बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Wednesday, February 29, 2012

पापों का स्मरण

   हमारे पापों का स्मरण हमारे उद्धार के आनन्द को चुरा सकता है। हो सकता है कि हमने स्वयं कहा हो, या किसी को कहते हुए सुना हो कि "काश मैं अपने आप को अपने किए के लिए माफ कर पाता!" कुछ लोग अपने बीते समय के पापों के दोष से ग्रस्त रहते हैं और सोच सोच कर दुखी होते रहते हैं।

   परमेश्वर के वचन में जब यूसुफ ने अपने भाईयों के सामने अपने आप को प्रकट किया, जिन्होंने कई वर्ष पहले उसे गुलामी में बेच दिया था, तो वे स्तब्ध खड़े रह गए, "वे उसके साम्हने घबरा गए थे" (उत्पत्ति ४५:३)। जो दुख उन्होंने अपने भाई और अपने वृद्ध पिता को दिया था उसके स्मरण ने उन्हें उनके दोष के कारण भयभीत कर दिया। यह देखते हुए यूसुफ ने तुरंत उन्हें आश्वस्त किया, "अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है" (उत्पत्ति ४५:५)।

   जब हमने दूसरों को दुख दिया हो और पाप किया हो तो हम भी अपने आप को यूसुफ के भाईयों के जैसी स्थिति में पा सकते हैं। किंतु यदि हमने परमेश्वर के सामने अपने पापों का अंगीकार करके उनका पश्चाताप किया है और उससे उनकी क्षमा माँगी है तो हम आश्वस्त हो सकते हैं कि उसने उन्हें क्षमा कर दिया है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)। परेशान करते रहने वाला पाप-बोध और हमारे अन्तरात्मा द्वारा हमें दोषी ठहराते रहना परमेश्वर के पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है; वरन, परमेश्वर तो कहता है: "मैं ने तेरे अपराधों को काली घटा के समान और तेरे पापों को बादल के समान मिटा दिया है; मेरी ओर फिर लौट आ, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है" (यशायाह ४४:२२)।

   परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि "अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ" (इफिसीयों ४:२३)। अर्थात, हमें अपना ध्यान बीते समय के उन पापों पर नहीं लगाना है जिनकी क्षमा हमें मिल चुकी है, वरन पापों के दोष और दण्ड से विवारण देने वाले अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु पर लगाए रखना है। हमारे विचार उन बीती बातों पर केंद्रित नहीं होने चाहिएं जो हमने की थीं वरन उस उद्धार के कार्य पर होने चाहिएं जो हमारे लिए हमारे प्रभु यीशु ने कलवरी के क्रूस पर अपना बलिदान दे कर किया है।

   क्योंकि उसने हमारे पाप क्षमा कर दिए हैं, अपने उन पापों को हमें भी स्मरण नहीं करते रहना चाहिए। - डेनिस डी हॉन

पापों के दोष का बोझ वह बोझ है जो हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता नहीं चाहता कि उसके बच्चे उठाए फिरें।

अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है। - उत्पत्ति ४५:५
 
बाइबल पाठ: उत्पत्ति ४५:१-१५
Gen 45:1  तब यूसुफ उन सब के साम्हने, जो उसके आस पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका और पुकार के कहा, मेरे आस पास से सब लोगों को बाहर कर दो। भाइयों के साम्हने अपने को प्रगट करने के समय यूसुफ के संग और कोई न रहा।
Gen 45:2  तब वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगा : और मिस्रियों ने सुना, और फिरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
Gen 45:3  तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, मैं यूसुफ हूं, क्या मेरा पिता अब तक जीवित है? इसका उत्तर उसके भाई न दे सके, क्योंकि वे उसके साम्हने घबरा गए थे।
Gen 45:4  फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, मेरे निकट आओ। यह सुनकर वे निकट गए। फिर उस ने कहा, मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिसको तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था।
Gen 45:5  अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।
Gen 45:6  क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है, और अब पांच वर्ष और ऐसे ही होंगे, कि उन में न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
Gen 45:7  सो परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसी लिये भेजा, कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो, और तुम्हारे प्राणों के बचने से तुम्हारा वंश बढ़े।
Gen 45:8  इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा: और उसी ने मुझे फिरौन का पिता सा, और उसके सारे घर का स्वामी, और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है।
Gen 45:9  सो शीघ्र मेरे पिता के पास जाकर कहो, तेरा पुत्र यूसुफ इस प्रकार कहता है, कि परमेश्वर ने मुझे सारे मिस्र का स्वामी ठहराया है, इसलिये तू मेरे पास बिना विलम्ब किए चला आ।
Gen 45:10  और तेरा निवास गोशेन देश में होगा, और तू, बेटे, पोतों, भेड़-बकरियों, गाय-बैलों, और अपने सब कुछ समेत मेरे निकट रहेगा।
Gen 45:11  और अकाल के जो पांच वर्ष और होंगे, उन में मै वहीं तेरा पालन पोषण करूंगा; ऐसा न हो कि तू, और तेरा घराना, वरन जितने तेरे हैं, सो भूखों मरें।
Gen 45:12  और तुम अपनी आंखों से देखते हो, और मेरा भाई बिन्यामीन भी अपनी आंखों से देखता है, कि जो हम से बातें कर रहा है सो यूसुफ है।
Gen 45:13  और तुम मेरे सब वैभव का, जो मिस्र में है और जो कुछ तुम ने देखा है, उस सब को मेरे पिता से वर्णन करना, और तुरन्त मेरे पिता को यहां ले आना।
Gen 45:14  और वह अपने भाई बिन्यामीन के गले से लिपटकर रोया, और बिन्यामीन भी उसके गले से लिपटकर रोया।
Gen 45:15  तब वह अपने सब भाइयों को चूमकर उन से मिलकर रोया : और इसके पश्चात्‌ उसके भाई उस से बातें करने लगे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २३ 
  • मरकुस ७:१४-२३

Tuesday, February 28, 2012

वृद्धावस्था का देश

   लेखिका मेरी पाईफर ने अपनी पुस्तक Another Country कई वृद्ध लोगों से जो सत्तर, अस्सी, नव्वे की अवस्थाओं में थे और जीवन की कई परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, मुलाकात करके उन अनुभवों के आधार पर लिखी। पाईफर ने बताया कि वे "वृद्धावस्था के देश को समझना चाहतीं थीं।" उन्होंने यह भी कहा कि "हमारा सामाजिक संगठन वृद्ध होने को आसान और आरामदायक होने के लिए प्रबन्धित नहीं है।" उनका निषकर्ष था कि इसका मूल कारण है कि जवान और वृद्ध एक दुसरे से पृथक और दूर हो गए हैं और इससे दोनो ही की हानि हुई है।

   यह सामाजिक प्रवृति जानबूझकर बनाई हुई नहीं है, लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत से लोग वृद्धों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को नज़रंदाज़ करते हैं, उसे टालते हैं, उससे जी चुराते हैं। यह आज के समाज की प्रवृति भी नहीं है; लगभग २००० वर्ष पूर्व, प्रभु यीशु के दिनों में भी यह प्रवृति उस समय के समाज में देखी जा सकती थी।

   परमेश्वर के वचन में मरकुस ७:९-१३ में प्रभु यीशु द्वारा धर्म के अगुवे फरीसियों द्वारा अपने पारिवारिक दायित्व से बचने के अनूठे तरीके के लिए उनकी भर्त्सना करी। ये फरीसी अपनी सांसारिक संपत्ति परमेश्वर के मन्दिर के नाम "कुर्बान" कर देते थे। अब जो परमेश्वर को दिया गया है, वह परिवार के वृद्धों के लिए कैसे प्रयोग हो सकता था? किंतु क्योंकि ये धर्म के अगुवे परमेश्वर के मंदिर से सम्बंधित थे और उसके लिए कार्य करते थे, इसलिए मंदिर की वस्तुओं का अपने लिए प्रयोग करना उनके लिए "जायज़" माना जाता था। इस प्रकार वे अपने धन को अपने लिए तो प्रयोग करने पाते थे किंतु अपने माता-पिता को उस धन से वंचित कर देते थे। उन लोगों ने अपनी इस परंपरा के मानने से परमेश्वर के वचन में माता-पिता का आदर करने की आज्ञा को तुच्छ किया और उसका उल्लंघन किया।

