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शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

प्रार्थना


    सन 1997 के एशियाई वित्तीय संकट के समय में उतनी नौकरियां नहीं थीं जितने लोग नौकरी खोज रहे थे। मैं भी उन नौकरी खोजने वालों में से एक थी। नौ महीनों के चिंता भरे महीने प्रतीक्षा करने के बाद मुझे एक छोटी सी नौकरी मिली, लेकिन जिस कंपनी में नौकरी मिली थी, वह शीघ्र ही बन्द हो गई और मैं फिर से बेरोजगार हो गई।

    क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है? आपको लगने लगता है कि अब जो कुछ बुरा हो सकता था, वह हो चुका है, अब और कुछ नहीं बिगड़ेगा, तभी अचानक ही आपके पैरों तले से ज़मीन खिसक जाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम सारपत की विधवा के साथ कुछ ऐसा ही होता हुआ पाते हैं (1 राजाओं 17:12)। देश में पड़े हुए अकाल के कारण वह विधवा अपने और अपने बेटे के लिए अपना अंतिम भोजन पकाने की तैयारी कर रही थी, कि एलिय्याह भविष्यद्वक्ता ने उस से कहा कि वह पहले उसे एक रोटी बना कर दे। उसने हिचकिचाते हुए उसकी बात स्वीकार कर ली, और परमेश्वर ने उसके लिए एक निरंतर बने रहने वाली तेल और मैदा की आपूर्ति का प्रावधान कर दिया (आयतें 10-16)।

    लेकिन इसके बाद उसका बेटा बीमार पड़ गया, और उसकी हालत बिगड़ती चली गई, यहाँ तक कि उसकी साँस भी रुक गई। वह विधवा एलिय्याह के सामने विलाप कर के कहने लगी, “तब वह एलिय्याह से कहने लगी, “हे परमेश्‍वर के जन! मेरा तुझ से क्या काम? क्या तू इसलिये मेरे यहाँ आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए?” (पद 18)।

    कभी-कभी हम उस विधवा के समान प्रतिक्रिया देना चाहते हैं – यह सोचते हुए कि परमेश्वर हमें दण्ड दे रहा है, लेकिन क्यों, यह हमारी समझ में नहीं आता है। हम भूल जाते हैं कि इस पतित संसार में, बुरी बातें होती हैं।

    एलिय्याह ने उसकी चिंता को परमेश्वर के सामने रखा, उस बच्चे के लिए सच्चाई और बल देकर प्रार्थना की, और परमेश्वर ने उस बच्चे को जिला दिया! (पद 20-22)।

    जब हमारे पैरों तले ज़मीन खिसकने लगे, हम भी एलिय्याह के समान इस बात को स्मरण रखें कि हमारा विश्वासयोग्य स्वर्गीय पिता हमें कभी नहीं छोड़ेगा! हम परमेश्वर के उद्देश्यों में आश्वासन रखते हुए अपनी प्रार्थनाएँ उसके सामने रख सकते हैं।

 

परमेश्वर हर समय में, भले या बुरे, अच्छा ही रहता है।

इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे। - इब्रानियों 4:16

बाइबल पाठ: 1 राजाओं 17:15-24

1 राजाओं 17:15 तब वह चली गई, और एलिय्याह के वचन के अनुसार किया, तब से वह और स्त्री और उसका घराना बहुत दिन तक खाते रहे।

1 राजाओं 17:16 यहोवा के उस वचन के अनुसार जो उसने एलिय्याह के द्वारा कहा था, न तो उस घड़े का मैदा समाप्‍त हुआ, और न उस कुप्पी का तेल घटा।

1 राजाओं 17:17 इन बातों के बाद उस स्त्री का बेटा जो घर की स्वामिनी थी, रोगी हुआ, और उसका रोग यहाँ तक बढ़ा कि उसका साँस लेना बन्द हो गया।

1 राजाओं 17:18 तब वह एलिय्याह से कहने लगी, “हे परमेश्‍वर के जन! मेरा तुझ से क्या काम? क्या तू इसलिये मेरे यहाँ आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए?”

