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Tuesday, July 19, 2016

विश्वासयोग्य


   मेरे दादाजी को कहानियाँ सुनाने का शौक था, और मुझे कहानियाँ सुनने का। उनकी कहानियाँ दो प्रकार की होती थीं, कालपनिक किस्से - जिनमें सत्य का थोड़ा सा अंश तो होता था लेकिन वे जितनी बार सुनाई जातीं उतनी बार उनमें कुछ बदल जाता था, तथा सच्ची कहानियाँ - जो वास्तविक घटनाएं होती थीं और जिनके तथ्य कभी नहीं बदलते थे चाहे उन्हें वे कितनी ही बार क्यों ना सुनाएं। एक दिन मेरे दादाजी ने एक ऐसी कहानी सुनाई जिसके सत्य होने को मान पाना मुझे बहुत कठिन लग रहा था, इसलिए मैंने तुरंत कहा यह कालपनिक है, लेकिन दादाजी ने ज़ोर देकर कहा कि नहीं यह वास्तविक है। यद्यपि जितनी बार उन्होंने उसे सुनाया, उसमें कोई बदलाव नहीं आया, फिर भी उसकी वास्तविकता को मान लेना मुझे कठिन ही लगता रहा।

   एक दिन मैं रेडियो पर एक कार्यक्रम सुन रहा था, और उस कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता ने वही कहानी वैसे ही सुनाई जैसे दादाजी सुनाया करते थे, और दादाजी की वह कहानी मेरे लिए तुरंत कालपनिक से वास्तविक बन गई। वह एक यादगार और मर्मसपर्शी पल था जिसमें दादाजी मेरे लिए और भी अधिक विश्वासयोग्य हो गए थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के कभी ना बदलने वाले स्वभाव के बारे में लिखकर (भजन 102:27) हमें उसकी इसी विश्वासयोग्यता की दिलासा दी है। विश्वासयोग्यता का यही भाव इब्रानियों 13:8 में इन शब्दों में कहा गया है: "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है।" परमेश्वर का सदा विश्वासयोग्य रहना हमारे हृदयों को प्रतिदिन के जीवन में आने वाली परीक्षाओं में दिलासा देता है, हमारी हिम्मत बंधाता है, हमें स्मरण करवाता है कि हमारा कभी ना बदलने वाला, सदा विश्वासयोग्य परमेश्वर पिता इस परिवर्तनशील और अव्यवस्थित दिखने वाले संसार पर भी अपना नियंत्रण बनाए हुए है और अन्ततः वही और उसकी इच्छा ही सर्वोपरी तथा शिरोमणी होगी। - रैंडी किलगोर


जीवन की आंधियों के समय में परमेश्वर के अपरिवर्तनशील होने की
 शांतिदायक बयार को अपने अन्दर प्रवाहित होने दें।

यहोवा, जो इस्राएल का राजा है, अर्थात सेनाओं का यहोवा जो उसका छुड़ाने वाला है, वह यों कहता है, मैं सब से पहिला हूं, और मैं ही अन्त तक रहूंगा; मुझे छोड़ कोई परमेश्वर है ही नहीं। - यशायाह 44:6

बाइबल पाठ: भजन 102:18-28
Psalms 102:18 यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी। 
Psalms 102:19 क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि कर के स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है, 
Psalms 102:20 ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होने वालों के बन्धन खोले; 
Psalms 102:21 और सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन किया जाए, और यरूशलेम में उसकी स्तुति की जाए; 
Psalms 102:22 यह उस समय होगा जब देश देश, और राज्य राज्य के लोग यहोवा की उपासना करने को इकट्ठे होंगे।
Psalms 102:23 उसने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया। 
Psalms 102:24 मैं ने कहा, हे मेरे ईश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले, मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे! 
Psalms 102:25 आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है। 
Psalms 102:26 वह तो नाश होगा, परन्तु तू बना रहेगा; और वह सब कपड़े के समान पुराना हो जाएगा। तू उसको वस्त्र की नाईं बदलेगा, और वह तो बदल जाएगा; 
Psalms 102:27 परन्तु तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त नहीं होने का। 
Psalms 102:28 तेरे दासों की सन्तान बनी रहेगी; और उनका वंश तेरे साम्हने स्थिर रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40