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Friday, March 2, 2018

भरोसा



   हमारी बाल्यावस्था में, 1960 के दशक में, हम लोग अफ्रीका के घाना देश के ग्रामीण इलाके में रहा करते थे। वहाँ पर हमारे साथ खेलने के लिए कभी-कभी हमारे पिता झाडियों में छुपकर, शेर के समान गुर्राने की आवाज़ निकालकर हमें डराने का नाटक करते थे, और मैं तथा मेरा भाई हंसते हुए उस आवाज़ के स्त्रोत को ढूँढ़ने के लिए झाड़ियों की ओर भागते थे, क्योंकि हम जानते थे के पिताजी के साथ खेलने का समय आ गया है, और इस इलाके में शेर के होने का कोई ख़तरा नहीं है।

   एक दिन हमारा एक मित्र हमसे मिलने आया हुआ था। उसके साथ खेलते हुए हमने वह जानी-पहचानी गुर्राने की आवाज़ सुनी। हमारा मित्र डर के मारे चिल्ला कर तेज़ी से भागने लगा। मैं और मेरा भाई भली-भांति जानते थे कि कोई ख़तरा नहीं है, वह आवाज़ काल्पनिक शेर की है; परन्तु एक विचित्र बात हुई, हम दोनों भी उस मित्र के साथ चिल्लाते हुए भाग निकले! हम सब ने कुछ पाठ सीखे – मेरे पिता को बहुत बुरा लगा कि हमारा मित्र डर कर भागा गया; मैंने और मेरे भाई ने सीखा कि दूसरों के भय से प्रभावित होकर घबरा नहीं जाना चाहिए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम कालेब और यहोशू के विषय में पढ़ते हैं, जो औरों के घबराने से स्वयं नहीं घबराए और परमेश्वर पर अपने भरोसे में दृढ़ खड़े रहे। इस्राएल के वाचा के देश में प्रवेश करने की कगार पर आने का समय आने पर, मूसा ने 12 लोगों को देश की छानबीन करके आने को भेजा जिससे वे स्वयं जान सकें कि परमेश्वर उन्हें कितने उत्तम देश में बसाने के लिए ले जा रहा है। उन बारहों ने देश की उत्तमता और उपजाऊ होने को तो देखा, परन्तु उन में से दस ने बाधाओं और कठिनाइयों पर ध्यान केंद्रित किया और वापस आकर शेष मण्डली को भी घबरा दिया (गिनती 13:27-33), जिससे वे सब डर कर वापस लौटने का प्रयास करने लगे (गिनती 14:1-4)। केवल कालेब और यहोशू ने परिस्थिति का सही आँकलन किया (पद 6-9), पिता परमेश्वर की बीते समय की विश्वासयोग्यता और उन्हें सफलता दिलवाते रहने की प्रवृत्ति पर भरोसा किया।

   कुछ “शेर” वास्तव में ख़तरा होते हैं; परन्तु अन्य केवल काल्पनिक होते हैं। हम मसीही विश्वासियों के जीवनों में आने वाले ये “शेर” चाहे वास्तविक हों अथवा काल्पनिक, हमारा भरोसा सदा अपने उस प्रभु परमेश्वर पर होना चाहिए जिसकी आवाज़ और कार्यों को हम भली-भांति जानते हैं; जिसपर हमने भरोसा किया है। - टिम गुस्ताफ्सन


दुष्ट लोग जब कोई पीछा नहीं करता तब भी भागते हैं
परन्तु धर्मी लोग जवान सिहों के समान निडर रहते हैं। (नीतिवचन 28:1)

मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। - यूहन्ना 10:27-28

बाइबल पाठ: गिनती 14:1-9
Numbers 14:1 तब सारी मण्डली चिल्ला उठी; और रात भर वे लोग रोते ही रहे।
Numbers 14:2 और सब इस्राएली मूसा और हारून पर बुड़बुड़ाने लगे; और सारी मण्डली उसने कहने लगी, कि भला होता कि हम मिस्र ही में मर जाते! वा इस जंगल ही में मर जाते!
Numbers 14:3 और यहोवा हम को उस देश में ले जा कर क्यों तलवार से मरवाना चाहता है? हमारी स्त्रियां और बाल-बच्चे तो लूट में चलें जाएंगे; क्या हमारे लिये अच्छा नहीं कि हम मिस्र देश को लौट जाएं?
Numbers 14:4 फिर वे आपस में कहने लगे, आओ, हम किसी को अपना प्रधान बना लें, और मिस्र को लौट चलें।
Numbers 14:5 तब मूसा और हारून इस्राएलियों की सारी मण्डली के साम्हने मुंह के बल गिरे।
Numbers 14:6 और नून का पुत्र यहोशू और यपुन्ने का पुत्र कालेब, जो देश के भेद लेने वालों में से थे, अपने अपने वस्त्र फाड़कर,
Numbers 14:7 इस्राएलियों की सारी मण्डली से कहने लगे, कि जिस देश का भेद लेने को हम इधर उधर घूम कर आए हैं, वह अत्यन्त उत्तम देश है।
Numbers 14:8 यदि यहोवा हम से प्रसन्न हो, तो हम को उस देश में, जिस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, पहुंचाकर उसे हमे दे देगा।
Numbers 14:9 केवल इतना करो कि तुम यहोवा के विरुद्ध बलवा न करो; और न तो उस देश के लोगों से डरो, क्योंकि वे हमारी रोटी ठहरेंगे; छाया उनके ऊपर से हट गई है, और यहोवा हमारे संग है; उन से न डरो।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 26-27
  • मरकुस 8:1-21