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Tuesday, December 27, 2011

नियंत्रण

   सन १८५४ में रूसी कवि और राजनितिज्ञ ने उस समय के संसार की स्थिति के अपने भयावह आँकलन के बारे में अपनी पत्नि को एक पत्र में लिखा, "अब जो बात विसमित करती है - और इसके बारे में मेरा निश्चय दृढ़ होता जा रहा है तथा सामन्य लोगों को भी प्रतीत हो रहा है, कि उन सारे खतरों के विषय में जिनका हमें सामना करना पड़ता है, लोगों की विचारधारा ऐसी होती जा रही है जिसमें स्वयं उन्हें परिस्थिति की समझ नहीं रही है। यह ऐसा है मानो हम एक लगातार और भी अधिक ढलुआँ होती जा रही ढाल पर भागती हुई बघ्घी में बैठे हों और अचानक पता चले कि बघ्घी को नियंत्रित करने वाला कोचवान है ही नहीं।"

   ऐसा प्रतीत होत है कि यह संसार एक अनियंत्रित गाड़ी के समान है जो अन्धेरी रात में अपने विनाश की ओर बढ़ती जा रही है, और कोई उसे रोकने या नियंत्रित करने वाला नहीं है। संसार में हर जगह बढ़ते हुए आपसी मतभेद, जातीय तनाव, धर्म के नाम पर झगड़े-फसाद, नई और ला-इलाज बीमारियाँ, स्थान स्थान पर होने वाले युद्ध और अशांति यह सोचने को बाध्य करते हैं कि संसार नियंत्रण से बाहर हो कर विनाश की कगार पर डगमगा रहा है।

   परन्तु मसीही विश्वासी संसार की दशा के इस भयावह दृश्य को अलग परिपेक्ष में देख सकते हैं। हम मसीही विश्वासी जानते हैं कि यद्यपि शैतान को वर्तमान संसार का शासक कहा जाता है, तौ भी अन्तिम नियंत्रण परमेश्वर के हाथों में है। हमें परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता यशायाह द्वारा दीए गए परमेश्वर के वायदे पर भरोसा है कि जो परमेश्वर ने कहा है वह पूरा हो कर रहेगा। परमेश्वर "अपनी इच्‍छा के मत के अनुसार सब कुछ करता है" (इफीसियों १:११)। परमेश्वर की ओर से "यही युक्ति सारी पृथ्वी के लिये ठहराई गई है; और यह वही हाथ है जो सब जातियों पर बढ़ा हुआ है। क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने युक्ति की है और कौन उसको टाल सकता है? उसका हाथ बढ़ाया गया है, उसे कौन रोक सकता है? (यशायाह १४:२६, २७)"

   इस सारी विनाशकारी उथल-पुथल के बीच हम मसीही विश्वासी आश्वस्त रह सकते हैं क्योंकि नियंत्रण अटल परमेश्वर के स्थिर हाथों में है। - डेव एग्नर

पृथ्वी बदलती है परन्तु परमेश्वर और हमारी आत्मा स्थिर और शाश्वत रहते हैं।

मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्घा है और उसे सफल भी करूंगा। - यशायाह ४६:११

बाइबल पाठ: यशायाह ४६:५-१३
Isa 46:5  मैं तुम्हें उठाए रहूंगा और छुड़ाता भी रहूंगा। तुम किस से मेरी उपमा दोगे और मुझे किस के समान बताओगे, किस से मेरा मिलान करोगे कि हम एक समान ठहरें?
Isa 46:6 जो थैली से सोना उण्डेलते वा कांटे में चान्दी तौलते हैं, जो सुनार को मजदुरी दे कर उस से देवता बनवाते हैं, तब वे उसे प्रणाम करते वरन दण्डवत्‌ भी करते हैं!
Isa 46:7  वे उसको कन्धे पर उठा कर लिए फिरते हैं, वे उसे उस के स्थान में रख देते और वह वहीं खड़ा रहता है; वह अपने स्थान से हट नहीं सकता; यदि कोई उसकी दोहाई भी दे, तौभी न वह सुन सकता है और न विपत्ति से उसका उद्धार कर सकता है।
Isa 46:8  हे अपराधियों, इस बात को स्मरण करो और ध्यान दो, इस पर फिर मन लगाओ।
Isa 46:9  प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से है; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं; मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है।
Isa 46:10  मै तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूं जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूं, मेरी युक्ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूंगा।
Isa 46:11  मैं पूर्व से एक उकाब पक्षी को अर्थात दूर देश से अपनी युक्ति के पूरा करने वाले पुरूष को बुलाता हूं। मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्घा है और उसे सफल भी करूंगा।
Isa 46:12  हे कठोर मन वालों तुम जो धर्म से दूर हो, कान लगा कर मेरी सुनो।
Isa 46:13  मैं अपनी धामिर्कता को समीप ले आने पर हूं वह दूर नहीं है, और मेरे उद्धार करने में विलम्ब न होगा; मैं सिय्योन का उद्धार करूंगा और इस्राएल को महिमा दूंगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह १-४ 
  • प्रकाशितवाक्य १८