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मंगलवार, 19 सितंबर 2017

क्लेष


   उस विशाल पर्दे पर निकट से लिया गया चित्र बड़ा तथा स्पष्ट था, इसलिए हम उस मनुष्य के शरीर के गहरे घावों को देख पा रहे थे। एक सैनिक उसे पीट रहा था, जबकि वहाँ खड़ी क्रुध्द भीड़ उस का उपहास कर रही थी; उस मनुष्य का चेहरा खून से लथपथ था। वह दृश्य इतना सजीव प्रतीत हो रहा था कि मैं उस खुले सिनेमा स्थान की शान्ति में बैठा, ऐसे मूँह बना रहा और कसमसा रहा था कि मानो वह यातना मुझे ही दी जा रही थी। परन्तु यह तो केवल एक फिल्म थी जिसमें हम मनुष्यों के लिए प्रभु यीशु द्वारा सही गई यातना और उठाए गए क्लेष का एक सजीव चित्रण किया गया था।

   प्रभु यीशु मसीह द्वारा हमारे लिए उठाए गए दुःखों को स्मरण करवाते हुए, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने लिखा, "और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुःख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्ह पर चलो" (1 पतरस 2:21)। जबकि क्लेष विभिन्न प्रकार और तीव्रता में आते हैं, वे अनपेक्षित नहीं हैं। हो सकता है कि हमारे दुःख उतने तीव्र न हों जैसे पौलुस ने सहे थे, जिसने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखने के लिए बेंतों से पीटा जाना, पत्थरवाह किया जाना, और जलयान के टूट जाने के कारण समुद्र में जान का जोखिम उठाना पड़ा। उसे डाकुओं ने घेरा, तथा उसने भूख और प्यास भी सही (2 कुरिन्थियों 11:24-27)। इसी प्रकार संभव है कि हमें वैसे क्लेष भी न उठाने पड़ें जैसे कि उन देशों में लोग उठाते हैं जहाँ मसीही विश्वास स्वीकार्य नहीं है।

   परन्तु हम मसीही विश्वासियों के लिए किसी न किसी रूप में क्लेष आएंगे; चाहे हमें अपना इन्कार करना पड़े, उत्पीड़न सहना पड़े, अपमान सहना पड़े, या ऐसे कार्यों को करने से इन्कार करना पड़े जो प्रभु यीशु को आदर नहीं देते हैं। जब हम इन और ऐसी अनेकों परिस्थितियों में धैर्य दिखाते हैं, अपना बदला नहीं लेते हैं, दूसरों को क्षमा कर देते हैं, अपने भरसक औरों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने का प्रयास करते हैं, तब हम प्रभु यीशु का अनुसरण कर रहे होते हैं।

   हमें जब भी क्लेषों का सामना करना पड़े, तो कोई भी प्रतिक्रीया देने से पूर्व हम थोड़ा थम कर विचार कर लें कि प्रभु यीशु ने हमारे लिए क्या कुछ और कैसे सहा। वह अपने सताने वालों के साथ क्या कुछ कर सकता था, परन्तु उसने उनके लिए क्या कुछ कर के दे दिया। हमारे क्लेष हमें हमारे प्रभु की समानता में ढालने का माध्यम हैं। - लॉरेंस दरमानी


दुःख की पाठशाला में हम वो पाठ सीखते हैं 
जिन्हें हम अन्य किसी पाठशाला में कभी नहीं सीख सकते हैं।

बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:17-19

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-30
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल के समान कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-प्यास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3
  • 2 कुरिन्थियों 11:16-33


रविवार, 19 अप्रैल 2015

क्लेष


   आमतौर से चर्च आराधना का अन्त आशीष वचन दिए जाने के साथ होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए अनेक आशीष वचनों में से एक और अकसर प्रयुक्त होने वाला वचन है प्रेरित पतरस द्वारा लिखी गई पहली पत्री के अन्त में लिखा वचन : "अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त करेगा" (1 पतरस 5:10)। लेकिन यह वचन दिए जाते समय कई बार इसका एक वाक्यांश, ’तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद’ नहीं बोला जाता; ऐसा क्यों? संभवतः इसलिए कि क्लेष या दुख की बात करना अकसर लोगों को अच्छा नहीं लगता।

   लेकिन यदि दुख और क्लेष हम मसीही विश्वासियों पर आएं तो यह हमारे लिए कोई आश्चर्यचकित कर देने वाली बात नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह तो हमारे विश्वास के प्रति संसार की स्वाभाविक प्रतिक्रीया है। प्रेरित पौलुस ने, जो भली-भाँति जानता था कि दुख और क्लेष उठाना क्या होता है, अपनी एक पत्री में लिखा : "पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे" (2 तिमुथियुस 3:12)।

   जैसा आज के बाइबल पाठ में विदित है, प्रेरित पतरस ने भी लिखा है कि हम जब परमेश्वर को समर्पित और उसकी आज्ञाकारिता का, और शैतान के विरोध में चलने वाला जीवन व्यतीत करेंगे तो हमें संसार के लोगों से निन्दा सहने, गलत समझे जाने और उन लोगों द्वारा हमें उनके लाभ के लिए प्रयोग किए जाने के लिए तैयार रहना चाहिए (1 पतरस 5:6, 9)। लेकिन साथ ही प्रेरित पतरस हमें यह भी बताता है कि इस क्लेष उठाने के पीछे एक उद्देश्य भी है, कि हम इस सब को सहने के द्वारा ’सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त’ किए जाएं (1 पतरस 5:10)।

   हमारे मसीही विश्वास में बढ़ने के लिए परमेश्वर द्वारा निर्धारित मार्ग अकसर हमें कठिनाईयों में से ले जाता है, लेकिन ये कठिनाईयाँ ही हमें हमारी हमारे विश्वास की वास्तविक स्थिति से अवगत करवाती हैं और हमें आने वाले समयों में जीवन के तूफानों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। हर परिस्थिति में परमेश्वर पर अपने भरोसे को बनाए रखिए और उससे प्रार्थना करते रहिए कि वह आपको हर परिस्थिति में निर्भीक होकर उसके प्रति विश्वासयोग्य और उसे महिमा देने वाला जीवन व्यतीत करने वाला बनाए। - सी. पी. हिया


जब परमेश्वर को हमें मज़बूत करना होता है, वह कठिनाईयों की पाठशाला से हमें निकालता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:1-11
1 Peter 5:1 तुम में जो प्राचीन हैं, मैं उन की नाईं प्राचीन और मसीह के दुखों का गवाह और प्रगट होने वाली महिमा में सहभागी हो कर उन्हें यह समझाता हूं। 
1 Peter 5:2 कि परमेश्वर के उस झुंड की, जो तुम्हारे बीच में हैं रखवाली करो; और यह दबाव से नहीं, परन्तु परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आनन्द से, और नीच-कमाई के लिये नहीं, पर मन लगा कर। 
1 Peter 5:3 और जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं, उन पर अधिकार न जताओ, वरन झुंड के लिये आदर्श बनो। 
1 Peter 5:4 और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने का नहीं। 
1 Peter 5:5 हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1 Peter 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1 Peter 5:7 और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। 
1 Peter 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए। 
1 Peter 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका साम्हना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं। 
1 Peter 5:10 अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त करेगा। 
1 Peter 5:11 उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 6-8
  • लूका 15:1-10



शनिवार, 17 जनवरी 2015

संकट


   मुझे खुशी थी कि वर्ष के अन्तिम दिन भी समाप्त होने लगे हैं, क्योंकि इस वर्ष में मैंने बहुत दुख, बिमारी और उदासी को देखा था। इसलिए मैं नव-वर्ष का स्वागत पूरे ज़ोर-शोर के साथ करने को तैयार थी। लेकिन नए वर्ष के पहले महीने के साथ ही एक के बाद एक उदासी बढ़ाने वाले समचारों ने भी आना आरंभ कर दिया। मेरे कई मित्रों के माता-पिता में से कोई जाता रहा; मेरे पिता के भाई निद्रा में ही जाते रहे; कुछ मित्रों को पता चला कि उन्हें कैंसर है; एक सहकर्मी का भाई, तथा एक मित्र का पुत्र, अनापक्षित दुर्घटनाओं में जाते रहे। बीते वर्ष के साथ दुख भरे समयों का अन्त तो नहीं हुआ, वरन नया वर्ष और भी दुखों की बाढ़ ले आया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 16:33 में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "संसार में तुम्हें क्लेष होता है", अर्थात क्लेषों का आना अवश्यंभावी हैं। हम मसीही विश्वासी जो परमेश्वर की सनतान हैं, हम भी क्लेषों से बचे हुए नहीं हैं; परमेश्वर ने हमारे लिए भी आरामदेह जीवन, समृद्धि एवं संपन्नता और अच्छे स्वास्थ्य की प्रतिज्ञा नहीं करी है। लेकिन जो प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हम से करी है वह यह है कि हमारे प्रत्येक संकट और क्लेष में वह हमारे साथ होगा। यशायाह 43:2 में परमेश्वर ने कहा कि "जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी"; अर्थात प्रत्येक खतरनाक परिस्थिति में वह हमारी रक्षा करेगा, हमारे साथ बना रहेगा। जिन संकटों और क्लेषों से होकर हम निकलते हैं, उनमें पूरे होने वाले परमेश्वर के उद्देश्यों को चाहे हम ठीक से समझने ना पाएं, लेकिन परमेश्वर सदा हमारे साथ है, और क्योंकि हम उसके प्रेम तथा हृदय को जानते हैं इसलिए उस पर भरोसा रख सकते हैं।