1 राजाओं 17:19 उसने उससे कहा, “अपना बेटा मुझे दे।” तब वह उसे उसकी गोद से लेकर उस अटारी पर ले गया जहाँ वह स्वयं रहता था, और अपनी खाट पर लिटा दिया।

1 राजाओं 17:20 तब उसने यहोवा को पुकारकर कहा, “हे मेरे परमेश्‍वर यहोवा! क्या तू इस विधवा का बेटा मार डालकर जिसके यहाँ मैं टिका हूँ, इस पर भी विपत्ति ले आया है?”

1 राजाओं 17:21 तब वह बालक पर तीन बार पसर गया और यहोवा को पुकारकर कहा, “हे मेरे परमेश्‍वर यहोवा! इस बालक का प्राण इसमें फिर डाल दे।” 

1 राजाओं 17:22 एलिय्याह की यह बात यहोवा ने सुन ली, और बालक का प्राण उसमें फिर आ गया और वह जी उठा।

1 राजाओं 17:23 तब एलिय्याह बालक को अटारी पर से नीचे घर में ले गया, और एलिय्याह ने यह कहकर उसकी माता के हाथ में सौंप दिया, “देख तेरा बेटा जीवित है।”

1 राजाओं 17: 24 स्त्री ने एलिय्याह से कहा, “अब मुझे निश्‍चय हो गया है कि तू परमेश्‍वर का जन है, और यहोवा का जो वचन तेरे मुँह से निकलता है, वह सच होता है।”

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 72-73
  • रोमियों 9:1-15


शुक्रवार, 22 मई 2020

बचाया



     मेरे पालतु बिल्ली के बच्चे वेलवेट को मेरी माँ ने घर में बनी रोटी को उठा कर, रसोई की अलमारी के ऊपर चढ़कर खाते हुए देखा। गुस्से में मेरी माँ ने उसे भगाया तो वह घर के दरवाज़े के बाहर भाग गई। कुछ घंटे के बाद भी जब वह अन्दर नहीं आई तो हम बाहर निकल कर उसे ढूँढने लगे, किन्तु वह हमें नहीं मिली। तभी उस की हलकी सी आवाज़ मुझे सुनाई पड़ी, और जब मैंने ऊपर की ओर देखा तो वह आँगन के एक ऊँचे पेड़ की पतली सी डाली के सिरे पर बैठे थी, और उस के वज़न से वह डाली झुक रही थी। मेरी माँ के क्रुद्ध व्यवहार से बचने के लिए भाग कर वेलवेट एक और भी अधिक खतरनाक परिस्थिति में जा फंसी थी। हम ने बहुत प्रयास किए कि वेलवेट किसी प्रकार से पीछे को हो कर उस डाली पर से सुरक्षित आ जाए, किन्तु सब असफल रहे। अंततः हमें अपने स्थानीय अग्निशमन सेवा को बुलाना पड़ा, और उन्होंने अपनी सब से लम्बी सीढ़ी को उस के सिरे तक उठा कर, एक दयालु व्यक्ति को ऊपर चढ़ाकर, वेलवेट को उस डाली पर से पकड़ कर उतारा और लाकर मेरे हाथों में रख दिया।

     हम भी कितनी ही बार यही करते हैं – अपनी गलतियों को छुपाने और उन से भागने के लिए अपने आप को और अधिक बड़े खतरों में डाल लेते हैं। किन्तु हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता फिर भी हमें बचाने के लिए आता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि योना भविष्यद्वक्ता से परमेश्वर ने नीनवे जाकर प्रचार करने के लिए कहा, परन्तु परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता कर के, वह तर्शीश की ओर भाग गया, और अंततः एक विशाल मछली के पेट में जा पहुँचा। “तब योना ने उसके पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर के कहा, मैं ने संकट में पड़े हुए यहोवा की दोहाई दी, और उसने मेरी सुन ली है; अधोलोक के उदर में से मैं चिल्ला उठा, और तू ने मेरी सुन ली” (योना 2:1-2)। परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुनी, “और यहोवा ने मच्छ को आज्ञा दी, और उसने योना को स्थल पर उगल दिया” (पद 10)। फिर परमेश्वर ने योना को एक और अवसर दिया कि वह जा कर नीनवे में प्रचार करे (योना 3:1)।

