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रविवार, 3 अगस्त 2025

The Holy Communion - 53 - A Remembrance for Honoring God Given Status & Privileges (2) / प्रभु भोज – 53 - परमेश्वर द्वारा दिए गए आदर और विशेष-अधिकारों की यादगार (2)

 

प्रभु भोज – 53

Click Here for the English Translation

प्रभु की मेज़ - परमेश्वर द्वारा दिए गए आदर और विशेष-अधिकारों की यादगार (2)

पिछले लेख में हमने देखा था कि प्रभु की मेज़ में भाग लेना, प्रभु के शिष्यों को दिया गया एक विशेषाधिकार है; साथ ही हमने यह भी ध्यान किया था कि प्रत्येक विशेषाधिकार एक ज़िम्म्देदारी के साथ आता है। दूसरे शब्दों में, प्रभु का शिष्य, उसके लोग होने, प्रभु की मेज़ में भाग लेने, के साथ ही प्रभु की सेवकाई में संलग्न रहने की ज़िम्मेदारी भी सम्मिलित है। पिछले लेख में हमने देखा था कि शिष्यों को “पृथ्वी के नमक” तथा “जगत की ज्योति” के समान जीना है जिससे लोग उनके स्वर्गीय पिता की महिमा करें (मत्ती 5:13-16)। आज हम प्रभु का शिष्य, अर्थात् प्रभु की मेज़ में भाग लेने वाला होने की कुछ अन्य जिम्मेदारियों के बारे में देखेंगे।

नए नियम के लेखकों के द्वारा, परमेश्वर पवित्र आत्मा की प्रेरणा से लिखी गई कुछ जिम्मेदारियों को देखिये। पौलुस प्रेरित ने, पवित्र आत्मा में होकर मसीही विश्वासियों को याद दिलाया कि वह तथा सभी विश्वासी “मसीह के राजदूत” हैं (2 कुरिन्थियों 5:20), और उन्हें प्रभु परमेश्वर की ओर से संसार के लोगों से प्रभु के लिए बोलना है। प्रेरित यूहन्ना ने लिखा “सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था” (1 यूहन्ना 2:6)। प्रेरित पतरस ने अपने पाठकों को याद दिलाया कि परमेश्वर ने उन्हें कितना उच्च ओहदा और आदर प्रदान किया है “पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो” (1 पतरस 2:9)। वे अपने प्रभु का शिष्य, अर्थात् प्रभु की मेज़ में भाग लेने वाला होने को हल्के में नहीं ले सकते थे, उनकी जिम्मेदारी थी कि “...जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो”। जैसा पतरस ने यहाँ पर कहा है और यूहन्ना ने प्रकाशितवाक्य 1:6 में कहा, प्रत्येक नया जन्म पाया हुआ मसीही विश्वासी, अर्थात प्रभु यीशु मसीह का प्रत्येक शिष्य, परमेश्वर की दृष्टि में, परमेश्वर के लिए याजक है। परमेश्वर के संदेशवाहक होने के नाते, उसके याजक की दो ज़िम्मेदारियाँ होती हैं, “क्योंकि याजक को चाहिये कि वह अपने ओठों से ज्ञान की रक्षा करे, और लोग उसके मुंह से व्यवस्था पूछें, क्योंकि वह सेनाओं के यहोवा का दूत है” (मलाकी 2:7); पहली, उसे “ज्ञान की रक्षा” करनी है; और दूसरी, उसे लोगों को परमेश्वर की व्यवस्था, परमेश्वर के मार्ग सिखाने हैं।

इसलिए प्रभु की मेज़ में भाग लेने की तैयारी करते समय, उसमें सम्मिलित होने वाले प्रत्येक जन को अपनी तथा अपने मसीही जीवन की जाँच (2 कुरिन्थियों 13:5) इन बातों के लिए कर लेनी चाहिए - प्रभु यीशु का शिष्य होने के नाते, क्या मैं उस ओहदे और विशेषाधिकार को याद रखता हूँ, उसका ध्यान रखता हूँ जो प्रभु परमेश्वर ने मुझे प्रदान किया है? उसके द्वारा प्रदान किए गए इस ओहदे और विशेषाधिकार के साथ जुड़ी हुई जिम्मेदारियों का क्या मैं निर्वाह करता हूँ? क्या मैं मसीह के राजदूत, परमेश्वर के याजक, उच्च ओहदा पाए हुए लोग के समान कार्य कर रहा हूँ जिससे कि मेरे कारण लोग परमेश्वर की महिमा करें?

यदि आप एक मसीही विश्वासी हैं, और प्रभु की मेज़ में भाग लेते रहे हैं, तो कृपया अपने जीवन को जाँच कर देख लें कि आप वास्तव में पापों से छुड़ाए गए हैं तथा आप ने अपना जीवन प्रभु की आज्ञाकारिता में जीने के लिए उस को समर्पित किया है। आपके लिए यह अनिवार्य है कि आप परमेश्वर के वचन की सही शिक्षाओं को जानने के द्वारा एक परिपक्व विश्वासी बनें, तथा सभी शिक्षाओं को वचन की कसौटी पर परखने, और बेरिया के विश्वासियों के समान, लोगों की बातों को पहले वचन से जाँचने और उनकी सत्यता को निश्चित करने के बाद ही उनको स्वीकार करने और मानने वाले बनें (प्रेरितों 17:11; 1 थिस्सलुनीकियों 5:21)। अन्यथा शैतान द्वारा छोड़े हुए झूठे प्रेरित और भविष्यद्वक्ता मसीह के सेवक बन कर (2 कुरिन्थियों 11:13-15) अपनी ठग विद्या और चतुराई से आपको प्रभु के लिए अप्रभावी कर देंगे और आप के मसीही जीवन एवं आशीषों का नाश कर देंगे।

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

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 The Holy Communion - 53

English Translation

The Lord’s Table - A Remembrance for Honoring God Given Status & Privileges (2)

In the previous article we had seen that partaking of the Lord’s Table is a privilege that has been granted to the disciples of the Lord; we had also recalled that every privilege comes with responsibilities. In other words, along with being a disciple of the Lord, being His people, participating in the Lord’s Table, is the responsibility of being involved in the Lord’s ministry. In the previous article we had seen that the disciples were to live as “the salt of the earth” and “the light of the world” so that people would glorify their heavenly Father (Matthew 5:13-16). Today, we will consider some other responsibilities of being the Lord’s disciple, being a partaker of the Lord’s Table.