   क्योंकि हमारा परमेश्वर अत्यन्त प्रेमी परमेश्वर है, और "...न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:38-39) इसलिए जब संकट और क्लेष आएं तो वह भी उनमें हमारे साथ रहेगा, और उनमें होकर भी हमारे लिए भला ही उत्पन्न करेगा (रोमियों 8:28)। - सिंडी हैस 
कैस्पर


विश्वास का अर्थ है चाहे हमें कुछ सुनाई या दिखाई ना भी दे, तो भी भरोसा बनाए रखना कि परमेश्वर हमारे साथ ही है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ:  यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

सांत्वना


   अमेरिका के इतिहास में एक बहुत त्रासदीपूर्ण और दुखदायी घटना है 19वीं सदी के आरंभ में अमेरिका के मूल रेड इन्डियन निवासियों का ज़बर्दस्ती किया गया विस्थापन। उन मूल निवासियों ने बढ़ती हुई श्वेत आबादी के लोगों के साथ संधियाँ करी थीं, उनके साथ दुश्मनों के विरुद्ध युद्ध में सहयोग किया था, लेकिन बाद में उन्हीं लोगों को अपनी भूमि छोड़कर अन्य स्थानों पर जाकर बसने के लिए मजबूर कर दिया गया। सन 1838 की सर्दियों में चिरोकी कबीले के हज़ारों लोगों को पश्चिम की ओर 1000 मील की एक कठिन यात्रा करने के लिए मजबूर कर दिया गया। इस अन्याय के कारण उनमें से हज़ारों मर गए क्योंकि सर्दी के समय में इस लंबी और कठिन यात्रा को कर पाने के लायक कपड़े, जूतियाँ और आवश्यक वस्तुएं उनके पास नहीं थे; इसलिए उनकी इस यात्रा को "आँसुओं की यात्रा" कहा जाता है।

   आज भी संसार अन्याय, पीड़ा और मनोव्यथा से भरा हुआ है। आज भी बहुतेरों को अनेक कारणों से अपने जीवन में "आँसुओं की यात्रा" करनी पड़ती है; उन्हें लगता है कि उनकी पीड़ा को जानने और समझने वाला कोई नहीं है, कोई उनकी परवाह नहीं करता है। लेकिन प्रभु परमेश्वर हमारी पीड़ाओं को देखता है और हमारे दुखी हृदयों को सांत्वना भी देता है (2 कुरिन्थियों 1:3-5)। साथ ही वह उस आते समय कि भी आशा देता है जिसमें पाप और अन्याय का कोई दाग़ नहीं रहेगा; उस समय और उस स्थान पर "वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)।

   परमेश्वर ना केवल भविष्य में हमारे आँसुओं को पोंछने और हमें सांत्वना देने की आशा देता है, वायदा करता है, वरन जब हम विश्वास और समर्पण के साथ उसके पास अपने दुखों को लेकर आते हैं तो वह आज भी हमारे सभी आँसुओं को पोंछता है, हर परिस्थिति में हमें सांत्वना देता है। - बिल क्राउडर


जब परमेश्वर हमारे जीवन में परीक्षाओं को आने की अनुमति देता है तो साथ ही अपनी शान्ति तथा सांत्वना भी हमें उपलब्ध करवा देता है।

वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:4

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • तीतुस 1-3



मंगलवार, 11 नवंबर 2014

मृत्यु तक विश्वासयोग्य


   इंगलैंड के लिवरपूल शहर में स्थित वॉल्कर आर्ट गैलरी में एक चित्र है जिसका शीर्षक है "Faithful unto Death" अर्थात मृत्यु तक विश्वासयोग्य। यह चित्र प्राचीन शहर पौम्पी का है जो सन 79 के माउंट वेसुवियस ज्वालामुखी फटने से कुछ ही पलों में लावा और राख में दफन हो गया और वहाँ के जीवन के वे क्षण राख में दबे हुए आज भी अपनी कहानी बताते हैं। उस चित्र में एक रोमी सिपाही को दिखाया गया है जो अपने सैनिक वस्त्र धारण किए हुए सन्तरी के कार्य पर डटा हुआ है जबकि उसके आस-पास सब कुछ लावा और राख में दबता जा रहा है। यह चित्र पौम्पी में राख में दबे हुए खड़े एक सैनिक के अवशेषों को देखकर बनाया गया है। यह चित्र गवाह है उन विश्वासयोग्य पहरेदारों का जो अपने चारों ओर हो रहे भयनाक विनाश में भी अपने स्थानों पर स्थिर डटे रहे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य में भी प्रभु यीशु पहली शताब्दी की स्मुरना की मसीही विश्वासियों की मण्डली को संबोधित करते हुए उन्हें आश्वस्त करता है कि वह उनके मसीही विश्वास के कारण उन पर आ रहे सताव को जानता है, उसने उनकी विश्वासयोग्यता को देखा है, और मसीह यीशु उन्हें उन विकट परिस्थितियों में भी विश्वासयोग्य बने रहने को प्रेरित करता है: "मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूं; (परन्तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उन की निन्‍दा को भी जानता हूं। जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उन से मत डर: क्योंकि देखो, शैतान तुम में से कितनों को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा" (प्रकाशितवाक्य 2:9-10)।

   हमारा प्रभु परमेश्वर हमारी परिस्थितियों और हमारे अनुभवों को भली-भांति जानता है, वह हमारे विषय में कुछ ऐसा भी जानता है जिसे हम नहीं जानते - हमारा भविष्य। चाहे इस संसार में हमें क्लेषों से होकर निकलना पड़े और सांसारिक वस्तुओं या जीवन का नुकसान भी उठाना पड़े, लेकिन हमारी अनन्तकाल की आशीषें और अनन्तकाल का जीवन सदा हमारे प्रभु परमेश्वर के साथ सुरक्षित है, और अपने प्रभु की सामर्थ से हम जब तक इस संसार में हैं, उसके द्वारा निर्धारित स्थानों पर उसके लिए मृत्यु तक विश्वासयोग्य बने रह सकते है (फिलिप्पियों 4:12-13) तथा मृत्योप्रांत उसके साथ अनन्त महिमा में प्रवेश करने को तैयार हो सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारे विश्वास की परीक्षा, परमेश्वर की विश्वास्योग्यता प्रमाणित करने का अवसर होती है।

मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। फिलिप्पियों 4:12-13

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:8-11
Revelation 2:8 और स्मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो प्रथम और अन्‍तिम है; जो मर गया था और अब जीवित हो गया है, वह यह कहता है कि। 
Revelation 2:9 मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूं; (परन्तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उन की निन्‍दा को भी जानता हूं। 
Revelation 2:10 जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उन से मत डर: क्योंकि देखो, शैतान तुम में से कितनों को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूंगा। 
Revelation 2:11 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए, उसको दूसरी मृत्यु से हानि न पहुंचेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 10-12


मंगलवार, 19 अगस्त 2014

हेमन


   मुझे हेमन पर अचरज होता है। हेमन एक कवि था जिसने परमेश्वर के वचन बाइबल का भजन 88 लिखा था। उसके इस भजन में हम पाते हैं कि उसके लिए जीवन का अर्थ था क्लेष, इतना क्लेष कि वह दुख से तंग आ गया था! उस का विलाप था, "क्योंकि मेरा प्राण क्लेश में भरा हुआ है, और मेरा प्राण अधोलोक के निकट पहुंचा है" (भजन 88:3)।

   जब हेमन ने पीछे मुड़कर देखा तो उसे अपना खराब स्वास्थ्य और दुर्भाग्य स्मरण हो आया। जब अपने चारों ओर देखा तो अपने को मुसीबत में पड़ा और तिरिस्कृत पाया। और जब ऊपर की ओर देखा तो कोई सांत्वना नहीं मिली। उसने शिकायत करी, मैं अकेला हूँ (पद 5), अंधकार में हूँ (पद 6), सताया हुआ हूँ (पद 7), त्यागा हुआ हूँ (पद 14) अधमुआ हूँ (पद 15)। उसे आशा की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही थी और ना ही अपने दुख का कोई समाधान मिल रहा था।

   हेमन की इस ईमानदारी से मेरे मन को सांत्वना मिलती है। मुझे समझ नहीं आता कि वे कैसे मसीही विश्वासी हैं जो कभी संघर्ष नहीं करने का दावा करते हैं। मैं यह मान सकता हूँ कि एक संतुलन होना आवश्यक है; ऐसे जन के पास कोई नहीं रहना चाहेगा जो हर समय अपने दुखों के बारे में ही बताता रहे और रोता रहे, लेकिन मुझे यह जानकर सांत्वना मिलती है कि संघर्ष करने वाला मैं ही अकेला नहीं हूँ, मेरे समान ही अन्य लोगों को भी संघर्ष करना पड़ता है, और उनके अनुभव मेरे लिए मार्गदर्शन कर सकते हैं।

   लेकिन हेमन में इस स्पष्टवादिता से बढ़ कर भी कुछ और है जो और भी अधिक अनुसरण के योग्य है - परमेश्वर में उसका अटल, अविचिलित विश्वास। इतनी समस्याओं में होने के बावजूद हेमन परमेश्वर से लिपटा ही रहा, दिन रात उसी की दोहाई देता रहा (पद 1, 9, 13)। उसने प्रार्थना करना नहीं छोड़ा; उसने हार नहीं मानी। संभवतः हेमन ने उस समय एहसास नहीं किया, लेकिन उसने परमेश्वर की करुणा, विश्वासयोग्यता और धार्मिकता की गवाही भी दी (पद 11, 12)।

   मुझे हेमन जैसे लोग अच्छे लगते हैं। वे परमेश्वर में मेरे विश्वास को दृढ़ करते हैं और मुझे स्मरण दिलाते हैं कि मैं प्रार्थना करना कभी नहीं छोड़ूँ। - डेविड रोपर