     हमें हमारी अनाज्ञाकारिता और ढिठाई के दुष्परिणामों से बचा कर निकाल लाने के लिए परमेश्वर कितनी भी ऊँचाई या गहराई तक जाने के लिए तैयार रहता है। उसका बचाने वाला प्रेम कितना महान है, जिस के अंतर्गत उसने हमें हमारे पापों से बचाया है। - एलिसा मॉर्गन

क्रूस पर प्रभु यीशु की मृत्यु ने हमें हमारे पापों से बचा लिया है।

क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ्य, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। - रोमियों 8:38-39

बाइबल पाठ: योना 2:1-10
योना 2:1 तब योना ने उसके पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर के कहा,
योना 2:2 मैं ने संकट में पड़े हुए यहोवा की दोहाई दी, और उसने मेरी सुन ली है; अधोलोक के उदर में से मैं चिल्ला उठा, और तू ने मेरी सुन ली।
योना 2:3 तू ने मुझे गहिरे सागर में समुद्र की थाह तक डाल दिया; और मैं धाराओं के बीच में पड़ा था, तेरी भड़काई हुई सब तरंग और लहरें मेरे ऊपर से बह गईं।
योना 2:4 तब मैं ने कहा, मैं तेरे साम्हने से निकाल दिया गया हूं; तौभी तेरे पवित्र मन्दिर की ओर फिर ताकूंगा।
योना 2:5 मैं जल से यहां तक घिरा हुआ था कि मेरे प्राण निकले जाते थे; गहिरा सागर मेरे चारों ओर था, और मेरे सिर में सिवार लिपटा हुआ था।
योना 2:6 मैं पहाड़ों की जड़ तक पहुंच गया था; मैं सदा के लिये भूमि में बन्द हो गया था; तौभी हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने मेरे प्राणों को गड़हे में से उठाया है।
योना 2:7 जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैं ने यहोवा को स्मरण किया; और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन तेरे पवित्र मन्दिर में पहुंच गई।
योना 2:8 जो लोग धोखे की व्यर्थ वस्तुओं पर मन लगाते हैं, वे अपने करूणा निधान को छोड़ देते हैं।
योना 2:9 परन्तु मैं ऊंचे शब्द से धन्यवाद कर के तुझे बलिदान चढ़ाऊंगा; जो मन्नत मैं ने मानी, उसको पूरी करूंगा। उद्धार यहोवा ही से होता है।
योना 2:10 और यहोवा ने मच्छ को आज्ञा दी, और उसने योना को स्थल पर उगल दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 16-18
  • यूहन्ना 7:28-53



गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

संकट में स्तुति



      मार्क ने अपने बचपन की एक घटना के बारे में बताया, जब उसके पिताजी ने सभी परिवार जनों को एक साथ बुलाया, और उन्हें बताया कि उनकी कार ख़राब हो गई है, और महीने का अन्त आते-आते, परिवार का पैसा भी समाप्त हो जाएगा। फिर मार्क के पिताजी ने इन बातों के लिए प्रार्थना की और परिवार के सभी लोगों से कहा कि वे परमेश्वर के उत्तर की प्रतीक्षा करें।

      आज मार्क स्मरण करता है कि परमेश्वर का वह उत्तर और उसकी सहायता कैसे आए। परिवार के एक मित्र ने उनकी कार की मरम्मत कर दी; पैसों के लिए लोगों से अनपेक्षित चैक आ गए; कोई-कोई उनके लिए भोजन सामग्री ले कर आ गया। उनके परिवार की कृतज्ञता संकट की भट्टी में होकर तैयार हुई।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 57 से, लंबे समय से, लोगों को स्तुति और आराधना के गीत और विषय मिलते रहे हैं। भजनकार दाऊद ने जब परमेश्वर को संबोधित करते हुए कहा, “तू स्वर्ग के ऊपर महान है” (पद 11), तो संभव है कि हम सोचें कि वह रात में टकटकी लगाए आकाशमंडल की भव्यता को निहार रहा होगा, या फिर मंदिर में किसी आराधना गीत के गए जाने में भाग ले रहा होगा। परन्तु वास्तविकता यह है कि उस समय दाऊद अपनी जान के जोखिम का सामना कर रहा था और एक गुफा में छिपा हुआ हुआ था।

