ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

सचेत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सचेत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

सचेत और सतर्क

 

          मेरी परवरिश गर्म दक्षिणी शहरों में हुई थी, इसलिए जब में उत्तरी बर्फीले क्षेत्रों में रहने लगी, तो मुझे यह सीखने के लिए समय लगा कि लम्बे बर्फीले मौसम में किस प्रकार सावधानी के साथ गाड़ी चलानी होती है। मेरी पहली कठिन सर्दियों में मैं तीन बार बर्फ के टीलों में फँस गई। लेकिन कई वर्ष के अभ्यास के बाद, मैं बर्फीली स्थितियों में भी गाड़ी अच्छे से चला लेने में आश्वस्त अनुभव करने लगी – कुछ आवश्यकता से अधिक आश्वस्त हो गई। परिणामस्वरूप, मैं सतर्क रहने की उपेक्षा करने लगी, और एक दिन मेरी गाड़ी जमी हुई बर्फ पर फिसल गई और टेलीफोन के खम्भे से जा टकराई।

          सचेत और सतर्क रहने की बजाए, मैं असावधान होकर ‘स्वचालितसी होकर गाड़ी चलाने लग गई थी, और यह दुर्घटना हो गई। सौभाग्यवश किसी को चोट तो नहीं आई, लेकिन उस दिन मुझे एक महत्वपूर्ण शिक्षा मिल गई – मुझे एहसास हो गया कि आश्वस्त होकर सचेत न रहने का क्या परिणाम हो सकता है।

          हमारे आत्मिक जीवनों में भी हमें इसी प्रकार से सचेत और सतर्क रहना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस मसीही विश्वासियों को सचेत करता है कि वे असावधान न हो जाएँ, वरन सचेत बने रहें (1 पतरस 5:8)। शैतान सदा सक्रिय रहता है कि हम मसीही विश्वासियों को हानि पहुँचाए; इसलिए हमें भी सचेत और सतर्क रहना है कि हम उसके प्रलोभनों में न फँस जाएँ और अपने विश्वास में दृढ़ होकर खड़े रहें (पद 9)।

          लेकिन यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे हमें अपनी ही शक्ति और योग्यता के द्वारा करना है। परमेश्वर ने हम से यह वायदा किया है कि वह सदा हमारे साथ बना रहेगा – हमारे दुखों और परेशानियों में भी, और हमें “सिद्ध, स्थिर और बलवंत” बनाएगा (पद 10)। उसकी सामर्थ्य और मार्गदर्शन के द्वारा हम सचेत और सतर्क बने रहना सीख सकते हैं, और शैतान की चालाकियों पर विजयी होकर परमेश्वर का अनुसरण कर सकते हैं। - एमी पीटरसन

 

प्रभु मुझे आलसी और लापरवाह होने से बचाकर, सचेत और सतर्क बनाए रखें।


कि शैतान का हम पर दांव न चले, क्योंकि हम उस की युक्तियों से अनजान नहीं। - 2 कुरिन्थियों 2:11

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:6-11

1 पतरस 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए।

1 पतरस 5:7 और अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है।

1 पतरस 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गरजने वाले सिंह के समान इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए।

1 पतरस 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका सामना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं।

1 पतरस 5:10 अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त करेगा।

1 पतरस 5:11 उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 शमूएल 12-13
  • लूका 16

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

सचेत

 

          क्रिसमस की छुट्टियों में हमारा पूरा परिवार, हम पाँचों,रोम घूमने के लिए गए। मुझे नहीं पता कि मैंने कभी इतनी अधिक संख्या में लोगों को एक ही समय पर एक ही स्थान एकत्रित देखा होगा। हम भीड़ में से होकर रास्ता बनाते हुए रोम के विभिन्न दर्शनीय स्थलों को देखते जा रहे थे, और मैं अपने बच्चों को बारंबार सचेत होकर अपने आस-पास का ध्यान रखे रहने के लिए कह रहा था – वे यह ध्यान रखें कि कहाँ पर हैं, उनके आस-पास कौन है, और क्या हो रहा है। हम ऐसे समय में रहते हैं जब अपना इलाका हो या कहीं बाहर का, संसार अब सुरक्षित स्थान नहीं रह गया है। और मोबाइल फोन तथा इयर-फोन्स के उपयोग करते हुए चलने की आदत के कारण, बच्चे हों या वयस्क, बहुत बार उन्हें ध्यान ही नहीं रहता है कि वे कहाँ पर और किस के साथ हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में, फिलिप्पियों 1:9-11 में, उनसे सचेत होकर प्रार्थना करने को कहा। उनके लिए उसकी इच्छा थी कि वे निरंतर अपनी परिस्थिति से संबंधित कौन/क्या/कहाँ की पहचान में बढ़ते चले जाएँ। किन्तु पौलुस की यह इच्छा उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं, वरन एक महान उद्देश्य के संबंध में थी – परमेश्वर के पवित्र लोग मसीह के उस प्रेम के अच्छे भण्डारी बनें, जो उन्होंने प्रभु यीशु से पाया है। वे पहचान सकें कि “क्या सर्वोत्तम है”, “पवित्र एवं निर्दोष” जीवन जीएँ, और उन सदगुणों से भरपूर हो जाएँ जो केवल प्रभु यीशु से ही आ सकते हैं।

