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Saturday, January 17, 2015

संकट


   मुझे खुशी थी कि वर्ष के अन्तिम दिन भी समाप्त होने लगे हैं, क्योंकि इस वर्ष में मैंने बहुत दुख, बिमारी और उदासी को देखा था। इसलिए मैं नव-वर्ष का स्वागत पूरे ज़ोर-शोर के साथ करने को तैयार थी। लेकिन नए वर्ष के पहले महीने के साथ ही एक के बाद एक उदासी बढ़ाने वाले समचारों ने भी आना आरंभ कर दिया। मेरे कई मित्रों के माता-पिता में से कोई जाता रहा; मेरे पिता के भाई निद्रा में ही जाते रहे; कुछ मित्रों को पता चला कि उन्हें कैंसर है; एक सहकर्मी का भाई, तथा एक मित्र का पुत्र, अनापक्षित दुर्घटनाओं में जाते रहे। बीते वर्ष के साथ दुख भरे समयों का अन्त तो नहीं हुआ, वरन नया वर्ष और भी दुखों की बाढ़ ले आया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 16:33 में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "संसार में तुम्हें क्लेष होता है", अर्थात क्लेषों का आना अवश्यंभावी हैं। हम मसीही विश्वासी जो परमेश्वर की सनतान हैं, हम भी क्लेषों से बचे हुए नहीं हैं; परमेश्वर ने हमारे लिए भी आरामदेह जीवन, समृद्धि एवं संपन्नता और अच्छे स्वास्थ्य की प्रतिज्ञा नहीं करी है। लेकिन जो प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हम से करी है वह यह है कि हमारे प्रत्येक संकट और क्लेष में वह हमारे साथ होगा। यशायाह 43:2 में परमेश्वर ने कहा कि "जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी"; अर्थात प्रत्येक खतरनाक परिस्थिति में वह हमारी रक्षा करेगा, हमारे साथ बना रहेगा। जिन संकटों और क्लेषों से होकर हम निकलते हैं, उनमें पूरे होने वाले परमेश्वर के उद्देश्यों को चाहे हम ठीक से समझने ना पाएं, लेकिन परमेश्वर सदा हमारे साथ है, और क्योंकि हम उसके प्रेम तथा हृदय को जानते हैं इसलिए उस पर भरोसा रख सकते हैं।

   क्योंकि हमारा परमेश्वर अत्यन्त प्रेमी परमेश्वर है, और "...न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:38-39) इसलिए जब संकट और क्लेष आएं तो वह भी उनमें हमारे साथ रहेगा, और उनमें होकर भी हमारे लिए भला ही उत्पन्न करेगा (रोमियों 8:28)। - सिंडी हैस 
कैस्पर


विश्वास का अर्थ है चाहे हमें कुछ सुनाई या दिखाई ना भी दे, तो भी भरोसा बनाए रखना कि परमेश्वर हमारे साथ ही है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ:  यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23