      दाऊद ने भजन में लिखा कि “मेरा प्राण सिंहों के बीच है”; उसे फाड़ खाने वाले ये पशु वे मनुष्य थे “जिनके दाँत बर्छी और तीर हैं” (पद 4)। दाऊद की यह स्तुति संकट में सिद्ध हुई। यद्यपि वह ऐसे शत्रुओं से घिरा हुआ था जो उसे मरा हुआ देखना चाहते थे, फिर भी दाऊद ये अद्भुत शब्द लिख सका, “हे परमेश्वर, मेरा मन स्थिर है, मेरा मन स्थिर है; मैं गाऊंगा वरन भजन कीर्तन करूंगा” (पद 7)।

      आज हम चाहे जिस संकट का सामना करें, हम सहायता के लिए परमेश्वर के पास निःसंकोच जा सकते हैं; और फिर उसके उत्तर की प्रतीक्षा करते हुए उसकी आराधना और स्तुति कर सकते हैं, इस भरोसे के साथ को वह हमारी चिंता करता है और हमारी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति भी करता है। संकट में स्तुति विश्वास को और दृढ़ करती है। - टिम गुस्टाफसन

आपका अगला संकट कभी धोखा न देने वाले परमेश्वर पर भरोसा रखना सीखने का अवसर है।

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा। - भजन 50:15

बाइबल पाठ: भजन 57
Psalms 57:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिये रहूंगा।
Psalms 57:2 मैं परम प्रधान परमेश्वर को पुकारूंगा, ईश्वर को जो मेरे लिये सब कुछ सिद्ध करता है।
Psalms 57:3 ईश्वर स्वर्ग से भेज कर मुझे बचा लेगा, जब मेरा निगलने वाला निन्दा कर रहा हो। परमेश्वर अपनी करूणा और सच्चाई प्रगट करेगा।
Psalms 57:4 मेरा प्राण सिंहों के बीच में है, मुझे जलते हुओं के बीच में लेटना पड़ता है, अर्थात ऐसे मनुष्यों के बीच में जिन के दांत बर्छी और तीर हैं, और जिनकी जीभ तेज तलवार है।
Psalms 57:5 हे परमेश्वर तू स्वर्ग के ऊपर अति महान और तेजोमय है, तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!
Psalms 57:6 उन्होंने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया है; मेरा प्राण ढला जाता है। उन्होंने मेरे आगे गड़हा खोदा, परन्तु आप ही उस में गिर पड़े।
Psalms 57:7 हे परमेश्वर, मेरा मन स्थिर है, मेरा मन स्थिर है; मैं गाऊंगा वरन भजन कीर्तन करूंगा।
Psalms 57:8 हे मेरी आत्मा जाग जा! हे सारंगी और वीणा जाग जाओ। मैं भी पौ फटते ही जाग उठूंगा।
Psalms 57:9 हे प्रभु, मैं देश के लोगों के बीच तेरा धन्यवाद करूंगा; मैं राज्य राज्य के लोगों के बीच में तेरा भजन गाऊंगा।
Psalms 57:10 क्योंकि तेरी करूणा स्वर्ग तक बड़ी है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक पहुंचती है।
Psalms 57:11 हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर अति महान है! तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 17-19
  • इफिसियों 5:17-33



शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

दृष्टिकोण



      मेरी किशोरावस्था में जब भी मैं किसी बड़ी चुनौती या जोखिम भरे बड़े निर्णय को लेने के संबंध में असमंजस में होती थी, तो जैसा मेरी माँ ने मुझे सिखाया था, मैं सही दृष्टिकोण को पाने के लिए अपनी समस्या और उसके विभिन्न पहलुओं तथा समाधानों को कागज़ पर लिख लेती थी। जब मैं अनिश्चित होती थी कि मुझे अध्ययन के लिए कौन से विषय चुनने चाहिएँ, या कौन सी नौकरी करनी चाहिए, या व्यसक होने की अभिभूत करने वाली सच्चाइयों का सामना कैसे करना है, तो मैं अपनी माँ की बताई विधि के अनुसार, समस्या से संबंधित प्रमुख बातें, उन बातों से संबंधित कार्यवाहियाँ, और उनके संभावित परिणाम लिख लिया करती थी। उस पृष्ठ पर अपने मन की बातें लिख लेने के पश्चात, मैं उस समस्या से थोड़ा सा पीछे हटकर उसे अधिक वास्तविक स्वरूप में देखने पाती थी, क्योंकि तब मेरी भावनाएँ मेरे दृष्टिकोण को प्रभावित नहीं करने पातीं थीं।