Consider some responsibilities stated by the writers of the New Testament under the inspiration of God the Holy Spirit. The Apostle Paul, through the Holy Spirit, reminds the Christian Believers that he and the Believers, all are “Ambassadors for Christ” (2 Corinthians 5:20), and must speak on behalf of the Lord God to the people of the world. The Apostle John wrote “He who says he abides in Him ought himself also to walk just as He walked” (1 John 2:6). The Apostle Peter reminded his readers that God had given them a highly exalted status, “But you are a chosen generation, a royal priesthood, a holy nation, His own special people, that you may proclaim the praises of Him who called you out of darkness into His marvellous light” (1Peter 2:9). They could not take being the Lord’s disciple, being a partaker of the Lord’s Table lightly, but in accordance with that status and authority, they had to “...proclaim the praises of Him who called you out of darkness into His marvellous light.” As Peter has said here, and John says in Revelation 1:6, every Born-Again Christian Believer, i.e., every disciple of the Lord Jesus, in God’s eyes, is a priest for God. A priest, as the messenger of God, has two functions to fulfil “For the lips of a priest should keep knowledge, And people should seek the law from his mouth; For he is the messenger of the Lord of hosts” (Malachi 2:7); firstly he has to “keep knowledge”, i.e., guard or protect knowledge of God and His Word; and secondly, he should teach God’s law, God’s ways to the people.

Therefore, when preparing to partake of the Lord’s Table, every participant should examine himself, his Christian life and living (2 Corinthians 13:5) for these things - as a disciple of the Lord Jesus, do I bear in mind the unique privilege and authority given to me by the Lord God? Do I fulfil God’s expectations from me in response to the privilege and authority He has bestowed upon me? Am I serving as God’s ambassador, as His priest, as people to whom He has accorded an exalted status so that they may glorify Him?

If you are a Christian Believer and have been participating in the Lord’s Table, then please examine your life and make sure that you are actually a disciple of the Lord, i.e., are redeemed from your sins, have submitted and surrendered your life to the Lord Jesus to live in obedience to Him and His Word. You should also always, like the Berean Believers, first check and test all teachings that you receive from the Word of God, and only after ascertaining the truth and veracity of the teachings brought to you by men, should you accept and obey them (Acts 17:11; 1 Thessalonians 5:21). If you do not do this, the false apostles and prophets sent by Satan as ministers of Christ (2 Corinthians 11:13-15), will by their trickery, cunningness, and craftiness render you ineffective for the Lord and cause severe damage to your Christian life and your rewards.

If you have not yet accepted the discipleship of the Lord Jesus, then to ensure your eternal life and heavenly rewards, take a decision in favor of the Lord Jesus now. Wherever there is surrender and obedience towards the Lord Jesus, the Lord’s blessings and safety are also there. If you are still not Born Again, have not obtained salvation, or have not asked the Lord Jesus for forgiveness for your sins, then you have the opportunity to do so right now. A short prayer said voluntarily with a sincere heart, with heartfelt repentance for your sins, and a fully submissive attitude, “Lord Jesus, I confess that I have disobeyed You, and have knowingly or unknowingly, in mind, in thought, in attitude, and in deeds, committed sins. I believe that you have fully borne the punishment of my sins by your sacrifice on the cross, and have paid the full price of those sins for all eternity. Please forgive my sins, change my heart and mind towards you, and make me your disciple, take me with you." God longs for your company and wants to see you blessed, but to make this possible, is your personal decision. Will you not say this prayer now, while you have the time and opportunity to do so - the decision is yours.

 

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सोमवार, 29 मार्च 2021

ज्योति

 

          हमारे चर्च से मैं और कुछ लोगों का एक समूह, 2015 के ग्रीष्मकाल में अफ्रीका में कीनिया देश के नैरोबी शहर गया। वहाँ हमने जो मथारे नामक एक झुग्गी-झोंपड़ियों की बस्ती में देखा, वह आँखें खोल देने वाला था। हम वहाँ पर एक स्कूल में गए – उसके भवन की दीवारें जंग लगे लोहे की चादरों से बनी थीं, फर्श कच्ची मिट्टी का था, और विद्यार्थियों के बैठने के लिए लकड़ी की बेंचें लगी हुई थीं। लेकिन इस बहुत ही दीन और निर्धन पृष्ठभूमि में एक व्यक्ति था जो अलग ही चमक रहा था।

          वह व्यक्ति, वहाँ की के अध्यापिका थी, जिसका नाम था ब्रिलियंट, और उसका यह नाम उसके स्वभाव के पूर्णतः अनुरूप था। वह प्राथमिक स्तर की कक्षाओं की अध्यापिका थी, और अपने कार्य के लिए जोश और दृढ़ निश्चय से भरी हुई थी। उसने चटकीले रंगीन वस्त्र पहने हुए थे, और उसका स्वरूप तथा वह आनन्द जिसके साथ वह बच्चों को पढ़ा और प्रोत्साहित कर रही थी विस्मित कर देने वाले थे।

          वह चमकदार ज्योति जो ब्रिलियंट ने अपने चारों ओर बिखेर रखी थी, वह उसके समान थी जो परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री में कहा कि वे अपने जीवनों से समाज को दिखाएं। आत्मिक अन्धकार और आवश्यकताओं की पृष्ठभूमि में, मसीही विश्वासियों को जलते हुए दीपकों के समान ज्योति फैलाने वाले बनना था (फिलिप्पियों 2:15)।

          हम मसीही विश्वासियों के लिए दिया गया यह उद्देश्य बदला नहीं है। आज भी, संसार के सभी स्थानों पर, चमकती हुई ज्योतियों की बहुत आवश्यकता है। यह हमारे लिए बहुत प्रोत्साहन की बात है कि हमारा प्रभु स्वयं हमें वह चमकती हुई ज्योति बनाकर उस स्थान पर प्रयोग करता है, जहाँ उसने हमें रखा है (पद 13), जिससे कि हम उसका अनुसरण करने के द्वारा उसकी ज्योति को अपने आस-पास के लोगों में पहुँचाएँ। प्रभु ने हमें अंधियारे संसार में चमकने वाली ज्योति बनाया है, और हमारा यह चमकना परमेश्वर को महिमा देता है (मत्ती 5:14-16)। - आर्थर जैक्सन

 

प्रभु यीशु की ज्योति को प्रतिबिंबित करें और अपने आस-पास के संसार को ज्योतिर्मय करें।


तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:14-16

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:12-18

फिलिप्पियों 2:12 सो हे मेरे प्यारो, जिस प्रकार तुम सदा से आज्ञा मानते आए हो, वैसे ही अब भी न केवल मेरे साथ रहते हुए पर विशेष कर के अब मेरे दूर रहने पर भी डरते और कांपते हुए अपने अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाओ।