          इस प्रकार का जीवन इस बात के प्रति सचेत बने रहने से आता है हमारे जीवन में परमेश्वर कौन है; क्या परमेश्वर पर हर बात के लिए हमारी निरंतर निर्भरता है, क्योंकि परमेश्वर इसी से प्रसन्न होता है; और हर परिस्थिति में सचेत रहते हुए उसके महान प्रेम को कहाँ पर व्यक्त और साझा कर सकते हैं। - जॉन ब्लेज़

 

हे पिता हमें सचेत करें, कि हम आपके प्रेम के सच्चे गवाह बनें।


क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:14-15

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:3-11

फिलिप्पियों 1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं।

फिलिप्पियों 1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं।

फिलिप्पियों 1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो।

फिलिप्पियों 1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा।

फिलिप्पियों 1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो।

फिलिप्पियों 1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं।

फिलिप्पियों 1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।

फिलिप्पियों 1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ।

फिलिप्पियों 1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्तुति होती रहे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 शमूएल 9-11
  • लूका 15:11-32

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

सचेत और सतर्क



      काम करने की मेरी मेज़ हमारे पड़ौस की ओर खुलती है, और उस  स्थान से मैं निकट के पेड़ों पर आने-जाने वाले पक्षियों को नीचे धरती पर आकर चुगते हुए, और कुछ को खिड़की की जाली में फंसे कीड़ों को खाने के लिए आते देख सकता हूँ। वे पक्षी अपने चारों और किसी खतरे के आभास के लिए देखते और सुनते रहते हैं। वे तब ही भोजन करना आरंभ करते हैं जब वे निश्चिन्त हो जाते हैं कि आस-पास कोई ख़तरा नहीं है। तब भी, वे बीच-बीच में भोजन से रुक कर आसपास का किसी भी संभावित खतरे के लिए फिर से आँकलन कर लेते हैं।

      ये पक्षी जिस सतर्कता को दिखाते हैं, वह मुझे स्मरण दिलाती है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम मसीही विश्वासियों को अपने मसीही विश्वास के प्रति सचेत और सतर्क रहने को कहा गया है। हमारा सँसार प्रलोभनों, आकर्षणों और लालचों से भरा हुआ है, जिनका प्रयोग शैतान हमें पथ-भ्रष्ट करने के प्रयासों के लिए करता रहता है, जैसे कि उसने अदन की वाटिका में आदम और हव्वा को बहकाने और पाप में फंसाने के लिए किया था; शैतान की बातों में आकर उन्होंने उस वर्जित फल को देखा कि “उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया” और वे परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के पाप को कर बैठे।

      प्रेरितों ने अपनी पत्रियों में हमें सचेत किया है: पौलुस ने कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा, “जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ” (1 कुरिन्थियों 16:13); पतरस ने भी अपनी पत्री में लिखा, “सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह के समान इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए” (1 पतरस 5:8); और यहूदा ने भी लिखा कि “हे प्रियो, जब मैं तुम्हें उस उद्धार के विषय में लिखने में अत्यन्‍त परिश्रम से प्रयत्न कर रहा था, जिस में हम सब सहभागी हैं; तो मैं ने तुम्हें यह समझाना आवश्यक जाना कि उस विश्वास के लिये पूरा यत्‍न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था” (यहूदा 1:3)।