      जिस प्रकार से पृष्ठ पर अपने विचारों को लिखने के द्वारा मुझे समस्याओं के लिए एक नया दृष्टिकोण प्राप्त होता है, वैसे ही परमेश्वर के सामने प्रार्थना में अपने हृदयों को उंडेलने से हमें उस बात के लिए उसके दृष्टिकोण और उसकी सामर्थ्य का अंदाजा होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा हिजकिय्याह ने भी यही किया, जब एक प्रबल शत्रु ने उसे एक चुनौतीपूर्ण पत्र लिखा। अश्शूरियों ने यरूशलेम को वैसे ही नाश कर डालने की धमकी भेजी थी जैसे कि वे अनेकों अन्य राष्ट्रों को कर चुके थे। राजा हिजकिय्याह ने वह धमकी का पत्र ले जाकर प्रभु परमेश्वर के सम्मुख रख दिया, और प्रार्थनापूर्वक उसे तथा लोगों को बचाने का निवेदन किया जिससे सँसार के लोग जान सकें कि सच्चा परमेश्वर केवल एक ही हैं (2 राजाओं 19:19)।

      हम जब भी किसी ऐसी परिस्थिति का सामना करें जिससे घबराहट, भय, या उससे पार पाने में अपनी असमर्थता का बोध हो, तो हम राजा हिजकिय्याह द्वारा किए गए का अनुसरण करें, और सीधे प्रभु परमेश्वर के सामने जाएँ। उसके समान हम भी अपनी समस्या प्रभु के सम्मुख रख सकते हैं, और उसपर भरोसा रख सकते हैं कि वह हमारे बेचैन हृदयों को शान्त करेगा, हमें सही दृष्टिकोण प्रदान करगा और हमारा मार्गदर्शन करेगा। - कर्स्टन होल्मबर्ग

समस्याओं के समय में परमेश्वर हमारा सबसे उत्तम सहायक होता है।

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा। - भजन 50:15

बाइबल पाठ: 2 राजाओं 19: 9-19
2 Kings 19:9 और जब उसने कूश के राजा तिर्हाका के विष्य यह सुना, कि वह मुझ से लड़ने को निकला है, तब उसने हिजकिय्याह के पास दूतों को यह कह कर भेजा,
2 Kings 19:10 तुम यहूदा के राजा हिजकिय्याह से यों कहना: तेरा परमेश्वर जिसका तू भरोसा करता है, यह कह कर तुझे धोखा न देने पाए, कि यरूशलेम अश्शूर के राजा के वश में न पड़ेगा।
2 Kings 19:11 देख, तू ने तो सुना है अश्शूर के राजाओं ने सब देशों से कैसा व्यवहार किया है उन्हें सत्यानाश कर दिया है। फिर क्या तू बचेगा?
2 Kings 19:12 गोजान और हारान और रेसेप और तलस्सार में रहने वाले एदेनी, जिन जातियों को मेरे पुरखाओं ने नाश किया, क्या उन में से किसी जाति के देवताओं ने उसको बचा लिया?
2 Kings 19:13 हमात का राजा, और अर्पाद का राजा, और समवैंम नगर का राजा, और हेना और इव्वा के राजा ये सब कहां रहे? इस पत्री को हिजकिय्याह ने दूतों के हाथ से ले कर पढ़ा।
2 Kings 19:14 तब यहोवा के भवन में जा कर उसको यहोवा के साम्हने फैला दिया।
2 Kings 19:15 और यहोवा से यह प्रार्थना की, कि हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा! हे करूबों पर विराजने वाले ! पृथ्वी के सब राज्यों के ऊपर केवल तू ही परमेश्वर है। आकाश और पृथ्वी को तू ही ने बनाया है।
2 Kings 19:16 हे यहोवा! कान लगाकर सुन, हे यहोवा आंख खोल कर देख, और सन्हेरीब के वचनों को सुन ले, जो उसने जीवते परमेश्वर की निन्दा करने को कहला भेजे हैं।
2 Kings 19:17 हे यहोवा, सच तो है, कि अश्शूर के राजाओं ने जातियों को और उनके देशों को उजाड़ा है।
2 Kings 19:18 और उनके देवताओं को आग में झोंका है, क्योंकि वे ईश्वर न थे; वे मनुष्यों के बनाए हुए काठ और पत्थर ही के थे; इस कारण वे उन को नाश कर सके।
2 Kings 19:19 इसलिये अब हे हमारे परमेश्वर यहोवा तू हमें उसके हाथ से बचा, कि पृथ्वी के राज्य राज्य के लोग जान लें कि केवल तू ही यहोवा है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 148-150
  • 1 कुरिन्थियों 15:29-58



