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बुधवार, 3 सितंबर 2014

नज़रिया एवं प्रेरणा


   1660 के दशक के अन्त की ओर सर क्रिस्टोफर रेन को लंडन के सेन्ट पॉल कैथिड्रल की पुनर्रचना का कार्य सौंपा गया। कहा जाता है कि एक दिन इस महान आराधना-भवन के निर्माण का मुआयना करने जब सर रेन आए तो वे कार्यस्थल पर अकेले ही घूमने चले गए। वहाँ कार्य कर रहे लोग उन्हें नहीं पहिचानते थे, और सर रेन उन से बातें करते और कार्य के बारे में पूछते हुए घूमने लगे। उन्होंने मज़दूरों से जानना चाहा कि वे क्या कर रहे हैं? एक मज़दूर का उत्तर था, "मैं पत्थर काट रहा हूँ"; एक अन्य ने कहा, "मैं प्रतिदिन की अपनी जीविका कमा रहा हूँ"; लेकिन एक अन्य मज़दूर का नज़रिया बहुत भिन्न था, उसका उत्तर था, "मैं सर क्रिस्टोफर रेन की सहायता कर रहा हूँ जिससे वे परमेश्वर की महिमा के लिए एक भव्य आराधना स्थल बना सकें"! इस मज़दूर का नज़रिये और कार्य करने की प्रेरणा अन्य मज़दूरों से कितनी भिन्न थी, वह परमेश्वर की महिमा के लिए कार्य कर रहा था।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह आँकलन करना कि जो कार्य हम करते हैं वह क्यों करते हैं, विशेषकर हमारे जीविका और कार्यकारी जीवनों के संदर्भ में, बहुत आवश्यक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें प्रेरित किया, "और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो" (इफिसियों 6:6-7)।

   यदि हम अपना कार्य केवल अपने अधिकारी अथवा निरीक्षक को सन्तुष्ट करने के लिए या फिर केवल जीविका कमाने के लिए करते हैं तो हम कार्य को भली-भाँति करने की सर्वोच्च प्रेरणा - परमेश्वर के प्रति हमारी भक्ति एवं समर्पण के प्रमाणस्वरूप, से कमतर रह जाते हैं। इसलिए यह आँकलन कीजिए कि आप कार्य क्यों करते हैं? सही नज़रिया एवं प्रेरणा होगी उस मज़दूर के समान यह कह पाना, "...परमेश्वर की महिमा" के लिए! - बिल क्राउडर


हमें मेहनताना देना वाला चाहे कोई भी हो, वास्तविकता में हम परमेश्वर के लिए कार्य करते हैं।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों 3:23 

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:5-9
Ephesians 6:5 हे दासो, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। 
Ephesians 6:6 और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। 
Ephesians 6:7 और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो। 
Ephesians 6:8 क्योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र; प्रभु से वैसा ही पाएगा। 
Ephesians 6:9 और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दोनों का स्‍वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-5


रविवार, 30 मार्च 2014

नज़रिया


   बहुत वर्षों से एलन फन्ट का टेलिविज़न कार्यक्रम Candid Camera दर्शकों के मनोरंजन का स्त्रोत रहा है। इस कार्यक्रम में एक छिपे हुए कैमरे में कैद कर के आकस्मिक और विचित्र परिस्थितियों के प्रति करी गई लोगों की हास्यासपद प्रतिक्रियाएं दिखाई जाती हैं। एलन के पुत्र पीटर के अनुसार, इस कार्यक्रम में दिखाने के लिए सामग्री एकत्रित करते समय उनका मानना यही रहता है कि, "सामान्यतः लोग अद्भुत होते हैं, और हम अपने कैमरे से यह दिखाना चाहते हैं।" पीटर का यह भी मानना है कि ऐसे ही कुछ अन्य कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ता यह मानकर चलते हैं कि लोग सामान्यतः बेवकूफ होते हैं और वे यही बात दिखाने का प्रयास करते हैं। पीटर की यह टिप्पणी दिखाती है कि लोगों के प्रति हमारा नज़रिया ही उनके प्रति हमारे व्यवहार को निर्धारित करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के जीवन से संबंधित एक घटना में, प्रभु यीशु ज़क्कई नामक एक महसूल लेने वाले के घर आतिथ्य के लिए गए। उन दिनों में क्योंकि यहूदी लोग रोमियों की गुलामी में थे और महसूल लेने वाले रोमी शासकों के लिए कार्य करते थे इसलिए यहूदी समाज महसूल लेने वाले यहूदियों को बड़ी निन्दनीय दृष्टि से देखता था और उन्हें घोर पापी मानता था। प्रभु यीशु को ज़क्कई के घर जाता देख, लोग प्रभु की आलोचना करने लगे, "यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है" (लूका 19:7)। प्रभु यीशु, इस आलोचना की परवाह किए बिना ज़क्कई के घर गए, प्रभु के व्यवहार से ज़क्कई का मन बदल गया, उसने अपने पापों से पश्चाताप किया और अधर्म से कमाई दौलत को लौटा देने का निर्णय लिया, जिस पर प्रभु ने कहा, "...आज इस घर में उद्धार आया है...क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है" (लूका 19:9, 10)।

