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Friday, February 1, 2019

देखभाल



      जिस दिन हमारी सबसे छोटी बेटी वायुयान से यात्रा के द्वारा म्यूनिक से बार्सिलोना जा रही थी, मैं उसके वायुयान की उड़ान का विवरण देखने के लिए अपनी सबसे पसंदीदा उड़ान पर नज़र रखने वाली वेबसाईट पर गया। मैंने उस साईट पर उसकी उड़ान की संख्या भरी और मेरे कम्प्यूटर स्क्रीन पर उसके वायुयान की उड़ान का विवरण दिखने लगा। मैंने देखा कि वह ऑस्ट्रिया को पार कर चुकी थी, इटली के उत्तरी भाग के निकट से निकल रही थी। वहाँ से उसका वायुयान भूमध्यसागर पर से होकर निकलेगा, फिर फ्रांस के दक्षिणी भाग से होता हुआ स्पेन की ओर जाएगा, तथा उसके समयानुसार पहुँच जाने की आशा थी।  उस विवरण को दखकर ऐसा लग रहा था कि उसकी उड़ान के बारे में जो पता नहीं था वह केवल यह कि उड़ान के दौरान भोजन के लिए क्या परोसा जा रहा है!

      मुझे अपनी बेटी के ठिकाने और परिस्थितियों की इतनी चिंता क्यों थी? क्योंकि मैं उससे प्रेम करता हूँ। मेरे लिए जो वह है उसके कारण, मुझे चिन्ता रहती है कि वह जीवन में कहाँ जा रही है, क्या कर रही है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम भजन 32 में दाऊद द्वारा परमेश्वर की क्षमा, मार्गदर्शन, और हमारे प्रति चिन्ता का उत्सव मनाते हुए देखते हैं। हमारा परमेश्वर पिता हमारे विषय में किसी भी मानवीय पिता से बहुत बढ़कर, हमारे बारे में सब कुछ जानता है। वह हमारे जीवन के हर एक बात को बारीकी से, और हमारे हृदय की हर एक आवश्यकता को गहराई से जानता है। हम से परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि, “मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा” (पद 8)।

      आज हमारी परिस्थिति चाहे जो भी हो, हम परमेश्वर की उपस्थिति और देखभाल पर भरोसा रख सकते हैं, क्योंकि “...जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा” (पद 10)। - डेविड मैक्कैस्लैंड


हम कभी भी परमेश्वर की दृष्टि और प्रेम भरी चिन्ता से दूर नहीं होते हैं।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: भजन 32: 1-11
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22