सोमवार, 24 अगस्त 2015

सहायक


   ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली जिमनास्ट, गैब्बी डगलस ने 2012 के लंडन खेलों में दो स्वर्णपदक जीतने के बाद घोषणा करी: "परमेश्वर आपको कभी नहीं छोड़ेगा। वह सदा आपके साथ रहेगा।"

   कभी कभी किसी खिलाड़ी द्वारा इस प्रकार के कथन कहे जाने का गलत अर्थ निकाल लिया जाता है; लोग समझते हैं कि खिलाड़ी कह रहा है कि क्योंकि परमेश्वर मेरे साथ है इसलिए मैं कभी हार नहीं सकता! किंतु यदि हम परमेश्वर के वचन बाइबल में से भजन 118:5-6 को देखें तो हमें वास्तविक स्थिति, और गैब्बी के कथन का सही अर्थ पता चलता है। वहाँ भजनकार ने लिखा, "मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया। यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?" (भजन 118:5-6) - यहाँ स्पष्ट है कि भजन के लेखक का इस कथन से तात्पर्य है कि जब भी संकट हमारे जीवन में आएगा, प्रेम और दया से भरा हुआ परमेश्वर सदा हमारा ध्यान रखेगा, हमें आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाएगा।

   हम उस साहसी ओलंपिक विजेता से सीख ले सकते हैं। जब भी संकट आएं, अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगे, हमें अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति भारी लगने लगे, गैब्बी की बात ध्यान रखें: "परमेश्वर आपको कभी नहीं छोड़ेगा।" यदि हमारा कोई प्रीय रिश्ता टूटने लगे, या अन्य कोई परेशानी आ जाए, स्थिति चाहे कोई भी हो, मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण हमें निश्चय है कि हमारी सहायता कहाँ से आएगी - परमेश्वर हमारा सर्वदा उपलब्ध और हमारे पक्ष में कार्यरत सहायक है। - डेव ब्रैनन


हर परीक्षा और संघर्ष में परमेश्वर हमारे साथ है।

संकट के समय मैं ने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली। - भजन 120:1

बाइबल पाठ: भजन 118:1-6
Psalms 118:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 118:2 इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:3 हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:4 यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:5 मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया। 
Psalms 118:6 यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 116-118
  • 1 कुरिन्थियों 7:1-19


गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

संकट स्थल


   जून 10, 1770 के दिन ब्रिटिश नाविक जेम्स कुक का जहाज़ ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी तट के समीप पानी के नीचे छिपी चट्टानों से टकराया। उसने अपना जहाज़ उन चट्टानों से निकालकर और गहरे पानी में जाने का प्रयास किया किंतु फिर से उसका जहाज़ पानी में छिपी चट्टनों से टकराया, और इस बार के टकराने से जहाज़ लगभग डूबने की स्थिति में आ गया। इस अनुभव को जहाज़ के प्रतिदिन के यात्रा-विवरण में दर्ज करते समय जेम्स ने लिखा, "उस उत्तरी बिन्दु को संकट स्थल नाम दिया क्योंकि वहीं से हमारे दुखों का आरंभ हुआ।"