   मेरे मित्र बौब हौर्नर कहते हैं, "यदि आप किसी को असफल प्रवृति का एवं अयोग्य देखोगे तो उसके प्रति तिरस्कारपूर्ण व्यवहार करोगे। लेकिन जब उन्हें पाप में खोया और सहायता पाने के योग्य देखोगे तो उनके प्रति आपका व्यवहार अनुकंपा और दया का होगा।"

   प्रभु यीशु कभी संसार के लोगों को असफल प्रवृति का एवं अयोग्य नहीं देखता, उसके लिए सभी जन पाप से छुड़ाए जाने तथा प्रेम किए जाने के योग्य हैं। इसीलिए उसने सारे संसार के सभी लोगों के लिए अपने प्राण बलिदान करे ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, अपने पापों से पश्चाताप करे और अपना जीवन उसे समर्पित करे, वह परमेश्वर की सन्तान कहलाने और अनन्तकाल तक उस के साथ स्वर्ग में रहने के योग्य हो जाए।

   जब हमारे सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु का नज़रिया ऐसा है तो हम जो उसके अनुयायी हैं, क्या पाप के अन्धकार में खोए संसार के लोगों के प्रति इससे भिन्न नज़रिया रखने का कोई वाजिब कारण दे सकते हैं? - डेविड मैक्कैसलैंड


जिन्होंने उद्धार पा लिया है उन्हें पाप में खोए हुओं को खोजने में लगे रहना चाहिए।

यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं। - मरकुस 2:17

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10
Luke 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था। 
Luke 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था। 
Luke 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था। 
Luke 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था। 
Luke 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है। 
Luke 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया। 
Luke 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है। 
Luke 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं। 
Luke 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है। 
Luke 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 1-4


बुधवार, 4 अप्रैल 2012

महत्वता

   विभिन्न खेल-कूद के दल अपने नाम विभिन्न सोच के साथ रखते हैं। कुछ इतिहास और इतिहास बनाने वाले नायकों से नाम लेते हैं, तो कोई प्रकृति और प्रकृति की सुन्दरता को नाम का आधार बनाते हैं। कुछ तो आकर्षक और चटक रंगों के नाम अपने दल पर ले लेते हैं। एक दल ने तो एक नाचीज़ घोंघे के नाम को ही अपना लिया!

   हुआ यों कि १९८० के दशक में सैंटा क्रूज़ में स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेना आरंभ ही किया था। इस विश्वविद्यालय के लोग, कुछ अन्य बड़े और नामी शिक्षण संस्थाओं द्वारा, खेल-कूद पर दिए जाने वाले अत्याधिक महत्व को इतना महत्वपूर्ण नहीं आँकते थे। इसलिए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की छात्र परिषद ने निर्णय लिया कि वे अपने दल का ऐसा नाम रखेंगे जो उनकी इस विचारधारा को भी दर्शाए और अन्य नामों से बिलकुल भिन्न भी हो। अपनी इसी सोच के अन्तर्गत उन्होंने अपने दल का नाम रखा "Banana Slug" जो एक पीला, लसलसा, धीमी गति से चलने वाला ऐसा घोंघा होता है जिसके ऊपर अन्य घोंघों की तरह कोई कठोर खोल नहीं होता। खेल कूद को दिए जाने वाले अत्याधिक महत्व पर, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, द्वारा यह एक रोचक कटाक्ष था।