फिलिप्पियों 2:13 क्योंकि परमेश्वर ही है, जिस न अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है।

फिलिप्पियों 2:14 सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो।

फिलिप्पियों 2:15 ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो)।

फिलिप्पियों 2:16 कि मसीह के दिन मुझे घमण्ड करने का कारण हो, कि न मेरा दौड़ना और न मेरा परिश्रम करना व्यर्थ हुआ।

फिलिप्पियों 2:17 और यदि मुझे तुम्हारे विश्वास के बलिदान और सेवा के साथ अपना लहू भी बहाना पड़े तौभी मैं आनन्दित हूं, और तुम सब के साथ आनन्द करता हूं।

फिलिप्पियों 2:18 वैसे ही तुम भी आनन्दित हो, और मेरे साथ आनन्द करो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • न्यायियों 7-8 
  • लूका 5:1-16

सोमवार, 4 जनवरी 2021

ज्योति

 

          चाँद के बादलों में छिप जाने से जंगल में स्थित हमारे गाँव पर अंधियारा छा गया। आकाश में बिजली कड़कने लगी, और गरजन की आवाज़ गूँजने लगी। मैं तब बच्चा ही था और जगा हुआ इन सब के कारण भयभीत हो रहा था, मुझे लग रहा था कि बाहर तरह-तरह के भयानक जानवर मुझ पर हमला करने को तैयार खड़े हैं। परन्तु प्रातः होने तक वे सभी आवाज़ें जाती रहीं, सूरज निकल आया, अंधियारा मिट गया, और गर्जन की बजाए चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़ सुनाए देने लगीं। रात की भयावह बातों की तुलना में प्रातः का आनन्द बहुत मनभावन था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों का लेखक इस्राएलियों के एक अनुभव के बारे में लिखता है; उनके मिस्र से निकलकर आने के बाद जब मूसा परमेश्वर से दस आज्ञाएँ लेने सीनै पर्वत पर गया हुआ था, तब वह पर्वत बहुत अंधियारा और आँधी-तूफ़ान से भरा हुआ था, और वे लोग भयभीत होकर छुप गए (निर्गमन 20:18-19)। उनके लिए परमेश्वर की उपस्थिति, उसके द्वारा सप्रेम अपनी व्यवस्था देने के समय में भी अंधियारी और भयावह थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि पापी मनुष्य होने के कारण, वे परमेश्वर के मानकों पर खरे नहीं उतर सकते थे। उनके पाप के कारण वे अन्धकार और भय में थे (इब्रानियों 12:18-21)।

          परन्तु परमेश्वर ज्योति है और उसमें कुछ भी अन्धकार नहीं है (1यूहन्ना 1:5)। इब्रानियों 12 में सीनै पर्वत परमेश्वर की पवित्रता और अनाज्ञाकारिता के हमारे पुराने जीवन का प्रतीक है। जबकि सिय्योन पर्वत की सुन्दरता परमेश्वर के अनुग्रह और “नई वाचा के मध्यस्थ” (पद 22-24) प्रभु यीशु मसीह में मसीही विश्वासी के नए जीवन का प्रतीक है।

          जो कोई भी प्रभु यीशु मसीह के पीछे चलेगा वह “कभी अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा” (यूहन्ना 8:12)। प्रभु यीशु मसीह में होकर हम अपने पुराने जीवन के अन्धकार को तज सकते हैं और प्रभु की ज्योति तथा उसके राज्य की सुन्दरता में चलने के आनन्द का उत्सव मना सकते हैं। - लॉरेंस दरमानी

 

क्या आपने प्रभु की ज्योति में चलने का निर्णय ले लिया है?


उस में जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी। - यूहन्ना 1:4

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:18-24

इब्रानियों 12:18 तुम तो उस पहाड़ के पास जो छूआ जा सकता था और आग से प्रज्वलित था, और काली घटा, और अन्‍धेरा, और आन्धी के पास।

इब्रानियों 12:19 और तुरही की ध्वनि, और बोलने वाले के ऐसे शब्द के पास नहीं आए, जिस के सुनने वालों ने बिनती की, कि अब हम से और बातें न की जाएं।

इब्रानियों 12:20 क्योंकि वे उस आज्ञा को न सह सके, कि यदि कोई पशु भी पहाड़ को छूए, तो पत्थरवाह किया जाए।

इब्रानियों 12:21 और वह दर्शन ऐसा डरावना था, कि मूसा ने कहा; मैं बहुत डरता और कांपता हूं।

इब्रानियों 12:22 पर तुम सिय्योन के पहाड़ के पास, और जीवते परमेश्वर के नगर स्वर्गीय यरूशलेम के पास।

इब्रानियों 12:23 और लाखों स्‍वर्गदूतों और उन पहिलौठों की साधारण सभा और कलीसिया जिन के नाम स्वर्ग में लिखे हुए हैं: और सब के न्यायी परमेश्वर के पास, और सिद्ध किए हुए धर्मियों की आत्माओं।

इब्रानियों 12:24 और नई वाचा के मध्यस्थ यीशु, और छिड़काव के उस लहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 10-12
  • मत्ती 4

रविवार, 15 नवंबर 2020

विकर्षण

 

         इंग्लैंड के विक्टोरियन काल के एक चित्रकार सिगिस्मंड गोएत्ज़े ने अपने समय के लोगों को एक चित्र के द्वारा चौंका दिया। चित्र का शीर्षक था “Despised and Rejected of Men”(मनुष्यों द्वारा तुच्छ जाना तथा तिरस्कार किया हुआ)। इस चित्र में उसने दुःख झेल रहे और दोषी ठहराए गए प्रभु यीशु को, गोएत्ज़े के ही समय के लोगों से घिरा हुआ दिखाया गया है। वे सभी लोग अपनी ही रुचि की बातों – व्यापार, रोमांस, राजनीति, आदि में इतने संलग्न थे कि वे उद्धारकर्ता द्वारा दिए गए बलिदान के प्रति पूर्णतः उदासीन और अनजान थे। मसीह के प्रति उदासीन होने के कारण, उसे घेरे हुई उस भीड़ को, प्रभु यीशु के क्रूस के नीचे एकत्रित हुई भीड़ के समान, ज़रा भी ध्यान नहीं था कि उन्होंने क्या और किसे खो दिया है।