प्रार्थना ही वह भूमि हैं जिसमें आशा सबसे अच्छी पनपती है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 88
Psalms 88:1 हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर यहोवा, मैं दिन को और रात को तेरे आगे चिल्लाता आया हूं। 
Psalms 88:2 मेरी प्रार्थना तुझ तक पहुंचे, मेरे चिल्लाने की ओर कान लगा! 
Psalms 88:3 क्योंकि मेरा प्राण क्लेश में भरा हुआ है, और मेरा प्राण अधोलोक के निकट पहुंचा है। 
Psalms 88:4 मैं कबर में पड़ने वालों में गिना गया हूं; मैं बलहीन पुरूष के समान हो गया हूं। 
Psalms 88:5 मैं मुर्दों के बीच छोड़ा गया हूं, और जो घात हो कर कबर में पड़े हैं, जिन को तू फिर स्मरण नहीं करता और वे तेरी सहायता रहित हैं, उनके समान मैं हो गया हूं। 
Psalms 88:6 तू ने मुझे गड़हे के तल ही में, अन्धेरे और गहिरे स्थान में रखा है। 
Psalms 88:7 तेरी जलजलाहट मुझी पर बनी हुई है, और तू ने अपने सब तरंगों से मुझे दु:ख दिया है; 
Psalms 88:8 तू ने मेरे पहिचान वालों को मुझ से दूर किया है; और मुझ को उनकी दृष्टि में घिनौना किया है। मैं बन्दी हूं और निकल नहीं सकता; 
Psalms 88:9 दु:ख भोगते भोगते मेरी आंखे धुन्धला गई। हे यहोवा मैं लगातार तुझे पुकारता और अपने हाथ तेरी ओर फैलाता आया हूं। 
Psalms 88:10 क्या तू मुर्दों के लिये अदभुत काम करेगा? क्या मरे लोग उठ कर तेरा धन्यवाद करेंगे? 
Psalms 88:11 क्या कबर में तेरी करूणा का, और विनाश की दशा में तेरी सच्चाई का वर्णन किया जाएगा? 
Psalms 88:12 क्या तेरे अदभुत काम अन्धकार में, वा तेरा धर्म विश्वासघात की दशा में जाना जाएगा? 
Psalms 88:13 परन्तु हे यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी है; और भोर को मेरी प्रार्थना तुझ तक पहुंचेगी। 
Psalms 88:14 हे यहोवा, तू मुझ को क्यों छोड़ता है? तू अपना मुख मुझ से क्यों छिपाता रहता है? 
Psalms 88:15 मैं बचपन ही से दु:खी वरन अधमुआ हूं, तुझ से भय खाते मैं अति व्याकुल हो गया हूं। 
Psalms 88:16 तेरा क्रोध मुझ पर पड़ा है; उस भय से मैं मिट गया हूं। 
Psalms 88:17 वह दिन भर जल की नाईं मुझे घेरे रहता है; वह मेरे चारों ओर दिखाई देता है। 
Psalms 88:18 तू ने मित्र और भाईबन्धु दोनों को मुझ से दूर किया है; और मेरे जान-पहिचान वालों को अन्धकार में डाल दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 3-5


सोमवार, 9 जून 2014

सरल जीवन


   क्या अभिभावक अपने बच्चों को खुश रखने के लिए आवश्यकता से अधिक प्रयास कर रहे हैं? क्या उनके इस प्रयास का प्रतिकूल प्रभाव हो रहा है? ये वे प्रश्न हैं जिनके साथ लोरि गौटलिब के एक साक्षातकार का परिचय एवं आरंभ दिया गया। लोरि गौटलिब नाखुश जवान व्यक्तियों पर लिखे गए एक लेख की लेखिका हैं और उपरोक्त दोनों प्रश्नों के लिए उनके उत्तर हैं "हाँ"। उनका कहना है कि वे अभिभावक जो अपने बच्चों को जीवन में पराजय या निराशा का सामना करने से बचाए रखते हैं, वे अपने बच्चों को संसार का एक मिथ्या दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं तथा उन्हें व्यसक होने पर जीवन की कटु सच्चाईयों का सामना करने के लिए तैयार नहीं करने पाते हैं। जब उनके बच्चे बड़े होकर संसार की वास्तविकताओं का सामना करते हैं तो वे उन्हें समझने और सही प्रतिक्रीया देने में असमर्थ होते हैं और अपने आप को अन्दर से खाली और चिंताग्रस्त महसूस करते हैं।

   कुछ मसीही विश्वासी भी यह आशा रखते हैं कि परमेश्वर भी उनके लिए एक ऐसा ही पिता रहेगा जो उन्हें किसी भी निराशा या दुख में नहीं जाने देगा। लेकिन परमेश्वर ने ऐसा कोई आश्वासन कभी अपने लोगों को नहीं दिया है और ना ही वह ऐसा पिता है जो अपने बच्चों को यथार्त से अनभिज्ञ रखता है। परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि परमेश्वर अपने लोगों को अपने द्वारा निर्धारित सीमाओं में और अपनी निगरानी में दुखों और प्रतिकूल परिस्थितियों से होकर निकलने देता है (यशायाह 43:2; 1 थिस्सलुनीकियों 3:3)।

   यदि हम इस धारणा के साथ आरंभ करेंगे कि एक सरल जीवन हमें वास्तविक खुशी देगा, तो अपनी इस गलत धारणा को जीने और निभाने के प्रयास में हम थक जाएंगे। लेकिन जब हम इस सच्चाई का सामना करते हुए कि जीवन कठिन है जीवन जीएंगे तो हम अपने जीवन भली रीति और परमेश्वर की इच्छानुसार व्यतीत करने पाएंगे। सही दृष्टिकोण के साथ जीवन निर्वाह करना हमें कठिन समयों के लिए तैयार करता है।

   परमेश्वर का उद्देश्य हमें केवल खुश रखना ही नहीं वरन साथ ही पवित्र बनाना भी है (1 थिस्स्य्लुनीकियों 3:13)। जब हम पवित्र होंगे तो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलेंगे भी जिससे परमेश्वर की आशीषों और उसकी शांति को प्राप्त करके हम सन्तुष्टि और खुशी का जीवन भी बिताने पाएंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सन्तुष्ट वह है जिसने मीठे के साथ कड़ुवा भी स्वीकार करना सीख लिया है।

यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। - फिलिप्पियों 4:11-12

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 3:1-13
1 Thessalonians 3:1 इसलिये जब हम से और भी न रहा गया, तो हम ने यह ठहराया कि एथेन्‍स में अकेले रह जाएं। 
1 Thessalonians 3:2 और हम ने तीमुथियुस को जो मसीह के सुसमाचार में हमारा भाई, और परमेश्वर का सेवक है, इसलिये भेजा, कि वह तुम्हें स्थिर करे; और तुम्हारे विश्वास के विषय में तुम्हें समझाए। 
1 Thessalonians 3:3 कि कोई इन क्‍लेशों के कारण डगमगा न जाए; क्योंकि तुम आप जानते हो, कि हम इन ही के लिये ठहराए गए हैं। 
1 Thessalonians 3:4 क्योंकि पहिले भी, जब हम तुम्हारे यहां थे, तो तुम से कहा करते थे, कि हमें क्‍लेश उठाने पड़ेंगे, और ऐसा ही हुआ है, और तुम जानते भी हो। 
1 Thessalonians 3:5 इस कारण जब मुझ से और न रहा गया, तो तुम्हारे विश्वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करने वाले ने तुम्हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्यर्थ हो गया हो। 
1 Thessalonians 3:6 पर अभी तीमुथियुस ने जो तुम्हारे पास से हमारे यहां आकर तुम्हारे विश्वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया और इस बात को भी सुनाया, कि तुम सदा प्रेम के साथ हमें स्मरण करते हो, और हमारे देखने की लालसा रखते हो, जैसा हम भी तुम्हें देखने की। 
1 Thessalonians 3:7 इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्‍लेश में तुम्हारे विश्वास से तुम्हारे विषय में शान्‍ति पाई। 
1 Thessalonians 3:8 क्योंकि अब यदि तुम प्रभु में स्थिर रहो तो हम जीवित हैं। 
1 Thessalonians 3:9 और जैसा आनन्द हमें तुम्हारे कारण अपने परमेश्वर के साम्हने है, उसके बदले तुम्हारे विषय में हम किस रीति से परमेश्वर का धन्यवाद करें? 
1 Thessalonians 3:10 हम रात दिन बहुत ही प्रार्थना करते रहते हैं, कि तुम्हारा मुंह देखें, और तुम्हारे विश्वास की घटी पूरी करें।
1 Thessalonians 3:11 अब हमारा परमेश्वर और पिता आप ही और हमारा प्रभु यीशु, तुम्हारे यहां आने के लिये हमारी अगुवाई करे। 
1 Thessalonians 3:12 और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए। 
1 Thessalonians 3:13 ताकि वह तुम्हारे मनों को ऐसा स्थिर करे, कि जब हमारा प्रभु यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ आए, तो वे हमारे परमेश्वर और पिता के साम्हने पवित्रता में निर्दोष ठहरें।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 46-48


रविवार, 29 दिसंबर 2013

आनन्दित


   संसार में हमारा जीवन कठिनाईयों से भरा हो सकता है। किसी ना किसी समय हम में से अधिकांश लोग इस विचार से जूझे होंगे कि मैं जब कठिनाईयों में पड़ा होता हूँ तब परमेश्वर कहाँ होता है? अनेक बार हमने यह भी विचार किया होगा कि अब तो अन्याय ही जीत रहा है और परमेश्वर खामोश बैठा है। हम अपनी कठिनाईयों के प्रति कैसी प्रतिक्रीया देते हैं यह हमारा व्यक्तिगत निर्णय है। इस संदर्भ में परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के नबी हबक्कूक का दृष्टिकोण अनुसरण के योग्य है - उसने निर्णय किया कि वह परमेश्वर में आनन्दित रहेगा।

