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Thursday, June 1, 2017

ज्योति


   पेरू देश के एक दौरे के समय, मैं उस पहाड़ी देश में पाई जाने वाली अनेकों गुफाओं में से एक को देखने गया। हमारे मार्गदर्शक ने बताया कि जिस गुफा में हम जा रहे थे वह 9 मील की गहराई तक खोजा जा चुका है, परन्तु वह इससे भी अधिक गहरी है। उस गुफा में उतरते हुए हमने अचंभित करने वाली चमगादड़ें, अंधेरे में विचरण करने वाले पक्षी और चट्टानों की आकर्षक आकृतियाँ देखीं। लेकिन गहराई में उतरते हुए गुफा का अन्धकार विचलित कर देने वाला, लगभग दम घोटने वाला सा हो गया। हमारे वापस सतह पर दिन की ज्योति में आ जाने से मुझे बहुत राहत मिली।

   यह अनुभव मेरे लिए एक यादगार था, कि अंधेरा कितना विचलित कर देने वाला हो सकता है और हमें ज्योति की कितनी अधिक आवश्यकता होती है। हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जिसे पाप ने अंधेरा कर दिया है - ऐसा संसार जो अपने सृष्टिकर्ता के विरुध्द हो गया है। हमें इस अंधकार से निकलने के लिए ज्योति की आवश्यकता है।
   प्रभु यीशु मसीह, जो मानव जाति सहित समस्त सृष्टि को उसके नियत स्वरूप में पुनः बहाल करने आए थे, ने अपने आप को "ज्योति" बताया (यूहन्ना 8:12)। प्रभु ने अपने संसार में आने के उद्देश्य के संबंध में कहा, "मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे" (यूहन्ना 12:46)।

   प्रभु यीशु में ना केवल हमें उध्दार की ज्योति मिलती है, वरन वह एकमात्र ज्योति मिलती है जिसके साथ हम संसार में व्याप्त पाप के अंधकार में भी अपना मार्ग - हमारे लिए परमेश्वर का मार्ग देख सकते हैं, उस पर चल सकते हैं। - बिल क्राउडर


यदि हम ज्योति में चलेंगे तो अंधकार से ठोकर नहीं खाएंगे।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 12:42-50
John 12:42 तौभी सरदारों में से भी बहुतों ने उस पर विश्वास किया, परन्तु फरीसियों के कारण प्रगट में नहीं मानते थे, ऐसा न हो कि आराधनालय में से निकाले जाएं। 
John 12:43 क्योंकि मनुष्यों की प्रशंसा उन को परमेश्वर की प्रशंसा से अधिक प्रिय लगती थी।
John 12:44 यीशु ने पुकारकर कहा, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है। 
John 12:45 और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजने वाले को देखता है। 
John 12:46 मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। 
John 12:47 यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं। 
John 12:48 जो मुझे तुच्‍छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहराने वाला तो एक है: अर्थात जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा। 
John 12:49 क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिसने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं और क्या क्या बोलूं 
John 12:50 और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 15-16
  • यूहन्ना 12:27-50