   हमारे बच्चे, हमारा कार्य, चर्च में हमारे कार्य हमें कई ओर खेंच सकते हैं, कई बातों में व्यस्त कर सकते हैं, लेकिन यह माता-पिता की देखभाल करने और उनका आदर करने के हमारे कर्त्वय और परमेश्वर की आज्ञा को अन्देखा करने के बहाने नहीं हो सकते। अपने वृद्ध जनों की यथासम्भव देखभाल करना और उनकी आवश्यक्ताओं को पूरा करने की जवाबदेही से हम बच नहीं सकते; परमेश्वर का वचन हमें चिताता है "पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्‍ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है" (१ तिमुथियुस ५:८)।

   जब वह समय आए कि हमें "वृद्धावस्था के देश" में पदार्पण करना हो तो ध्यान रहे कि हमने अपने जीवन और अपने कार्यों से अपनी सन्तान के सम्मुख वह श्रेष्ठ उदाहरण रखा है जिसका अब वह अनुसरण करने वाले बनने वाले हैं। - डेनिस फिशर

माता-पिता का आदर करना हम उदाहरण से ही सीखते हैं।
पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्‍ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है। - १ तिमुथियुस ५:८
 
बाइबल पाठ: मरकुस ७:१-१३
Mar 7:1  तब फरीसी और कई एक शास्त्री जो यरूशलेम से आए थे, उसके पास इकट्ठे हुए।
Mar 7:2  और उन्‍होंने उसके कई चेलों को अशुद्ध अर्थात बिना हाथ धोए रोटी खाते देखा।
Mar 7:3  क्‍योंकि फरीसी और सब यहूदी, पुरिनयों की रीति पर चलते हैं और जब तक भली भांति हाथ नहीं धो लेते तब तक नहीं खाते।
Mar 7:4  और बाजार से आकर, जब तक स्‍नान नहीं कर लेते, तब तक नहीं खाते; और बहुत सी और बातें हैं, जो उन के पास मानने के लिये पहुंचाई गई हैं, जैसे कटोरों, और लोटों, और तांबे के बरतनों को धोना-मांजना।
Mar 7:5  इसलिये उन फरीसियों और शास्‍त्रियों ने उस से पूछा, कि तेरे चेले क्‍यों पुरिनयों की रीतों पर नहीं चलते, और बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं?
Mar 7:6  उस ने उन से कहा;. कि यशायाह ने तुम कपटियों के विषय में बहुत ठीक भविष्यद्ववाणी की, जैसा लिखा है, कि ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है।
Mar 7:7  और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्‍योंकि मनुष्यों की आज्ञाओं को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।
Mar 7:8  क्‍योंकि तुम परमेश्वर की आज्ञा को टालकर मनुष्यों की रीतियों को मानते हो।
Mar 7:9  और उस ने उन से कहा, तुम अपनी रीतियों को मानने के लिये परमेश्वर आज्ञा कैसी अच्‍छी तरह टाल देते हो!
Mar 7:10  क्‍योंकि मूसा ने कहा है कि अपने पिता और अपनी माता का आदर कर; ओर जो कोई पिता वा माता को बुरा कहे, वह अवश्य मार डाला जाए।
Mar 7:11  परन्‍तु तुम कहते हो कि यदि कोई अपने पिता वा माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुंच सकता था, वह कुरबान अर्थात संकल्प हो चुका।
Mar 7:12  तो तुम उस को उसके पिता वा उस की माता की कुछ सेवा करने नहीं देते।
Mar 7:13  इस प्रकार तुम अपनी रीतियों से, जिन्‍हें तुम ने ठहराया है, परमेश्वर का वचन टाल देते हो; और ऐसे ऐसे बहुत से काम करते हो।
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २०-२२ 
  • मरकुस ७:१-१३

Monday, February 27, 2012

कमज़ोरी में सामर्थ

   कोई कमज़ोर दिखन नहीं चाहता, इसलिए हम सब किसी न किसी प्रकार से सामर्थी दिखने के प्रयास करते हैं। कोई भावनाओं के आवेश से दूसरों को नियंत्रित करने का प्रयास करता है तो कोई अपने व्यक्तित्व या बुद्धि से। यद्यपि ये बातें सामर्थ का भ्रम उत्पन्न करतीं हैं किंतु वास्तव में ये सब कमज़ोरी की निशानियाँ हैं।