   मुझे खेल-कूद से सदा ही लगाव रहा है, इसलिए मैं यह भी जानता हूँ कि ये बहुत आसानी से और अनजाने ही आवश्यक्ता से अधिक महत्वपूर्ण बन सकते हैं। खेल-कूद का जीवन में अपना स्थान है, उनकी उपयोगिता है, किंतु उस स्थान और उपयोगिता के बाहर यदि वे जीवन के लिए अन्य आवश्यक बातों के समय और प्रयास में आड़े आने लगें तो भली बात बुरी बन जाती है। हमें अपने जीवनों में उनकी महत्वता को आँकने और उस के अनुसार अपने जीवन के लिए आवश्यक बातों की प्राथमिकता को निर्धारित करने की आवश्यकता है जिससे सब कार्य सुचारू रूप से चले, और एक के कारण दूसरे का नुकसान ना हो।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए एक और बात है जिसका उसे सदा ध्यान रखना चाहिए - संसार के कार्य और परमेश्वर की बातों के बीच का तालमेल। जैसा हमारे प्रभु यीशु ने बताया था: "तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती २२:३७-३९), यही जीवन में हमारी प्राथमिकता रहनी चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता मीका के द्वारा परमेश्वर ने अपनी प्रजा को समझाया था कि वे कैसे उसे प्रसन्न करने वाला जीवन जी सकते हैं; मीका ने परमेश्वर की ओर से कहा: "हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है, और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?" (मीका ६:८)।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए यह अनिवार्य है कि उसके जीवन में परमेश्वर की जो उस से उम्मीदें हैं उन्हें छोड़ और कोई बात प्राथमिकता ना लेने पाए। यदि प्राथमिकताओं के सही आँकलन और निर्वाह में गलती हुई और संसार तथा संसार के कार्यों एवं बातों ने परमेश्वर का स्थान ले लिया तो इसके परिणाम उन के मसीही विश्वास और विश्वास के जीवन तथा आशीषों के लिए अति हानिकारक होंगे।

   आप के जीवन की महत्वता किस के लिए है - परमेश्वर या संसार? - बिल क्राउडर


अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करें; कम महत्व की बातों पर अधिक समय गँवाने से सावधान रहें।
हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है, और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? - मीका ६:८
बाइबल पाठ: मीका ६:१-८
Mic 6:1  जो बात यहोवा कहता है, उसे सुनो: उठकर, पहाड़ों के साम्हने वादविवाद कर, और टीले भी तेरी सुनने पाएं।
Mic 6:2  हे पहाड़ों, और हे पृथ्वी की अटल नेव, यहोवा का वादविवाद सुनो, क्योंकि यहोवा का अपनी प्रजा के साथ मुकद्दमा है, और वह इस्राएल से वादविवाद करता है।
Mic 6:3  हे मेरी प्रजा, मैं ने तेरा क्या किया, और क्या करके मैं ने तुझे उकता दिया है?
Mic 6:4  मेरे विरूद्ध साक्षी दे! मैं तो तुझे मिस्र देश से निकाल ले आया, और दासत्व के घर में से तुझे छुड़ा लाया, और तेरी अगुवाई करने को मूसा, हारून और मरियम को भेज दिया।
Mic 6:5  हे मेरी प्रजा, स्मरण कर, कि मोआब के राजा बालाक ने तेरे विरूद्ध कौन सी युक्ति की, और बोर के पुत्र बिलाम ने उसको क्या सम्मति दी? और शित्तीम से गिल्गाल तक की बातों का स्मरण कर, जिस से तू यहोवा के धर्म के काम समझ सके।
Mic 6:6  मैं क्या लेकर यहोवा के सम्मुख आऊं, और ऊपर रहने वाले परमेश्वर के साम्हने झुकूं? क्या मैं होमबलि के लिये एक एक वर्ष के बछड़े लेकर उसके सम्मुख आऊं?
Mic 6:7  क्या यहोवा हजारों मेढ़ों से, वा तेल की लाखों नदियों से प्रसन्न होगा? क्या मैं अपने अपराध के प्रायश्चित्त में अपने पहिलौठे को वा अपने पाप के बदले में अपने जन्माए हुए किसी को दूं?
Mic 6:8  हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है, और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपके परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?
एक साल में बाइबल: 
  • रूथ १-४ 
  • लूका ८:१-२५