      अपने दैनिक जीवनों के लिए परिश्रम करते हुए, क्या हम उन बातों के प्रति सचेत रहते हैं जो हमारे लिए हानिकारक हो सकती हैं, हमें फंसा और पाप में गिरा सकती हैं? क्या हम अपने अन्दर आने वाले किसी भी स्वाभिमान अथवा उलझाने वाली लालसा के पनपने के प्रति सतर्क रहते हैं? क्या हम अपनी प्रत्येक इच्छा और लालसा को परमेश्वर के हाथों में समर्पित करके, उसकी इच्छा को सर्वोपरि रखने के लिए प्रयासरत रहते हैं? – लॉरेंस दरमानी


प्रलोभनों और परीक्षाओं से बच कर निकलने का सबसे सुरक्षित तरीका है
 परमेश्वर की आधीनता की ओर भागना।

इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। - इब्रानियों 12:1

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-7
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं।
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया।
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3



शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

सचेत



      अपनी खिड़की से मैं एक 1,700 मीटर ऊँचे पहाड़ को, जिसका नाम सेरो डेल बोरेगो, अर्थात, “भेड़ों का पर्वत” है, देख सकती हूँ। सन 1862 में, फ्रांस की सेना ने मेक्सिको पर आक्रमण किया। शत्रु सेना नीचे ओरिज़बा के केन्द्रीय पार्क में डेरा डाले हुए थी, और मेक्सिको की सेना ने उस पहाड़ के ऊपर मोर्चा संभाला हुआ था। किन्तु मेक्सिको की सेना के सेनापति ने पहाड़ पर चढ़ने के मार्ग की सुरक्षा करने में लापरवाही की। जब मेक्सिको के सैनिक सो रहे थे, फ्रांस के सैनिकों ने उन पर हमला किया और उनमें से 2000 को मार डाला।

      इस से मुझे एक और पहाड़ की याद आती है – परमेश्वर के वचन बाइबल में उल्लेखित जैतून का पर्वत, और उसके तली में स्थित गतसमने का बगीचा, जहाँ प्रभु के साथ आए हुए उसके शिष्य, प्रभु के साथ प्रार्थना में जागते रहने के स्थान पर सो गए थे। प्रभु यीशु ने उनके जागते न रहने, वरन सो जाने के कारण उन्हें उलाहना दिया, “जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है” (मरकुस 14:38)।

      मसीही जीवन यात्रा में सो जाना, अर्थात लापरवाह हो जाना सरला होता है। जब हम इस प्रकार अपनी लापरवाही द्वारा अपने आप को असुरक्षित कर लेते हैं तब शैतान के लिए प्रलोभनों और परीक्षाओं द्वारा हम पर हमला करने का अवसर बन जाता है। जब हम अपने आत्मिक जीवन के कुछ महत्वपूर्ण भाग, जैसे कि प्रार्थना और बाइबल अध्ययन, के प्रति असावधान होते हैं, हम ऊंघने लगते हैं, अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो जाते हैं, और शैतान के हमले के आसान निशाने बन जाते हैं (1 पतरस 5:8)।

      हमें प्रार्थना करते रहने और परमेश्वर के वचन को अपने जीवन में प्राथमिकता देने के द्वारा शैतान के हमलों के प्रति सदा सजग एवँ सचेत रहना चाहिए। यदि हम सचेत रहेंगे, अपने तथा औरों के लिए प्रार्थना करते रहेंगे, तो परमेश्वर का आत्मा हमारे प्रलाभोनों और परीक्षाओं पर जयवंत होने में भी सहायता करता रहेगा। - कीला ओकोआ


मसीह यीशु की शक्ति के सामने शैतान शक्तिहीन है।

सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह के समान इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए। - 1 पतरस 5:8

बाइबल पाठ: मरकुस 14:32-42
Mark 14:32 फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उसने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं।
Mark 14:33 और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा।
Mark 14:34 और उन से कहा; मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो।
Mark 14:35 और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिरकर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए।
Mark 14:36 और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो।
Mark 14:37 फिर वह आया, और उन्हें सोते पाकर पतरस से कहा; हे शमौन तू सो रहा है? क्या तू एक घड़ी भी न जाग सका?
Mark 14:38 जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है।
Mark 14:39 और वह फिर चला गया, और वही बात कहकर प्रार्थना की।
Mark 14:40 और फिर आकर उन्हें सोते पाया, क्योंकि उन की आंखे नींद से भरी थीं; और नहीं जानते थे कि उसे क्या उत्तर दें।
Mark 14:41 फिर तीसरी बार आकर उन से कहा; अब सोते रहो और विश्राम करो, बस, घड़ी आ पहुंची; देखो मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।
Mark 14:42 उठो, चलें: देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 116-118
  • 1कुरिन्थियों 7:1-19



