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Wednesday, March 26, 2014

सामर्थ के मार्ग


   जब तराह हाई स्कूल की छात्रा थी तो उसे भय लगने लगा कि किसी दिन वह एक गंभीर बिमारी से ग्रस्त हो जाएगी, इस लिए उसने परमेश्वर से उसे इस संभावित बिमारी से बचाकर रखने के लिए प्रार्थना करना आरंभ कर दिया। फिर उसकी विचारधारा में एक परिवर्तन आया और उसने इस कालपनिक भय को छोड़ कर अपने भविष्य और जीवन की हर संभावना को, वह चाहे जो भी हो, परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। कई वर्षों के उपरान्त तराह के चिकित्सकों को उसके शरीर में एक कैंसर की रसौली का पता चला जिसका इलाज कर के तराह को सफलता से रोग मुक्त किया जा सका। तराह का कहना था, क्योंकि वह अपने आप को और अपने भविष्य को परमेश्वर के हाथों में सौंप चुकी थी, इसलिए जब वास्तव में बिमारी आई तो वह परिणाम से निश्चिंत थी। उसकी समस्या उसके लिए परमेश्वर की सामर्थ पाने का मार्ग बन गई थी।

   परमेश्वर के प्रति इस प्रकार समर्पित होकर सब कुछ उसके हाथों में सौंप देना हमें प्रेरित पौलुस के जीवन से भी देखने को मिलता है। पौलुस अपने विषय में लिखता है कि "और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं" (2 कुरिन्थियों 12:7)। पौलुस ने इस के लिए परमेश्वर से बहुत प्रार्थना करी, कि परमेश्वर इस समस्या को उससे दूर कर दे, परन्तु परमेश्वर का उत्तर था "...मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है..."; यह उत्तर पा कर पौलुस की चिंता जाती रही, उसका रवैया सकारात्मक हो गया और वह कहने लगा "...इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे" (2 कुरिन्थियों 12:9)।

   अपनी दुर्बलताओं, कठिनाईयों और चिंतित करने वाले भय का सामना करने के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने आप को परमेश्वर को पूरी रीति से समर्पित कर दें, अपनी सारी चिंता उस पर डाल दें (1 पतरस 5:7) और उसे अपने कार्य को स्वतंत्रता के साथ करने दें। यदि ऐसा करेंगे तो हम देखेंगे कि जो हमारे लिए चिंता के विषय हो सकते थे, वे ही परमेश्वर के हाथों में उसकी सामर्थ के हमारे जीवन में आने और कार्यकारी होने के मार्ग बन गए हैं। - डेनिस फिशर


अपनी ही सामर्थ पर भरोसा परमेश्वर की सामर्थ के प्रति समर्पित हो जाने का विकल्प कदापि नहीं है। 

और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:7 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:1-10
2 Corinthians 12:1 यद्यपि घमण्‍ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशों की चर्चा करूंगा। 
2 Corinthians 12:2 मैं मसीह में एक मनुष्य को जानता हूं, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देह सहित, न जाने देह रहित, परमेश्वर जानता है, ऐसा मनुष्य तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया। 
2 Corinthians 12:3 मैं ऐसे मनुष्य को जानता हूं न जाने देह सहित, न जाने देह रहित परमेश्वर ही जानता है। 
2 Corinthians 12:4 कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं। 
2 Corinthians 12:5 ऐसे मनुष्य पर तो मैं घमण्‍ड करूंगा, परन्तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्‍ड न करूंगा। 
2 Corinthians 12:6 क्योंकि यदि मैं घमण्‍ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तोभी रुक जाता हूं, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे। 
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 13-15