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

लालसाएं

   शरद ऋतु लंबी चली है और ठंड भी बहुत रही है, अब मैं गरमी के लिए तरस रहा हूँ। मैं बिना पत्तों के सूने और नंगे पड़े पेड़ों और ज़मीन पर निर्जीव सूखे भूरे पत्तों को देखते देखते अघा गया हूँ। अब मेरी तीव्र लालसा है कि इन मरे हुए पत्तों के बीच में से नए हरे अँकुर फूटते हुए दिखाई दें, पेड़ फिर से हरे दिखने लगें और चारों ओर हरियाली के साथ फूलों का सुन्दर नज़ारा हो।

   किंतु जैसे जैसे मैं अपने प्रीय मौसम की लालसा करता हूँ, मुझे मेरी माँ की आवाज़ भी आती है, "अपनी ज़िन्दगी ऐसे ही प्रतीक्षाओं में ना बिता देना।"

   यदि आप मेरी जैसी प्रवृति वाले व्यक्ति हैं तो आप भी मेरे समान ही कुछ इस प्रकार की कल्पनाएं करते होंगे: "जब ऐसा और ऐसा होगा, तब मैं यह करूँगा..."; या, "यदि वह ऐसा करेगा, तब ही मैं भी यह करूँगा..."; या, "मुझे तब ही संतुष्टि मिलेगी जब..."; या, "मैं तो बस इस से प्रसन्न होऊँगा कि..."; इत्यादि।

   भविष्य की भलाई की लालसा में हम यह भूल जाते हैं कि प्रत्येक दिन, चाहे उस दिन मौसम या परिस्थितियाँ कैसी भी हों, परमेश्वर का दिया हुआ वरदान है, जिसे परमेश्वर ही की महिमा के लिए बिताया जाना चाहिए।

   लेखक रौन ऐश के अनुसार, "हम वहीं हैं जहाँ हमें होना चाहिए और हम वही सीख रहे हैं जो हमें सीखना चाहिए। बस अपने पथ पर बने रहिए क्योंकि आज के अनुभवों से परमेश्वर आपको वह सिखा रहा है जो कल की परिस्थितियों में आपके लिए उपयोगी होगा; आज उसने आपको वहाँ रखा है जहाँ से आप कल के लिए तैयार हो सकते हैं।"

   प्रत्येक ऋतु में भलाई करने और आनन्दित होने के लिए भी कारण होते हैं (सभोपदेशक ३:१२)। यह हम सब के लिए प्रतिदिन की चुनौती है कि हम हर दिन में करने के लिए कुछ भला और आनन्दित होने के लिए कोई कारण ढूँढ़ें, और फिर उस दिन में वह भलाई भी करें और उस आनन्द को भी मनाएं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हर ऋतु आनन्द का कोई कारण लाती है।
 
मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं; और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे। - सभोपदेशक ३:१२, १३
 
बाइबल पाठ: सभोपदेशक ३:१-१३
Ecc 3:1  हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है।
Ecc 3:2  जन्म का समय, और मरण का भी समय; बोने का समय, और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है;
Ecc 3:3  घात करने का समय, और चंगा करने का भी समय; ढा देने का समय, और बनाने का भी समय है;
Ecc 3:4  रोने का समय, और हंसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है;
Ecc 3:5  पत्थर फेंकने का समय, और पत्थर बटोरने का भी समय; गले लगाने का समय, और गले लगाने से रुकने का भी समय है?
Ecc 3:6  ढूंढ़ने का समय, और खो देने का भी समय; बचा रखने का समय, और फेंक देने का भी समय है;
Ecc 3:7  फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है;
Ecc 3:8  प्रेम का समय, और बैर करने का भी समय; लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है।
Ecc 3:9  काम करने वाले को अधिक परिश्रम से क्या लाभ होता है?
Ecc 3:10  मैं ने उस दु:ख भरे काम को देखा है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उस में लगे रहें।
Ecc 3:11  उस ने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं; फिर उस ने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तौभी जो काम परमेश्वर ने किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य बूझ नहीं सकता।
Ecc 3:12  मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं;
Ecc 3:13  और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १९-२१ 
  • लूका ७:३१-५०