   जो वास्तव में सामर्थी होते हैं वे अपनी सीमाओं को मान लेने से नहीं हिचकिचाते और ना ही अपनी कमज़ोरियों के प्रकट होने से घबराते हैं। उन्हें अपनी सामर्थ के लिए परमेश्वर पर अपने निर्भर होने को बताने में कोई संकोच नहीं होता। इसलिए वास्तविक सामर्थ अकसर संसार को कमज़ोरी प्रतीत होती है। जब प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर से प्रार्थना करी कि उसकी व्यथा जो उसे परेशान कर रही थी उससे दूर हो जाए तो परमेश्वर का उत्तर था "...मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्‍योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है"; परमेश्वर से इस अप्रत्याशित उत्तर को पाकर पौलुस की प्रतिक्रिया और भी विसमित करने वाली थी; उसने कहा "...इसलिये मैं बड़े आनन्‍द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। इस कारण मैं मसीह के लि्ये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं, क्‍योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं" (२ कुरिन्थियों १२:९-१०)।

   प्रभु यीशु की इस पृथ्वी पर शारीरिक रूप में सेवकाई के अन्त के निकट उनके कुछ चेलों में, आते दिनों और समयों के लिए, प्रमुख स्थान पाने की होड़ लग गई। प्रभु यीशु ने इस बात को लेकर उनके आपसी विवाद को अवसर बनाया उन्हें समझाने का कि उसके राज्य में संसार के राज्य से बात अलग होती है, प्रमुख होने के तरीके भिन्न हैं: प्रभु यीशु ने उन्हें बताया कि परमेश्वर के राज्य में बड़ा वही है जो जानबूझकर कमज़ोरी और निम्नता का स्वरूप ले लेता है (मत्ती २०:२६)।

   यह एक कटु सत्य है और इसे स्वीकार कर लेना आसान नहीं है क्योंकि कमज़ोरी की सच्चाई को मानने कि बजाए सामर्थ के छल को दिखाना ही लोग अधिक पसन्द करते हैं और अपने जीवनों में यही निभाते रहते हैं। किंतु परमेश्वर चाहता है कि हम इस बात का एहसास करें कि सच्ची सामर्थ तभी आती है जब हम लोगों को नियंत्रित करने के प्रयासों की बजाए उनकी सेवा करने के अवसर ढ़ूंढने लगें और प्रयास करने लगें। - जूली एकरमैन लिंक


हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी में परमेश्वर की सबसे बड़ी सामर्थ प्रकट हो सकती है।

परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। - मत्ती २०:२६
 
बाइबल पाठ: मत्ती २०:२०-२८
Mat 20:20 जब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उस से कुछ मांगने लगी।
Mat 20:21 उस ने उस से कहा, तू क्‍या चाहती है? वह उस से बोली, यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएं बैठें।
Mat 20:22 यीशु ने उत्तर दिया, तुम नहीं जानते कि क्‍या मांगते हो जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्‍या तुम पी सकते हो? उन्‍होंने उस से कहा, पी सकते हैं।
Mat 20:23  उस ने उन से कहा, तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएं किसी को बिठाना मेरा काम नहीं, पर जिन के लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।
Mat 20:24  यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।
Mat 20:25 यीशु ने उन्‍हें पास बुलाकर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं, और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।
Mat 20:26 परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने।
Mat 20:27 और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने।
Mat 20:28 जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल की जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १७-१९ 
  • मरकुस ६:३०-५६

Sunday, February 26, 2012

नया स्वामित्व

   हरमन वौउक ने दूसरे विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित एक बहुत रोचक उपन्यास लिखा है The Caine Mutiny जिसमें एक अद्भुत उदाहरण है जो इस बात को समझने में सहायता करता है कि जब कोई व्यक्ति परमेश्वर का अनुयायी हो जाता है तो उसके जीवन में क्या परिवर्तन आ जाता है।