         हमारे वर्तमान समय में भी, मसीही विश्वासी और अविश्वासी दोनों ही का ध्यान अनन्त से भटक सकता है। प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी ध्यान भटकाने वाले विकर्षणों की धुंध को परमेश्वर के प्रेम की सच्चाई के द्वारा किस प्रकार मिटा सकते हैं? परमेश्वर की संतान होने के नाते, हम एक दूसरे से प्रेम के करने के द्वारा आरंभ कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा, “यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो” (यूहन्ना 13:35)।

         परन्तु सच्चा प्रेम यहीं आकर रुक नहीं जाता है। हम उस प्रेम को और विस्तृत करते हैं, प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को औरों के साथ साझा करने के द्वारा जिससे लोग समस्त जगत के सभी लोगों के उद्धारकर्ता की ओर आकर्षित होने पाएं। जैसे कि पौलुस ने लिखा, हम मसीह के राजदूत हैं (2 कुरिन्थियों 5:20)।

         ऐसा करने से मसीह की देह, उसकी कलीसिया, परमेश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित भी कर सकती है और दूसरों तक पहुँचा भी सकती है, क्योंकि परमेश्वर के प्रेम की संसार को बहुत आवश्यकता है। काश पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से प्रभु के प्रेम को अपने जीवनों के द्वारा दिखाने के द्वारा हम मसीह यीशु में सेंत-मेंत मिलाने वाले उद्धार से लोगों का ध्यान भटकाने वाले विकर्षणों को मिटा सकें, और सुसमाचार की आवश्यकता को प्रस्तुत कर सकें। - बिल क्राउडर

 

प्रभु यीशु में उद्धार का सुसमाचार, विकर्षणों की धुंध में ज्योति चमकाता है।


सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। - 2 कुरिन्थियों 5:20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:31-35

यूहन्ना 13:31 जब वह बाहर चला गया तो यीशु ने कहा; अब मनुष्य पुत्र की महिमा हुई, और परमेश्वर की महिमा उस में हुई।

यूहन्ना 13:32 और परमेश्वर भी अपने में उस की महिमा करेगा, वरन तुरन्त करेगा।

यूहन्ना 13:33 हे बालकों, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं।

यूहन्ना 13:34 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

यूहन्ना 13:35 यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

ज्योति

 

         अंग्रेज़ी की एक बहुत जानी-मानी बच्चों की कविता है, ‘ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार’; इस कविता को जेन टेलर ने लिखा था, परमेश्वर के उस आकाश मंडल के आश्चर्य को दर्शाने के उद्देश्य से, जहाँ पर पृथ्वी से बहुत ऊपर सितारे टंगे हुए दिखाई देते है। इस कविता के बाद के छंदों में, जिन्हें सामान्यतः नहीं बताया जाता है, एक छंद में तारों के द्वारा यात्रियों का मार्गदर्शन करने की बात कही गई है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को निर्दोष और पवित्र होने की चुनौती दी गई है, जब वे अपने चारों के लोगों के मध्य सुसमाचार बांटते हुए “जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो” (फिलिप्पियों 2:15)। हम अचरज कर सकते हैं कि भला हम सितारों के समान कैसे चमकें? हम अकसर अपने आप को अक्षम और दुर्बल समझते हैं, और हमें यह मानने में कठिनाई होती है कि हमारी ‘ज्योति’ क्या ऐसी होगी कि उससे किसी के जीवन में उससे कुछ अंतर आए? परन्तु सितारों को सितारे होने के लिए कोई प्रयास नहीं करना पड़ता है; वे तो वैसे होते ही हैं। ज्योति हमारे संसार को बदलती है, और हमें भी बदलती है। परमेश्वर हमारे संसार में भौतिक प्रकाश को लेकर आया (उत्पत्ति 1:3); और प्रभु यीशु मसीह में होकर वह हमारे जीवनों में आत्मिक ज्योति को लाता है (यूहन्ना 1:1-4)।

         हमें, जिन में परमेश्वर की ज्योति है, इस प्रकार चमकना है कि जो लोग हमारे चारों ओर हैं, वे उस ज्योति के मूल स्त्रोत की ओर आकर्षित होने पाएं। जैसे आकाश में टंगे हुए सितारे, बिना स्वतः कोई प्रयास करे, अपनी ज्योति के कारण लोगों को मार्ग दिखाते हैं, उसी प्रकार हमारे जीवनों की ज्योति भी लोगों का मार्गदर्शन करने वाली हो। जब हम पौलुस द्वारा दिए गए निर्देश, “परमेश्वर के निष्कलंक सन्तान बने रहो” (पद 15) का पालन करते हैं, तो हम अपनी ज्योति को संसार में दिखने देते हैं।

         पाप के अन्धकार से भरे इस संसार में हमें ज्योति बनकर चमकना है, जिससे औरों को भी जीवन की ज्योति के मूल स्त्रोत – प्रभु यीशु की ओर आकर्षित कर सकें। - एलिसा मॉर्गन

 

प्रभु यीशु जीवनों में ज्योति लाते हैं।


उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:14-16

 फिलिप्पियों 2:14 सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो।

फिलिप्पियों 2:15 ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो)।

फिलिप्पियों 2:16 कि मसीह के दिन मुझे घमण्ड करने का कारण हो, कि न मेरा दौड़ना और न मेरा परिश्रम करना व्यर्थ हुआ।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2

शुक्रवार, 5 जून 2020

ज्योति



     कुछ वर्ष पहले, मेरे साथ यात्रा कर रहे एक साथी ने ध्यान किया कि दूर की चीज़ें देखने के लिए मुझे आँखों पर जोर देना पड़ रहा है, मुझे कठिनाई हो रही है। उसने एक साधारण सा, किन्तु जीवन बदलने वाला कार्य किया; उस ने अपना चश्मा उतारा और मुझे देते हुए कहा, “इसे लगा कर देखो” और जब मैंने उस के चश्मे का प्रयोग किया तो मेरी धुंधली दृष्टि स्पष्ट हो गई। मैं चश्मा बनाने वाले के पास गया, आँखों की जांच करवाई, अपने लिए भी एक चश्मा ले लिए, और मुझे भी फिर से स्पष्ट दिखने लगा।

