चाहे ना मिला हो, लेकिन प्रभु यीशु मसीह में होकर संसार का प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के प्रेम की परिपूर्णता को अनुभव कर सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा लिखित प्रथम पत्री के चौथे अध्याय में प्रेम शब्द 27 बार आया है, तथा प्रभु यीशु में होकर हमें प्राप्त होने वाले परमेश्वर के प्रेम को हमारे परमेश्वर तथा एक दुसरे के प्रति प्रेम का उदगम स्त्रोत बताया गया है: "प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा" (पद 10); " और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है" (पद 16); "हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया" (पद 19)।

   परमेश्वर का प्रेम बूँद-बूँद करके टपकने वाले नल या हमारे स्वयं खोदे जाने वाले किसी कुएँ के समान नहीं है जिस में से प्रेम-जल पाने के लिए हमें परिश्रम करना पड़े। वह तो एक बहती हुई नदी है जो उसके हृदय से निकलकर हमारे मनों में प्रवाहित होती रहती है और जिससे हम जब चाहें और जितना चाहें उतना शांतिदायक जीवन जल प्राप्त कर सकते हैं। हमारी पारिवारिक पृष्ठभूमि या जीवन के अनुभव चाहे जैसे भी रहे हों - चाहे हमने दूसरों से प्रेम पाने का अनुभव किया हो अथवा नहीं, लेकिन परमेश्वर से हमें सदा ही प्रेम मिलता रह सकता है। परमेश्वर के प्रेम के इस कभी ना खत्म होने वाले सोते से ना केवल हम तृप्त रह सकते हैं, वरन दूसरों को भी उसके पास इस तृप्ति के लिए ला सकते हैं।

   प्रभु यीशु में होकर संसार का प्रत्येक जन परमेश्वर के प्रेम से परिपूर्ण रह सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के प्रेम से बढ़कर सामर्थी और कुछ नहीं है।

हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। - 1 यूहन्ना 4:19 

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-21
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। 
1 John 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। 
1 John 4:21 और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 1-2 
  • 1 यूहन्ना 4


बुधवार, 4 दिसंबर 2013

शांति


   सृष्टि की शांति जाती रही जब हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा ने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता का पाप कर के, अदन कि वाटिका में वह वर्जित फल खा लिया। यह पाप करते ही ना केवल उन की परमेश्वर से सहभागिता जाती रही, वरन उनकी परस्पर शांति भी जाती रही और वे आपस में भी एक दुसरे पर दोषारोपण करने लगे (उत्पत्ति 3:12-13)। परमेश्वर के साथ तथा परस्पर संबंधों में पाप के कारण आने वाली यही अशांति तब से लेकर आज तक संसार और मानवजाति के लिए दुख का कारण बनी हुई है। हम अपने द्वारा लिए गलत निर्णयों तथा किए गए गलत चुनावों के लिए दूसरों को दोषी ठहराने का प्रयास करते रहते हैं, और जब कोई हमसे इस प्रयास में सहमत नहीं होता तो हम क्रोधित होने लगते हैं। दूसरों पर दोषारोपण की इस प्रवृति के कारण परिवारों, चर्च मण्डली, समाज और राष्ट्रों में भी तनाव तथा कलह व्याप्त है। हम शांति स्थापित कर नहीं पा रहे हैं क्योंकि हमारे मन दूसरों को दोषी ठहराने में लगे रहते हैं और संसार बिखरता जा रहा है, खंडित होता जा रहा है।

   क्रिसमस शांति का मौसम है। परमेश्वर के वचन बाइबल का पुराने नियम का खण्ड हमें बताता है कि कैसे परमेश्वर ने शांति के राजकुमार (यशायाह 9:6), प्रभु यीशु के संसार में आगमन के लिए तैयारी करी। प्रभु यीशु संसार में आए जिससे उसके क्रूस पर बहाए गए लहु के द्वारा (कुल्लुसियों 1:20) पाप और दोषारोपण का यह कुचक्र तोड़ा जा सके और परमेश्वर के साथ तथा परस्पर मानव संबंधों में शांति स्थापित हो सके। हमारे पापों और कटु व्यवहार के कारण संसार में व्याप्त असंतोष तथा अशांति के लिए हमें दोषी ठहराने की बजाए, प्रभु यीशु ने सारे संसार के लोगों के सारे पापों का दोष अपने ऊपर ले लिया, उनका दण्ड सह लिया, और अपने बलिदान तथा पुनर्त्थान के द्वारा पापों के दोष तथा दण्ड से बच निकलने का मार्ग मानव जाति को बना के दे दिया। अब जो कोई भी प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा मांग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, वह उसका अनुयायी तथा परमेश्वर की सनतान बन जाता है (यूहन्ना 1:12-13)।

   जो परमेश्वर से पापों की क्षमा की यह अद्भुत शांति पा लेता है, फिर स्वतः ही उसके अन्दर दूसरों को भी इस अद्भुत शांति को पहुँचाने की लालसा जागृत हो जाती है। जो परमेश्वर के साथ शांति से जीवन व्यतीत कर पाता है, वह दूसरों के साथ भी शांति से रहने पाता है। जो अपने पापों के दोष से मुक्त हो जाने के अनुभव को जानता है वह दूसरों को भी दोषी ठहराने से दूर रहता है।