   उस उपन्यास में, एक धनी और ऊंची जान-पहचान रखने वाले परिवार का नौजवान सदस्य नौसेना में भरती लेकर प्रशिक्षण के लिए आता है। उसकी मां उसे एक बड़ी और सुन्दर कार में लेकर प्रशिक्षण केंद्र पर छोड़ने आती है, और वहाँ बड़े प्यार से उसे विदा कहती है। नौजवान दरवाज़े पर खड़े पहरेदार से हाथ मिलाता है और दरवाज़े के अन्दर चला जाता है, दरवाज़ा उसके पीछे बन्द हो जाता है। तभी उस की माँ को विचार आता है कि पता नहीं उसके बेटे के पास उचित मात्रा में पैसा है कि नहीं, और वह दौड़ कर दरवाज़े पर आती है। दरवाज़े पर खड़ा पहरेदार उसे सम्मान पूर्वक अन्दर जाने से रोक देता है। वह अन्दर जाने का हट करती है किन्तु पहरेदार जाने नहीं देता। माँ दरवाज़े के अन्दर खड़े अपने बेटे को देख रही है और गुस्से में कहती है कि "वह मेरा बेटा है, मुझे उससे मिलने का हक है" और दरवाजे की कुँडी को हाथ से पकड़कर खोलने का प्रयास करती है। पहरेदार कुँडी पर से उसका हाथ हटाते हुए उत्तर देता है, "महोदया, मैं जानता हूँ कि वह आपका पुत्र है, किंतु अब पहले वह एक नौसैनिक है और उस पर उसके देश का पहला अधिकार है।"

   जब हम पापों की क्षमा के लिए प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं और अपने जीवन उसे सौंप देते हैं, तो हम एक नए स्वामीत्व के आधीन आ जाते हैं। तब से हम नए आदेशों के आधीन कार्य करने वाले हो जाते हैं। अब हम प्रभु के हो जाते हैं। अब जो हमें आवश्यक लगता था उसका महत्व नहीं रहता। हमारे मूल्यांकन के मापदण्ड बदल जाते हैं। अब हमारी लालसा पूर्णतः अपने प्रभु परमेश्वर की आज्ञाकरिता में रहकर उससे प्रेम करना और उसकी सेवा करना हो जाती है (व्यवस्थाविवरण ६:५-६); और हमारा प्रभु हर परिस्थिति में हमारे साथ बना रहता है, हमें संभाले रहता है और हमारी आवश्य्क्ताओं को पूरा करता रहता है (मत्ती ६:३३)।

   क्या आप प्रभु के नए स्वामित्व के आधीन आएं हैं? - डेव एगनर

मसीह के अनुयायी मसीह ही से हर आज्ञा पाते हैं।

तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। - मत्ती २२:३७
 
बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ६:१-९
Deu 6:1  यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिक्कारी होने को पार जाने पर हो;
Deu 6:2  और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे।
Deu 6:3  हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ।
Deu 6:4  हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है;
Deu 6:5  तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
Deu 6:6  और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;
Deu 6:7  और तू इन्हें अपने बालबच्चों को समझा कर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
Deu 6:8  और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी करके बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
Deu 6:9  और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १५-१६ 
  • मरकुस ६:१-२९

Saturday, February 25, 2012

कलपनाएं

   मैं और मेरे मित्र एक चित्रकला प्रदर्शनी देखने गए जो प्रभु यीशु द्वारा दी गई उड़ाऊ पुत्र की कहानी पर आधारित थी। हम सब यह सोच कर गए थे कि यह हमारे लिए एक गंभीर मनन और सीखने का अवसर होगा। हम प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचे और जानकारी लेने वहाँ सहायता देनेवाले लोगों की मेज़ पर गए। उस मेज़ पर प्रदर्शनी से संबंधित जानकारी पुस्तिकाएं और विषय से संबंधित अन्य पुस्तकें रखी हुईं थीं, तथा प्रदर्शनी के स्थान की ओर इशारा करने वाला एक सूचना चिन्ह भी रखा था।

   सहायता देने वालों की उस मेज़ पर कुछ और भी रखा था जिसे देखकर हम सब मन ही मन अनुमान लगाने लगे कि चित्रकला के विषय के साथ इसका क्या संबंध हो सकता है - वह थी एक प्लेट जिस में रोटी थी, एक ग्लास और एक अंगोछा। हमने कलपना करी कि संभवतः यह उस भोज का सूचक होगा जो उड़ाऊ पुत्र के घर वापस लौटने पर उसके पिता ने आयोजित किया था, और पिता पुत्र के सम्बंध और सहभागिता को दिखाने कि लिए यहाँ रखा गया है। जब हमने उसे ज़रा ध्यानपूर्वक देखा तो समझ आया कि प्ल्र्ट कुछ गन्दी थी, रोटी खाने के बाद की बची हुई रोटी थी - कोई भोजन करने के बाद अपने भोजन की प्लेट ऐसे ही उस मेज़ पर प्रदर्शनी से संबंधित चीज़ों के साथ छोड़कर चला गया था। उस मेज़ पर रखे पुस्तक, पुस्तिकाओं और प्रदर्शनी संबंधित अन्य वस्तुओं से उस प्लेट, गिलास और अंगोछे का कोई लेना देना नहीं था; उन से संबंधित हमारी कलपनाएं बिलकुल गलत थीं।