   हम में से बहुतेरों ने अपने जीवनों में ऐसे संकटों का सामना किया है जो फिर अन्य संकटों के आने का आरंभ बन गए; जैसे किसी प्रीय जन की मृत्यु, कोई अनचाहा तलाक, लगातार गिरती हुई सेहत इत्यादि बातों जैसी अन्य कोई भी बात इस सूचि का भाग हो सकते हैं। यद्यपि ये संकट हमारे लिए भी ’संकट स्थल’ अर्थात अन्य दुखों का आरंभ हो सकते हैं, तो भी हम मसीही विश्वासियों को यह निश्चय है कि परमेश्वर हर बात पर सर्वे-सर्वा है तथा हमारी प्रत्येक परिस्थिति का नियंत्रक भी है। वह संकट और दुखः के समयों का उपयोग हमारे जीवनों में लचीलापन, अर्थात सभी परिस्थितियों में स्थिर बने रहने का गुण विकसित करने के लिए करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब नाम का परमेश्वर का एक दास लिखता है, "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है" (याकूब 1:2-3)। यहाँ जिस शब्द का अनुवाद ’धीरज’ किया गया है, मूल यूनानी भाषा में उस शब्द का अर्थ सहन शक्ति अथवा स्थिर बने रहने की सामर्थ भी होता है।

   अपने जीवन में जीवन परिवर्तित कर देने वाली परिस्थितियों का सामना करते समय यह कभी नहीं भूलें कि परमेश्वर नियंत्रण में है तथा आपके जीवन में कार्यरत भी है। वह आपके ’संकट स्थल’ वाले अनुभवों का उपयोग आपके चरित्र को बनाने एवं निखारने के लिए करता है और उसका यह वायदा है कि उन समयों में वह आपको उनके लिए आवश्यक अनुग्रह तथा सामर्थ भी देगा (2 कुरिन्थियों 12:9)। - डेनिस फिशर


संकट की शरद ऋतु में ही विश्वास का सर्वोत्तम विकास होता है। - रदरफोर्ड

और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। - 2 कुरिन्थियों 12:9 

बाइबल पाठ: याकूब 1:1-8
James 1:1 परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे। 
James 1:2 हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो 
James 1:3 तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। 
James 1:4 पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
James 1:5 पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी। 
James 1:6 पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। 
James 1:7 ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा। 
James 1:8 वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31
  • लूका 13:23-35


शनिवार, 17 जनवरी 2015

संकट


   मुझे खुशी थी कि वर्ष के अन्तिम दिन भी समाप्त होने लगे हैं, क्योंकि इस वर्ष में मैंने बहुत दुख, बिमारी और उदासी को देखा था। इसलिए मैं नव-वर्ष का स्वागत पूरे ज़ोर-शोर के साथ करने को तैयार थी। लेकिन नए वर्ष के पहले महीने के साथ ही एक के बाद एक उदासी बढ़ाने वाले समचारों ने भी आना आरंभ कर दिया। मेरे कई मित्रों के माता-पिता में से कोई जाता रहा; मेरे पिता के भाई निद्रा में ही जाते रहे; कुछ मित्रों को पता चला कि उन्हें कैंसर है; एक सहकर्मी का भाई, तथा एक मित्र का पुत्र, अनापक्षित दुर्घटनाओं में जाते रहे। बीते वर्ष के साथ दुख भरे समयों का अन्त तो नहीं हुआ, वरन नया वर्ष और भी दुखों की बाढ़ ले आया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 16:33 में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "संसार में तुम्हें क्लेष होता है", अर्थात क्लेषों का आना अवश्यंभावी हैं। हम मसीही विश्वासी जो परमेश्वर की सनतान हैं, हम भी क्लेषों से बचे हुए नहीं हैं; परमेश्वर ने हमारे लिए भी आरामदेह जीवन, समृद्धि एवं संपन्नता और अच्छे स्वास्थ्य की प्रतिज्ञा नहीं करी है। लेकिन जो प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हम से करी है वह यह है कि हमारे प्रत्येक संकट और क्लेष में वह हमारे साथ होगा। यशायाह 43:2 में परमेश्वर ने कहा कि "जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी"; अर्थात प्रत्येक खतरनाक परिस्थिति में वह हमारी रक्षा करेगा, हमारे साथ बना रहेगा। जिन संकटों और क्लेषों से होकर हम निकलते हैं, उनमें पूरे होने वाले परमेश्वर के उद्देश्यों को चाहे हम ठीक से समझने ना पाएं, लेकिन परमेश्वर सदा हमारे साथ है, और क्योंकि हम उसके प्रेम तथा हृदय को जानते हैं इसलिए उस पर भरोसा रख सकते हैं।

