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Tuesday, November 15, 2016

सचेत


   सन 2002 में 31.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर की लॉटरी जीतने के बाद एक आनन्दित व्यवसायी ने उस पैसे के सदुपयोग के लिए उच्च अभिलाषाएं व्यक्त करीं। वह दान-धर्म के कार्य करने के लिए संस्था स्थापित करने, बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को वापस काम पर रखने और परिवार के लिए अच्छे कार्य करने कि बातें करता था। लॉटरी जीतने के समय वह धनी था, उसने पत्रकारों से कहा कि यह धन जीतना उसे बदलेगा नहीं।

   कुछ वर्ष पश्चात उसके बारे में पता लगाकर लिखे गए एक लेख ने इससे बिलकुल भिन्न ही स्थिति दिखाई। सबसे बड़ी लॉटरी के जीतने के पश्चात वह कानूनी समस्याओं में पड़ गया, उसने अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा गवाँ दी, और जुए में सारा धन हार गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आगूर नामक एक विचारशील व्यक्ति ने ऐसी हृदय-विदारक परिस्थितियों से संबंधित कुछ बातें लिखीं। अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रियाओं के कारण झुका दिए गए (नीतिवचन 30:2-3) आगूर ने बहुत अधिक अथवा बहुत कम संपदा में होने के बारे में लिखा। उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी, "व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार कर के कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खो कर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं" (नीतिवचन 30:8-9)।

   आगूर ने बहुतायत और दरिद्रता के, तथा अपनी ही प्रवृतियों के कारण जीवन में आने वाली चुनौतियों को देखा था। ये सभी बातें मिलकर हमें हमारे प्रभु पर हर बात, हर परिस्थिति में निर्भर रहने के लिए प्रेरित करती हैं, जिसने हमें प्रार्थना में कहना सिखाया, "हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे" (मत्ती 6:11), तथा इनमें से प्रत्येक बात हमें सचेत रहने का कारण देती है। - मार्ट डिहॉन


असंतोष धनी लोगों को निर्धन, तथा संतोष निर्धनों को धनी बना देता है।

पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए। पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। - 1 तिमुथियुस 6:6-9

बाइबल पाठ नीतिवचन 30:1-9
Proverbs 30:1 याके के पुत्र आगूर के प्रभावशाली वचन। उस पुरूष ने ईतीएल और उक्काल से यह कहा, 
Proverbs 30:2 निश्चय मैं पशु सरीखा हूं, वरन मनुष्य कहलाने के योग्य भी नहीं; और मनुष्य की समझ मुझ में नहीं है। 
Proverbs 30:3 न मैं ने बुद्धि प्राप्त की है, और न परमपवित्र का ज्ञान मुझे मिला है। 
Proverbs 30:4 कौन स्वर्ग में चढ़ कर फिर उतर आया? किस ने वायु को अपनी मुट्ठी में बटोर रखा है? किस ने महासागर को अपने वस्त्र में बान्ध लिया है? किस ने पृथ्वी के सिवानों को ठहराया है? उसका नाम क्या है? और उसके पुत्र का नाम क्या है? यदि तू जानता हो तो बता! 
Proverbs 30:5 ईश्वर का एक एक वचन ताया हुआ है; वह अपने शरणागतों की ढाल ठहरा है। 
Proverbs 30:6 उसके वचनों में कुछ मत बढ़ा, ऐसा न हो कि वह तुझे डांटे और तू झूठा ठहरे।
Proverbs 30:7 मैं ने तुझ से दो वर मांगे हैं, इसलिये मेरे मरने से पहिले उन्हें मुझे देने से मुंह न मोड़: 
Proverbs 30:8 अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। 
Proverbs 30:9 ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार कर के कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खो कर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19