   आज परमेश्वर का द्वार संसार के प्रत्येक जन के लिए यह शांति तथा मुक्ति पा लेने के लिए खुला है। क्या आप ने इस अवसर का लाभ उठाया है? यही समय है अपने लिए शांति पा लेने और दूसरों को शांति तक पहुँचा देने का; इसे व्यर्थ ना जाने दीजिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु ने हमारी अशांति अपने ऊपर ले ली जिससे कि हम उस की शांति अपने जीवनों में प्राप्त कर सकें।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: कुल्लुसियों 1:17-29
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। 
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। 
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।
Colossians 1:24 अब मैं उन दुखों के कारण आनन्द करता हूं, जो तुम्हारे लिये उठाता हूं, और मसीह के क्‍लेशों की घटी उस की देह के लिये, अर्थात कलीसिया के लिये, अपने शरीर में पूरी किए देता हूं। 
Colossians 1:25 जिस का मैं परमेश्वर के उस प्रबन्‍ध के अनुसार सेवक बना, जो तुम्हारे लिये मुझे सौंपा गया, ताकि मैं परमेश्वर के वचन को पूरा पूरा प्रचार करूं। 
Colossians 1:26 अर्थात उस भेद को जो समयों और पीढिय़ों से गुप्‍त रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है। 
Colossians 1:27 जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है। 
Colossians 1:28 जिस का प्रचार कर के हम हर एक मनुष्य को जता देते हैं और सारे ज्ञान से हर एक मनुष्य को सिखाते हैं, कि हम हर एक व्यक्ति को मसीह में सिद्ध कर के उपस्थित करें। 
Colossians 1:29 और इसी के लिये मैं उस की उस शक्ति के अनुसार जो मुझ में सामर्थ के साथ प्रभाव डालती है तन मन लगाकर परिश्रम भी करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 47-48 
  • 1 यूहन्ना 3


रविवार, 1 दिसंबर 2013

आगमन विषय


   मैं मानती हूँ कि परमेश्वर के वचन बाइबल का हर भाग परस्पर संबंधित है और समस्त पवित्र-शास्त्र प्रासंगिक तथा महत्वपूर्ण है। लेकिन फिर भी मुझे अचरज हुआ जब नवंबर माह के मेरे बाइबल पाठ में पतरस प्रेरित द्वारा लिखित प्रथम पत्री में से मैंने पाया कि प्रभु यीशु के आगमन से संबंधित चारों विषयों के बारे में पतरस ने एक ही पत्री में एक साथ ही लिखा है। दिसंबर माह से लोग प्रभु यीशु के पहले आगमन - उस पहले क्रिसमस कि यादें ताज़ा करने की तैयारी में लग जाते हैं और साथ ही उसके दूसरे आगमन की भविष्यवाणी को भी स्मरण करते हैं। आगमन के स्मरण का यह समय होता है परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में होकर संसार के लिए भेजी गई आशा, आनन्द, प्रेम और शांति पर ध्यान करना।

   प्रेरित पतरस की प्रथम पत्री में हम प्रभु यीशु के आगमन से संबंधित इन चारों विषयों को भी पाते हैं
  • आशा: स्वर्ग में हम मसीही विश्वासियों की अजर मीरास सुरक्षित है, जो मसीह यीशु के पुनरुत्थान के द्वारा है (1 पतरस 1:3-5)।
  • आनन्द: मसीही विश्वासियों के पास एक अवर्णनीय आनन्द है, चाहे उनका विश्वास क्लेषों द्वारा परखा भी जाए, लेकिन उस विश्वास का अन्त आत्माओं का उद्धार है (1 पतरस 1:6-9) जो अन्य किसी रीति से कतई संभव नहीं है, और जिस उद्धार का प्रतिफल यह अवर्णनीय आनन्द है।
  • प्रेम: मसीही विश्वासी एक शुद्ध हृदय से सभी लोगों के साथ प्रेम कर सकते हैं, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के वचन पर विश्वास द्वारा एक नया जन्म पाया है और परमेश्वर का यह वचन अब उनमें बसा रहता है, उनके स्वभाव और दृष्टिकोण को सांसारिक से परिवर्तित कर के स्वर्गीय बना देता है (1 पतरस 1:22-23)।
  • शांति: क्योंकि परमेश्वर अपने लोगों पर ध्यान बनाए रखता है, उनकी प्रार्थनाएं सुनता है, इसलिए मसीही विश्वासियों के जीवन में परमेश्वर की शांति बनी रहती है (1 पतरस 3:10-12)।

   मसीह यीशु के प्रथम आगमन के कारण, जितने उस पर विश्वास लाते हैं, वे सब उसके दुसरे आगमन तक आशा, आनन्द, प्रेम और शांति के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि आप आशा, आनन्द, प्रेम और शांति के खोजी हैं तो प्रभु यीशु के पास आईए।

इस कारण अपनी अपनी बुद्धि की कमर बान्‍धकर, और सचेत रहकर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलने वाला है। - 1 पतरस 1:13

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:3-9, 18-23; 3:10-12
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया। 
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये। 
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है। 
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। 
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। 
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। 
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो। 
1 Peter 1:18 क्योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्‍तुओं के द्वारा नहीं हुआ। 
1 Peter 1:19 पर निर्दोष और निष्‍कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ। 
1 Peter 1:20 उसका ज्ञान तो जगत की उत्‍पत्ति के पहिले ही से जाना गया था, पर अब इस अन्‍तिम युग में तुम्हारे लिये प्रगट हुआ। 
1 Peter 1:21 जो उसके द्वारा उस परमेश्वर पर विश्वास करते हो, जिसने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी; कि तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर पर हो। 
1 Peter 1:22 सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो। 
1 Peter 1:23 क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। 
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 40-41 
  • 2 पतरस 3