   हबक्कूक ने यहूदा को तीव्र गति से नैतिक और आत्मिक पतन में गिरते देखा था और वह इससे बहुत चिंतित हुआ। लेकिन इससे भी अधिक चिंता उसे तब हुई जब यहूदा के इस व्यवहार के लिए उसने परमेश्वर की प्रतिक्रीया को जाना - परमेश्वर एक और भी दुष्ट राज्य बाबुल द्वारा यहूदा को दण्डित करने जा रहा था। हबक्कूक यह सब समझ नहीं सका, लेकिन फिर भी उसने परमेश्वर की बुद्धिमता, न्याय और प्रभुतव पर भरोसा रखने का निर्णय लिया और अपने इस निर्णय के अन्तर्गत वह कहने पाया: "तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा" (हबक्कूक 3:18)। यद्यपि हबक्कूक को यह स्पष्ट नहीं था कि यहूदा इस दण्ड में जाने पर सुरक्षित बच कर कैसे आ सकेगा, लेकिन हबक्कूक ने सीख लिया था कि अन्याय, क्लेष और हानि में भी वह परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखेगा और परमेश्वर पर विश्वास द्वारा ही अपना जीवन व्यतीत करेगा। ऐसे विश्वास के निर्णय का प्रतिफल था उसका हर परिस्थिति में परमेश्वर में आनन्दित रहना, चाहे वह परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों ना हो।

   हम भी अपनी परीक्षाओं में आनन्दित रह सकते हैं, यदि हबक्कूक के समान ही हम परमेश्वर पर दृढ़ विश्वास बनाए रखें और उसके सार्वभौमिक प्रभुत्व की ऊँचाईयों पर उसके साथ बने रहें। - मार्विन विलियम्स


परेशानियों में भी परमेश्वर की आराधना करते रहने से बोझ बरकतों में बदल जाते हैं।

परन्तु मैं यहोवा के कारण अपने मन में मगन होऊंगा, मैं उसके किए हुए उद्धार से हर्षित होऊंगा। - भजन 35:9

बाइबल पाठ: हबक्कूक 3:8-19
Habakkuk 3:8 हे यहोवा, क्या तू नदियों पर रिसियाया था? क्या तेरा क्रोध नदियों पर भड़का था, अथवा क्या तेरी जलजलाहट समुद्र पर भड़की थी, जब तू अपने घोड़ों पर और उद्धार करने वाले विजयी रथों पर चढ़कर आ रहा था? 
Habakkuk 3:9 तेरा धनुष खोल में से निकल गया, तेरे दण्ड का वचन शाप के साथ हुआ था। तू ने धरती को नदियों से चीर डाला। 
Habakkuk 3:10 पहाड़ तुझे देख कर कांप उठे; आंधी और जलप्रलय निकल गए; गहिरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात लहरों को ऊपर उठाया। 
Habakkuk 3:11 तेरे उड़ने वाले तीरों के चलने की ज्योति से, और तेरे चमकीले भाले की फलक के प्रकाश से सूर्य और चन्द्रमा अपने अपने स्थान पर ठहर गए। 
Habakkuk 3:12 तू क्रोध में आकर पृथ्वी पर चल निकला, तू ने जाति जाति को क्रोध से नाश किया। 
Habakkuk 3:13 तू अपनी प्रजा के उद्धार के लिये निकला, हां, अपने अभिषिक्त के संग हो कर उद्धार के लिये निकला। तू ने दुष्ट के घर के सिर को घायल कर के उसे गले से नेव तक नंगा कर दिया। 
Habakkuk 3:14 तू ने उसके योद्धाओं के सिरों को उसी की बर्छी से छेदा है, वे मुझ को तितर-बितर करने के लिये बवंडर की आंधी की नाईं आए, और दीन लोगों को घात लगा कर मार डालने की आशा से आनन्दित थे। 
Habakkuk 3:15 तू अपने घोड़ों पर सवार हो कर समुद्र से हां, जलप्रलय से पार हो गया।
Habakkuk 3:16 यह सब सुनते ही मेरा कलेजा कांप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे; मेरी हड्डियां सड़ने लगीं, और मैं खड़े खड़े कांपने लगा। मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूंगा जब दल बांध कर प्रजा चढ़ाई करे।
Habakkuk 3:17 क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, 
Habakkuk 3:18 तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा।
Habakkuk 3:19 यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 9-12 
  • प्रकाशितवाक्य 20


गुरुवार, 14 नवंबर 2013

विलाप और सांत्वना


   यरुशलेम आग की लपटों से घिरा हुआ था और परमेश्वर का भविष्यद्वकता यिर्मयाह उसकी दुर्दशा पर विलाप कर रहा था। लंबे समय से तथा बारंबार यिर्मयाह यरुशलेम के लोगों और हाकिमों को आते विनाश से बचने के लिए पश्चाताप करने का परमेश्वर का सन्देश पहुँचाता रहा था, लेकिन उन्होंने उसकी एक ना सुनी, उसका तिरस्कार किया, उसे सताया, उसे झूठा कहा। अब वह विनाश का समय अपनी संपूर्ण वीभत्सता के साथ यरुशलेम पर आ पड़ा था और चारों ओर बरबादी ही बरबादी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह द्वारा लिखित छोटी सी पुस्तक ’विलापगीत’ यिर्मयाह द्वारा यरुशलेम की इस बरबादी पर किए गए शोक और विलाप का वर्णन है।

   यिर्मयाह ने इस पुस्तक को एक विशेष रीति से लिखा है। मूल इब्रानी भाषा की वर्णमाला में, जिसमें यह पुस्तक लिखी गई, 22 अक्षर होते हैं। यिर्मयाह ने इस पुस्तक को कविता के रूप में लिखा, और कविता का हर छंद इब्रानी वर्णनमाला के अक्षर से क्रमबुद्ध रूप में आरंभ होता है। प्रत्येक अक्षर के इस प्रकार क्रमबद्ध रूप में प्रयोग करे जाने से ना केवल पाठकों को इसे स्मरण करना सरल है, वरन यह इस बात का भी सूचक है कि यिर्मयाह का शोक और विलाप अधूरा नहीं वरन आरंभ से अन्त तक संपूर्ण था। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि यिर्मयाह ने ना केवल यरुशलेम और उसके लोगों की दशा बयान करी, वरन साथ ही अपना अनुभव और अपनी व्यथा भी बयान करी, और उससे भी बढ़कर, इस सारे कठोर अनुभव में उसने परमेश्वर से मिलने वाली शांति और सांत्वना को भी लिखा है। यिर्मयाह ने लिखा, "क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;" (विलापगीत 3:31-32)।

   यह हम मसीही विश्वासियों के लिए एक अद्भुत आशा और मार्गदर्श्न की बात है - हमारा प्रभु, जिस पर हमने विश्वास किया है और जिसे अपना जीवन समर्पित किया है वह हमारे कष्ट और क्लेष में हमारे साथ होता है, हमें संभालता है, हमें सांत्वना देता है। क्या आप भी किसी हृदय विदारक घटना या क्लेष से होकर निकल रहे हैं अथवा आप को निकलना पड़ा है? यिर्मयाह के समान ही, अपने मन के शोक और विलाप को पूरा अवसर दीजिए, साथ ही परमेश्वर की उपस्थिति और बीती समय में उसके द्वारा दिखाई गई भलाईयों को भी स्मरण रखिए। इससे आप उसकी शांति तथा सांत्वना को भी अनुभव करने पाएंगे और भविषय के लिए आशावान भी बने रहेंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर आज हमारे हृदयों को हमारे आँसुओं से धुल लेने देता है जिससे आते सुख और आनन्द के लिए वे साफ रहें।

क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:17

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:22-33
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5 
  • इब्रानियों 10:19-39


बुधवार, 13 नवंबर 2013

हम जो हैं


   एक स्थानीय अस्पताल में अपने नियमित चिकित्सा जाँच किए जाने की प्रतीक्षा करते हुए मेरा ध्यान वहाँ दीवार पर लगे क्रूस पर चढ़ाए हुए प्रभु यीशु मसीह के चित्र पर गया। थोड़ी देर बाद, जाँच से पहले एक नर्स ने मेरे फॉर्म भरते और जाँच संबंधी कागज़ तैयार करते हुए मुझसे अनेक प्रश्न पूछे, जिनमें से एक था, "क्या आपकी कोई आत्मिक आवश्यकताएं हैं जिनके बारे में आप हमारे पादरी से चर्चा चाहेंगे?" मैंने कहा कि वर्तमान संसार के संदर्भ में मुझे उनका यह प्रश्न पूछना अच्छा लगा। उस नर्स ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि हम मसीही विश्वास पर आधारित और संचालित अस्पताल हैं और यह करना हमारी सेवकाई का एक भाग है। मैं प्रभावित हुआ कि आज के बहुवादी और धर्मनिर्पेक्ष धारणाओं को मान्यता देने वाले संसार में भी ऐसे लोग हैं जो वह दिखाने में हिचकिचाते नहीं हैं जो वो हैं।

   प्रेरित पतरस ने प्रथम सदी के मसीही विश्वासियों को ढ़ाढ़स दिया, उन्हें जो मसीही विश्वास के कारण उन पर आए सताव के कारण घर-बार छोड़कर भागने और तित्तर-बित्तर हो जाने को बाध्य हो गए थे, कि सच्चाई के कारण क्लेष उठाना भी उनके लिए आशीष का कारण है। अपनी पत्री में पतरस ने उन्हें लिखा: "और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (1 पतरस 3:14-15)।