गुरुवार, 4 अगस्त 2011

निष्कर्ष तथा मापदण्ड

अपनी पुस्तक Illustrations of Bible Truths में लेखक H. A. Ironside ने एक रोचक घटना प्रस्तुत करी। वर्च के शीर्ष धर्मगुरू बिशप पौटर अमेरिका से यूरोप की यात्रा पर एक आलीशान यात्री जहाज़ पर निकले। जब वे जहाज़ पर पहुँचे तो उन्हें मालूम पड़ा कि उनके कमरे में एक और यात्री भी उनके साथ यात्रा करेगा। अपने कमरे का निरीक्षण करने और सह यात्री से मिलने के बाद वे जहाज़ के सुरक्षा अधिकारी के पास आए और कहने लगे कि "साधारणतया मैं ऐसा नहीं करता हूँ, लेकिन क्या मैं अपनी सोने की घड़ी और अन्य कीमती सामान जहाज़ की तिजोरी में रखवा सकता हूँ क्योंकि मुझे अपने साथ वाला यात्री देखने में कुछ अटपटा सा लग रहा है और मैं उस पर विश्वास नहीं कर पा रहा हूँ"। सुरक्षा अधिकारी ने उन से उन की कीमती चीज़ें लेते हुए आश्वासन दिया कि उनका सामान पूरी यात्रा में तिजोरी में सुरक्षित रहेगा, और कहा कि "आप निश्चिंत रहिए, आपके साथ वाला यात्री भी कि कुछ देर पहले अपनी कीमती चीज़ें बिलकुल यही बात कहते हुए मेरे पास तिजोरी में रखवा कर गया है"!

किसी के बारे में गलत धारणा बना लेना या गलत अफवाह पर विश्वास कर लेना, उसके बारे में किसी भली बात को स्वीकार करने की अपेक्षा बहुत सहज होता है। लेकिन जो गलतियाँ हमें दूसरों में देखाई देती हैं वे अकसर हमारे अपने चरित्र का प्रतिबिंब होती हैं। परमेश्वर ने अपने वचन में अपने लोगों को चिताया कि "किसी मनुष्य के विरूद्ध किसी प्रकार के अधर्म वा पाप के विषय में, चाहे उसका पाप कैसा ही क्यो न हो, एक ही जन की साक्षी न सुनना, परन्तु दो वा तीन साक्षीयों के कहने से बात पक्की ठहरे" (व्यवस्थाविवरण १९:१५)। इसी प्रकार किसी अगुवे पर भी यदि कोई दोष लगाए तो "कोई दोष किसी प्राचीन पर लगाया जाए तो बिना दो या तीन गवाहों के उस को न सुन" (१ तिमुथियुस ५:१९)।

किसी के विरुद्ध कोई बात स्वीकार करने से पहले हमें सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उस बात और उस व्यक्ति से संबंधित सभी तथ्य हमारे समक्ष हैं और जल्दबाज़ी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। जो मापदण्ड हम दूसरों को नापने के लिए प्रयोग करेंगे, वही हमारे लिए भी उपयोग किया जाएगा। - डेव एग्नर


शीघ्र ही आलोचना करना यथार्त जानने और मानने से कहीं अधिक सहज होता है।

दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए। - मत्ती ७:१


बाइबल पाठ: मत्ती ७:१-४

Mat 7:1 दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए।
Mat 7:2 क्‍योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा।
Mat 7:3 तू क्‍यों अपने भाई की आंख के तिनके को देखता है, और अपनी आंख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता? और जब तेरी ही आंख मे लट्ठा है, तो तू अपने भाई से क्‍योंकर कह सकता है, कि ला मैं तेरी आंख से तिनका निकाल दूं?
Mat 7:4 हे कपटी, पहले अपनी आंख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आंख का तिनका भली भांति देखकर निकाल सकेगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ६६-६७
  • रोमियों ७

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

सही नज़रिया

कभी कभी हमारे अपने दोष और कमियाँ हमें दूसरों में ऐसे दोष और कमियाँ दिखाते हैं जो वास्तव में होते नहीं हैं। एक औरत हमेशा अपने घर आने जाने वालों से अपनी पड़ौसन की गन्दी खिड़कियों के बारे में बातें करती थी। एक दिन एक मेहमान ने उसे सलाह दी कि क्यों नहीं वह अपनी खिड़कियाँ धो कर देखे। उस औरत ने अपने मेहमान की बात मान ली और ऐसा ही किया, और फिर विसमय से बोली, "मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा, जैसे ही मैंने अपनी खिड़कियाँ धोईं, लगता है साथ ही पड़ौसन ने भी अपनी खिड़कियाँ धो लीं; देखो तो उसकी खिड़कियाँ कैसी चमक रही हैं!