     परमेश्वर के वचन बाइबल से लिया गया हमारा आज का पाठ, एक अंधे व्यक्ति के बारे में है, जो बिलकुल अन्धकार में जीवन व्यतीत कर रहा था, और उस के अंधेपन ने उसे भिखारी बना दिया था। इस अंधे भिखारी ने भी लोकप्रीय शिक्षक और आश्चर्यकर्म करने वाले यीशु के बारे में सुना था। इसलिए जब एक दिन प्रभु यीशु उसी मार्ग से हो कर निकले जिस के किनारे वह अंधा भिखारी बैठा हुआ था, तो उस के मन में भी आशा जागृत हुई, और उस ने पुकारा, “तब उसने पुकार के कहा, हे यीशु दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया कर” (लूका 18:38)। वह चाहे शारीरिक रीति से अँधा था, परन्तु उस के पास आत्मिक दृष्टि थी जिस से वह प्रभु यीशु की वास्तविक पहचान को देख सका और उस में विश्वास रख सका, कि वह उस की आवश्यकता को अवश्य पूरी करेगा। लोगों ने उसे चुप रहने के लिए कहा, किन्तु वह और भी जोर से चिल्लाने लगा (39)। परिणाम यह हुआ कि प्रभु यीशु ने उसे अपने पास बुलाया, उसे चंगा किया, और उस का अंधापन जाता रहा। वह बैठ कर भीख मांगने वाले से, उठ कर परमेश्वर की बड़ाई और स्तुति करने वाला बन गया (43), क्योंकि वह अब देख सकता था।

     जब आपके जीवन में अंधकार होता है, कुछ मार्ग सूझ नहीं पड़ता है, तो आप किस की ओर मुड़ते हैं? आप किसे पुकारते हैं? शारीरिक आँखों के चश्मे देखने में सहायता तो करते हैं, परन्तु परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु का करुणापूर्ण स्पर्श ही आत्मिक अन्धकार से अनंत ज्योति में ले कर आता है। - आर्थर जैकसन

परमेश्वर पिता उस से मांगने वालों को आत्मिक ज्योति देने से प्रसन्न होता है।

कि तू उन की आंखे खोले, कि वे अंधकार से ज्योति की ओर, और शैतान के अधिकार से परमेश्वर की ओर फिरें; कि पापों की क्षमा, और उन लोगों के साथ जो मुझ[यीशु] पर विश्वास करने से पवित्र किए गए हैं, मीरास पाएं। - प्रेरितों 26:18

बाइबल पाठ: लूका 18:35-43
लूका 18:35 जब वह यरीहो के निकट पहुंचा, तो एक अन्‍धा सड़क के किनारे बैठा हुआ भीख मांग रहा था।
लूका 18:36 और वह भीड़ के चलने की आहट सुनकर पूछने लगा, यह क्या हो रहा है?
लूका 18:37 उन्होंने उसको बताया, कि यीशु नासरी जा रहा है।
लूका 18:38 तब उसने पुकार के कहा, हे यीशु दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया कर।
लूका 18:39 जो आगे जाते थे, वे उसे डांटने लगे कि चुप रहे: परन्तु वह और भी चिल्लाने लगा, कि हे दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया कर।
लूका 18:40 तब यीशु ने खड़े हो कर आज्ञा दी कि उसे मेरे पास लाओ, और जब वह निकट आया, तो उसने उस से यह पूछा।
लूका 18:41 तू क्या चाहता है, कि मैं तेरे लिये करूं? उसने कहा; हे प्रभु यह कि मैं देखने लगूं।
लूका 18:42 यीशु ने उस से कहा; देखने लग, तेरे विश्वास ने तुझे अच्छा कर दिया है।
लूका 18:43 और वह तुरन्त देखने लगा; और परमेश्वर की बड़ाई करता हुआ उसके पीछे हो लिया, और सब लोगों ने देख कर परमेश्वर की स्‍तुति की।   

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15



शनिवार, 21 दिसंबर 2019

घर



      एक वर्ष, क्रिसमस के समय मैं काम पर एक ऐसे स्थान को गया हुआ था जिसे मेरे बहुत से मित्र नक़्शे पर भी ढूँढ़ नहीं पा रहे थे। एक संध्या काम समाप्त करके जब मैं थका हुआ घर की ओर चला जा रहा था, तो तेज़ बहती सर्द हवाएं मुझे परेशान कर रहीं थीं, और मेरा मन हो रहा था, काश मैं घर पर होता। जब मैनें कमरे पर पहुँच कर दरवाज़ा खोला तो वह एक चमत्कारिक पल था। मेरे साथ रहने वाले मेरे कला प्रेमी साथी ने अपनी कला का एक नया नमूना तैयार कर रखा था – चीनी मिट्टी से बना उन्नीस इंच ऊँचा क्रिसमस ट्री, जिस पर रंगीन बत्तियां जगमगा रहीं थीं, और जो उस समय हमारे कमरे के अँधेरे को रंगीन बना रही थीं। चाहे थोड़ी से देर ही के लिए सही, मुझे लगा जैसे मैं घर पहुँच गया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब याकूब अपने भाई एसाव से बचकर भाग रहा था, तो एक रात उसने अपने आप को एक अकेले और सुनसान स्थान पर पाया। वह वहीं धरती पर सो गया और रात को एक स्वप्न में परमेश्वर ने उसे दर्शन दिए, और याकूब को घर के लिए एक स्थान देने का वायदा किया। परमेश्वर ने उससे कहा, “...जिस भूमि पर तू पड़ा है, उसे मैं तुझ को और तेरे वंश को दूंगा। और तेरा वंश भूमि की धूल के किनकों के समान बहुत होगा, और पच्छिम, पूरब, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर फैलता जाएगा: और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएंगे” (उत्पत्ति 28:13-14)।

      आगे चलकर याकूब के वंशजों में से ही प्रतिज्ञागत मसीहा – संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह, अपना स्वर्गीय घर छोड़कर आए, और उन्होंने उन पर विश्वास लाने वालों को यह वायदा दिया कि, “और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो” (यूहन्ना 14:3)।

      उस दिसंबर की रात को मैं अपने कमरे के अँधेरे में बैठा उस क्रिसमस ट्री को निहार रहा था; और निश्चय ही मैंने जगत की उस ज्योति के बारे में सोचा होगा, जो समस्त संसार के लोगों सभी लोगों को घर वापसी का मार्ग प्रदान करने आई थी। - टीम गुस्ताफ्सन