गुरुवार, 19 जुलाई 2018

प्रतीक्षा



      सैन्य आज्ञा, “अंकन समय; कदम ताल” का अर्थ होता है अपने स्थान पर खड़े-खड़े कदम चलाना। यह आगे बढ़ने की चाल में एक सक्रीय विराम है, जिसमें सचेत मन के साथ अगली आज्ञा की प्रतीक्षा की जाती है। प्रतिदिन के जीवन में “अंकन करने” का अर्थ होता है “बिना आगे बढ़े गतिवान होना, सचल होते हुए भी कहीं पहुंचना नहीं, और प्रतीक्षा करते हुए कुछ महत्वपूर्ण नहीं करना।” इससे एक निरुपयोगी, अर्थहीन प्रतीक्षा का अभिप्राय सामने आता है।

      इसकी तुलना में, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रतीक्षा करने का अधिकाँशतः अर्थ होता है, “उत्सुकता से देखना, आशा रखना, और अपेक्षा से देखना।” भजनकार ने बहुत कठिनाईयों का सामना करते हुए लिखा: “हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं। वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे” (भजन 25:2-3)।

      अकसर हमारे पास जिन बातों के लिए हम प्रतीक्षा कर रहे हैं, उनके लिए कोई विकल्प अथवा चुनाव करने के कुछ नहीं होता है – रोग के निदान के लिए की गई चिकित्सीय जाँच की रिपोर्ट, नौकरी के लिए दिए गए साक्षात्कार का परिणाम, किसी प्रिय जन के लौट कर आने की प्रतीक्षा, इत्यादि; परन्तु हम यह निर्णय अवश्य कर सकते हैं कि यह प्रतीक्षा हम किस प्रकार से करेंगे। किसी भय या उदासीनता में समय बिताने के स्थान पर, हम परमेश्वर की उपस्थिति में “कदम ताल” करते रह सकते हैं, प्रतिदिन परमेश्वर से मार्गदर्शन और सामर्थ्य की प्रार्थना करते हुए, जैसा कि भजनकार ने किया: “हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे। मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं” (पद 4-5)। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर की बात जोहना उसमें सक्रीय भरोसा बनाए रखना है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 25:1-15
Psalms 25:1 हे यहोवा मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूं।
Psalms 25:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं।
Psalms 25:3 वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे।।
Psalms 25:4 हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे।
Psalms 25:5 मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं।
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं।
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।
Psalms 25:12 वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? यहोवा उसको उसी मार्ग पर जिस से वह प्रसन्न होता है चलाएगा।
Psalms 25:13 वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा।
Psalms 25:14 यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उस से डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा।
Psalms 25:15 मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40



रविवार, 29 अक्टूबर 2017

सचेत


   बचपन में मैं अपने माता-पिता के साथ अपनी पर-नानी से, जो एक फार्म के निकट रहतीं थीं, मिलने गई। उनके घर का आहता चारों ओर कटीले तारों की बाड़ से घिरा हुआ था, जिसमें बिजली का संचार रहता था, जिससे कि फ़ार्म की गाएं घास चरने के लिए उनके घर के आहते में नहीं गुस आएं। मैंने अपने माता-पिता से बाहर जाकर खेलने की अनुमति माँगी तो उन्होंने अनुमति देते हुए कहा कि मैं बाड़े के निकट सचेत रहूँ, क्योंकि उसे छू लेने से मुझे बिजली का झटका लग जाएगा। दुर्भाग्यवश मैंने उनकी यह चेतावनी नज़रन्दाज़ कर दी और उस बाड़ को छू लिया; तुरंत ही मुझे बिजली का ज़ोर का झटका लगा, ऐसा जो एक गाए को सबक सिखाने लायक था। मैंने तब समझा कि मेरे माता-पिता ने जब मुझे सचेत किया था तो वह मेरी भलाई के लिए था, क्योंकि वे मुझसे प्रेम करते हैं और मुझे किसी हानि में पड़ते हुए देखना नहीं चाहते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई इस्त्राएल की ऐतिहासिक घटनओं में हम पाते हैं कि जब परमेश्वर ने इस्त्राएलियों को मूर्तियाँ बनाते और उनकी उपासना करते हुए देखा, तो उन्हें इसके विरुध्द बारंबार सचेत किया, "और उनके पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने बड़ा यत्न कर के अपने दूतों से उन के पास कहला भेजा, क्योंकि वह अपनी प्रजा और अपने धाम पर तरस खाता था" (2 इतिहास 36:15)। परमेश्वर ने उन से अपने नबी यिर्मयाह द्वारा भी बातें कीं, परन्तु उन इस्त्राएलियों ने उत्तर दिया, "...ऐसा नहीं होने का, हम तो अपनी ही कल्पनाओं के अनुसार चलेंगे और अपने बुरे मन के हठ पर बने रहेंगे" (यिर्मयाह 18:12)। इस कारण परमेश्वर ने उन्हें नबूकद्नेस्सर के हाथ में पड़ने दिया, और नबूकद्नेस्सर ने यरुशलेम को नष्ट कर दिया तथा उसके अधिकांश लोगों को बन्दी बनाकर ले गया।

