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Wednesday, September 3, 2014

नज़रिया एवं प्रेरणा


   1660 के दशक के अन्त की ओर सर क्रिस्टोफर रेन को लंडन के सेन्ट पॉल कैथिड्रल की पुनर्रचना का कार्य सौंपा गया। कहा जाता है कि एक दिन इस महान आराधना-भवन के निर्माण का मुआयना करने जब सर रेन आए तो वे कार्यस्थल पर अकेले ही घूमने चले गए। वहाँ कार्य कर रहे लोग उन्हें नहीं पहिचानते थे, और सर रेन उन से बातें करते और कार्य के बारे में पूछते हुए घूमने लगे। उन्होंने मज़दूरों से जानना चाहा कि वे क्या कर रहे हैं? एक मज़दूर का उत्तर था, "मैं पत्थर काट रहा हूँ"; एक अन्य ने कहा, "मैं प्रतिदिन की अपनी जीविका कमा रहा हूँ"; लेकिन एक अन्य मज़दूर का नज़रिया बहुत भिन्न था, उसका उत्तर था, "मैं सर क्रिस्टोफर रेन की सहायता कर रहा हूँ जिससे वे परमेश्वर की महिमा के लिए एक भव्य आराधना स्थल बना सकें"! इस मज़दूर का नज़रिये और कार्य करने की प्रेरणा अन्य मज़दूरों से कितनी भिन्न थी, वह परमेश्वर की महिमा के लिए कार्य कर रहा था।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह आँकलन करना कि जो कार्य हम करते हैं वह क्यों करते हैं, विशेषकर हमारे जीविका और कार्यकारी जीवनों के संदर्भ में, बहुत आवश्यक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें प्रेरित किया, "और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो" (इफिसियों 6:6-7)।

   यदि हम अपना कार्य केवल अपने अधिकारी अथवा निरीक्षक को सन्तुष्ट करने के लिए या फिर केवल जीविका कमाने के लिए करते हैं तो हम कार्य को भली-भाँति करने की सर्वोच्च प्रेरणा - परमेश्वर के प्रति हमारी भक्ति एवं समर्पण के प्रमाणस्वरूप, से कमतर रह जाते हैं। इसलिए यह आँकलन कीजिए कि आप कार्य क्यों करते हैं? सही नज़रिया एवं प्रेरणा होगी उस मज़दूर के समान यह कह पाना, "...परमेश्वर की महिमा" के लिए! - बिल क्राउडर


हमें मेहनताना देना वाला चाहे कोई भी हो, वास्तविकता में हम परमेश्वर के लिए कार्य करते हैं।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों 3:23 

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:5-9
Ephesians 6:5 हे दासो, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। 
Ephesians 6:6 और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। 
Ephesians 6:7 और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो। 
Ephesians 6:8 क्योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र; प्रभु से वैसा ही पाएगा। 
Ephesians 6:9 और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दोनों का स्‍वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-5