घर नक़्शे पर स्थित कोई स्थान नहीं है; 
वह अपनेपन का स्थान है; और परमेश्वर ही हमें वह स्थान देता है।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 28:10-17
Genesis 28:10 सो याकूब बेर्शेबा से निकल कर हारान की ओर चला।
Genesis 28:11 और उसने किसी स्थान में पहुंच कर रात वहीं बिताने का विचार किया, क्योंकि सूर्य अस्त हो गया था; सो उसने उस स्थान के पत्थरों में से एक पत्थर ले अपना तकिया बना कर रखा, और उसी स्थान में सो गया।
Genesis 28:12 तब उसने स्वप्न में क्या देखा, कि एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुंचा है: और परमेश्वर के दूत उस पर से चढ़ते उतरते हैं।
Genesis 28:13 और यहोवा उसके ऊपर खड़ा हो कर कहता है, कि मैं यहोवा, तेरे दादा इब्राहीम का परमेश्वर, और इसहाक का भी परमेश्वर हूं: जिस भूमि पर तू पड़ा है, उसे मैं तुझ को और तेरे वंश को दूंगा।
Genesis 28:14 और तेरा वंश भूमि की धूल के किनकों के समान बहुत होगा, और पच्छिम, पूरब, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर फैलता जाएगा: और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएंगे।
Genesis 28:15 और सुन, मैं तेरे संग रहूंगा, और जहां कहीं तू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा, और तुझे इस देश में लौटा ले आऊंगा: मैं अपने कहे हुए को जब तक पूरा न कर लूं तब तक तुझ को न छोडूंगा।
Genesis 28:16 तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा; निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था।
Genesis 28:17 और भय खा कर उसने कहा, यह स्थान क्या ही भयानक है! यह तो परमेश्वर के भवन को छोड़ और कुछ नहीं हो सकता; वरन यह स्वर्ग का फाटक ही होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 4-5
  • प्रकाशितवाक्य 12



गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

सरल और सहज



      वाशिंगटन पोस्ट नामक समाचार पत्र में छपे एक लेख में कुछ तकनीकी विद्वानों द्वारा मानव जीवन को अमर करने के प्रयासों के विषय बताया गया; इस परियोजना पर काम करने वाले इसके लिए अरबों खर्च करने को तैयार हैं।

      परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि यह प्रभु यीशु मसीह द्वारा दो हज़ार वर्ष पहले ही संभव कर दिया गया है। प्रभु यीशु ने कहा, “यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है?” (यूहन्ना 11:25-26)। प्रभु यीशु मसीह ने यह प्रतिज्ञा दी कि जो कोई उनपर विश्वास करेगा उसका कभी, किसी भी पारिस्थित में अन्त नहीं होगा। इसे थोड़ा स्पष्ट कर दें – हमारे शरीर मर सकते हैं, और मर भी जाएंगे; परन्तु हमारा वह भाग जो हमारे विचार, विवेक, बुद्धि, स्मरण और स्मृतियों, प्रेम आदि से संबंधित है, जो हमारा वास्तविक भीतरी मनुष्यत्व है, जिसे हम “मैं” कहते हैं वह कभी नहीं मरेगा – वह सदा प्रभु के साथ स्वर्ग में रहेगा।

      और सबसे अच्छी बात यह है कि ऐसे अनन्त जीवन को प्राप्त करने के लिए केवल उसे परमेश्वर के उपहार के रूप में स्वीकार भर करना है, इसके लिए अपना कोई कार्य या प्रयास नहीं करना है, अपने आप को इसके योग्य जताने या बनाने के लिए कुछ भी नहीं करना है, केवल प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा माँग कर, अपना जीवन उसे समर्पित कर देना है, और प्रत्युत्तर में उससे यह अविनाशी, आशीषित जीवन उपहार स्वरूप स्वीकार कर लेना है।

      कुछ लोग कहते हैं कि इतनी बड़ी बात इतनी सरल और सहज कैसे हो सकती है? मेरा उत्तर है, जैसा बाइबल में लिखा है, यदि परमेश्वर ने हमसे हमारे जन्म लेने से भी पहले प्रेम किया और यह चाहा कि हम उसके साथ सदा काल के लिए स्वर्ग में रहें, तो वह ऐसा होना कठिन क्यों बनाएगा; इसे सरल और सहज क्यों नहीं रखेगा?


मसीह यीशु ने मृत्यु के अँधेरे द्वार को अनन्त जीवन के ज्योतिर्मय द्वार से बदल दिया है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:17-27
John 11:17 सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।
John 11:18 बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।
John 11:19 और बहुत से यहूदी मारथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे।
John 11:20 सो मारथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्तु मरियम घर में बैठी रही।
John 11:21 मारथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
John 11:22 और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
John 11:23 यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
John 11:24 मारथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा।
John 11:25 यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
John 11:26 और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है?
John 11:27 उसने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13



बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

ज्योति



      यूनानी दार्शनिक प्लेटो (c.427 – c.348 ईसा पूर्व) ने मानव हृदय के अँधेरे भाग पर ज्योति चमकाने का एक अनूठा मार्ग लिया। उसने एक कहानी बनाई, कि एक भूकंप के कारण किसी पहाड़ के निकट की एक कब्र खुल गई और उसमें छिपी एक सुनहरी अंगूठी एक चरवाहे को दिखाई दी। उस चरवाहे को यह भी पता चला कि उस अंगूठी में एक करिशमाई ताकत भी है – उसे पहनने वाला अपनी इच्छानुसार अदृश्य भी हो सकता है। अदृश्यता की बात करते हुए प्लेटो ने एक प्रश्न उठाया, “यदि लोगों को पकड़े जाने और दण्ड भुगतने का भय न हो, तो क्या वे बुरा अथवा गलत करने से अपने आप को रोकेंगे?”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह ने ऐसे ही एक विचार को भिन्न दिशा दी। वहाँ, प्रभु यीशु मसीह ने, जिसे अच्छा चरवाहा भी कहा गया है, ऐसे हृदयों की बात की जो अपने किए को छुपाए रखने के लिए अन्धकार में छिपे रहते हैं (यूहन्ना 3:19-20)। वह बात को छिपाए रखने की हमारी इच्छा की ओर हमारा ध्यान में हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं खींच रहे हैं, परन्तु हमें उनमें होकर मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के विषय बताने के लिए ऐसा कर रहे हैं (पद 17)। हमारे हृदय का चरवाहा होने के कारण, वह हमारे मानवीय हृदय और स्वभाव की सबसे बुरी स्थिति को उजागर करते हैं, यह प्रमाणित करने के लिए कि फिर भी परमेश्वर पिता हम से कितना प्रेम करते हैं (पद 16)।

      परमेश्वर अपने अनुग्रह में हमें पाप के अन्धकार से निकलकर उसकी ज्योति में चलने का निमंत्रण देता है, जिससे हम उसके साथ अनन्तकाल तक आशीषित जीवन व्यतीत कर सकें। - मार्ट डीहान