   जैसे उस अस्पताल की नर्स ने बिना झिझके अपने विश्वास को व्यक्त किया, वैसे ही हम मसीही विश्वासी भी अपने विश्वास को बिना हिचकिचाए बयान कर सकते हैं। यदि इस कारण लोग हमसे अनुचित व्यवहार करें या हमारी आलोचना करें तो हमें नम्रता और आदर के साथ ही उन्हें अपना प्रत्युत्तर देना चाहिए। हम जो हैं उसके लिए हमें कभी भयभीत होने या शर्मिंदा होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारा परमेश्वर सदा हमारे साथ है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीह के कार्य को कष्ट देने के बजाए भला है कि मसीह के कार्य के लिए कष्ट उठाना।

फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है। - 1 पतरस 4:14

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-17
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है? 
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। 
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों। 
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2 
  • इब्रानियों 10:1-18


शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2013

खरा न्याय

   प्रकाशन में मेरा एक पूर्व सहकर्मी लगभग एक वर्ष तक इसी भय में जीता और कार्य करता रहा कि बस अब उसकी नौकरी गई। ऐसा इसलिए क्योंकि उस विभाग में आया एक नया अधिकारी, अनजाने कारणों से मेरे मित्र की व्यक्तिगत फाईल में उसके विरुद्ध नकारात्मक बातें भरता जा रहा था। फिर एक दिन ऐसा आया जब मेरे मित्र को लगा कि बस आज तो मेरी नौकरी गई ही समझो; उस दिन नौकरी तो गई, लेकिन मेरे मित्र की नहीं वरन उस अधिकारी की जो मेरे मित्र के विरुद्ध कार्य कर रहा था।

   एक ऐसी ही घटना हम परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम नामक खण्ड में एस्तेर की पुस्तक में दर्ज पाते हैं। जब इस्त्राएलियों को बन्धुआ बनाकर बेबिलोन ले जाया गया, तो मोर्देकै नामक एक इस्त्राएली ऐसी ही परिस्थिति में आ पड़ा। उस समय के राजा क्षयर्ष का सबसे चहेता अधिकारी हमान राजा की उस पर बनी हुई कृपादृष्टि के कारण घमण्ड में ऐसा फूल गया कि उसने रीति बना दी की प्रत्येक अधिकारी उसके सामने झुक कर दण्डवत करे। लेकिन मोरदकै परमेश्वर को छोड़ किसी अन्य के आगे झुकना और दण्डवत करना स्वीकार नहीं करता था (एस्तेर 3:1-2)। मोरदकै के इस रवैये से हमान क्रोधित हो उठा और उसने मोरदकै सहित सभी इस्त्राएलियों को मार डालने का षड़यंत्र रच डाला। हमान ने राजा क्षयर्ष को मना लिया कि वह एक राजाज्ञा पर हस्ताक्षर करे जिसमें एक विशेष दिन राज्य के सभी लोगों को उनके इलाके में पाए जाने वाले इस्त्राएलियों को घात करने की खुली छूट दी गई (एस्तेर 3:5-6), और उसने यह राजाज्ञा सारे राज्य में सुनवा दी। मोरदकै के लिए हमान ने अपने घर में एक ऊँचा फांसी का स्थान बनवाया जिससे सब उसकी मृत्यु को देख सकें (एस्तेर 5:14)। लेकिन परमेश्वर के लोग इस्त्राएली, उपवास और प्रार्थना में लग गए और परिस्थितियों ने नाटकीय मोड़ लिया; राजा द्वारा मोर्दकै को हमान के हाथों सम्मानित करवाया गया, तथा फिर और भी नाटकीय घटनाक्रम में हमान राजा की नज़रों से एकदम गिर गया और उस पर राजा की ओर से मृत्यु दण्ड की आज्ञा सुना दी गई तथा इस्त्राएलियों को अपना बचाव करने की छूट दे दी गई। राजा की आज्ञा के अन्तर्गत घमण्डी हमान को उसी फांसी के स्थान पर लटका दिया गया जो उसने मोर्दकै के लिए बनवाया था (एस्तेर 7:9-10; 8)।

   यह सच है कि हर किसी को इस नाटकीय रूप में न्याय तो नहीं मिलता, लेकिन यह भी सच है कि परमेश्वर का वचन हमें आश्वस्त करता है कि परमेश्वर एक दिन सबका न्याय अवश्य चुकाएगा (रोमियों 12:19)। हम मसीही विश्वसियों को परमेश्वर से निर्देश है कि उसके खरे न्याय की प्रतीक्षा करते हुए हमें अपना पलटा आप नहीं लेना है वरन इस कार्य को उसके हाथ में ही छोड़ देना है। हमारा कर्तव्य है अपने और जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के जीवन और शिक्षाओं को संसार के सामने अपने जीवन से प्रगट करते रहना; हमारा प्रतिफल परमेश्वर के हाथों में सुरक्षित है। - जूली ऐकैर्मैन लिंक


परमेश्वर का न्याय अवश्यंभावी है, खरा है, पक्षपात रहित है। उसके भय में जीवन बिताएं।

हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:19

बाइबल पाठ: एस्तेर 3:1-11; 7:1-10
Esther 3:1 इन बातों के बाद राजा क्षयर्ष ने अगामी हम्मदाता के पुत्र हामान को उच्च पद दिया, और उसको महत्व देकर उसके लिये उसके साथी हाकिमों के सिंहासनों से ऊंचा सिंहासन ठहराया। 
Esther 3:2 और राजा के सब कर्मचारी जो राजभवन के फाटक में रहा करते थे, वे हामान के साम्हने झुककर दण्डवत किया करते थे क्योंकि राजा ने उसके विषय ऐसी ही आज्ञा दी थी; परन्तु मोर्दकै न तो झुकता था और न उसको दण्डवत करता था। 
Esther 3:3 तब राजा के कर्मचारी जो राजभवन के फाटक में रहा करते थे, उन्होंने मोर्दकै से पूछा, 
Esther 3:4 तू राजा की आज्ञा क्यों उलंघन करता है? जब वे उस से प्रतिदिन ऐसा ही कहते रहे, और उसने उनकी एक न मानी, तब उन्होंने यह देखने की इच्छा से कि मोर्दकै की यह बात चलेगी कि नहीं, हामान को बता दिया; उसने तो उन को बता दिया था कि मैं यहूदी हूँ। 
Esther 3:5 जब हामान ने देखा, कि मोर्दकै नहीं झुकता, और न मुझ को दण्डवत करता है, तब हामान बहुत ही क्रोधित हुआ। 
Esther 3:6 उसने केवल मोर्दकै पर हाथ चलाना अपनी मर्यादा के नीचे जाना। क्योंकि उन्होंने हामान को यह बता दिया था, कि मोर्दकै किस जाति का है, इसलिये हामान ने क्षयर्ष के साम्राज्य में रहने वाले सारे यहूदियों को भी मोर्दकै की जाति जानकर, विनाश कर डालने की युक्ति निकाली। 
Esther 3:7 राजा क्षयर्ष के बारहवें वर्ष के नीसान नाम पहिले महीने में, हामान ने अदार नाम बारहवें महीने तक के एक एक दिन और एक एक महीने के लिये “पूर” अर्थात चिट्ठी अपने साम्हने डलवाई। 
Esther 3:8 और हामान ने राजा क्षयर्ष से कहा, तेरे राज्य के सब प्रान्तों में रहने वाले देश देश के लोगों के मध्य में तितर बितर और छिटकी हुई एक जाति है, जिसके नियम और सब लोगों के नियमों से भिन्न हैं; और वे राजा के कानून पर नहीं चलते, इसलिये उन्हें रहने देना राजा को लाभदायक नहीं है। 
Esther 3:9 यदि राजा को स्वीकार हो तो उन्हें नष्ट करने की आज्ञा लिखी जाए, और मैं राजा के भणडारियों के हाथ में राजभणडार में पहुंचाने के लिये, दस हजार किक्कार चान्दी दूंगा। 
Esther 3:10 तब राजा ने अपनी अंगूठी अपने हाथ से उतार कर अगागी हम्मदाता के पुत्र हामान को, जो यहूदियों का बैरी था दे दी। 
Esther 3:11 और राजा ने हामान से कहा, वह चान्दी तुझे दी गई है, और वे लोग भी, ताकि तू उन से जैसा तेरा जी चाहे वैसा ही व्यवहार करे। 

Esther 7:1 सो राजा और हामान एस्तेर रानी की जेवनार में आगए। 
Esther 7:2 और राजा ने दूसरे दिन दाखमधु पीते-पीते एस्तेर से फिर पूछा, हे एस्तेर रानी! तेरा क्या निवेदन है? वह पूरा किया जाएगा। और तू क्या मांगती है? मांग, और आधा राज्य तक तुझे दिया जाएगा। 
Esther 7:3 एस्तेर रानी ने उत्तर दिया, हे राजा! यदि तू मुझ पर प्रसन्न है, और राजा को यह स्वीकार हो, तो मेरे निवेदन से मुझे, और मेरे मांगने से मेरे लोगों को प्राणदान मिले। 
Esther 7:4 क्योंकि मैं और मेरी जाति के लोग बेच डाले गए हैं, और हम सब विध्वंसघात और नाश किए जाने वाले हैं। यदि हम केवल दास-दासी हो जाने के लिये बेच डाले जाते, तो मैं चुप रहती; चाहे उस दशा में भी वह विरोधी राजा की हानि भर न सकता। 
Esther 7:5 तब राजा क्षयर्ष ने एस्तेर रानी से पूछा, वह कौन है? और कहां है जिसने ऐसा करने की मनसा की है? 
Esther 7:6 एस्तेर ने उत्तर दिया है कि वह विरोधी और शत्रु यही दुष्ट हामान है। तब हामान राजा-रानी के साम्हने भयभीत हो गया। 
Esther 7:7 राजा तो जलजलाहट में आ, मधु पीने से उठ कर, राजभवन की बारी में निकल गया; और हामान यह देखकर कि राजा ने मेरी हानि ठानी होगी, एस्तेर रानी से प्राणदान मांगने को खड़ा हुआ। 
Esther 7:8 जब राजा राजभवन की बारी से दाखमधु पीने के स्थान में लौट आया तब क्या देखा, कि हामान उसी चौकी पर जिस पर एस्तेर बैठी है पड़ा है; और राजा ने कहा, क्या यह घर ही में मेरे साम्हने ही रानी से बरबस करना चाहता है? राजा के मुंह से यह वचन निकला ही था, कि सेवकों ने हामान का मुंह ढांप दिया। 
Esther 7:9 तब राजा के साम्हने उपस्थित रहने वाले खोजों में से हर्वोना नाम एक ने राजा से कहा, हामान के यहां पचास हाथ ऊंचा फांसी का एक खम्भा खड़ा है, जो उसने मोर्दकै के लिये बनवाया है, जिसने राजा के हित की बात कही थी। राजा ने कहा, उसको उसी पर लटका दो। 
Esther 7:10 तब हामान उसी खम्भे पर जो उसने मोर्दकै के लिये तैयार कराया था, लटका दिया गया। इस पर राजा की जलजलाहट ठंडी हो गई।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मियाह 6-8 
  • 1 तीमुथियुस 5


गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013

क्लेष, सेवकाई और प्रतिफल

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के एक महान नबी यिर्मयाह को, आम तौर से ’विलाप करना वाला नबी’ की संज्ञा भी दी जाती है। यिर्मयाह संभवतः एक संवेदनशील और उदास स्वभाव का व्यक्ति था, जिसका हृदय उसके लोगों इस्त्राएल द्वारा परमेश्वर की लगातार अनाज्ञाकारिता तथा उसके दुषपरिणामों के कारण टूट गया और उसकी उदासी और भी अधिक बढ़ गई। विलाप करने की उसकी क्षमता अद्भुत थी; इस्त्राएल की दुर्दशा को देखकर वह कहता है: "भला होता, कि मेरा सिर जल ही जल, और मेरी आंखें आँसुओं का सोता होतीं, कि मैं रात दिन अपने मारे हुए लोगों के लिये रोता रहता" (यिर्मियाह 9:1)।

   यद्यपि यिर्मियाह अपने राष्ट्र के पाप और उसके परिणाम के लिए शोकित था, लेकिन इस्त्राएल के लोगों ने उसके इस दुख को नहीं समझा, वरन परमेश्वर के न्याय की चेतावनी देने के लिए उसे ही सताया गया; यहां तक कि इस्त्राएल को परमेश्वर की ओर लौटने और पापों से पश्चाताप करने की उसकी पुकार के लिए एक बार उसे दलदल से भरे एक अन्धे कुएं में कैद कर दिया गया (यिर्मियाह 38:6)। परमेश्वर की आज्ञाकारिता में चलने और परमेश्वर के सन्देश को लोगों तक पहुँचाने के उसके प्रयासों का प्रतिफल उसे इस प्रकार दिया गया। लेकिन उन परिस्थितियों में भी परमेश्वर ने उसे नहीं छोड़ा, और ना ही यिर्मियाह ने परमेश्वर पर या अपनी सेवकाई शक किया; वह निराश अवश्य हुआ, लेकिन उसने परमेश्वर में अपने विश्वास को टलने नहीं दिया और पीछे नहीं हटा।

   कभी कभी अपने परमेश्वर की सेवकाई करने और उसकी आज्ञाकरिता में बने रहने के प्रयासों में हमें दुखदायी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, हमें गलत समझा जाता है, सताया जाता है और हमारे दिल भी टूटते हैं। ऐसे में हम यिर्मियाह के जीवन और उसकी सहनशीलता से पाठ सीख सकते हैं। यिर्मियाह को अपनी परमेश्वर से मिली बुलाहट और सेवकाई पर इतना दृढ़ विश्वास था कि कोई परिस्थिति, कोई प्रयास उसे इस सेवकाई को करने से डिगा नहीं सका; वह कहता है: "यदि मैं कहूं, मैं उसकी चर्चा न करूंगा न उसके नाम से बोलूंगा, तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते रोकते थक गया पर मुझ से रहा नहीं जाता" (यिर्मियाह 20:9)।

   केवल यिर्मियाह का ही यह हाल नहीं था। परमेश्वर के प्रत्येक नबी और जन को सताया गया, गलत समझा गया, तिरिस्कृत किया गया, और कईयों को उनकी सेवकाई के लिए मार भी डाला गया; यहाँ तक कि प्रभु यीशु को भी इन्हीं बातों का सामना करना पड़ा। परन्तु ये सभी अपने विश्वास और अपनी सेवकाई में अडिग खड़े रहे, परमेश्वर द्वारा दी गई ज़िम्मेदारी को भरसक निभाते रहे, और आज सारे संसार में आदर के पात्र हैं, परमेश्वर के वचन में स्थान पाते हैं, तथा हमारे लिए प्रेर्णा और मार्गदर्शन का स्त्रोत हैं।

   क्या परमेश्वर की सेवकाई में आपको निराशाओं और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है? क्या आपका मन भी दुखी है, हृदय टूट रहा है? हियाव रखिए, इन परिस्थितियों का सामना करने वाले ना तो आप पहले और ना ही अकेले जन हैं। आश्वस्त रहिए, जैसे परमेश्वर ने यिर्मियाह और अपने अन्य लोगों को नहीं छोड़ा, आपको भी नहीं छोड़ेगा; जैसे उन्होंने अपनी सेवकाई पूरी कर के एक बड़ा प्रतिफल पाया, आपके लिए भी परमेश्वर की ओर से एक बड़ा प्रतिफल रखा हुआ है (2 तीमुथियुस 4:8)। परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए और अपने हृदय के लिए ताज़गी एवं सामर्थ मांगिए तथा उसकी पवित्र आत्मा की सहायता से, हरेक निराशा और सताव के बावजूद, अपनी सेवकाई को पूरा करने में लगे रहिए। अन्ततः, सेवकाई पूरा करने पर जो प्रतिफल मिलेगा, उसके सामने आज के ये दुख कुछ भी नहीं हैं (2 कुरिन्थियों 4:17)। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु की कोई भी सेवकाई बिना प्रतिफल या महत्वहीन नहीं है।

इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:16-17

बाइबल पाठ: यिर्मियाह 20:7-13
Jeremiah 20:7 हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं ने धोखा खाया; तू मुझ से बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हंसी होती है; सब कोई मुझ से ठट्ठा करते हैं। 
Jeremiah 20:8 क्योंकि जब मैं बातें करता हूँ, तब मैं जोर से पुकार पुकारकर ललकारता हूँ कि उपद्रव और उत्पात हुआ, हां उत्पात! क्योंकि यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठा का कारण होता रहता है। 
Jeremiah 20:9 यदि मैं कहूं, मैं उसकी चर्चा न करूंगा न उसके नाम से बोलूंगा, तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते रोकते थक गया पर मुझ से रहा नहीं जाता। 
Jeremiah 20:10 मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना है। चारों ओर भय ही भय है! मेरी जान पहचान के सब जो मेरे ठोकर खाने की बाट जोहते हैं, वे कहते हैं, उसके दोष बताओ, तब हम उनकी चर्चा फैला देंगे। कदाचित वह धोखा खाए, तो हम उस पर प्रबल हो कर, उस से बदला लेंगे। 
Jeremiah 20:11 परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा। 
Jeremiah 20:12 हे सेनाओं के यहोवा, हे धर्मियों के परखने वाले और हृदय और मन के ज्ञाता, जो बदला तू उन से लेगा, उसे मैं देखूं, क्योंकि मैं ने अपना मुक़द्दमा तेरे ऊपर छोड़ दिया है। 
Jeremiah 20:13 यहोवा के लिये गाओ; यहोवा की स्तुति करो! क्योंकि वह दरिद्र जन के प्राण को कुकमिर्यों के हाथ से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मियाह 3-5 
  • 1 तीमुथियुस 4


शनिवार, 29 जून 2013

परमेश्वर के अतिरिक्त

   अपनी पुस्तक Through the Valley of the Kwai में स्कॉटलैंड के एक सेना अधिकारी, 6 फुट 2 इन्च कद के एर्नेस्ट गौर्डन, ने दूसरे विश्वयुद्ध में कैदी बनाए जाने के अपने संस्मरण लिखे हैं। युद्ध बंदी बनाए जाने के समय गौर्डन एक नास्तिक था। बन्दीयों को रखने की दशा के कारण उसे मलेरिया, डिप्थीरिया, टायफाइड, बेरीबेरी, डाय्सेन्ट्री, शरीर के घाव आदि बिमारियों से होकर गुज़रना पड़ा। बिमारियों से उत्पन्न कमज़ोरी, कठिन परिश्रम और भोजन की कमी के कारण उसका वज़न शीघ्र ही घटकर 50 किलो से भी कम रह गया।

   युद्ध बन्दीयों के अस्पताल में व्याप्त गन्दगी के कारण गौर्डन ने आग्रह किया कि उसे एक ऐसे स्थान पर रखा जाए जहाँ कुछ सफाई होती है - वहाँ का मुर्दाघर। उस मुर्दाघर की ज़मीन पर लेटा हुआ वह प्रतिदिन अपनी मृत्यु की बाट जोहता था। लेकिन रोज़ एक साथी युद्ध बन्दी, डस्टी मिलर, उसके पास आकर उसके घावों को साफ करता, उसे आशा बन्धाता और मिलने वाले भोजन को स्वीकार करने के लिए समझाता, यहाँ तक कि डस्टी अपने भोजन में से भी गौर्डन को खाने के लिए दे देता। शांत और विनम्र स्वभाव का डस्टी उसकी मरहम-पट्टी करते समय गौर्डन से परमेश्वर में अपने दृढ़ विश्वास के बारे में बातें करता और बताता कि इस क्लेष में भी उसे एक अलौकिक आशा है।