   हो सकता है कि आज परमेश्वर आपको आपके जीवन के किसी पाप के विषय में सचेत कर रहा है। यदि ऐसा है तो उत्साहित हों, क्योंकि यह इस बात का प्रमाण है कि वह आप से प्रेम करता है (इब्रानियों 12:5-6), और आपको हानि से दूर रखना चाहता है। परमेश्वर ही है जो यह जानता है कि आगे क्या रखा है और आने वाली समस्याओं से हमें सुरक्षित रखना चाहता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की चेतावनियाँ हमारी रक्षा करने के लिए होती हैं, हमें दण्ड देने के लिए नहीं।

और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों के समान दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हिम्मत न छोड़। क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। - इब्रानियों 12:5-6

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 18:1-12
Jeremiah 18:1 यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, उठ कर कुम्हार के घर जा, 
Jeremiah 18:2 और वहां मैं तुझे अपने वचन सुनवाऊंगा। 
Jeremiah 18:3 सो मैं कुम्हार के घर गया और क्या देखा कि वह चाक पर कुछ बना रहा है! 
Jeremiah 18:4 और जो मिट्टी का बासन वह बना रहा था वह बिगड़ गया, तब उसने उसी का दूसरा बासन अपनी समझ के अनुसार बना दिया। 
Jeremiah 18:5 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, हे इस्राएल के घराने, 
Jeremiah 18:6 यहोवा की यह वाणी है कि इस कुम्हार के समान तुम्हारे साथ क्या मैं भी काम नहीं कर सकता? देख, जैसा मिट्टी कुम्हार के हाथ में रहती है, वैसा ही हे इस्राएल के घराने, तुम भी मेरे हाथ में हो। 
Jeremiah 18:7 जब मैं किसी जाति वा राज्य के विषय कहूं कि उसे उखाड़ूंगा वा ढा दूंगा अथवा नाश करूंगा, 
Jeremiah 18:8 तब यदि उस जाति के लोग जिसके विषय मैं ने कह बात कही हो अपनी बुराई से फिरें, तो मैं उस विपत्ति के विषय जो मैं ने उन पर डालने को ठाना हो पछताऊंगा। 
Jeremiah 18:9 और जब मैं किसी जाति वा राज्य के विषय कहूं कि मैं उसे बनाऊंगा और रोपूंगा; 
Jeremiah 18:10 तब यदि वे उस काम को करें जो मेरी दृष्टि में बुरा है और मेरी बात न मानें, तो मैं उस भलाई के विष्य जिसे मैं ने उनके लिये करने को कहा हो, पछताऊंगा। 
Jeremiah 18:11 इसलिये अब तू यहूदा और यरूशलेम के निवासियों यह कह, यहोवा यों कहता है, देखो, मैं तुम्हारी हानि की युक्ति और तुम्हारे विरुध्द प्रबन्ध कर रहा हूँ। इसलिये तुम अपने अपने बुरे मार्ग से फिरो और अपना अपना चालचलन और काम सुधारो। 
Jeremiah 18:12 परन्तु वे कहते हैं, ऐसा नहीं होने का, हम तो अपनी ही कल्पनाओं के अनुसार चलेंगे और अपने बुरे मन के हठ पर बने रहेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 18-19
  • 2 तिमुथियुस 3