प्रभु यीशु की ज्योति आने पर पाप का अन्धकार मिट जाता है।

और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। - 2 कुरिन्थियों 4:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3: 16-21
John 3:16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
John 3:17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
John 3:18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
John 3:19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे।
John 3:20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
John 3:21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56



सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

ज्योति



      अपने अस्तित्व से ही अफ्रीका के रवाण्डा देश में स्थित मसीही सेवकाई का एक केन्द्र, जिसका नाम “Lighthouse (प्रकाशस्तंभ)” है, छुटकारे को दर्शाता है। यह उस भूमि पर स्थित है जहाँ 1994 में हुए जातिवाद पर आधारित नरसंहार के समय राष्ट्रपति का भव्य घर था। परन्तु यह नया भवन अब मसीहियों द्वारा ज्योति और आशा का प्रकाशस्तंभ होने के लिए बनाया गया है। वहाँ पर एक बाइबल शिक्षण संस्थान स्थित है जहाँ से नई पीढ़ी के लिए मसीही अगुवे प्रशिक्षित किए जाते हैं, और साथ ही वहाँ के समाज के लिए उस भवन में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य उपयोगी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उस नरसंहार की राख में से नया जीवन निकल कर आया है। जिन्होंने Lighthouse (प्रकाशस्तंभ) को बनाया है वे प्रभु यीशु को अपनी आशा और छुटकारे का स्त्रोत मानते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में आया है कि जब प्रभु यीशु नासरत के आराधनालय में गए, तो उन्होंने यशायाह नबी की पुस्तक से पढ़ा, और घोषणा की, कि परमेश्वर की प्रसन्नता की घोषणा के लिए अभिषिक्त जन वे ही हैं (लूका 4:14-21)। वे कुचले हुओं को छुटकारा और क्षमा देने के लिए आए थे। प्रभु यीशु में हम राख में से सुंदरता को निकलकर आते हुए देखते हैं (यशायाह 61:3)।

      हम जब कबीलों और जनजातियों के परस्पर लड़ाई के कारण हुए नरसंहार में मारे गए पाँच लाख से भी अधिक लोगों के बारे में सोचते हैं तो यह हमारे मन-मस्तिष्क को झकझोर देने वाला होता है, और हम समझ नहीं पाते हैं कि उसके विषय हम क्या कहें। परन्तु फिर भी हम यह जानते हैं कि प्रभु परमेश्वर ऐसी क्रूरताओं और अत्याचारों से छुटकारा दे सकता है – चाहे यहाँ पृथ्वी पर, अथवा स्वर्ग में। वह जो शोक के स्थान पर हर्ष का तेल हमें दे सकता है, वही हमारे सबसे अंधकारमय पलों में आशा के ज्योति भी लेकर आता है। - एमी बाउचर पाई


प्रभु यीशु हमारी सबसे अंधकारमय परिस्थिति में भी आशा की ज्योति दें के लिए आए थे।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: यशायाह 61:1-6
Isaiah 61:1 प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं; कि बंधुओं के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूं;
Isaiah 61:2 कि यहोवा के प्रसन्न रहने के वर्ष का और हमारे परमेश्वर के पलटा लेने के दिन का प्रचार करूं; कि सब विलाप करने वालों को शान्ति दूं
Isaiah 61:3 और सिय्योन के विलाप करने वालों के सिर पर की राख दूर कर के सुन्दर पगड़ी बान्ध दूं, कि उनका विलाप दूर कर के हर्ष का तेल लगाऊं और उनकी उदासी हटाकर यश का ओढ़ना ओढ़ाऊं; जिस से वे धर्म के बांजवृक्ष और यहोवा के लगाए हुए कहलाएं और जिस से उसकी महिमा प्रगट हो।
Isaiah 61:4 तब वे बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएंगे, पूर्वकाल से पड़े हुए खण्डहरों में वे फिर घर बनाएंगे; उजड़े हुए नगरों को जो पीढ़ी पीढ़ी में उजड़े हुए हों वे फिर नये सिरे से बसाएंगे।
Isaiah 61:5 परदेशी आ खड़े होंगे और तुम्हारी भेड़-बकरियों को चराएंगे और विदेशी लोग तुम्हारे चरवाहे और दाख की बारी के माली होंगे;
Isaiah 61:6 पर तुम यहोवा के याजक कहलाओगे, वे तुम को हमरो परमेश्वर के सेवक कहेंगे; और तुम अन्यजातियों की धन-सम्पत्ति को खाओगे, उनके वैभव की वस्तुएं पाकर तुम बड़ाई करोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 23-24
  • मरकुस 1:1-22



शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

निपुण



      नोआ प्यूरिफोए ने अपने कार्य का आरंभ तीन टन मलबे के साथ किया। उस मलबे को लॉस एन्जिल्स के वॉट्स इलाके में 1965 में हुए दंगों के बाद एकत्रित किया गया था। टूटी हुई साईकिल के पहियों, गेंदों, ख़राब टायरों, पुराने टी.वी. सेटों – ऐसी वस्तुएँ जो अब उपयोगी नहीं रहीं थें – उन सब से उसने और उसके एक साथी ने मिलकर ऐसी प्रतिमाएं और कृतियाँ बनाईं जो आधुनिक समाज में लोगों को तिरीस्कृत कर देने की प्रवृत्ति के विषय प्रबल सन्देश देती हैं। एक पत्रकार ने श्री प्युरिफोए को “कबाड़खाना निपुण” कहकर संबोधित किया।

      प्रभु यीशु के समय में, बहुत से लोगों की धारणा थी कि जिन्हें बीमारियाँ या शारीरिक विकार हैं वे पापी हैं जिन्हें परमेश्वर द्वारा दण्ड दिया जा रहा है। उन्हें तिरीस्कृत और उपेक्षित रखा जाता था। परमेश्वर के वचन बाइबल में आया है कि जब प्रभु यीशु और उनके शिष्य एक अंधे व्यक्ति से मिले तो शिष्यों ने इसी धारणा के अन्तर्गत प्रभु से प्रश्न किया, और प्रभु ने शिष्यों से कहा कि उस व्यक्ति की वह दशा किसी पाप के कारण नहीं थी, वरन परमेश्वर की सामर्थ्य प्रगट करने का एक अवसर थी। जब उस अंधे व्यक्ति ने प्रभु यीशु के निर्देशों का पालन किया तो वह देखने लग गया।