   क्योंकि हमारा परमेश्वर अत्यन्त प्रेमी परमेश्वर है, और "...न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:38-39) इसलिए जब संकट और क्लेष आएं तो वह भी उनमें हमारे साथ रहेगा, और उनमें होकर भी हमारे लिए भला ही उत्पन्न करेगा (रोमियों 8:28)। - सिंडी हैस 
कैस्पर


विश्वास का अर्थ है चाहे हमें कुछ सुनाई या दिखाई ना भी दे, तो भी भरोसा बनाए रखना कि परमेश्वर हमारे साथ ही है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ:  यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



सोमवार, 12 मई 2014

पुकारें


   कातुशिका होकुसई जापान के इतिहास के सबसे यशस्वी और बहुतायत से चित्र बनाने वाले कलाकारों में गिने जाते हैं। सन 1826 से सन 1833 तक, जब उनकी आयु मध्य 60 तथा आरंभिक 70 के मध्य थी, उन्होंने अपने सबसे विख्यात कृति बनाई - लकड़ी के सांचों से रंगीन चित्रों की श्रंखला जिसका शीर्षक था, फूजी पर्वत के 36 दृश्य। इन चित्रों में से एक जो बहुत विख्यात हुआ वह था "The Great Wave off Kanagaawa" (कानागावा तट के निकट विशाल लहर)। उन्होंने यह चित्र उस समय बनाया जब वे आर्थिक और भावनात्मक संघर्ष के दौर से हो कर निकल रहे थे। इस चित्र में एक बहुत ऊँची दीवार के समान समुद्र की लहर दिखाई गई है, लहर के सिरे पर पंजों के समान दिखने वाला फेन है जो कि लहर के नीचे यात्रियों से भरी तीन छोटी नावों पर गिरने को तैयार है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 में भी समुद्र के जोखिम में फंसे लोगों का वर्णन दिया है। वे लहरों पर तैरते हुए एक पल में आकाश की ऊँचाईयों पर तो दुसरे ही पल में समुद्र की गहराईयों में उतर आते हैं, जिससे उनके जी में जी नहीं रहता। तब वे सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारते हैं, परमेश्वर उनकी पुकार सुनकर लहरों को शान्त करता है और उन्हें उनके गन्तव्य तक सुरक्षित पहुँचा देता है।

   जब हम जीवन कि कठिनाईयों का सामना कर रहे होते हैं तो सहायता, मार्गदर्शन और सांत्वना के लिए हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रीया अन्य मनुष्यों की ओर देखने की होती है। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि वे मनुष्य भी तो हमारे समान ही जीवन की परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं, उन्हें भी हमारे समान ही कठिनाईयों और जोखिमों का सामना करना होता है। केवल परमेश्वर ही है जो जीवन रूपी नाव और परिस्थितियों रूपी समुद्र से बाहर है, उनके ऊपर है, तथा उन पर नियंत्रण रखने की सामर्थ रखता है। वह ही है जो परिस्थितियों के समुद्र को शांत कर के हमें गन्तव्य तक भली भांति पहुँचा सकता है। क्या आप भी जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं? परमेश्वर प्रभु यीशु को विश्वास के साथ पुकारें, अपने जीवन की बाग-डोर उसके हाथ में सौंप दें और निश्चिंत हो जाएं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हम उस परमेश्वर की आराधना करते हैं जो हमारी हर समस्या से बड़ा है तथा हमारे जीवन की हर बात को नियंत्रित कर सकता है।

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा। - भजन 50:15

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मतवाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। 
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 4-7