मंगलवार, 15 नवंबर 2016

सचेत


   सन 2002 में 31.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर की लॉटरी जीतने के बाद एक आनन्दित व्यवसायी ने उस पैसे के सदुपयोग के लिए उच्च अभिलाषाएं व्यक्त करीं। वह दान-धर्म के कार्य करने के लिए संस्था स्थापित करने, बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को वापस काम पर रखने और परिवार के लिए अच्छे कार्य करने कि बातें करता था। लॉटरी जीतने के समय वह धनी था, उसने पत्रकारों से कहा कि यह धन जीतना उसे बदलेगा नहीं।

   कुछ वर्ष पश्चात उसके बारे में पता लगाकर लिखे गए एक लेख ने इससे बिलकुल भिन्न ही स्थिति दिखाई। सबसे बड़ी लॉटरी के जीतने के पश्चात वह कानूनी समस्याओं में पड़ गया, उसने अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा गवाँ दी, और जुए में सारा धन हार गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आगूर नामक एक विचारशील व्यक्ति ने ऐसी हृदय-विदारक परिस्थितियों से संबंधित कुछ बातें लिखीं। अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रियाओं के कारण झुका दिए गए (नीतिवचन 30:2-3) आगूर ने बहुत अधिक अथवा बहुत कम संपदा में होने के बारे में लिखा। उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी, "व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार कर के कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खो कर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं" (नीतिवचन 30:8-9)।

   आगूर ने बहुतायत और दरिद्रता के, तथा अपनी ही प्रवृतियों के कारण जीवन में आने वाली चुनौतियों को देखा था। ये सभी बातें मिलकर हमें हमारे प्रभु पर हर बात, हर परिस्थिति में निर्भर रहने के लिए प्रेरित करती हैं, जिसने हमें प्रार्थना में कहना सिखाया, "हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे" (मत्ती 6:11), तथा इनमें से प्रत्येक बात हमें सचेत रहने का कारण देती है। - मार्ट डिहॉन


असंतोष धनी लोगों को निर्धन, तथा संतोष निर्धनों को धनी बना देता है।

पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए। पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। - 1 तिमुथियुस 6:6-9

बाइबल पाठ नीतिवचन 30:1-9
Proverbs 30:1 याके के पुत्र आगूर के प्रभावशाली वचन। उस पुरूष ने ईतीएल और उक्काल से यह कहा, 
Proverbs 30:2 निश्चय मैं पशु सरीखा हूं, वरन मनुष्य कहलाने के योग्य भी नहीं; और मनुष्य की समझ मुझ में नहीं है। 
Proverbs 30:3 न मैं ने बुद्धि प्राप्त की है, और न परमपवित्र का ज्ञान मुझे मिला है। 
Proverbs 30:4 कौन स्वर्ग में चढ़ कर फिर उतर आया? किस ने वायु को अपनी मुट्ठी में बटोर रखा है? किस ने महासागर को अपने वस्त्र में बान्ध लिया है? किस ने पृथ्वी के सिवानों को ठहराया है? उसका नाम क्या है? और उसके पुत्र का नाम क्या है? यदि तू जानता हो तो बता! 
Proverbs 30:5 ईश्वर का एक एक वचन ताया हुआ है; वह अपने शरणागतों की ढाल ठहरा है। 
Proverbs 30:6 उसके वचनों में कुछ मत बढ़ा, ऐसा न हो कि वह तुझे डांटे और तू झूठा ठहरे।
Proverbs 30:7 मैं ने तुझ से दो वर मांगे हैं, इसलिये मेरे मरने से पहिले उन्हें मुझे देने से मुंह न मोड़: 
Proverbs 30:8 अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। 
Proverbs 30:9 ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार कर के कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खो कर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19