   जिस आशा की बात परमेश्वर का वचन बाइबल करती है वह कोई अस्पष्ट, अनिश्चित, काल्पनिक आशावाद नहीं है। इसके विपरीत बाइबल में वर्णित आशा एक मज़बूत और निश्चयपूर्ण उम्मीद है कि जो कुछ परमेश्वर ने अपने वचन में वायदा किया है उसे वह अवश्य ही पूरा भी करेगा। बाइबल हमें यह भी सिखाती है कि परमेश्वर पर विश्वास करने और उसमें आशा बनाए रखने वालों के लिए क्लेष अकसर एक उत्प्रेरक का कार्य करते हैं और उनके चरित्र में धीरज तथा खराई को बढ़ाकर उन्हें और भी अधिक निखार देते हैं (रोमियों 5:3-4)।

   एक कठोर और कष्टदायक युद्ध बन्दीगृह में, 70 वर्ष पूर्व, एर्नेस्ट गौर्डन ने व्यक्तिगत अनुभव से परमेश्वर के वचन में दिया आशा का यह पाठ सीखा, और कल के उस नास्तिक का आज यह कहना है कि "सच्चा विश्वास वहीं पनपता और बढ़ता है जहाँ परमेश्वर के अतिरिक्त कोई आशा नहीं होती।" (रोमियों 8:24-25)। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीह यीशु विश्वासी की आशा की अटूट और स्थिर चट्टान है।

आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं। - रोमियों 8:24-25

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-5
Romans 5:1 ​सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज।
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 14-16 
  • प्रेरितों 9:22-43


शुक्रवार, 22 मार्च 2013

फलवंत और आनन्दित


   मैं और मेरा परिवार एक बहुमंज़िली इमारत में रहते हैं इसलिए हमारा बग़ीचा गमलों में लगे फूलों के पौधों तक ही सीमित है। बहुत समय तक हमारे पौधों में फूल नहीं आ रहे थे, जबकि हम नियमित रूप से उन्हें पानी और खाद देते थे। फिर हमें मालूम हुआ कि गमले की मिट्टी की गुड़ाई करना और उसे उलट-पुलट करना भी आवश्यक है। हमने यह भी करना आरंभ कर दिया और अब हमारे घर में फूलों की छट्टा देखते ही बनती है।

   कभी कभी हमारे जीवनों में भी यह आवश्यक होता है कि जीवन कुछ उलट-पुलट हो। परेशानीयों से होकर निकल रहे अपने समय के मसीही विश्वासीयों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पतरस ने उन्हें समझाया: "हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो" (1 पतरस 4:12-13)।

   हमारे गमलों के पौधों की मिट्टी के समान, इन मसीही विश्वासीयों के जीवन भी "उलट-पुलट" किए जा रहे थे। उनके जीवनों में परेशानीयों का यह समय आने देने के द्वारा परमेश्वर का उद्देश्य उनके जीवनों को और कारगर बनाना था जो परमेश्वर की महिमा और प्रशंसा को प्रगट करता (1 पतरस 1:7)।

   परमेश्वर हमारे जीवनों को घोट कर रखने और हमें उसके लिए फलवंत होने से रोकने वाली बातों से हमें निकालने के लिए हमारे जीवनों में उथल-पुथल आने देता है। यह उथल-पुथल अपने साथ परीक्षा और दुख भी लाती है, लेकिन हमारे लिए अन्ततः इससे भलाई ही उत्पन्न होती है। मसीही विश्वासी होने पर भी यदि आप जीवन के ऐसे दौर से गुज़र रहें हैं तो निराश नहीं वरन आनन्दित हों, परमेश्वर आपको अपनी महिमा के लिए तैयार कर रहा है और उपयोग भी करेगा। उसके हाथों में अपने आप को छोड़ दीजिए और कुछ ही समय में आप अपनी कलपना से भी अधिक फलवंत और आनन्दित होंगे। - सी. पी. हिया


जो अपने क्लेषों में भी परमेश्वर को धन्य कहते हैं वे परमेश्वर द्वारा क्लेषों में भी धन्य बन जाते हैं।

पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो। - 1 पतरस 4:13

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:1-9
1 Peter 1:1 पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्‍तुस, गलतिया, कप्‍पदुकिया, आसिया, और बिथुनिया में तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं।
1 Peter 1:2 और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्हें अत्यन्‍त अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये।
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है।
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो।
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे।
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है।
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 10-12 
  • लूका 1:39-56

मंगलवार, 15 जनवरी 2013

स्वतंत्र


   सैन फ्रांसिस्को के अल्काट्रैज़ टापू पर स्थित और अब बन्द कर दिए गए कैदखाने के भ्रमण से लौटने के बाद वहां की कुछ अविस्मरणीय यादें मेरे साथ रह गईं। जब हम नौका से वहां पहुंचे तो मैं जान सका कि क्यों उस अधिकतम सुरक्षा प्राप्त स्थान को "चट्टान" कह कर संबोधित किया जाता था।

   अन्दर भ्रमण करते समय, मैंने वहां के चर्चित "बड़े घर" के अन्दर रौशनी की किरणों को मोटी सलाखों लगी खिड़कियों से होकर आते हुए देखा। फिर एक के बाद एक कोठरियों की कतारों को देखा जिनमें कई कुख्यात अपराधी कैद रखे गए थे। लेकिन एक अन्य बात ने एक बहुत गहरी छाप मुझ पर छोड़ी - एक खाली कोठरी में प्रवेश करने पर मैंने वहां की एक दिवार पर लिखा हुआ देखा "यीशु" और एक अन्य कोठरी की ताक में एक बाइबल रखी हुई थी। इन दोनों बातों ने मुझसे शांत भाव से सबसे बड़ी स्वतंत्रता के बारे में बातें कीं।

   प्रेरित पौलुस भी, जब वह कैदखाने की कोठरी में पड़ा अपने मृत्यु दण्ड के पूरा किए जाने की प्रतीक्षा कर रहा था तो इस स्वतंत्रता के बारे में जानता था। अपने आप को "मसीह का कैदी" जानकर उसने अपने कैद के समय का उपयोग अन्य कैदियों तक पाप से अनन्त काल की क्षमा पाने तथा परमेश्वर के परिवार का सदस्य बनने और मसीह में स्वतंत्र होने के सुसमाचार को पहुंचाने के लिए बिताया।

   सलाखें लगे दरवाज़े और खिड़कियां एक प्रकार की कैद के प्रतीक हैं। शरीर में लकवे का रोगी होना, अपरिहार्य दरिद्रता, लंबे अर्से की बेरोज़गारी इत्यादि एक अन्य प्रकार की कैद के प्रतीक हैं। संभव है कि आप किसी अन्य प्रकार की कैद सहन कर रहे हों। इनमें से कोई भी कैद वांछनीय नहीं है - लेकिन जिसने मसीह के प्रेम और उससे मिलने वाली सामर्थ को जान लिया है वह मसीह का कैदी होने के बदले में मसीह के बिना स्वतंत्र रहने की कल्पना भी नहीं कर सकता क्योंकि मसीह की कैद ही जीवन की वास्तविक स्वतंत्रता है। - मार्ट डी हॉन


मसीह के नियंत्रण में रहना ही स्वतंत्रता में रहना है।

मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं। - फिलेमॉन १:१०

बाइबल पाठ: फिलेमॉन १:४-१६
Phlm 1:4  मैं तेरे उस प्रेम और विश्वास की चर्चा सुन कर, जो सब पवित्र लोगों के साथ और प्रभु यीशु पर है।
Phlm 1:5  सदा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं; और अपनी प्रार्थनाओं में भी तुझे स्मरण करता हूं।
Phlm 1:6  कि तेरा विश्वास में सहभागी होना तुम्हारी सारी भलाई की पहिचान में मसीह के लिये प्रभावशाली हो।
Phlm 1:7 क्योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्द और शान्‍ति मिली, इसलिये, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।
Phlm 1:8  इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं।
Phlm 1:9  तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं।
Phlm 1:10  मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं।
Phlm 1:11  वह तो पहिले तेरे कुछ काम का न था, पर अब तेरे और मेरे दोनों के बड़े काम का है।
Phlm 1:12  उसी को अर्थात जो मेरे हृदय का टुकड़ा है, मैं ने उसे तेरे पास लौटा दिया है।
Phlm 1:13  उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण है, मेरी सेवा करे।
Phlm 1:14  पर मैं ने तेरी इच्छा बिना कुछ भी करना न चाहा कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनन्द से हो।
Phlm 1:15  क्योंकि क्या जाने वह तुझ से कुछ दिन तक के लिये इसी कारण अलग हुआ कि सदैव तेरे निकट रहे।
Phlm 1:16  परन्तु अब से दास की नाईं नहीं, वरन दास से भी उत्तम, अर्थात भाई के समान रहे जो शरीर में भी और विशेष कर प्रभु में भी मेरा प्रिय हो।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३६-३८ 
  • मत्ती १०:२१-४२

सोमवार, 14 जनवरी 2013

भला या बुरा?


   क्या वास्तव में जीवन की बातों तथा परिस्थितियों को भला या बुरा कर के आंकने की क्षमता हम में है? 