      जब धर्म के अधिकारियों ने उस व्यक्ति से उसकी चंगाई के बारे में प्रश्न किए तो उसका सीधा सा उत्तर था, “मैं नहीं जानता कि वह पापी है या नहीं: मैं एक बात जानता हूं कि मैं अन्‍धा था और अब देखता हूं” (पद 25)।

      प्रभु यीशु आज भी सँसार के सबसे निपुण रचनाकार हैं, जो पाप और सांसारिकता से बिगड़े हुए लोगों को सुधार और संवार कर, अपने लिए उपयोगी नई कृतियाँ बना देते हैं। आप जैसे भी हैं, प्रभु यीशु के पास आ जाईए, उसे अपना जीवन समर्पित कर दीजिए, और उसके निर्देशों के अनुसार अपने जीवन को संवार लीजिए। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु जीवन को नया कर देने में निपुण हैं।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 9:1-11
John 9:1 फिर जाते हुए उसने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म का अन्‍धा था।
John 9:2 और उसके चेलों ने उस से पूछा, हे रब्बी, किस ने पाप किया था कि यह अन्‍धा जन्मा, इस मनुष्य ने, या उसके माता पिता ने?
John 9:3 यीशु ने उत्तर दिया, कि न तो इस ने पाप किया था, न इस के माता पिता ने: परन्तु यह इसलिये हुआ, कि परमेश्वर के काम उस में प्रगट हों।
John 9:4 जिसने मुझे भेजा है; हमें उसके काम दिन ही दिन में करना अवश्य है: वह रात आनेवाली है जिस में कोई काम नहीं कर सकता।
John 9:5 जब तक मैं जगत में हूं, तब तक जगत की ज्योति हूं।
John 9:6 यह कहकर उसने भूमि पर थूका और उस थूक से मिट्टी सानी, और वह मिट्टी उस अन्धे की आंखों पर लगाकर।
John 9:7 उस से कहा; जा शीलोह के कुण्ड में धो ले, (जिस का अर्थ भेजा हुआ है) सो उसने जा कर धोया, और देखता हुआ लौट आया।
John 9:8 तब पड़ोसी और जिन्हों ने पहले उसे भीख मांगते देखा था, कहने लगे; क्या यह वही नहीं, जो बैठा भीख मांगा करता था?
John 9:9 कितनों ने कहा, यह वही है: औरों ने कहा, नहीं; परन्तु उसके समान है: उसने कहा, मैं वही हूं।
John 9:10 तब वे उस से पूछने लगे, तेरी आंखें क्योंकर खुल गईं?
John 9:11 उसने उत्तर दिया, कि यीशु नाम एक व्यक्ति ने मिट्टी सानी, और मेरी आंखों पर लगाकर मुझ से कहा, कि शीलोह में जा कर धो ले; सो मैं गया, और धोकर देखने लगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 19-20
  • मत्ती 27:51-66



सोमवार, 24 दिसंबर 2018

आनन्द और ज्योति



      हिटलर का खुला विरोध करने के कारण पास्टर मार्टिन निमोलर को आठ वर्ष नाट्ज़ी नज़रबंदियों के शिविर में बिताने पड़े। उन्होंने 1944 के क्रिसमस की पूर्व-संध्या को दिए गए अपने सन्देश में डकाऊ शिविर के अपने साथी बंदियों से आशा के ये शब्द कहे: “मेरे प्रिय मित्रों, इस क्रिसमस पर...हम बेतलेहम के शिशु में उसे खोजें जो हमारे साथ हर वह बात बाँटने आया था जो हम पर बोझ है...स्वयं परमेश्वर ने अपने और हमारे मध्य एक सेतू बनाया है! ऊपर से ज्योति हम तक पहुँची है!”

      क्रिसमस पर हम परमेश्वर के सुसमाचार को गले लगाते हैं, कि परमेश्वर मसीह में हम तक आया है, हम चाहे जहाँ भी हों, और उसके तथा हमारे मध्य की दूरी को पाट दिया है। वह हमारे अन्धकार के कैदखाने में अपनी ज्योति में होकर आता है और हमें दबाने वाले दुःख, दोष, या अकेलेपन के बोझ को उठा लेता है।

      कैदखाने के अन्धकार में उस क्रिसमस की पूर्व-संध्या पर, निमोलर ने यह शुभ-सन्देश बाँटा: “चरवाहों को घेरने वाली उस ज्योति में से हमारे अन्धकार पर भी ज्योति की एक किरण पड़ेगी।” उनके शब्द हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता के शब्दों का स्मरण करवाते हैं, जिसने भविष्यवाणी करते हुए कहा था: “जो लोग अन्धियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी” (यशायाह 9:2)।

      हम आज चाहे जहाँ भी हों, यीशु हमारे अंधकारमय सँसार में अपने आनन्द और ज्योति के साथ प्रवेश कर चुका है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


क्रिसमस का आनन्द यीशु है।

कि उसके लोगों को उद्धार का ज्ञान दे, जो उन के पापों की क्षमा से प्राप्त होता है। यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा। कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए। - लूका 1:77-79

बाइबल पाठ: यशायाह 9:1-7
Isaiah 9:1 तौभी संकट-भरा अन्धकार जाता रहेगा। पहिले तो उसने जबूलून और नप्ताली के देशों का अपमान किया, परन्तु अन्तिम दिनों में ताल की ओर यरदन के पार की अन्यजातियों के गलील को महिमा देगा।
Isaiah 9:2 जो लोग अन्धियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी।
Isaiah 9:3 तू ने जाति को बढ़ाया, तू ने उसको बहुत आनन्द दिया; वे तेरे साम्हने कटनी के समय का सा आनन्द करते हैं, और ऐसे मगन हैं जैसे लोग लूट बांटने के समय मगन रहते हैं।
Isaiah 9:4 क्योंकि तू ने उसकी गर्दन पर के भारी जूए और उसके बहंगे के बांस, उस पर अंधेर करने वाले की लाठी, इन सभों को ऐसा तोड़ दिया है जेसे मिद्यानियों के दिन में किया था।
Isaiah 9:5 क्योंकि युद्ध में लड़ने वाले सिपाहियों के जूते और लोहू में लथड़े हुए कपड़े सब आग का कौर हो जाएंगे।
Isaiah 9:6 क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा।
Isaiah 9:7 उसकी प्रभुता सर्वदा बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा, इसलिये वे उसको दाऊद की राजगद्दी पर इस समय से ले कर सर्वदा के लिये न्याय और धर्म के द्वारा स्थिर किए ओर संभाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन के द्वारा यह हो जाएगा।
                                                                                                                                                        

एक साल में बाइबल: 
  • हबक्कूक 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 15