गुरुवार, 2 जून 2016

सावधानी


   जैमाइका में देखने वाले स्थलों में से मेरा सबसे पसंदीदा स्थल है ओको रियोस - डन्न नदी जल प्रपात का स्थान। उस जल प्रपात को देखना एक ऐसा अद्भुत दृश्य है जिसकी विलक्षण्ता कभी समाप्त नहीं होती। नदी का पानी क्रमवार अनेकों चट्टानों की लंबी श्रंखला पर से होकर बहता हुआ नीचे कैरिबियन सागर की ओर बहता है। दुस्साहसी सैलानी उस प्रपात के मार्ग पर उन गोल चट्टानों और पत्थरों पर नीचे से ऊपर की ओर की एक रोमांचक चढ़ाई का आनन्द भी ले सकते हैं। बहता हुआ पानी, पत्थरों की चिकनी फिसलन भरी सतह, ऊँचाई के खड़े कोण आदि मिलकर इस चढ़ाई को धीमा और खतरनाक बनाते हैं। ऊपर तक पहुँचने के लिए चढ़ने वालों को प्रत्येक कदम देखभाल कर सावधानी से लेना होता है; ज़रा सी चूक से गिर जाने की संभावना लगातार बनी रहती है। सफलता-पूर्वक ऊपर पहुँचने की कुँजी है एकाग्रता तथा सावधानी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में इफसुस के मसीही विश्वासियों को प्रेरित पौलुस ने उनके मसीही विश्वास की यात्रा के संबंध में जो सचेत किया है, मेरे विचार से डन्न नदी के जल-प्रपात की चढ़ाई से बेहतर उसका चित्रण अन्य कोई नहीं हो सकता है। पौलुस ने लिखा, "इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो" (इफिसियों 5:15)। स्पष्ट है कि जीवन मार्ग में हमारे विरोध में आने वाले अनेकों खतरों का सामना करते हुए जब हम ऊँचाईयों पर पहुँचने के लिए चढ़ते हैं तो अपने प्रभु यीशु के मार्गदर्शन में हम अपना प्रत्येक कदम बुद्धिमता एवं सावधानी से उठाएं और फिर उसे वहीं जमाएं जहाँ हमारा प्रभु चाहता है। पौलुस की यह चेतावनी साफ बताती है कि निर्बुद्धि लोग असावधानी से जीवन जीते हैं, किंतु बुद्धिमान लोग हर कदम सचेत और सावधान होकर बढ़ाते हैं जिससे वे ना तो लड़खड़ाएं और ना ही गिरें।

   जब पौलुस हमें कहता है कि हम परमेश्वर का अनुकरण करें (पद 1), तो यह उद्देश्य हमारे सावधानी और प्रेम में होकर चलने से पूरा होता है (पद 2, 15)। प्रत्येक मसीही विश्वासी में निवास करने वाले परमेश्वर के पवित्र-आत्मा की सहायता से हम सावधानी पूर्वक यह यात्रा परमेश्वर की महिमा के लिए पूरी कर सकते हैं। - डेव बैनन

यदि हम परमेश्वर को अपने मन-मस्तिष्क पर राज करने देंगे, 
तो वह हमारे कदमों को अपने सही मार्गों ले जाता रहेगा।

अपने पांव धरने के लिये मार्ग को समथर कर, और तेरे सब मार्ग ठीक रहें। - नीतिवचन 4:26

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:1-17
Ephesians 5:1 इसलिये प्रिय, बालकों की नाईं परमेश्वर के सदृश बनो। 
Ephesians 5:2 और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। 
Ephesians 5:3 और जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। 
Ephesians 5:4 और न निर्लज्ज़ता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन धन्यवाद ही सुना जाएं। 
Ephesians 5:5 क्योंकि तुम यह जानते हो, कि किसी व्यभिचारी, या अशुद्ध जन, या लोभी मनुष्य की, जो मूरत पूजने वाले के बराबर है, मसीह और परमेश्वर के राज्य में मीरास नहीं। 
Ephesians 5:6 कोई तुम्हें व्यर्थ बातों से धोखा न दे; क्योंकि इन ही कामों के कारण परमेश्वर का क्रोध आज्ञा ने मानने वालों पर भड़कता है। 
Ephesians 5:7 इसलिये तुम उन के सहभागी न हो। 
Ephesians 5:8 क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो। 
Ephesians 5:9 (क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धामिर्कता, और सत्य है)। 
Ephesians 5:10 और यह परखो, कि प्रभु को क्या भाता है 
Ephesians 5:11 और अन्धकार के निष्‍फल कामों में सहभागी न हो, वरन उन पर उलाहना दो। 
Ephesians 5:12 क्योंकि उन के गुप्‍त कामों की चर्चा भी लाज की बात है। 
Ephesians 5:13 पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है, वह ज्योति है। 
Ephesians 5:14 इस कारण वह कहता है, हे सोने वाले जाग और मुर्दों में से जी उठ; तो मसीह की ज्योति तुझ पर चमकेगी।
Ephesians 5:15 इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो। 
Ephesians 5:16 और अवसर को बहुमोल समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं। 
Ephesians 5:17 इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्छा क्या है?

एक साल में बाइबल: 

  • 2 इतिहास 17-18
  • यूहन्ना 13:1-20