आलोचना की प्रवृति दूसरों द्वारा किए जा रहे भले कार्यों के प्रति हमें अन्धा बना देती है। एक आदमी ने शहर के मुख्य चौक में पानी पीने के लिए स्थान का निर्माण करवाया। उस स्थान को देखकर शहर के कला समीक्षक ने उस निर्माण की वस्तुकला की आलोचना करी। निर्माण करवाने वाले आदमी को इस आलोचना से दुख हुआ, लेकिन उसने उससे केवल एक ही प्रश्न पूछा, "क्या जिस उद्देश्य के लिए यह बनाया गया है, वह पूरा हुआ है कि नहीं?" अब उत्तर सुनकर उसके प्रसन्न होने की बारी थी क्योंकि वह स्थान शहर के लोगों को बहुत लाभ पहुँचा रहा था और उनकी प्यास बुझा रहा था। कला समीक्षक ने निर्मित स्थान की कला को तो परखा किन्तु उपयोगिता की ओर ध्यान नहीं दिया, जबकि महत्व उपयोगिता का था, कला का नहीं।

प्रभु यीशु ने अपने चेलों को चिताया, "दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए" (मत्ती ७:१)। प्रभु भोज मे सम्मिलित होने से पहले के लिए भी परमेश्वर की चेतावनी है कि "इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए" (१ कुरिन्थियों ११:२८)। प्रभु के विश्वासियों से प्रभु का आत्मा कहता है, "अपने प्राण को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं? अपने आप को जांचो, क्‍या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो" (२ कुरिन्थियों १३:५)।

दूसरों की गलतियाँ ढूंढना बहुत आसान है, परन्तु अपनी गलतियाँ पहिचानने के लिए अपने अन्दर झाँकना होता है और संसार के मापदण्ड को नहीं परमेश्वर के मापदण्ड - परमेश्वर के वचन को उपयोग करना पड़ता है। परमेश्वर का वचन ही हमें वह सही नज़रिया प्रदान कर सकता है जिससे हम दूसरों के आलोचक बनने की बजाए स्व्यं अपने आप को जांचने वाले और अपनी गलतियों को पहचान कर उन्हें सुधारने वाले बन सकते हैं, जो परमेश्वर हम से चाहता है।


जब कभी आलोचना करने का मन हो तो ध्यान रखिए कि परमेश्वर सुन रहा है।

व्यवस्था देने वाला और हाकिम तो एक ही है, जिसे बचाने और नाश करने की सामर्थ है? तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है? - याकूब ४:१२


बाइबल पाठ: लूका ६:३७-४२

Luk 6:37 दोष मत लगाओ, तो तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगा: दोषी न ठहराओ, तो तुम भी दोषी नहीं ठहराए जाओगे: क्षमा करो, तो तुम्हारी भी क्षमा की जाएगी।
Luk 6:38 दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा: लोग पूरा नाप दबा दबाकर और हिला हिलाकर और उभरता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे, क्‍योंकि जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा।
Luk 6:39 फिर उस ने उन से एक दृष्‍टान्‍त कहा; क्‍या अन्‍धा, अन्‍धे को मार्ग बता सकता है? क्‍या दोनो गड़हे में नहीं गिरेंगे?
Luk 6:40 चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं, परन्‍तु जो कोई सिद्ध होगा, वह अपने गुरू के समान होगा।
Luk 6:41 तू अपने भाई की आंख के तिनके को क्‍यों देखता है, और अपनी ही आंख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?
Luk 6:42 और जब तू अपनी ही आंख का लट्ठा नहीं देखता, तो अपने भाई से क्‍योंकर कह सकता है, हे भाई, ठहर जा तेरी आंख से तिनके को निकाल दूं? हे कपटी, पहिले अपनी आंख से लट्ठा निकाल, तब जो तिनका तेरे भाई की आंख में है, भली भांति देखकर निकाल सकेगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ६०-६२
  • रोमियों ५