   उदाहरणस्वरूप, मान लीजिए कि आप परिवार के साथ यात्रा पर निकलने को हैं और आपकी कार खराब हो जाती है। जब कार को वर्कशॉप में ले जाते हैं तो मिस्त्री उसे देखकर कहता है, "अच्छा हुआ कि आप इसे लेकर यात्रा पर नहीं निकले; इसमें कभी भी आग लग सकती थी!" आप की पारिवारिक यात्रा का संभव ना हो पाना बुरा था या परमेश्वर द्वारा आप को तथा आप के परिवार को इस प्रकार बचाना भला था?

   या, मान लीजिए कि आप चाहते हैं कि आपकी पुत्री खेल तथा दौड़ में आगे बढ़े, किंतु उसकी रुचि गाने तथा संगीत वाद्य बजाने में है। आप कुंठित होते हैं क्योंकि वह आप की इच्छानुसार नहीं वरन अपनी पसन्द अनुसार चल रही है। किंतु वह संगीत में अच्छी प्रवीणता प्राप्त करती है और उसे संगीत में आगे के प्रशीक्षण के लिए छात्रवृत्ति भी मिल जाती है। उस में होकर आप की इच्छाओं का पूरा ना होना क्या बुरा था, या यश पाने के लिए परमेश्वर द्वारा उसको ऐसे मार्ग में ले चलना जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की थी भला है?

   कई बार यह जानना कठिन होता है कि परमेश्वर कैसे कार्य कर रहा है। उसके भेद हमारी समझ से परे होते हैं और हमारी जीवन यात्रा, हमारे नियंत्रण से बाहर, कुछ अनपेक्षित रास्तों पर होकर निकलती है। संभवतः परमेश्वर हमें एक बेहतर मार्ग दिखा रहा है।

   जब बुरे या भले का भेद समझना कठिन हो, तो आज के बाइबल पाठ के भजनकार के समान, जो बुरा प्रतीत होता है उसमें से भी भला उत्पन्न करने वाले हमारे परमेश्वर पिता के प्रेम पर अपना विश्वास बनाए रखें (पद ५) क्योंकि अपने विश्वासियों के प्रति परमेश्वर का प्रेम कभी घटता नहीं, टलता नहीं; भजनकार के समान ही सदैव परमेश्वर की स्तुति और आराधना में लगे रहें (पद ६)। - डेव ब्रैनन


हम परिस्थितियों को तो नियंत्रित नहीं कर सकते परन्तु उनके प्रति अपनी प्रतिक्रीया को अवश्य ही निर्धारित कर सकते हैं।

परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। - भजन १३:५

बाइबल पाठ: भजन १३
Ps 13:1  हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?
Ps 13:2  मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?
Ps 13:3  हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;
Ps 13:4  ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Ps 13:5  परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।
Ps 13:6  मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३३-३५ 
  • मत्ती १०:१-२०

रविवार, 13 जनवरी 2013

विश्वास


   कई बार कुछ लोग जो परमेश्वर के नाम से कोई सेवकाई करते हैं, इसे परमेश्वर के साथ किए गई एक ठेके के रूप में देखते हैं - क्योंकि मैंने अपना समय, सामर्थ और धन परमेश्वर के नाम पर कार्य करने में व्यय किया है इसलिए प्रत्युत्तर में परमेश्वर को मेरी विशेष देखभाल करनी चाहिए।

   किंतु मेरा मित्र डगलस ऐसा नहीं है। उसका जीवन परमेश्वर के वचन के पात्र अय्युब के समान ही है जिसने अपने परिवार, संपदा और स्वास्थ्य की भारी हानि उठाने और उस दशा में मित्रों द्वारा अपमानित होने पर भी परमेश्वर से अपने विश्वास को टलने नहीं दिया। डगलस ने भी अपनी सेवकाई की असफलता, कैंसर से अपनी पत्नि की मृत्यु, नशे में धुत एक वाहन चालक द्वारा अपने आप तथा अपने एक बच्चे को लगी चोटें सही हैं। किंतु डगलस की सलाह रहती है, "परमेश्वर को अपने जीवन की परिस्थितियों से मत आंको।"

   जब कठिनाईयां आती हैं और शंकाएं उत्पन्न होती हैं तो मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों ८ अध्याय की ओर अकसर मुड़ता हूँ। रोमियों की पत्री के लेखक पौलुस ने यहां प्रश्न उठाया: "कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?" (रोमियों ८:३५); इस एक वाक्य में पौलुस ने अपनी सेवकाई के जीवन का सारांश प्रस्तुत कर दिया। उसने सुसमाचार प्रचार के लिए बहुत क्लेष उठाए, लेकिन उसका विश्वास था कि चाहे इन क्लेषों में कोई भी बात अपने आप में भली नहीं है, किंतु परमेश्वर इन क्लेष की बातों से भी भलाई उत्पन्न कर सकता है। उसने कठिनाईयों और क्लेषों से भी आगे उस प्रेमी परमेश्वर को देखना सीख लिया था जो एक दिन सब को सब बातों का योग्य प्रतिफल देगा। पौलुस ने आगे लिखा: "क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों ८:३८-३९)।

   ऐसा विश्वास निराशाओं पर जयवंत होने में बहुत सहायक होता है, क्योंकि तब हम जीवन को अपनी योजनाओं की सफलता या असफलता की दृष्टि से नहीं वरन परमेश्वर की योजनाओं की दृष्टि से देखने लगते हैं। - फिलिप यैन्सी


और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। - फिलिप्पियों १:६

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिल कर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों ८:२८

बाइबल पाठ: रोमियों ८:२८-३९
Rom 8:28  और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिल कर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Rom 8:29  क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Rom 8:30  फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
Rom 8:31  सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Rom 8:32  जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Rom 8:33  परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Rom 8:34  फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Rom 8:35  कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेष, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Rom 8:36  जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Rom 8:37  परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Rom 8:38  क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Rom 8:39  न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३१-३२ 
  • मत्ती ९:१८-३८

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

शान्ति देने वाले


   न्यू यॉर्क के एक मेडिकल कॉलेज ने, उन छात्रों के लिए जो प्रौढ़ लोगों में पाई जाने वाली बीमारियों के विशेषज्ञ बनने की शिक्षा ले रहे थे, एक विशेष कार्यक्रम चलाया। वे छात्र १० दिन तक बुज़ुर्गों के समान ही किसी नर्सिंग होम में दाखिल रहते हैं। इन १० दिनों में वे बुज़ुर्गों द्वारा अनुभव करी जाने वाली कठिनाईयों को स्वयं अनुभव करके उनके कष्टों को समझना सीखते हैं। वे छात्र पहिए वाली कुर्सी को सामन्य लोगों के लिए बने स्थानों में इधर से उधर ले जाने, पलंग से लिफ्ट की सहायता से बाहर निकलने, कुर्सी पर बैठे हुए स्नानगृह में स्नान करने, अन्दर बाहर होने और एक से दूसरे स्थान पर खिसकने आदि का व्यक्तिगत अनुभव लेते हैं। एक छात्र ने अपने इस प्रशिक्षण के समय पहचाना कि कैसे कमरों पर लगी नाम की पट्टियों को यदि थोड़ा नीचा लगाया जाए तो बुज़ुर्गों के लिए उन्हें पढ़ना सरल हो जाएगा, या यदि टी.वी. का रिमोट यदि किसी एक निर्धारित स्थान पर जहां उसे सरलता से देखा और उठाया जा सके रखा जाए तो बुज़र्गों के लिए उसका उपयोग करना कितना सहज हो जाएगा।

   इन प्रतीत होने में छोटी किंतु कुछ लोगों के लिए बड़ी और महत्वपूर्ण बातों की समझ उन छात्रों को अपने व्यक्तिगत अनुभव द्वारा ही संभव होने पाई। संभवतः वे छात्र बुज़ुर्गों की समस्याओं की पूरी समझ ना भी लेने पाएं, परन्तु जो वे अनुभव करते और सीखते हैं, उसके द्वारा अपनी शिक्षा कार्यक्रम के पूरा करने के बाद उन्हें बुज़ुर्गों की सेवा करने में सहायता मिलेगी, वे उन प्रौढ़ लोगों की मजबूरियों और समस्याओं की बेहतर समझ रख सकेंगे।

   इसी प्रकार, जब हम कठिनाइयों और समस्याओं मे पड़ते हैं और परमेश्वर उनमें हमारी सहायता करके हमें उन से निकालता है तो वह यह भी चाहता है कि हम दूसरों की कठिनाईयों और समस्याओं की समझ रखें और उनकी सहायता करने वाले बने। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा लिखवाया: "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेषों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेष में हों" (२ कुरिन्थियों १:३-४)।

   अपनी समस्याओं और कठिनाईयों को अपनी उन्नति की सीढ़ीयाँ बनाएं; उन से प्राप्त होने वाली शिक्षाओं को दूसरों को उनके क्लेषों में शान्ति और सांत्वना देने के लिए प्रयोग करें। स्मरण रखें, लोगों के जीवनों में छोटी छोटी बातों का भी बड़ा महत्व होता है। - ऐनी सेटास


परमेश्वर हमें आरामतलब होने के लिए शान्ति नहीं देता, वरन इसलिए कि हम दूसरों को शान्ति देने वाले हों।

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेषों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेष में हों। - २ कुरिन्थियों १:३-४

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १:३-७
2Co 1:1  पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्‍छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्थुस में है; और सारे अखया के सब पवित्र लोगों के नाम।
2Co 1:2  हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
2Co 1:3  हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। 
2Co 1:4  वह हमारे सब क्‍लेषों में शान्‍ति देता है, ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेष में हों। 
2Co 1:5  क्‍योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है। 
2Co 1:6  यदि हम क्‍लेष पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेषों को सह लेते हो, जिन्‍हें हम भी सहते हैं। 
2Co 1:7  और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्‍योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल ५-७ 
  • २ यूहन्ना