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Sunday, September 13, 2015

अनुकर्णीय


   जब मैं अपने पिता के बारे में सोचती हूँ तो मुझे यह कथन स्मरण हो आता है: "उन्होंने मुझे कहा नहीं कि जीवन कैसे जीना है; उन्होंने मुझे जीवन जी कर दिखाया।" मेरी युवाव्यस्था में मैंने अपने पिता को परमेश्वर के साथ चलते हुए देखा। वे प्रति इतवार प्रातः की चर्च सभा में सम्मिलित होते थे, और वहाँ परमेश्वर के वचन बाइबल का व्यसकों को अध्ययन करवाते थे, चर्च में आए पैसे के हिसाब में सहायता करते थे, और चर्च का अगुवा होने की सभी ज़िम्मेदारियाँ निभाते थे। चर्च के बाहर वे नियमित रीति से बाइबल अध्ययन करते थे और बाइबल तथा सुसमाचार के बारे में विश्वासयोग्यता के साथ चर्चा किया करते थे। मैंने उन्हें अपने कार्यों के द्वारा परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए देखा।

   बाइबल में यहूदा के राजा आसा का वृतान्त आया है, जिसने अपने जीवन में परमेश्वर के प्रति अपने समर्पण और भक्ति को अपना आदर्श बनाया (2 इतिहास 14:2)। उसने अपने राज्य में से मूर्तियों को हटवाया, परमेश्वर की वेदी को पुनःस्थापित किया तथा अपनी प्रजा के लोगों की परमेश्वर के साथ वाचा बाँधने में अगुवाई करी (2 इतिहास 15:8-12)। आसा के पुत्र यहोशापात ने भी अपने पिता का अनुसरण किया और "वह अपने पिता के परमेश्वर की खोज में लगा रहता था और उसी की आज्ञाओं पर चलता था..." (2 इतिहास 17:4)। यहोशापात ने भी अपने राज्य से मूर्तिपूजा को साफ किया (पद 6), तथा परमेश्वर की बातों को प्रजा को सिखाने के लिए याजकों और लेवियों को यहूदा के सभी नगरों में भेजा (पद 7-9)।

   यहोशापात का शासन काल उसके पिता के शासन काल के समान था; यहोशापात ने अपने पिता आसा के भक्तिपूर्ण उदाहरण का संपूर्ण रीति से अनुकरण किया। लेकिन इस से भी बढ़कर यह था कि वह परमेश्वर की बातों में लौलीन हो गया, "यहोवा के मार्गों पर चलते चलते उसका मन मगन हो गया..." (पद 6)। आज यदि आप अनुकरण के लिए किसी उदाहरण को ढूँढ़ रहे हैं, तो परमेश्वर के वचन बाइबल में आपको अनेक उदाहरण मिल जाएंगे; सर्वोत्त्म उदाहरण है हमारे पिता परमेश्वर का, जो अनुकरण के सर्वथा योग्य हमारा पिता है।


जब हम परमेश्वर को अपना पिता कहते हैं और उसके पुत्र के समान जीवन व्यतीत करते हैं, हम अपने परमेश्वर का आदर करते हैं।

और आसा ने वही किया जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में अच्छा और ठीक था। - 2 इतिहास 14:2

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 17:1-10
2 Chronicles 17:1 और उसका पुत्र यहोशापात उसके स्थान पर राज्य करने लगा, और इस्राएल के विरुद्ध अपना बल बढ़ाया। 
2 Chronicles 17:2 और उसने यहूदा के सब गढ़ वाले नगरों में सिपाहियों के दल ठहरा दिए, और यहूदा के देश में और एप्रैम के उन नगरों में भी जो उसके पिता आसा ने ले लिये थे, सिपाहियों की चौकियां बैठा दीं। 
2 Chronicles 17:3 और यहोवा यहोशापात के संग रहा, क्योंकि वह अपने मूलपुरुष दाऊद की प्राचीन चाल सी चाल चला और बाल देवताओं की खोज में न लगा। 
2 Chronicles 17:4 वरन वह अपने पिता के परमेश्वर की खोज में लगा रहता था और उसी की आज्ञाओं पर चलता था, और इस्राएल के से काम नहीं करता था। 
2 Chronicles 17:5 इस कारण यहोवा ने रज्य को उसके हाथ में दृढ़ किया, और सारे यहूदी उसके पास भेंट लाया करते थे, और उसके पास बहुत धन और उसका वैभव बढ़ गया। 
2 Chronicles 17:6 और यहोवा के मार्गों पर चलते चलते उसका मन मगन हो गया; फिर उसने यहूदा से ऊंचे स्थान और अशेरा नाम मूरतें दूर कर दीं। 
2 Chronicles 17:7 और उसने अपने राज्य के तीसरे वर्ष में बेन्हैल, ओबद्याह, जकर्याह, नतनेल और मीकायाह नामक अपने हाकिमों को यहूदा के नगरों में शिक्षा देने को भेज दिया। 
2 Chronicles 17:8 और उनके साथ शमायाह, नतन्याह, जबद्याह, असाहेल, शमीरामोत, यहोनातान, अदोनिय्याह, तोबिय्याह और तोबदोनिय्याह, नाम लेवीय और उनके संग एलीशामा और यहोराम नामक याजक थे। 
2 Chronicles 17:9 सो उन्होंने यहोवा की व्यवस्था की पुस्तक अपने साथ लिये हुए यहूदा में शिक्षा दी, वरन वे यहूदा के सब नगरों में प्रजा को सिखाते हुए घूमे। 
2 Chronicles 17:10 और यहूदा के आस पास के देशों के राज्य राज्य में यहोवा का ऐसा डर समा गया, कि उन्होंने यहोशापात से युद्ध न किया।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 16-18
  • 2 कुरिन्थियों 6