   यह जान कर, अपनी कलपना की उड़ान पर, हम सब को अच्छी हंसी आई। लेकिन बाद में मैं यह सोचने लगी कि क्या संभव नहीं कि ऐसे ही हम कितनी बार परमेश्वर के वचन में वह सब देखने लगते हैं जो वहाँ है ही नहीं। यह मानकर चलने की बजाए कि बाइबल की किसी बात के विषय में हमारे विचार सही ही हैं, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी व्याख्या बाइबल में उस विषय पर दी गई सभी जानकारी के अनुकूल है कि नहीं। प्रेरित पतरस ने अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को इस बात के बारे में चिताते हुए लिखा: "पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्‍त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती" (२ पतरस १:२०)।

   परमेश्वर के वचन को गंभीरता से लेना हमारा कर्तव्य है, उस की व्याख्या और चर्चा से पहले यह जाँच लेना अति आवश्यक है कि हम यह पवित्र आत्मा की प्रेर्णा से, वचन के संदर्भ का ध्यान रखते हुए और संपूर्ण वचन में उस विषय के बारे में कही गई बातों के अनुसार ही कुछ कहें; ना कि अपनी इच्छा के अनुसार और अपने अभिमान कि रक्षा करते हुए परमेश्वर के वचन को जैसे चाहें तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करें। - ऐनी सेटास


संदर्भ से बाहर करी गई वचन की व्याख्या खतरनाक झूठ या अतिश्योक्ति हो सकती है।

अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। - २ तिमुथियुस २:१५
 
बाइबल पाठ: २ पतरस १:१६-२१
2Pe 1:16 क्‍योंकि जब हम ने तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ का, और आगमन का समाचार दिया था तो वह चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण नहीं किया था वरन हम ने आप ही उसके प्रताप को देखा था।
2Pe 1:17  कि उस ने परमेश्वर पिता से आदर, और महिमा पाई जब उस प्रतापमय महिमा में से यह वाणी आई कि यह मेरा प्रिय पुत्र है जिस से मैं प्रसन्न हूं।
2Pe 1:18 और जब हम उसके साथ पवित्र पहाड़ पर थे, तो स्‍वर्ग से यही वाणी आते सुना।
2Pe 1:19 और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्‍छा करते हो, कि जो यह समझ कर उस पर ध्यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अन्‍धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे।
2Pe 1:20 पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्‍त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती।
2Pe 1:21 क्‍योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्‍छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १२-१४ 
  • मरकुस ५:२१-४३

Friday, February 24, 2012

वास्तविक और खरा

   प्राचीन वस्तुओं को खरीदने-बेचने वाली एक दुकानदार को एक जीर्ण और बदरंग हुआ बेसबॉल कार्ड मिला। उस कार्ड को देखकर उसने अनुमान लगाया कि उसकी कीमत लगभग $१० ही होगी। उसने उसे बेचने के लिए ई-बे पर रख दिया, किंतु उसे सन्देह हुआ कि कहीं वह कार्ड उसके अनुमान से और अधिक मूल्यवान तो नहीं? इसलिए उसने ई-बे से उसे हटा कर एक व्यवसायिक मूल्य निर्धारण करने वाले विशेषग्य को वह कार्ड दिखाया। उस विशेषग्य ने उस कार्ड को देखकर पुष्टि करी कि सन १८६९ में बने उस कार्ड पर बना चित्र अमेरिका की प्रथम व्यावसायिक बेसबॉल टीम सिन्सिनाटी रेड स्टॉकिंग्स का ही था। वह कार्ड अन्ततः $७५,००० में बिका। यद्यपि वह कार्ड जीर्ण और बदरंग था किंतु जो सबसे महत्वपुर्ण बात थी वह थी उसका वास्तविक होना। उसकी वास्तविकता प्रमाणित ह